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यूपी: नहीं लग रही अपराधियों पर लगाम, फिर एक नाबालिग छात्रा की हत्या
फिरोजाबाद शहर में कुछ मनचलों ने सिर्फ इसलिए 11वीं में पढ़ने वाली लड़की को मौत के घाट उतार दिया क्योंकि उसने उनकी छेड़खानी का विरोध किया था। घटना के बाद आरोपी फरार हैं और पुलिस जांच में जुटी है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Oct 2020
stop rape
Image Credit: Arpita Biswas/Feminism in India

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भले ही रोज़ ‘बेहतर कानून व्यवस्था’ के नए दावे कर रही हो लेकिन प्रदेश के हालात दिन-प्रतिदिन बद से बदतर होते जा रहे है। अभी बाराबंकी में दलित लड़की के साथ दुष्कर्म और हत्या का मामला सुलझा ही नहीं की फिरोज़ाबाद में बेखौफ मनचलों ने छेड़खानी का विरोध करने पर नाबालिग लड़की की घर में घुसकर हत्या कर दी है। इस मामले में पुलिस ने तीन नामजद और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं और पुलिस की कई टीमें जांच में जुटी हैं।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक घटना फिरोजाबाद के थाना रसूलपुर क्षेत्र की है। यहां प्रेम नगर इलाके में रहने वाली 16 वर्षीय छात्रा 11वीं में पढ़ती थी। मृतका के पिता के अनुसार शुक्रवार, 23 अक्टूबर को स्कूल जाते समय तीन युवकों ने छात्रा का रास्ता रोककर उससे छेड़छाड़ का प्रयास किया। जब छात्रा ने इसका विरोध किया तो ये बात उन्हें बर्दाश्त नहीं हुई और रात को उन लड़कों ने घर का बंद दरवाजा तोड़कर छात्रा की हत्या कर दी।

मृतका के पिता ने छेड़छाड़ करने वाले तीन युवकों पर ही हत्या का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक आरोपियों ने सोती हुई छात्रा पर तमंचे से ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं और फिर हत्या के बाद आरोपी फरार हो गए।

स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक घटना की सूचना मिलते ही फोर्स के साथ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटना की जानकाली ली। पुलिस ने छात्रा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।

पुलिस का क्या कहना है?

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सचिंद्र पटेल ने घटना की जानकारी देते हुए मीडिया को बताया कि छात्रा की गोली मारकर हत्या हुई है। मृतका के पिता ने तीन युवकों पर आरोप लगाया है। मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस टीमें आरोपियों को तलाश कर रही है। जल्द ही घटना का अनावरण किया जाएगा।

प्रदेश में महिला सुरक्षा का बुरा हाल

गौरतलब है कि महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता बताने वाली बीजेपी की योगी सरकार में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों का ग्राफ तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में नाबालिग और दलित लड़कियों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। बीते दिनों एक के बाद एक बलात्कार और हत्या की घटनाओं ने रामराज पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी की इस साल जनवरी में आई सालाना रिपोर्ट कहती है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। देश में महिलाओं के ख़िलाफ़ 2018 में कुल 378,277 मामले हुए और अकेले यूपी में 59,445 मामले दर्ज किए गए। यानी देश के कुल महिलाओं के साथ किए गए अपराध का लगभग 15.8%।

इसके अलावा प्रदेश में कुल रेप   के 4,322 केस हुए। यानी हर दिन 11 से 12 रेप केस दर्ज हुए। ध्यान देने वाली बात ये है कि ये उन अपराधों पर तैयार की गई रिपोर्ट है जो थानों में दर्ज होते हैं। इन रिपोर्ट से कई ऐसे केस रह जाते हैं जिनकी थाने में कभी शिकायत ही दर्ज नहीं हो सकी। एनसीआरबी देश के गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है।

सत्ता पक्ष के नेता खुलेआम आरोपियों का मनोबल बढ़ाते हैं!

‘लॉ एंड ऑर्डर बेहतर स्थिति में है और आगे भी बेहतर स्थिति में रहेगा' कहने वाले सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन तमाम घटनाओं के चलते कानून व्यवस्था के नाम पर नाकामी का आरोप झेल रहे हैं। जानकारों के अनुसार प्रदेश में पुलिस प्रशासन का खौफ़ नहीं है। अपराधी लॉ एंड ऑर्डर की खुले-आम धज्जियां उड़ा रहे हैं और सरकार इसे बाहरी साजिश के नाम पर लीपा-पोती करने में लगी है। आए दिन सामने आ रही आपराधिक घटनाओं पर लगाम नहीं लग पा रही तो वहीं दबंगों में क़ानून का भय ना के बराबर है। कई मामलों में तो सत्ता पक्ष के नेता खुलेआम आरोपियों के पक्ष में खड़े दिखाई देते हैं, जिससे उनका मनोबल और बढ़ता है। ऐसे में यह कहना बड़ा मुश्किल है कि अपराधियों में क़ानून का भय है और सीएम के रामराज के दावे में सच्चाई।

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