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भारत
राजनीति
उत्तर प्रदेश: 26 जनवरी को खुली घूम रही गायों को योगी आदित्यनाथ के निवास पर बांधेंगे ग्रामीण 
दिल्ली के बॉर्डर पर टिके किसानों के साथ अपनी एकजुटता दिखाने के लिए, उत्तर प्रदेश के ग्रामीण, खुले घूम रहे पशुओं को 26 जनवरी के अवसर पर मुख्य मंत्री आदित्यनाथ के निवास पर बांधेंगे। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
25 Jan 2021
26 जनवरी को खुली घूम रही गायों को योगी आदित्यनाथ के निवास पर बांधेंगे ग्रामीण 
'प्रतीकात्मक तस्वीर' फोटो साभार: पत्रिका

सोशलिस्ट किसान सभा के आह्वान पर व किसान आंदोलन के समर्थन में उत्तर प्रदेश के ग्रामीण खुले घूम रहे पशुओं को 26 जनवरी के अवसर पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के निवास पर बांधेंगे और उनसे अनुरोध करेंगे कि इनके खिलाने-पिलाने व रहने  की व्यवस्था की जाए। 

देश भर में चल रहे किसान आंदोलन के आह्वान पर तीन किसान विरोधी कानूनों को रद्द करवाने के लिए जब किसान दिल्ली में अपने ट्रैक्टरों के साथ प्रवेश करेंगे, तब उसी समय उत्तर प्रदेश के ग्रामीण दिल्ली के बॉर्डर पर टिके किसानों के साथ अपनी एकजुटता दिखाने के लिए 25 जनवरी को खुले घूम रहे पशुओं को लेकर उन्नाव जिले के फतेहपुर चैरासी विकास खण्ड से निकलेंगे और 26 जनवरी को मुख्य मंत्री आदित्यनाथ के निवास पहुंच कर अपना रोष प्रदर्शन करेंगे। 

सोशलिस्ट किसान सभा के उत्तर प्रदेश राज्य अध्यक्ष अनिल मिश्र का कहना है, “योगी आदित्यनाथ गांयों को गुड़ खिलाते हुए अपना विज्ञापन छपवाते हैं। उन्हें गाय से बहुत प्रेम है। दूसरी तरफ जब से उनकी सरकार आई है गांवों में लोग खुले घूम रहे पशुओं से परेशान हैं। ये पशु फसलों को चर जाते हैं। सरकार की तरफ से जो गौशालाएं खुलवाई गई हैं पर उनमें पशुओं को ठीक से रखने की व्यवस्था नहीं है। वहां से भी पशु छूट कर खुले घूमने लगते हैं। सरकार के पास गायों को गांवों से गौशाला तक ले जाने का भी कोई इंतजाम नहीं है। लेकिन अगर कोई गायों को गौशाला ले जाना चाहे तो हिन्दुत्ववादी गौ रक्षक तांडव करते हैं। भारतीय जनता पार्टी के राज में गौ रक्षक का मतलब है जो गाय पालते नहीं बल्कि गाय के नाम पर लोगों के साथ मार-पीट करते हैं।”

उत्तर प्रदेश में गौतस्करी के नाम पर हो रहे आतंक के डर से पशु पालकों ने अपने पशुओं को खुले आम छोड़ दिया है, जिस के कारण राज्य में किसान अपनी फसलों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि उनकी शिकायतों और परेशानियों को हर बार प्रशासन द्वारा अनसुना कर दिया जाता है. 

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