NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
दिल्ली विश्वविद्यालय: हाईकोर्ट ने कहा, 'शिक्षकों को ऐसे परेशान होते नहीं छोड़ा जा सकता है'
दिल्ली सरकार से अनुदान प्राप्त दिल्ली यूनिवर्सिटी के 12 कॉलेजों में पिछले 3 महीने से शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया गया है। इसके अलावा वहां रखरखाव जैसे बिजली बिल आदि भरने के लिए भी फंड नहीं है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Nov 2020
दिल्ली विश्वविद्यालय

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के 12 कॉलेजों के टीचर्स और कर्मचारियों को वेतन देने के लिए छात्र निधि (एसएसएफ) के पैसे का इस्तेमाल करने के अरविंद केजरीवाल सरकार के आदेश पर रोक लगाने के अपने अंतरिम आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार को इस मामले में हलफनामा दाखिल कर जवाब देने को कहा है।

न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने केजरीवाल सरकार की उस मांग को ठुकरा दिया जिसमें शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन देने के उसके फैसले पर रोक लगाने के आदेश को वापस लेने का आग्रह किया गया था। उन्होंने सरकार से कहा कि पहले हलफनामा दाखिल कीजिए और इसके बाद सभी 12 कॉलेजों का भी पक्ष सुना जाएगा। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब सरकार ने कहा कि कॉलेजों के पास धन की कोई कमी नहीं है।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ता दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के वकील जिवेश तिवारी से इस मामले में सभी 12 कॉलेजों को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। साथ ही कॉलेजों को अगली सुनवाई से पहले जवाब देने को कहा है। अब मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर गुरुवार को होगी और कोर्ट ने कहा कि तब तक अंतरिम आदेश जारी रहेगा।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों के बीच चल रहे झगड़े के कारण शिक्षकों को ऐसे परेशान होते नहीं छोड़ा जा सकता है। अदालत ने यह भी माना कि दिल्ली विश्वविद्यालय अपने सभी कॉलेजों का अभिभावक है और उस पर मुद्दों को हल करने की जिम्मेदारी है।

आपको बता दे दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित दिल्ली यूनिवर्सिटी के 12 कॉलेजों में पिछले 3 महीनो से शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया गया है। इसके अलावा वहां रखरखाव जैसे बिजली बिल आदि भरने के लिए भी फंड नहीं है। इसको लेकर लगातार शिक्षक विरोध जता रहे हैं। इस मामले में शिक्षकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने दिल्ली सरकार को तत्काल वेतन जारी करने का निर्देश दिया था। जिसके बाद दिल्ली सरकार ने 16 अक्टूबर को अपनी तरफ से फंड जारी न करके छात्र निधि के पैसे से वेतन देने का ऑर्डर जारी किया था।

दिल्ली सरकार के इस फैसले का विरोध छात्र और शिक्षक दोनों कर रहे थे। इसी मामले को लेकर डीयू छात्रसंघ कोर्ट गया। हाईकोर्ट ने 23 अक्टूबर को अपने आदेश में दिल्ली विश्वविद्यालय के 12 कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन देने के लिए छात्र निधि के पैसे का इस्तेमाल करने के केजरीवाल सरकार के आदेश पर रोक लगा थी।

इस मसले पर डीयू शिक्षक संघ अध्यक्ष राजीव रे ने कहा कि शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान करने के लिए छात्रनिधि का उपयोग करना हमे मंजूर नहीं है। यह कोष छात्रों से अतिरिक्त पाठ्यचर्या संबंधी गतिविधियों के आयोजन के लिए एकत्र किया जाता है। वेतन देने के लिए छात्र निधि के उपयोग का आदेश देकर दिल्ली सरकार माता-पिता और छात्रों पर वेतन के बोझ को बढ़ा रही है। यह अस्वीकार्य है, भले ही इसे अंतरिम व्यवस्था के रूप में किया जा रहा हो।

आगे उन्होंने कहा कि 'अतीत में भी यदि कॉलेजों को इस तरह के उद्देश्य के लिए छात्र निधि का उपयोग करने की मजबूरी हुई है तो इस खाते से पैसा उधार लिया जाता है और जैसे ही अनुदान प्राप्त होता है, वैसे ही हमेशा इसे लौटा दिया जाता है। स्थायी आधार पर वेतन प्रयोजनों के लिए छात्र निधि से पैसे नहीं निकाला जा सकता है। यह न तो उचित है और न ही स्थाई समाधान है।'

12 कॉलेजों के शिक्षकों को नहीं मिल रहा है वेतन

गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज, डॉ. भीम राव आम्बेडकर कॉलेज, भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज, भगिनी निवेदिता कॉलेज, दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज, अदिति महाविद्यालय, इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंसेज, केशव महाविद्यालय, महाराजा अग्रसेन कॉलेज, महर्षि वाल्मीकि कॉलेज ऑफ एजुकेशन, शहीद राजगुरु कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज फॉर वुमेन और शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज हैं। इन कॉलेजों के शिक्षकों को वेतन नहीं मिल रहा है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई इनपुट के साथ )

Delhi University
DUTA
Delhi High court
DU Teacher Salary Delay
Arvind Kejriwal
DUSU
delhi government
AAP

Related Stories

दिल्ली: दलित प्रोफेसर मामले में SC आयोग का आदेश, DU रजिस्ट्रार व दौलत राम के प्राचार्य के ख़िलाफ़ केस दर्ज

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट को लेकर छात्रों में असमंजस, शासन-प्रशासन से लगा रहे हैं गुहार

यूजीसी का फ़रमान, हमें मंज़ूर नहीं, बोले DU के छात्र, शिक्षक

नई शिक्षा नीति ‘वर्ण व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करती है' 

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई

डीयू: कैंपस खोलने को लेकर छात्रों के अनिश्चितकालीन धरने को एक महीना पूरा

दिल्ली विश्वविद्यालय के सामने चुनौतियां: एडहोकवाद, NEP और अन्य


बाकी खबरें

  • Ahmed Hasan passes away
    भाषा
    उप्र विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन का निधन; योगी, अखिलेश ने दुख जताया
    19 Feb 2022
    वह पूर्व पुलिस अधिकारी थे। बाद में समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव उन्हें राजनीति में ले आये थे। हसन सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह विधान परिषद सदस्य और नेता…
  • Ravish Tiwari passes away
    भाषा
    वरिष्ठ पत्रकार रवीश तिवारी का निधन, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया शोक
    19 Feb 2022
    इंडियन एक्सप्रेस के राष्ट्रीय ब्यूरो के प्रमुख रवीश तिवारी कैंसर से पीड़ित थे और पिछले करीब दो वर्षों से इस बीमारी से जूझ रहे थे।
  • police
    नाइश हसन
    योगी की पुलिस कैसे कर रही चुनाव में ग़रीबों से वसूली: एक पड़ताल
    19 Feb 2022
    सवाल यह है कि क्या मात्र विज्ञापन या भाषण स्थितियों की असलियत बयान कर सकते हैं? हमने हालिया पुलिसिया दमन की पड़ताल करनी चाही, तो ‘अमृतकाल’ में ग़रीब बस्तियों का हाल कुछ और ही दिखा।
  • Protest in Myanmar
    लव पुरी
    कैसे सैन्य शासन के विरोध ने म्यांमार को 2021 के तख़्तापलट के बाद से बदल दिया है
    19 Feb 2022
    म्यांमार में सैन्य शासन नया नहीं है, लेकिन कुछ टिप्पणीकार बाइनरी लेंस से परे म्यांमार की स्थिति को समझने का प्रयास करते हैं।
  • AFGHAN
    क्रिस्टीन लेहनेन
    तालिबान के आने के बाद अफ़ग़ान सिनेमा का भविष्य क्या है?
    19 Feb 2022
    तीन पुरस्कार विजेता महिला निर्देशकों ने अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उद्योग से अफ़ग़ान सिनेमा को बचाने की अपील की है। आज के दौर में इन महिला फिल्मकारों का समर्थन पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।  
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License