NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
विज्ञान
समझिए संगीत से मिलने वाले आनंद के पीछे का विज्ञान
ताजा शोधों से पता चला है कि संगीत का आनंद ''सकारात्मक प्रतिफल अनुमान'' से आता है। इसका मतलब है कि हमें कोई संगीत तभी खुशी देता है जब वो हमारी उम्मीदों से ज्यादा बेहतर हो।
संदीपन तालुकदार
14 Nov 2019
Unravelling the Science
Image Courtesy: Max Planck Gesellschaft

आख़िर संगीत में ऐसा क्या होता है, जिससे हमें आनंद महसूस होता है? शब्द, तान या स्वर, आखिर यह किसका खेल है? दरअसल यह सभी चीजें मिलकर हमें आनंद की अनुभूति करवाती हैं। रिसर्चर यह पता लगाने में जुटे हैं कि संगीत के बारे में मस्तिष्क अपनी पसंद कैसे तय करता है? क्या उसे पसंद है या क्या नहीं? पसंद का फ़ैसला ''रिवार्ड प्रोसेसिंग या प्रतिफल क्रमण'' से जुड़ा हुआ है। मस्तिष्क के रिवार्ड सिस्टम में तंत्रिका कोशिकाओं का एक समूह होता है, जो आनंद सबंधी भावनाओं के लिए ज़िम्मेदार होता है। सीधे शब्दों में, हमारे किसी काम को करने के बाद मस्तिष्क का ''रिवार्ड सर्किट या प्रतिफल तंत्र'' हमें आनंद का एहसास  देता है। आनंद के अलावा, इन तंत्रिकाओं का कोई काम नहीं है। लेकिन संगीत से संबंधित आनंद में इनका अहम किरदार है।

हाल की खोजों से पता चला है कि संगीत में आनंद, हमारी संगीत के प्रतिफल के अनुमान से आता है। मतलब़ कि जिस संगीत को हम सुनते हैं, अगर वह हमारी आशाओं से ज़्यादा अच्छा है, तो हमें आनंद आता है। बल्कि श्रोता की उम्मीदों से खेलकर ही संगीत आनंद पैदा करता है। जब हम पहली बार कोई गाना सुनते हैं, तब मस्तिष्क अंदाजा लगा रहा होता है कि आगे कौन सी आवाज आएगी। यह अंदाज हमारे पिछले सुने हुए संगीत के आधार पर होता है। हमें तब आनंद आता है, जब हमारी उम्मीदें पूरी होती हैं, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता।

इसी खोज को आगे बढ़ाते हुए, ''मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन कॉग्निशन एंड ब्रेन साइंस'' ने खोजा कि दो तरीके संगीत के आनंद से जटिलता के साथ जुड़े हुए हैं। आनंद से जुड़े यह दो तरीके हैं- पहला, कम अनिश्चित्ता और ज़्यादा आनंद देना वाला प्रतिरूप, दूसरा और इससे उलट, ज़्यादा अनिश्चित्ता वाला प्रतिरूप। किसी संगीत माला में कैसे स्वर, आनंद पैदा करते हैं, इस विषय पर शोध को करंट बॉयोलॉजी में छापा गया है।

इस अध्ययन में शामिल टीम ने ''कंप्यूटेशनल'' और ''ब्रेन इमेंजिग'' तकनीक का मिलाजुला इस्तेमाल किया। गणना करने वाला हिस्सा एक ''मशीन लर्निंग सिस्टम'' वाला सांख्यिकीय मॉडल था। इस मॉडल के ज़रिए ''अमेरिकन बिलबोर्ड हिट नंबर्स'' के 80,000 स्वरों को परिमाणित किया जा सकता था। इससे टीम को सहूलियत मिली कि वह इस बात की जांच कर सके कि, क्या आने वाले स्वर की अनिश्चित्ता या विस्मय के अनुभव से संगीत के आनंद का अनुमान लगाया जा सकता है। अगर किसी को पता है कि संगीत में आगे क्या आने वाला है, मतलब ''कम अनिश्चित्ता वाले स्वर क्रम'' के बारे में उसे जानकारी है और ऐन मौके पर गाने को बदल दिया गया, श्रोता को विस्मय में डाल दिया गया, तब संगीत खुशी देता है। दूसरी तरफ, ''ज़्यादा अनिश्चित्ता वाले स्वर क्रम'' में, जो श्रोता को विस्मय में नहीं डालता, तब भी संगीत व्यक्ति तो खुशी देता है।

अध्ययन के मुख्य वैज्ञानिक विंसेंट चेआंग के मुताबिक़ ''दूसरे शब्दों में, जरूरी है कि उम्मीदों के दोनों पहलुओं, मतलब ''स्वर आने के पहले की निश्चित्ता और स्वर आने के बाद होने वाले आश्चर्य में'' गतिशील आपसी क्रिया कराई जाए।''

''न्यूरल मैकेनिज़्म'' को समझने के लिए टीम ने ब्रेन इमेंजिग का सहारा लिया। FMRI के उपयोग से रिसर्चर संगीत सुनते वक्त श्रोता की दिमागी हलचलों का परीक्षण कर सकते थे। ब्रेन इमेज से पता चला कि आने वाले स्वर की अनिश्चित्ता और विस्मय स्तर के आपसी क्रिया का प्रभाव मस्तिष्क के भावनात्मक और श्रवण संबंधित क्षेत्र से जुड़े थे। संक्षिप्त में, मस्तिष्क के अमिग्डाला, हिप्पोकैंपस और श्रवण कॉर्टेक्स में होने वाली गतिविधि और न्यूक्लिअस एक्कयूंबेंस केवल अनिश्चित्ता के साथ जुड़े हुए थे। इससे पहले न्यूक्लिअस एक्कयूंबेंस का संगीत आनंद में एक अहम किरदार माना जाता था। लेकिन इस धारणा को ताजा अध्ययन से चुनौती मिली है।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Unravelling the Science Behind Pleasure in Music

Music Pleasure
Brain Areas in Music Pleasure
FMRI
Brain Imaging
Max Planck Institute of Human Cognition and Brain Sciences

Related Stories


बाकी खबरें

  • liquor
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: शराब भली चीज है, जी भर के पीजिए!
    30 Jan 2022
    शराब जब वोट डालने से एक दो दिन पहले पिलाई जाये तो वह वोटर पटाने के लिए होती है पर जब उसका बंदोबस्त पूरे पांच साल के लिए किया जाये तो वह शराब और शराबियों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए ही होता है।
  • pegasus
    अजय कुमार
    क्या पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर के लिए भारत की संप्रभुता को गिरवी रख दिया गया है?
    30 Jan 2022
    न्यूयॉर्क टाइम्स का खुलासा कि मोदी सरकार ने पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर इजराइल से खरीदा है। यह खुलासा मोदी सरकार के इस इंकार को झूठा साबित करता है कि पेगासस से मोदी सरकार का कोई लेना-देना नहीं।
  • Sabina Martin
    राज कुमार
    सबिना मार्टिन से ख़ास बातचीत: गोवा चुनाव और महिलाओं का एजेंडा
    30 Jan 2022
    लोगों के जो वास्तविक मुद्दे हैं वो चुनाव चर्चा में अपनी जगह बनाने की जद्दो-जहद कर रहे हैं। ऐसा ही एक अहम मुद्दा है जेंडर का। महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा, न्याय और गोवा में महिलाओं से जुड़े अन्य…
  • Mahatma Gandhi
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    शहीद दिवस: मारकर भी गांधी से क्यों डरते हैं हत्यारे
    30 Jan 2022
    गांधी की शहादत के दिन क्यों उनकी हत्या और हत्यारों के समर्थक सक्रिय हो जाते हैं और विभिन्न मंचों पर अपनी विचारधारा और कृत्य का प्रदर्शन करते हैं?
  • HafteKiBaat
    न्यूज़क्लिक टीम
    पेगासस का पेंच, रेलवे नौकरी के परीक्षार्थियों की पीड़ा और चुनावी ख़बरें
    29 Jan 2022
    हफ्ते की बात के नये एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश चर्चा कर रहे हैं चार बड़ी खबरों पर. ये हैं: पेगासस जासूसी कांड में न्यूयॉर्क टाइम्स का रहस्योद्घाटन, RRB-NTPC नौकरी के परीक्षार्थियों पर भयानक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License