NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
मोदी सरकार के टीकाकरण प्रोपगेंडा को तथ्यों और संदर्भ के साथ समझें
मोदी और उनकी सरकार की विफलता और संवेदनहीनता खुलकर लोगों सामने आ गई है। ऐसे में क्षतिपूर्ति करने के लिए खूब इवेंट रचे जा रहे हैं और मीडिया मैनेज़मेंट हो रहा है। ऐसे में ज़रूरी तथ्यों को याद रखना ज़रूरी है।
राज कुमार
30 Jun 2021
मोदी सरकार के टीकाकरण प्रोपगेंडा को तथ्यों और संदर्भ के साथ समझें
फ़ोटो साभार: सोशल मीडिया

28 जून से कोरोना टीकाकरण को लेकर जबरदस्त प्रोपगेंडा चल रहा है। भारत सरकार, प्रधानमंत्री मोदी, तमाम मंत्री, मंत्रालय, आईटी सेल, मीडिया और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय जोर-शोर से प्रचार कर रहे हैं कि भारत टीकाकरण के मामले में पहले स्थान पर आ गया है और अमेरिका, फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी और इटली को भी पीछे छोड़ दिया है।

कहा जा रहा है कि भारत में 32 करोड़ 36 लाख से ज्यादा वैक्सीन दी जा चुकी हैं। जबकि अमेरिका में 32 करोड़ 33 लाख वैक्सीन ही अब तक दी गई हैं। भारत ने टीकाकरण में अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। जबकि अमेरिका में भारत से एक महीना पहले टीकाकरण शुरु हो गया था।

ये प्रचार विभिन्न तरह से किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर आप स्वास्थ्य मंत्रालय का ये ट्वीट देख सकते हैं। इस प्रोपगेंडा को तथ्यों और संदर्भ के साथ समझना ज़रूरी है।

टीकाकरण, भारत और अन्य विकसित देश

मोदी सरकार दावा कर रही है कि हमने सबसे ज्यादा टीकाकरण किया है। पहली बात तो ये कि कोरोना वैक्सीनेशन ट्रैकर के हिसाब से भारत में 32 करोड़ से ज्यादा टीके लगाए चुके हैं, तथ्य सही है। यानी अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी और इटली आदि से ज्यादा टीके लग चुके हैं। लेकिन ये ही अकेला तथ्य नहीं है। आपको करोड़ों में सिर्फ संख्या बताई गई, ये नहीं बताया गया कि किस देश में कितनी प्रतिशत जनसंख्या को टीका लग चुका है। ये हम बताते हैं।

भारत में मात्र 19 प्रतिशत लोगों को ही पहली डोज लगी है और मात्र 4 प्रतिशत लोगों को दोनों डोज लग चुकी हैं। जबकि अमेरिका में 54 प्रतिशत लोगों को पहली डोज और 46 प्रतिशत लोगों को दोनों डोज लग चुकी हैं।

इंग्लैंड में 66 प्रतिशत लोगों को पहली और 49 प्रतिशत लोगों को दोनों डोज लग चुकी हैं। फ्रांस में 50 प्रतिशत लोगों को पहली और 29 प्रतिशत लोगों को दोनों डोज लग चुकी हैं। जर्मनी में 54 प्रतिशत लोगों को पहली और 35 प्रतिशत लोगों को दोनों डोज लग चुकी हैं।

इसी प्रकार इटली में 55 प्रतिशत लोगों को पहली और 29 प्रतिशत लोगों को दोनों डोज लग चुकी हैं। स्पष्ट है कि भारत अभी टीकाकरण के मामले में इन देशों से बहुत पीछे है।

मोदी सरकार की टीकाकरण पॉलिसी के बारे में ज़रूरी तथ्य और संदर्भ

गौरतलब है कि कोरोना से निपटने, ऑक्सीजन, वेंटीलेटर, बेड आदि चिकित्सा सुविधाओं की कमी, वैक्सीन की कमी और मोदी सरकार के अवैज्ञानिक और लापरवाह रवैये की देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी छीछालेदर हो रही है। मोदी और उनकी सरकार की विफलता और संवेदनहीनता खुलकर लोगों सामने आ गई है। ऐसे में क्षतिपूर्ति करने के लिए खूब इवेंट रचे जा रहे हैं और मीडिया मैनेज़मेंट हो रहा है। ऐसे में ज़रूरी तथ्यों को याद रखना ज़रूरी है।

* भारत में टीकाकरण बाकी देशों की अपेक्षा तकरीबन एक महीने से ज्यादा देरी से शुरू हुआ। क्योंकि जब बाकी देश अपनी जनता के लिए टीके का ऑर्डर दे रहे थे तब हम बिना टीका कोरोना को हराने का गुणगान कर रहे थे और घोषणा कर चुके थे कि कोरोना को भगा दिया है।

* देश में वैक्सीन की जबरदस्त कमी हुई जिसकी वजह से जगह-जगह पर टीकाकरण केंद्रों को बंद करना पड़ा।

* केंद्र सरकार ने पहले स्वयं टीका उपलब्ध कराने की बजाय ये काम राज्य सरकारों को सौंप दिया। कहा कि राज्य सरकारें कंपनियों से सीधे वैक्सीन खरीदें। सब जानते हैं कि राज्य सरकारे विदेशी कंपनियों से सीधे तौर पर वैक्सीन नहीं खरीद सकती।

* एक ही वैक्सीन देश में दो दामों पर बिकी। केंद्र सरकार को 150 और राज्य सरकारों को 400 रुपये में।

* टीकाकरण से पहले कोविन एप पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ने उन तमाम लोगों को टीकाकरण की प्रक्रिया से बाहर कर दिया था जिनकी इंटरनेट तक पहुंच नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सवाल उठाया और इसे डिजिटल डिवाइड कहा था।

* मोदी सरकार की टीकाकरण पॉलिसी का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार को आदेश देना पड़ा कि टीकाकरण संबंधी तमाम दस्तावेज़ कोर्ट में पेश किए जाएं। कोर्ट ने सरकार को टीकाकरण पॉलिसी पर फटकार लगाई थी और कहा था कि पारदर्शिता की कमी है और ये अतार्किक है।

* विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर गुहार लगाई कि केंद्र सरकार वैक्सीन की खरीद करे।

* इसके बाद केंद्र सरकार ने वैक्सीन उपलब्ध कराने की ज़िम्मेदरी स्वयं ली। इस दौरान वैक्सीन को लेकर जो अफरा-तफरी मोदी सरकार फैला चुकी थी उस सबका ठीकरा राज्य सरकारों पर फोड़ दिया।

* इस बदइंतज़ामी के चलते भाजपा और मोदी की जमकर किरकरी हुई। इसे मैनेज़ करने के लिए मुफ्त टीके की घोषणा की गई।

* ये नहीं बताया गया कि वैक्सीन खरीदने के लिए कितने रुपये और कितने डोज के अनुबंध हुए हैं। टीका खरीद और शोध संबंधी कार्यों में खर्च को लेकर सरकार का पारदर्शी नज़रिया नहीं रहा।

* मंत्रीगण लगातार प्रेस कांफ्रेस में वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर झूठे आंकड़े और भ्रामक जानकारी देते रहे।

प्राथमिकता पर टीकाकरण है या भ्रामक प्रोपगेंडा

समझना मुश्किल है कि सरकार की प्राथमिकता पर टीकाकरण है या भ्रामक प्रोपगेंडा। सरकार डैमेज कंट्रोल करने के लिए नये-नये इवेंट रच रही है। 21 जून को वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड बनाने के लिए राज्यों में टीकाकरण की गति धीमी कर दी गई ताकि वैक्सीन इकट्ठा हो सके। मतलब, प्राथमिकता पर लोगों को वैक्सीन देना था या इवेंट बनाकर प्रोपगेंडा करना। इसी प्रकार का एक उदाहरण हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पेश किया था। जब देश वैक्सीन की कमी से जूझ रहा था। तब 1 मई को मनोहर लाल खट्टर ने अरविंद केजरीवाल को घेरते हुए कहा था कि एक दिन में दो लाख वैक्सीन लगाने की बजाय हर रोज पचास हज़ार वैक्सीन लगाओ चार दिन तक चलेंगी।

बिल्कुल इसी तर्ज़ पर मोदी सरकार लगातार इवेंट रच रही है और भ्रामक प्रोपगेंडा कर रही है ताकि खो चुकी विश्वसनीयता और लोकप्रियता वापस पाई जा सके। ऐसे में ज़रूरी है कि जनता विवेक से काम ले और सरकारी दावों और प्रोपगेंडा पर सीना फुला लेने की बजाय उसे तथ्यों और संदर्भों के साथ, आलोचनात्मक नज़रिये से देखें।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। आप सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

COVID-19
Covid Vaccination
Narendra modi
Modi government
Vaccination propagand

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • Women Hold Up More Than Half the Sky
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    महिलाएँ आधे से ज़्यादा आसमान की मालिक हैं
    19 Oct 2021
    हाल ही में जारी हुए श्रम बल सर्वेक्षण पर एक नज़र डालने से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली 73.2% महिला श्रमिक कृषि क्षेत्र में काम करती हैं; वे किसान हैं, खेत मज़दूर हैं और कारीगर हैं।
  • Vinayak Damodar Savarkar
    डॉ. राजू पाण्डेय
    बहस: क्या स्वाधीनता संग्राम को गति देने के लिए सावरकर जेल से बाहर आना चाहते थे?
    19 Oct 2021
    बार-बार यह संकेत मिलता है कि क्षमादान हेतु लिखी गई याचिकाओं में जो कुछ सावरकर ने लिखा था वह शायद किसी रणनीति का हिस्सा नहीं था अपितु इन माफ़ीनामों में लिखी बातों पर उन्होंने लगभग अक्षरशः अमल भी किया।
  • Pulses
    शंभूनाथ शुक्ल
    ‘अच्छे दिन’ की तलाश में, थाली से लापता हुई ‘दाल’
    19 Oct 2021
    बारिश के चलते अचानक सब्ज़ियों के दाम बढ़ गए हैं। हर वर्ष जाड़ा शुरू होते ही सब्ज़ियों के दाम गिरने लगते थे किंतु इस वर्ष प्याज़ और टमाटर अस्सी रुपए पार कर गए हैं। खाने के तेल और दालें पहले से ही…
  • migrant worker
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कश्मीर में प्रवासी मज़दूरों की हत्या के ख़िलाफ़ 20 अक्टूबर को बिहार में विरोध प्रदर्शन
    19 Oct 2021
    "अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद घाटी की स्थिति और खराब हुई है। इससे अविश्वास का माहौल कायम हुआ है, इसलिए इन हत्याओं की जिम्मेवारी सीधे केंद्र सरकार की बनती है।”
  • Non local laborers waiting for train inside railwaysation Nowgam
    अनीस ज़रगर
    कश्मीर में हुई हत्याओं की वजह से दहशत का माहौल, प्रवासी श्रमिक कर रहे हैं पलायन
    19 Oct 2021
    30 से अधिक हत्याओं की रिपोर्ट के चलते अक्टूबर का महीना सबसे ख़राब गुज़रा है, जिसमें 12 नागरिकों की हत्या शामिल हैं, जिनमें से कम से कम 11 को आतंकवादियों ने क़रीबी टारगेट के तौर पर मारा है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License