NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
उत्तर प्रदेश की मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं ठप लेकिन प्रचार पूरा
भाजपा उत्तर प्रदेश ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को लेकर एक वीडियो ट्वीट किया है, आइए जानते हैं इसकी हक़ीक़त।
राज कुमार
20 Oct 2021
उत्तर प्रदेश की मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं ठप लेकिन प्रचार पूरा

उत्तर प्रदेश चुनाव और किसान आंदोलन को लेकर भाजपा डरी हुई है। खेती से संबंधित तमाम तरह का प्रोपगेंडा भाजपा द्वारा किया जा रहा है। इसी कड़ी में भाजपा उत्तर प्रदेश ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को लेकर एक वीडियो ट्वीट किया है। ट्वीट में लिखा है- धरती मां के स्वास्थ्य का रखा ख्याल। दोगुनी हुई आय, किसान हुए खुशहाल।

लेकिन सवाल कई हैं। क्या सचमुच मृदा स्वास्थ्य कार्ड की वजह से खेती में कुछ सुधार हुआ है? क्या ये योजना सचमुच सफल रही है? क्या उत्तर प्रदेश में सचमुच कार्ड बनें है? क्या उत्तर प्रदेश में मृदा जांच के लिए पर्याप्त प्रयोगशालाएं भी हैं? इन प्रयोगशालाओं की क्या स्थिति है? पहले समझते है कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना है क्या?

 

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की शुरुआत 19 फरवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। योजना के तहत देश के सभी किसानों की खेती की ज़मीन का मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाया जाना था। जिससे पता चले कि ज़मीन में पोषक तत्वों की क्या स्थिति है। ताकि उसी हिसाब से खाद वगैरह डाला जा सके। वर्ष 2015 से लेकर 2020 तक इस योजना पर 751 करोड़ 42 लाख रुपया खर्च किया जा चुका है। इसी योजना के आधार पर उत्तर प्रदेश भाजपा किसानों की आय दोगुनी करने का प्रोपगेंडा कर रही है।

उत्तर प्रदेश में मृदा स्वास्थ्य कार्डों की स्थिति

मृदा स्वास्थ्य जांच की आधिकारिक वेबसाइट पर 2019-20 वित्तीय वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 22,412 मृदा जांच सैंपल दर्ज़ किए गये हैं। जिनमें से 10,389 सैंपल के परिणाम दर्ज़ किए गए हैं और मृदा स्वास्थ्य जांच के वेब पोर्टल पर उत्तर प्रदेश के कुल 39,852 मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध हैं। जबकि उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की वेबसाइट के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 165.98 लाख हैक्टेयर भूमि पर खेती होती है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार सिंचित भूमि में प्रति 2.5 हैक्टेयर और असिंचित भूमि की स्थिति में 10 हैक्टेयर ग्रिड पर नमूना लेने की सिफारिश है और प्रत्येक दो वर्ष के बाद दोबारा से जांच करनी होती है और नया कार्ड बनाना होता है। लेकिन मृदा स्वास्थ्य कार्ड मात्र 39,852 दर्ज़ हैं। तो, उत्तर प्रदेश में इतने कम मृदा स्वास्थ्य कार्ड क्यों बने हैं? आइये, समझते हैं।

 उत्तर प्रदेश में मिट्टी जांच और प्रयोगशालाएं

उत्तर प्रदेश के कम मृदा स्वास्थ्य कार्डों का राज़ उत्तर प्रदेश की मृदा जांच प्रयोगशालाओं में हैं। किसान पोर्टल के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 180 मृदा जांच प्रयोगशालाएं हैं। आमतौर पर एक प्रयोगशाला का एक साल में दस हज़ार सैंपल टेस्ट करने का टारगेट होता है। अगर मान लें कि हर प्रयोगशाला ने अपना टारगेट पूरा किया है तो, उत्तर प्रदेश में एक वर्ष में कुल 18 लाख जांच होनी चाहिए थीं। लेकिन वेबसाइट पर मात्र 39,852 मृदा स्वास्थ्य कार्ड ही उपलब्ध हैं। जबकि समस्त कृषि योग्य भूमि की जांच और कार्ड बनाने की बात योजना में की गई है। इस हिसाब से लगभग 66 लाख सैंपल की जांच होनी चाहिये और मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनना चाहिये। स्पष्ट है कि 180 प्रयोगशालाएं बहुत ही कम हैं। अब आइये, इन 180 प्रयोगशालाओं की स्थिति को भी देखते हैं।

उत्तर प्रदेश में मृदा जांच प्रयोगशालाओं की स्थिति

किसान पोर्टल और मृदा जांच डैशबोर्ड के अनुसार उत्तर प्रदेश में 180 मृदा जांच प्रयोगशालाएं हैं। मृदा स्वास्थ्य जांच कार्ड की वेबसाइट के अनुसार उत्तर प्रदेश की 180 प्रयोगशालाओं में से 156 प्रयोगशालाओं में एक भी कर्मचारी नहीं है। 4 प्रयोगशालाओं में मात्र एक कर्मचारी है, 3 प्रयोगशालाओं में 2 कर्मचारी, 4 प्रयोगशालाओं में 4 और 2 प्रयोगशालाओं में पांच कर्मचारी हैं। मात्र 6 प्रयोगशालाओं में पांच से ज्यादा कर्मचारी हैं। यानी उत्तर प्रदेश की प्रयोगशालाओं में स्टाफ की जबरदस्त कमी है। जबकि कृषि मंत्रालय की 12 फरवरी 2021 की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार उत्तर प्रदेश में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के अंतर्गत 85-90% किसानों को कवर किया जा चुका है। ट्विटर पर भाजपा मृदा स्वास्थ्य कार्ड का प्रचार कर रही है, कृषि मंत्रालय उत्तर प्रदेश को योजना के सफल कार्यान्वन पर तीसरा रैंक दे रही है। लेकिन प्रयोगशालाएं ठप्प पड़ी हैं।

13 जुलाई 2021 की दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार चंदौली, आज़मगढ़, गाजीपुर, बहराइच, बलिया, वाराणसी समेत कई और ज़िलों के 17 कृषि विज्ञान केंद्रों की लैब में पिछले दस साल से कोई जांच नहीं हुई है। 24 जून की इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले डेढ़ साल से कोंच नगर में कोई जांच नहीं हो रही है। न कोई नमूना लेने वाला है और न ही कोई जांच करने वाला।

नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर योजना के तहत गांव स्तर पर सैंपल लेने और जांच करने का प्रावधान दिया गया ताकि किसानों को ज़िला केंद्रों पर न जाना पड़े। लेकिन बजट न होने के कारण प्रयोगशालाएं ठप पड़ी हैं। 3 मार्च 2020 की पत्रिका की एक रिपोर्ट के अनुसार उद्यपुरा में प्रयोगशाला का उद्घाटन हुआ लेकिन तब से बंद ही पड़ी है। इस बंद पड़ी प्रयोगशाला का बिजली का बिल 1 लाख 21 हज़ार से ज्यादा आ गया है। मात्र इतना ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश में मृदा परिक्षण एजेंसी के चयन को लेकर घोटाला हुआ और कृषि विभाग के नौ अफसरों को सस्पेंड किया गया और चार फर्म के ब्लैक लिस्टेड किया गया।

यह ख़बरें और आंकड़े काफ़ी हैं यूपी में यह बताने कि लिए कि धरती मां के स्वास्थ्य का कितना ख्याल रखा गया है, और किस तरह किसान खुशहाल हो गए हैं।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। वे सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते हैं।)

 

इसे भी पढ़ें: ऑस्ट्रेलिया की चीनी मिल को उत्तर प्रदेश का बताकर चुनावी लहर बना रही भाजपा

 

इसे भी पढ़ें:  देश में दलितों पर हर चौथा अपराध उत्तर प्रदेश में होता है

 

 

 

Uttar pradesh
soil testing laboratories
yogi sarkar

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में भारी बवाल


बाकी खबरें

  • संसद
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    पेगासस स्पाइवेयर को लेकर संसद में गतिरोध, स्वतंत्र जांच के लिए वरिष्ठ पत्रकारों ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया  
    27 Jul 2021
    प्रतिष्ठित पत्रकारों एन राम और शशि कुमार ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करके अनुरोध किया है कि इजराइली स्पाइवेयर पेगासस का इस्तेमाल करके सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रतिष्ठित नागरिकों, नेताओं और…
  • साल के अंत तक इराक़ छोड़ देंगे सभी अमेरिकी सैनिक
    पीपल्स डिस्पैच
    साल के अंत तक इराक़ छोड़ देंगे सभी अमेरिकी सैनिक
    27 Jul 2021
    इराक़ में विपक्ष ने इस फ़ैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह देश से सभी विदेशी सैनिकों, लड़ाकू या ग़ैर-लड़ाकू की पूरी तरह से वापसी की दिशा में पहला क़दम है।
  • लेबनान के मनोनीत पीएम नजीब मिकाती ने सरकार बनाने के लिए संसदीय बहुमत हासिल किया
    पीपल्स डिस्पैच
    लेबनान के मनोनीत पीएम नजीब मिकाती ने सरकार बनाने के लिए संसदीय बहुमत हासिल किया
    27 Jul 2021
    सरकार बनाने में सफल रहे नजीब मिकाती को 2019 से देश में कहर बरपा रहे आर्थिक संकट से तत्काल निपटना होगा।
  • हिमाचल: एचआरटीसी कर्मियों की मांगों के समर्थन में सीटू ने किया प्रदर्शन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिमाचल: एचआरटीसी कर्मियों की मांगों के समर्थन में सीटू ने किया प्रदर्शन
    27 Jul 2021
    मज़दूर संगठन सीटू ने हिमाचल प्रदेश सरकार से एचआरटीसी कर्मियों की मांगों को पूर्ण करने व क्षेत्रीय प्रबंधक का तबादला रद्द करने की मांग की है। सीटू ने ऐलान किया है कि अगर एचआरटीसी कर्मियों का आंदोलन आगे…
  • आजम खान की रिहाई के लिए एएमयू में मार्च
    भाषा
    आज़म ख़ान की रिहाई के लिए एएमयू में मार्च
    27 Jul 2021
    उत्तर प्रदेश के रामपुर से लोकसभा सदस्य और प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान को जमानत नहीं दिए जाने के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में मार्च निकाला।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License