NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव का समीकरण
भारत निर्वाचन आयोग राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा  करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश समेत 15 राज्यों की 57 राज्यसभा सीटों के लिए 10 जून को मतदान होना है। मतदान 10 जून को होगा।  परिणाम उसी दिन घोषित किए जाएंगे।चुनाव आयोग ने 24 मई को राज्यसभा चुनाव के लिए अधिसूचना की तारीख घोषित की है।
असद रिज़वी
21 May 2022
Rajya Sabha
फाइल फोटो।

विधानसभा-विधानपरिषद के चुनावों के बाद एक बार फ़िर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) राज्यसभा चुनाव में आमने-सामने होंगी। देश भर में जून में 57 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। जिसमे अधिकतम 11 सीटें उत्तर प्रदेश में हैं। प्रदेश की 403 सीटों वाली विधानसभा से चुनावी गणित के हिसाब से बीजेपी ज़्यादा सदस्यों को राज्यसभा भेजने की स्थिति में है। हालाँकि सपा के 03 उमीदवारों के सफ़ल होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

अगर पार्टी सूत्रों की मानें तो अपने गठबंधन को 2024 आम चुनावों तक मज़बूत बनाये रखने के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने हिस्से की एक सीट राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) को दे सकते हैं। समाजवादी पार्टी पूर्व आईएएस अलोक रंजन को भी ऊपरी सदन भेजने पर विचार कर रही है ।रंजन अखिलेश सरकार के दौरान प्रदेश के मुख्य सचिव थे। इसके अलावा उन्होंने ही 2022 के प्रदेश के  विधानसभा चुनाव में सपा का घोषणा पत्र तैयार किया था। उधर सपा को 2022 में ज़बरदस्त समर्थन देने वाले मुस्लिम समाज का दबाव भी अपने प्रतिनिधि को राज्यसभा भेजने के लिए रहेगा।

सपा सूत्रों के अनुसार ही पार्टी महाराष्ट्र से पार्टी के नेता अबू हसन आज़मी के नाम पर विचार कर रही है। पार्टी ने आज़म खान के जेल में रहते, आज़मी को 2022 के विधानसभा चुनाव, मुस्लिम चेहरा बनाया था। इस से पार्टी प्रदेश के बाहर भी विस्तार की सम्भावना को तलाश रही है।उधर सपा के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के (सुभासपा) अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर भी अपने बेटे अरविन्द राजभर को राज्यसभा भेजना चाहते हैं। अगर रालोद और सुभासपा की बात करे तो रालोद ने सपा गठबंधन में 38 सीटों पर चुनाव लड़ा था और केवल 08 पर जीत हासिल की थी।जबकि सुभासपा ने 16 सीटों पर मैदान में उतरी और 07 पर जीत हासिल की थी।

दूसरी तरफ जेल से बहार आये आज़म खान भी अपने किसी निकटतम को राज्यसभा का टिकट दिलाना चाहते हैं। उधर सपा से नाराज़ चल रहे शिवपाल यादव को भी राज्यसभा चुनावों के मद्देनज़र पार्टी को मनाये रखना ज़रूरी है ताकि क्रॉस वोटिंग न हो। बता दें कि एक राज्यसभा सीट के लिए 34-37 वोटों की जरूरत होगी।यह प्रत्याशियों की संख्या पर निर्भर करता है। भाजपा और सहयोगी दलों के पास 273 वोट हैं। सपा और सहयोगी दलों के पास 125 विधयाक हैं। बीजेपी आठ पर और सपा 03 सीटों पर दावा कर रही है।

बीजेपी गठबंधन के पास  273 सीटों में स्वयं उसके 255 अपना दल (सोनेलाल) के 12 और निषाद पार्टी के 06 विधायक है।वही सपा गठबंधन के125 सीटों में अधिकतम 111 स्वयं उसके विधायक हैं। रालोद 08 और सुभासपा की 06 सीटें है। इसके अलावा रघुराज प्रताप सिंह के जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) 02, कांग्रेस 02 और बसपा 01 वाली पार्टी है।

प्रदेश विधानसभा के गणित के अनुसार 11 में से 07 बीजेपी और 03 सपा के उम्मीदवारों की विजय होने की संभावना प्रबल है। लेकिन अगर 11वीं सीट पर दोनों दलों के अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारा तो उस पर कड़ा मुकाबला होने की संभावना है।जबकि कांग्रेस के सपा का समर्थन करने की संभावना है। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी और बसपा के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है कि वह किसका समर्थन करेंगे।

बता दें कि 2020 में बसपा विधायकों ने राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवार के ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया था। सपा से हाथ मिला लिया था। इसका कारण बसपा अध्यक्ष मायावती का वह बयान माना जाता है, जिसमें उन्होंने 2019 आम चुनाव में बीएसपी-सपा के साथ गठबंधन एक "बड़ी गलती"  बताया था। मायावती ने कहा था कि वह भविष्य सपा को हराने के लिए चुनावों में कुछ भी करेगी।

कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल का कार्यकाल जुलाई में  समाप्त हो रहा है। अब कांग्रेस के पास उच्च सदन में देश के सबसे बड़े प्रदेश से कोई सदस्य नहीं होगा। बसपा भी प्रदेश से एक सदस्य के रूप में सिमट जाएगी, रामजी लाल गौतम, जो 2021 में चुने गए थे।इसके अलावा उसके दो सदस्यों, पार्टी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा और अशोक सिद्धार्थ जुलाई में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

सपा के पांच सदस्यों में से तीन अगले महीने सेवानिवृत्त हो रहे हैं - सुखराम सिंह, रेवती रमन सिंह और विशंभर प्रसाद निषाद। अखिलेश राज्यसभा में एक अतिरिक्त सदस्य भेजने के अलावा इन सीटों को वापस जीतने की उम्मीद कर कर है।बीजेपी के जिन पांच सदस्यों का कार्यकाल 3 जुलाई को समाप्त हो रहा है, उनमें सैयद ज़फर इस्लाम, शिव प्रताप, जय प्रकाश, सुरेंद्र सिंह और बिल्डर से नेता बने संजय सेठ शामिल हैं।

बीजेपी प्रदेश से कम से कम सात सदस्यों को राज्यसभा भेजने की उम्मीद कर रही है। वहीं सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि बीजेपी संभावित उम्मीदवार कौन होंगे। सूत्र बताते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों को तय करने में जाति और स्थानीय समीकरण अहम भूमिका निभाएंगे।

भगवा पार्टी के सूत्र बताते हैं 29 मई तक बीजेपी सभी उम्मीदवारों के नाम तय कर लेगी।कहा जा रहा है बीजेपी इस बार पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को राज्यसभा भेज सकती है। इसके अलावा यह भी माना जा रहा है कि बीजेपी की सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) भी एक सीट के लिए दबाव बना सकती है।

वरिष्ठ पत्रकार अतुल चंद्रा कहते हैं कि प्रदेश का राज्यसभा चुनाव अखिलेश के नेतृत्व की परीक्षा है क्योंकि चुनावों के बाद से आज़म खान और शिवपाल यादव को लेकर अंदरूनी कलह चल रही है।  अतुल चंद्रा के अनुसार यह कलह और मुस्लिम मुद्दों पर अखिलेश की ख़ामोशी सपा को नुकसान भी पंहुचा सकती है। वह आगे कहते हैं कि बीजेपी, ओपी राजभर को भी अपने ख़ेमे में लेन की कोशिश कर सकती है। वह मानते हैं कि यह राज्यसभा चुनाव, अखिलेश और सपा के भविष्य के लिए निर्णयक साबित होगा।  

भारत निर्वाचन आयोग राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा  करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश समेत 15 राज्यों की 57 राज्यसभा सीटों के लिए 10 जून को मतदान होना है। मतदान 10 जून को होगा और परिणाम उसी दिन घोषित किए जाएंगे।चुनाव आयोग ने 24 मई को राज्यसभा चुनाव के लिए अधिसूचना की तारीख घोषित की है।

Uttar pradesh
Rajya Sabha
UP Rajya Sabha elections
BJP
SAMAJWADI PARTY
AKHILESH YADAV
Yogi Adityanath

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • गुजरात: धर्म-परिवर्तन क़ानून को लेकर हाईकोर्ट और सरकार के बीच क्या विवाद है?
    सोनिया यादव
    गुजरात: धर्म-परिवर्तन क़ानून को लेकर हाईकोर्ट और सरकार के बीच क्या विवाद है?
    29 Aug 2021
    धर्म-परिवर्तन के नए क़ानून पर हाईकोर्ट की सख़्ती से गुजरात सरकार सकते में है। कानून के कई प्रावधानों पर हाईकोर्ट की रोक के ख़िलाफ़ राज्य की विजय रुपाणी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा की है।
  • 200 हल्ला हो: अत्याचार के ख़िलाफ़ दलित महिलाओं का हल्ला बोल
    रचना अग्रवाल
    200 हल्ला हो: अत्याचार के ख़िलाफ़ दलित महिलाओं का हल्ला बोल
    29 Aug 2021
    "जाति के बारे में क्यों ना बोलूं सर जब हर पल हमें हमारी औक़ात याद दिलाई जाती है..."
  • रोटी के लिए जद्दोजहद करते खाना पहुंचाने वाले हाथ
    समृद्धि साकुनिया
    रोटी के लिए जद्दोजहद करते खाना पहुंचाने वाले हाथ
    29 Aug 2021
    नई श्रम सुधार संहिता के दायरे में गिग वर्कर्स को लाए जाने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा के लाभ प्रदान करने के बावजूद फुड डिलीवरी कर्मचारियों का शोषण बदस्तूर है, खासकर महामारी के बाद से। समृद्धि साकुनिया…
  • अफ़गानिस्तान: ‘ग्रेट गेम’  खेलने की सनक में अमेरिका ने एक देश को तबाह कर दिया
    जॉन पिलगर
    अफ़गानिस्तान: ‘ग्रेट गेम’  खेलने की सनक में अमेरिका ने एक देश को तबाह कर दिया
    29 Aug 2021
    कुछ दशक पहले अफ़गानिस्तान की अवाम ने अपनी आज़ादी ली थी, लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देशों की महत्वाकांक्षाओं ने उसे तबाह कर दिया
  • अन्न महोत्सव: मुफ़लिसी का मंगलगान, सरकारी खर्च पर हिंदुत्व प्रचार
    असद रिज़वी
    अन्न महोत्सव: मुफ़लिसी का मंगलगान, सरकारी खर्च पर हिंदुत्व प्रचार
    29 Aug 2021
    “उतना ही खाद्यान्न मुफ़्त मिला जितना पहले मिलता आ रहा था। मुफ़्त सिर्फ़ एक थैला मिला है, जो पहले नहीं मिला था। थैला देने के बदले सरकार अगर मुफ़्त खाद्यान्न बढ़ा कर देती तो ज़्यादा अच्छा होता।”
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License