NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
उत्तराखंड: NIOS से डीएलएड करने वाले छात्रों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति नहीं
उत्तराखंड सरकार द्वारा नवंबर 2020 में प्राथमिक शिक्षक के 2287 पदों पर भर्ती के लिए सूचना जारी की गई थी, इसमें राज्य सरकार द्वारा इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से होने वाले डीएलएड को मान्य किया गया लेकिन राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) किए हुए छात्रों को अमान्य कर दिया गया
सत्यम कुमार
23 Oct 2021
Uttarakhand
देहरादून स्थित गांधी पार्क पर एक दिन के लिए उपवास करते NIOS से डीएलएड करने वाले छात्र (फोटो-सत्यम कुमार)

“मैं एक शिक्षक बनना चाहती हूँ लेकिन मेरी शादी होने के बाद प्रतिदिन कॉलेज जाकर मैं रेगुलर बीएड नहीं कर सकती थी, तभी मुझे राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से होने वाले डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) के बारे में मालूम हुआ,NIOS के नियम अनुसार मैं अपने नजदीकी स्कूल में पढ़ाने के लिए जा सकती थी। एनआईओएस द्वारा संचालित डीएलएड में मैंने तुरंत प्रवेश ले लिया, जब डीएलएड क्लास स्टार्ट हुईं तो मैं अपने आठ दिन के बेटे को लेकर क्लास लेने गयी, मैंने अपने जीवन के दो साल दिन रात मेहनत करके डीएलएड के साथ साथ सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन की परीक्षा भी पास की लेकिन अब प्रशासन का कहना है कि मैं प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए मान्य ही नहीं हूँ” यह कहना है देहरादून की रहने वाली स्वाति त्यागी का। 

उत्तराखंड सरकार द्वारा नवंबर 2020 प्राथमिक शिक्षक के लिए 2287 पदों पर भर्ती के लिए सूचना जारी की गई थी, राज्य में होने वाली इस प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए सरकार द्वारा इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से होने वाले डीएलएड को मान्य किया लेकिन राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन(डीएलएड) किए हुए छात्रों को अमान्य कर दिया गया, जबकि बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़, असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा से डीएलएड करने वाले छात्रों को नियुक्ति भी दे दी गयी हैं।

इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद(NCTE) के द्वारा भी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के द्वारा किये गये डीएलएड को भी मान्य कर दिया गया था, उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा भी राजकीय प्रारंभिक शिक्षा(अध्यापक) संशोधन नियमावली 2019 के अनुसार भी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से किये जाने वाले डीएलएड को मान्य किया गया है साथ ही 15 जनवरी 2021 को आर मीनाक्षी सुंदरम सचिव उत्तराखंड शासन द्वारा निदेशक प्रारंभिक शिक्षा उत्तराखंड को NIOS के द्वारा दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से डीएलएड किये गए अभ्यर्थियों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती में सम्मिलित करने का आदेश दिया गया। लेकिन नवम्बर 2020 प्राथमिक शिक्षक के लिए होने वाली भर्ती में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान डीएलएड करने वाले छात्रों को भर्ती से वंचित रखा गया।

ये भी पढ़ें: पहाड़ों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी, कैसे तीसरी लहर का मुकाबला करेगा उत्तराखंड?


उत्तराखंड सरकार के इस निर्णय के विरोध में दिनांक 16 अक्टूबर 2021 को देहरादून स्थित गांधी पार्क पर भारत संविधान संरक्षण मंच के बैनर तले छात्रों ने एक दिवसीय उपवास रख प्रदर्शन किया, स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इण्डिया उत्तराखंड द्वारा भी इस प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया गया। छात्रो का कहना है कि राज्य में लगभग तीस हजार से भी अधिक छात्रों ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से डीएलएड किया है, सभी छात्रों को उम्मीद थी कि वह भी शिक्षक बनेंगे लेकिन सरकार के इस फैसले ने छात्रों की उम्मीद पर पानी फेर दिया, आज हम अपने अधिकार के लिए आंदोलन कर रहे हैं और सरकार को हमारी मांग को मानना ही होगा क्योंकि सरकार को हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का कोई हक नहीं है, हम अपने आंदोलन को शांति पूर्ण तरीके से जारी रखेंगे। कुछ समय बाद जिला मजिस्ट्रेट देहरादून को ज्ञापन सौपने के बाद धरना समाप्त कर दिया गया, लेकिन छात्रों का कहना है कि हम अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं और इसे अंत तक लड़ेंगे यदि सरकार ने अगले दस दिन में हमारी मांग नहीं मानी तो हम सभी छात्रों द्वारा क्रमिक अनशन किया जायेगा। 

एनआईओएस क्या है?

एनआईओएस एक 'मुक्त विद्यालय' है जो पूर्व-स्नातक स्तर तक के विभिन्न प्रकार के शिक्षार्थियों को शिक्षा प्रदान करता है। 1979 में इसे केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा एक परियोजना के रूप में चलाया गया था जिसमें कुछ अंतनिर्हित सुविधाएं दी गई थीं, 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा यह सुझाव दिया गया कि देश भर में माध्यमिक स्तर पर विस्तृत रूप में मुक्त शिक्षा की सुविधा प्रदान करने के लिए मुक्त विद्यालय प्रणाली को एक स्वतंत्र प्रणाली के रूप में मजबूत किया जाए, जिसमे एनआईओएस का अपना पाठ्यक्रम हो और परीक्षा हो जिसमें उत्तीर्ण होने पर प्रमाणपत्र दिया जाए। मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार ने नवंबर 1989 में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय की स्थापना की। जुलाई, 2002 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संगठन का नाम राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय से बदलकर राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान किया गया। शिक्षा का सार्वभौमीकरण, समाज में बेहतर समता और न्याय लाने के लिए और एक शिक्षित समाज का निर्माण ये सभी एनआईओएस के उद्देश्य हैं।

एनआईओएस किस प्रकार कार्य करता है ?

ऐसे व्यक्ति जिनकी शिक्षा किसी कारणवश बीच में छूट जाती है और ऐसे व्यक्ति जो पढ़ना तो चाहते हैं लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पढाई पूर्ण होने से पहले नौकरी करनी पड़ती है लेकिन नौकरी के साथ साथ रेगुलर पढाई नहीं कर सकते, एनआईओएस ऐसे व्यक्तियों को अपनी शिक्षा पूर्ण करने में मदद करता है, एनआईओएस ने 853 एजेंसियों के साथ सहभागिता की है ये एजेंसियां अपने अध्ययन केन्द्रों पर सुविधा प्रदान करती हैं। माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तरों पर एनआईओएस विषयों, पाठ्यक्रमों के चयन, पढ़ाई की गति, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, स्कूल शिक्षा के कुछ अन्य बोर्डों और राज्य मुक्त विद्यालयों से क्रेडिटों से स्थानांतरण द्वारा सुविधाएं प्रदान करता है। शिक्षार्थी को पाँच वर्ष की अवधि में अधिकतम नौ बार परीक्षा देने की सुविधा दी गई है। जब तक शिक्षार्थी प्रमाणपत्र के लिए आवश्यक विषयों में उत्तीर्ण नहीं होता, तब तक उसके क्रेडिट एकत्र होते रहते हैं। अध्ययन की रणनीतियों में स्व-अध्ययन सामग्री द्वारा पढ़ाई, श्रव्य और दृश्य कार्यक्रम, व्यक्तिगत संपर्क कार्यक्रम, और अनुशिक्षक द्वारा अंकित मूल्यांकन कार्य में भाग लेना शामिल है। अर्धवार्षिक पत्रिका "मुक्त शिक्षा'' द्वारा भी शिक्षार्थियों का ज्ञान बढ़ाया जाता है। अध्ययन सामग्री अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू माध्यमों में उपलब्ध कराई जाती है। माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर जब चाहो तब परीक्षा प्रणाली (ओड्स) चलाया जा रहा है। एनआईओएस आठ माध्यमों (हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मराठी, तेलुगू, गुजराती, मलयालम और उड़िया) में 28 विषयों में माध्यमिक परीक्षा और हिंदी, अंग्रेजी, बंगाली,उड़िया और उर्दू माध्यमों में विषयों में उच्चतर माध्यमिक स्तर पर 28 विषयों में और 20 व्यावसायिक विषयों को शैक्षिक विषयों के संयोजन में चलाने का प्रावधान भी रखता है। इस के अतिरिक्त एनआईओएस पांच विभागों, क्षेत्रीय केन्द्रों देश और विदेश में फैले प्रत्यायित संस्थाओं (अध्ययन केन्द्रों) द्वारा कार्य करता है। माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर इसका वर्तमान नामांकन 2.71 मिलियन शिक्षार्थियों का है जिससे यह विश्व की मुक्त विद्यालयी शिक्षा प्रणाली बन गया है। 

एनआईओएस से डीएलएड किए हुए छात्रों का भविष्य दांव पर

जिला उद्यम सिंह नगर की रहने वाली अंजली राणा का कहना है कि मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के कारण मुझे नौकरी करनी पड़ी, नौकरी के साथ साथ मैं रेगुलर बीएड नहीं कर सकती थी, इसी कारण मैंने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन करने का फैसला लिया। लेकिन तब मुझे मालूम ही नहीं था की सरकार हमारे सपनो पर इस प्रकार पानी फेर देगी, मेरे द्वारा सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन की परीक्षा भी पास कर ली गयी है, लेकिन सरकार के इस फैसले ने मेरी सारी मेहनत को बे मतलब कर दिया। अंजलि आगे कहती हैं कि मेरा सरकार से सवाल है कि राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन को उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए क्यों मान्य नहीं किया? क्या राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की कोई मान्यता नहीं है? यदि नहीं है तो क्यों इस प्रकार के संस्थान को राज्य में आने दिया जा रहा है ? और यदि है तो फिर क्यों हम लोगो को उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक भर्ती वंचित रखा जा रहा है, कारण चाहे जो भी हो दोनों ही सूरत में सरकार ही जिम्मेदार है, हमारे द्वारा सरकार को चेताने के लिए विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुका है और अपने हक के लिए हम अंत तक लड़ने के लिए तैयार हैं।

भारतीय संवैधानिक अधिकार मंच से शिक्षक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कपिल का कहना है कि हम लोगो ने शिक्षक बनने के लिए मेहनत की है, लेकिन उत्तराखंड सरकार के इस फैसले के कारण आज हमे सड़को पर उतर कर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठानी पड़ रही है क्योकि आज हमारे जीवन भर की मेहनत दाव पर लगी है, सरकार से हमारा सवाल है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद और आर मीनाक्षी सुंदरम सचिव उत्तराखंड द्वारा आदेश किये जाने के बाबजूद भी हमे क्यों प्राथमिक शिक्षक भर्ती में शामिल नहीं किया जा रहा? हमने भी इग्नू और डाइट से डीएलएड करने वाले अभ्यार्थियों के जैसे ही डीएलएड और सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन की परीक्षा पास की है, यदि उनकी नियुक्ति हो सकती है तो हमारी क्यों नहीं? उत्तराखंड राज्य में लगभग 35 हजार छात्रों ने NIOS से डीएलएड किया है, अब हम सभी ने मिलकर यह निर्णय लिया है कि हम किसी भी हालत में सरकार को हमारे अधिकारों को रौंदने नहीं देंगे। इसलिए हम सभी एकजुट होकर एक दिन का उपवास कर रहे हैं फिर भी सरकार ने हमारी बात नहीं सुनी तो 27 अक्टूबर से हमारे द्वारा क्रमिक अनशन देहरादून में किया जायेगा।

सरकार का पक्ष जानने के लिए हमारे द्वारा अरविन्द पांडेय शिक्षा मंत्री उत्तराखंड, डायरेक्टर जनरल स्कूल एजुकेशन उत्तराखंड बंशीधर तिवारी आदि से फ़ोन पर संपर्क करने की कोशिश की गयी। लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला इस के अतरिक्त NIOS चेयरपर्सन प्रोफ़ेसर सरोज शर्मा से भी फोन द्वारा संपर्क करने की कोशिश की गयी, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। अतः हमारे द्वारा स्कूल एजुकेशन उत्तराखंड और NIOS को मेल कर दिया गया है जानकारी मिलने पर आप सभी को अवगत करा दिया जायेगा।

(लेखक देहरादून स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं )

UTTARAKHAND
NIOS
DELED
Diploma in Elementary Education
SFI
Student Protests

Related Stories

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

दिल्ली में गूंजा छात्रों का नारा— हिजाब हो या न हो, शिक्षा हमारा अधिकार है!

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई

उत्तराखंड चुनाव: राज्य में बढ़ते दमन-शोषण के बीच मज़दूरों ने भाजपा को हराने के लिए संघर्ष तेज़ किया

रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा

रेलवे भर्ती मामला: बिहार से लेकर यूपी तक छात्र युवाओं का गुस्सा फूटा, पुलिस ने दिखाई बर्बरता

‘(अ)धर्म’ संसद को लेकर गुस्सा, प्रदर्शन, 76 वकीलों ने CJI को लिखी चिट्ठी

अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध छात्र, अचानक सिलेबस बदले जाने से नाराज़

कोलकाता: बाबरी मस्जिद विध्वंस की 29वीं बरसी पर वाम का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Dairy
    जेनिफ़र बार्कले
    नागरिकों की अनदेखी कर, डेयरी उद्योग को थोपती अमेरिकी सरकार
    05 Jan 2022
    बिग डेयरी के अपने अतार्किक समर्थन में, अमेरिकी सरकार आम लोगों को गुमराह कर रही है और एक उद्योग की कीमत पर दूसरे उद्योग की जेबों को मालामाल करने में मशगूल है।
  • संदीपन तालुकदार
    भूटान और अरुणाचल की तलहटी में डॉक्टर का इंतज़ार
    05 Jan 2022
    उदलगुड़ी ज़िले में सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की आधारभूत संरचना अच्छी स्थिति में है। लेकिन यहां डॉक्टरों और दूसरे कर्मचारियों की कम संख्या हैरान करने वाली है। महामारी के दौरान भी सरकार ने कुशल कर्मचारियों…
  • BHOJANMATA
    राजेश डोबरियाल
    दलित भोजनमाता को दिल्ली में नौकरी के 'आप' के दावे पर सवाल.. दिल्ली में तो यह पद ही नहीं
    05 Jan 2022
    उत्तराखंड के सीमांत ज़िले चंपावत में दलित भोजनमाता के हाथ का खाना खाने से सवर्ण बच्चों के इनकार और उन्हें काम से हटाए जाने की ख़बर जब नेशनल मीडिया और सोशल मीडिया की सुर्खियां बनी तो दिल्ली के समाज…
  • Aviation
    एंड्रियास स्पाएथ
    हाइड्रोजन-इलेक्ट्रिक जेट और उसका पुनर्गठन: 2022 में विमानन उद्योग की ​योजनाएं
    05 Jan 2022
    कोरोना महामारी के कारण पस्त पड़ा विमानन उद्योग, कोविड के नए अवतार ओमिक्रॉन के प्रकोप के बावजूद, नए साल में अपनी संभावनाओं को लेकर कुछ कुछ आशावादी है। ​2022​ को​ विमानन उद्योग के लिए सीमित संभावनाओं…
  • BULLI BAI
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ‘बुल्ली बाई’ ऐप मामला : मुंबई पुलिस ने एक और छात्र को गिरफ़्तार किया
    05 Jan 2022
    मुंबई पुलिस ने मयंक रावल (21) नामक छात्र को बुधवार तड़के उत्तराखंड से पकड़ा है। इधर, इस मामले में दिल्ली पुलिस अभी जानकारी ही जुटा रही है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License