NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
विश्व भर के यूनियनों ने श्रमिकों के लिए अधिक सुरक्षा और स्वास्थ्य उपायों की मांग की
विश्व भर में आईएलओ और ट्रेड यूनियन ने 28 अप्रैल को वर्ल्ड डे ऑफ़ सेफ्टी एंड हेल्थ एट वर्क एंड इंटरनेशनल वर्कर्स मेमोरियल डे के रूप में मनाया।
पीपल्स डिस्पैच
28 Apr 2020
 ट्रेड यूनियन

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और विश्व भर की ट्रेड यूनियनों ने COVID-19 महामारी के ख़िलाफ़ लड़ने वाले कर्मचारियों के लिए इस वर्ष को 'वर्ल्ड डे ऑफ सेफ्टी एंड हेल्थ एट वर्क' थीम से समर्पित किया है।

आईएलओ के जनरल डाटरेक्टर गाइ राइडर ने कहा, "एक संक्रामक बीमारी के प्रकोप के बावजूद, हम अपने कर्मचारियों की रक्षा कैसे करते हैं, यह स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है कि हमारे समुदाय कितने सुरक्षित हैं और हमारे काम कितने साहसी होंगे क्योंकि ये महामारी फैली हुई है।"

हर साल 28 अप्रैल को दुनिया भर के ट्रेड यूनियन मृतकों और घायल कर्माचारियों की याद में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक स्मृति दिवस के रूप में मनाते हैं और कार्यस्थलों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए लड़ने का संकल्प लेते हैं। इस वर्ष, कोरोनावायरस महामारी के प्रकोप के कारण, सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े अगुवा कर्मचारी अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलए) के केंद्रीय कक्ष में इकट्ठा हो गए और इसके "कार्यस्थल पर उत्पीड़न और हिंसा को रोकने" की थीम को "महामारी को रोकने" में बदलने के लिए दबाव डाला।

वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियंस (डब्ल्यूएफटीयू) ने अपने बयान में कहा सच्चाई यह है कि हर साल काम की ख़तरनाक प्रकृति के चलते "दुर्घटनाओं" के कारण हज़ारों श्रमिकों की मौत हो जाती है, असुरक्षित और अस्वास्थ्यकर काम करने की स्थिति के कारण होने वाली बीमारियां, वर्कर्स मूवमेंट के लिए सुरक्षा और स्वास्थ्य सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

"शोषणकारी पूंजीवादी व्यवस्था में, जहां एकाधिकार का लाभ हमेशा श्रमिकों के स्वास्थ्य से ऊपर होता है, जहां स्वास्थ्य का नुकसान होता है, जहां स्वास्थ्य उद्योगों के प्रतिपक्षी लोगों द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान किया जाता है, श्रमिक और आम लोग पहले सामान्य रूप से और इस महामारी संकट के दौरान क़ीमत चुकाते हैं।" "लाभ से उपर श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा" की मांग करते हुए "कार्यस्थलों में स्वास्थ्य और सुरक्षा के उपायों के लिए हमारी लड़ाई जारी रखने और मजबूत करने के लिए, लोगों के लिए मुफ्त और सुरक्षित वैक्सीन, सार्वजनिक नि: शुल्क और उच्च गुणवत्ता वाले स्वास्थ्य सेवाएं, कार्यस्थलों में डॉक्टरों के लिए दुनिया के 132 से अधिक देशों के लगभग 100 मिलियन सदस्यों से अपील की गई।"

वर्ष 2003 से आईएलओ और ट्रेड यूनियनों द्वारा काम के दौरान सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए विश्व दिवस मनाया जाता है। जून 2003 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में इसे मंज़ूरी दी गई थी।

मृत और घायल कर्मचारियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्मरणोत्सव दिवस भी दुनिया भर में ट्रेड यूनियनों द्वारा 1996 से मनाया जाता है।

साभार : पीपल्स डिस्पैच

Coronavirus
COVID-19
trade unions
ILO
Workers
International news

Related Stories

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

दुनिया भर की: कोलंबिया में पहली बार वामपंथी राष्ट्रपति बनने की संभावना

महामारी के दौर में बंपर कमाई करती रहीं फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां

विश्व खाद्य संकट: कारण, इसके नतीजे और समाधान

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

महंगाई की मार मजदूरी कर पेट भरने वालों पर सबसे ज्यादा 

कश्मीर: कम मांग और युवा पीढ़ी में कम रूचि के चलते लकड़ी पर नक्काशी के काम में गिरावट

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप


बाकी खबरें

  • समीना खान
    हिजाब बनाम परचम: मजाज़ साहब के नाम खुली चिट्ठी
    12 Apr 2022
    यहां मसला ये है कि आंचल, घूंघट, हिजाब, नक़ाब हो या बिकनी, हमेशा से पगड़ी के फ़ैसले इन सब पर भारी रहे हैं। इसलिए अब हमें आपके नज़रिए में ज़रा सा बदलाव चाहिए। जी! इस बार हमें आंचल भी चाहिए और आज़ादी भी…
  • ज़ाहिद खान
    सफ़दर भविष्य में भी प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे
    12 Apr 2022
    12 अप्रैल, सफ़दर हाशमी जयंती और ‘राष्ट्रीय नुक्कड़ नाटक दिवस’ पर विशेष।
  • jnu
    न्यूज़क्लिक टीम
    ‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र
    11 Apr 2022
    जेएनयू में रविवार को हुई हिंसा के बाद विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र अपना विरोध जताने के लिए दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुँचे जहाँ उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया गया. छात्रों की बड़ी माँग थी कि पुलिस…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    JNU में अब नॉन वेज को लेकर विवाद? ऐसे बनोगे विश्वगुरु ?
    11 Apr 2022
    न्यूज़चक्र के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा JNU में हुए ABVP द्वारा राम नवमी के दिन मांसाहारी खाना खाने पर छात्रों की पिटाई की खबर पर चर्चा कर रहे हैं और वह भारत में तेज़ी से बढ़ रहे…
  • मुकुंद झा
    जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए
    11 Apr 2022
    घटना के विरोध में दिल्ली भर के छात्र सड़क पर उतरे। छात्र, पुलिस मुख्यालय पर विरोध जताने के लिए एकत्रित हुए परन्तु पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को अस्थायी हिरासत में ले लिया और चाणक्यपुरी, संसद मार्ग…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License