NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
कानपुर: घेरे में क़ानून व्यवस्था, अपराध और राजनीति का गठजोड़
“अपराधी या तो उत्तर प्रदेश से बाहर चले गए हैं या फिर ज़मानत रद्द कराकर जेल में बंद हैं।” कानपुर मुठभेड़ में 8 पुलिसकर्मियों के शहीद होने के बाद यूपी सरकार के इस दावे की एक बार फिर पोल खुल गई है।
सोनिया यादव
05 Jul 2020
कानपुर: घेरे में क़ानून व्यवस्था,
image courtesy : Times of India

“…उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था बेहद बिगड़ चुकी है, अपराधी बेखौफ हैं।”

ये ट्वीट कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का है। प्रियंका गांधी ने अपने ट्वीट में आगे लिखा कि प्रदेश में आमजन व पुलिस तक सुरक्षित नहीं हैं। कानून व्यवस्था का जिम्मा खुद मुख्यमंत्री के पास है। ऐसे में कानपुर की भयावह घटना के बाद मुख्यमंत्री को सख़्त कार्रवाई करनी चाहिए, कोई भी ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

बता दें कि कानपुर मुठभेड़ में 8 पुलिसकर्मियों के शहीद होने के बाद उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है तो वहीं कुछ ऐसे सवाल भी हैं, जिनका जवाब अभी सामने आना बाकी है। जैसे 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद भी अभी तक विकास दुबे गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ था? विकास के घर दबिश डालने गए पुलिसवालों ने बुलेट प्रूफ़ जैकेट क्यों नहीं पहनी थी? क्या इतनी बड़े अपराधी को पकड़ने गई पुलिस की तैयारी समुचित थी? आखिर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनाती और घेराबंदी के बाद भी अपराधी कब और कहाँ फ़रार हो गए, विकास दुबे अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर क्यों है?

क्या है विकास दुबे मामले में अपडेट?

 - प्रशासन ने जेसीबी की मदद से हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का बिकरू गांव में बना  किलानुमा घर पूरी तरह से गिरा दिया है। पुलिस के मुताबिक विकास ने अवैध तरीके से जो भी प्रॉपर्टी बनाई है, अब वो सब जांच का विषय है।

- विकास दुबे की तलाश में पुलिस की 20 टीमें तैनात की गई हैं। सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। मामले में पूछताछ के लिए गांव के कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस को विकास के नेपाल भागने की भी आशंका है। नेपाल बॉर्डर पर पुलिस को अलर्ट कर दिया गया है।

- कानपुर के आईजी मोहित अग्रवाल ने विकास दुबे पर 50 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की है। पुलिस का कहना है कि उसके बारे में बताने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी। पुलिस ने सैकड़ों मोबाइल फोन नंबर को भी सर्विलांस पर लगाए हैं।

- खबरों के अनुसार पुलिस विकास के घर के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कर रही है लेकिन पुलिस को सीसीटीवी कैमरों का डीवीडी रिकॉर्ड नहीं मिला है। पुलिस को शक है कि विकास दुबे सीसीटीवी को कंट्रोल कर रहा था और डीवीडीआर लेकर भाग गया है।

- इस मामले में चौबेपुर थाने के एसओ विनय तिवारी की भूमिका लगातार संदिग्ध होती जा रही है। हिंदुस्तान अख़बार में छपी ख़बर के मुताबिक – जब दबिश दी गई तो बाकी थानों की फोर्स, एसओ और सीओ आगे बढ़ गए, लेकिन एसओ चौबेपुर विनय तिवारी जेसीबी के पीछे ही रहे। जबकि थाना उनका था, उन्हें यहां की तमाम जानकारियां थीं। गली-कूचों की भी जानकारी थी। लेकिन वो पीछे रहे और स्थिति बिगड़ने पर भाग गए।

- कॉल डिटेल्स से पता लगा है कि घटना के पहले 24 घंटे के भीतर विकास की कई पुलिसवालों से बात हुई थी। इन सभी के नंबर उसकी कॉल डिटेल्स में हैं। इस वक्त पुलिस के शक के घेरे में एक दारोगा, एक सिपाही और एक होमगार्ड हैं। तीनों से पुलिस पूछताछ कर रही है।

- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विकास दुबे को पहले से ही पुलिस की दबिश की मुखबिरी हो गई थी। विकास दुबे के खिलाफ 60 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। पुलिस की तरफ से उस पर पहले से ही 25 हजार का इनाम था।

विकास दुबे की राजनितिक सांठ-गांठ

पिछले करीब तीन दशक से अपराध की दुनिया से विकास दुबे का नाम जुड़ा हुआ है। उसका लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। इस दौरान कई बार उसकी गिरफ्तारी भी हुई लेकिन किसी भी मामले में सजा नहीं हुई और हर बार वो जमानत पर छूटकर बाहर आता रहा। इसका सबसे बड़ा कारण राजनीतिक दलों में विकास की अच्छी-खासी पहुंच बताई जा रही है।

कानपुर में नवभारत टाइम्स के पत्रकार प्रवीण मोहता ने बीबीसी को बताया, "साल 2001 में विकास दुबे ने थाने के अंदर घुसकर बीजेपी के दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की हत्या कर दी थी। संतोष शुक्ला हत्याकांड ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया था लेकिन इतनी बड़ी वारदात होने के बाद भी किसी पुलिस वाले ने विकास के खिलाफ गवाही नहीं दी। कोर्ट में विकास के खिलाफ हत्या का कोई साक्ष्य नहीं मिला जिसकी वजह से उसे बरी कर दिया गया।”

इसके अलावा साल 2000 में कानपुर के शिवली थाना क्षेत्र स्थित ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या के मामले में भी विकास दुबे को नामजद किया गया था।

थाने में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2000 में ही विकास दुबे के ऊपर रामबाबू यादव की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप लगा था। बताया जा रहा था कि साजिश विकास ने जेल में ही रची थी। 2004 में केबल व्यवसायी की हत्या में भी विकास दुबे का नाम आया।

प्रवीण महतो के अनुसार हर राजनीतिक दल में विकास दुबे की पैठ रही है और यही वजह है कि आजतक उसे नहीं पकड़ा गया। पकड़ा भी गया तो कुछ ही दिनों में वह बाहर आ गया।

चौबेपुर गांव के लोगों के मुताबिक बिकरू गांव में पिछले 15 साल से विकास दुबे के परिवार के ही लोग जिला पंचायत के सदस्य और प्रधान रहे हैं। गांव में विकास की बुराई करने वाला कोई नहीं है और न ही उसके खिलाफ कोई गवाही ही देता है।

राजनीति और अपराध

पुलिस पर लगातार बढ़ते हमलों के पीछे अपराधियों के बुलंद हौसले एक प्रमुख वजह तो हैं ही लेकिन इन बदमाशों को राजनीतिक संरक्षण भी मिला हुआ होता है, जिसके कारण इन बदमाशों में कानून का भय नहीं होता। जब पुलिस इन बदमाशों पर कड़ी कार्रवाई करने की कोशिश करती है, तो राजनीतिक दबाव इन पुलिस अधिकारियों पर डाल दिया जाता है।

दरअसल ये बाहुबली लोग राजनीतिक पार्टियों को चुनाव के समय भारी मात्रा में फंड तो देते ही हैं साथ ही लोगों के वोट को प्रभावित करने में भी इनकी बड़ी भूमिका रहती है। शायद यही कारण है कि हमारे देश में अपराध और राजनीति का चोली-दामन का साथ है। आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों का राजनीति में बोलबाला रहता है, राजनीतिक दल चुनाव में उन्हें ज्यादा से ज्यादा टिकट देते हैं।

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने चुनावों में अपनी किस्मत आजमाने वाले प्रत्याशियों के हलफनामों का विश्लेषण करने पर पाया कि हर चुनाव में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की संख्या में वृद्धि हो रही है।

इस संगठन द्वारा किये गये विश्लेषणों से पता चलता है कि 2019 में संपन्न 17वीं लोकसभा के चुनाव में 1070 प्रत्याशियों ने अपने खिलाफ बलात्कार, हत्या, हत्या के प्रयास, महिलाओं के प्रति अत्याचार जैसे गंभीर अपराधों के मामले लंबित होने की जानकारी हलफनामे पर दी थी। इनमें भाजपा के 124, कांग्रेस के 107, बसपा के 61, मार्क्सवादी पार्टी के 24 और 292 निर्दलीय उम्मीदवार शामिल थे।

घेरे में कानून व्यवस्था

“अपराधी या तो उत्तर प्रदेश से बाहर चले गए हैं या फिर जमानत रद्द कराकर जेल में बंद हैं।” कानपुर मुठभेड़ में 8 पुलिसकर्मियों के शहीद होने के बाद यूपी सरकार के इस दावे की पोल खुल खुल गई है। इस घटना के पहले भी राज्य में कई घटनाएं हो चुकी हैं। जिससे योगी सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

योगी सरकार को सोनभद्र के उम्भा गांव में बीते साल 17 जुलाई को 10 लोगों के नरसंहार पर सबसे ज्यादा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। पहले सरकार ने मारे गए लोगों के परिवार को पांच लाख रुपये देने की घोषणा की थी, मगर प्रियंका गांधी के जाने के बाद मामला गरमाया तो धनराशि 18.5 लाख रुपये कर दी गई।

संभल में सिपाहियों की हत्या

यूपी के संभल में 17 जुलाई को पेशी के लिए ले जाए जा रहे कैदियों ने दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद उनके हथियार लेकर तीन कैदी फरार हो गए थे। बाद में संभल में ही बदमाशों और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में पुलिस ने ढाई लाख के इनामी बदमाश कमल को मार गिराया था।

इंस्पेक्टर को भीड़ ने मार डाला

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पिछले साल हिंसा की बड़ी घटना हुई थी। जब उन्मादी भीड़ ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। सुबोध सिंह के परिवार ने आरोप लगाया था कि उनकी हत्या इसलिए की गई, क्योंकि वो दादरी में हुए अखलाक हत्याकांड की जांच कर रहे थे। अखलाक की 28 सितंबर 2015 को पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी।

अलीगढ़ की घटना

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के थाना छर्रा क्षेत्र में एक पुलिसवाले से मारपीट और सर्विस रिवॉल्वर छीने जाने का मामला सामने आया है। एक महिला की शिकायत पर जांच करने गए सिपाही पर ही लोगों ने हमला कर दिया। वर्दी फाड़ दी थी। इसका वीडियो वायरल होने पर शासन और प्रशासन की किरकिरी हुई थी।

गौरतलब है कि मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद से प्रदेश में हो रहीं पुलिस मुठभेड़ों पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार को नोटिस जारी किया था। यह नोटिस एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया गया। जिसमें कहा गया था कि इन मुठभेड़ों की सीबीआई या एसआईटी से जांच कराई जाए और इसकी निगरानी कोर्ट करे।

UttarPradesh
kanpur encounter
Vikas Dubey
UP police
UP Police Encounter
Yogi Adityanath
yogi sarkar
BJP
PRIYANKA GANDHI VADRA
Congress

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!

ग़ाज़ीपुर; मस्जिद पर भगवा झंडा लहराने का मामला: एक नाबालिग गिरफ़्तार, मुस्लिम समाज में डर


बाकी खबरें

  • election
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव दूसरा चरण:  वोट अपील के बहाने सियासी बयानबाज़ी के बीच मतदान
    14 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव कितने अहम हैं, ये दिग्गज राजनेताओं की सक्रियता से ही भांपा जा सकता है, मतदान के पहले तक राजनीतिक दलों और राजनेताओं की ओर से वोट के लिए अपील की जा रही है, वो भी बेहद तीखे…
  • unemployment
    तारिक़ अनवर
    उत्तर प्रदेश: क्या बेरोज़गारी ने बीजेपी का युवा वोट छीन लिया है?
    14 Feb 2022
    21 साल की एक अंग्रेज़ी ग्रेजुएट शिकायत करते हुए कहती हैं कि उनकी शिक्षा के बावजूद, उन्हें राज्य में बेरोज़गारी के चलते उपले बनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
  • delhi high court
    भाषा
    अदालत ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 44 हजार बच्चों के दाख़िले पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा
    14 Feb 2022
    पीठ ने कहा, ‘‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम और पिछले वर्ष सीटों की संख्या, प्राप्त आवेदनों और दाखिलों की संख्या को लेकर एक संक्षिप्त और स्पष्ट जवाब दाखिल करें।’’ अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।
  • ashok gehlot
    भाषा
    रीट पर गतिरोध कायम, सरकार ने कहा ‘एसओजी पर विश्वास रखे विपक्ष’
    14 Feb 2022
    इस मुद्दे पर विधानसभा में हुई विशेष चर्चा पर सरकार के जवाब से असंतुष्ट मुख्य विपक्षी दल के विधायकों ने सदन में नारेबाजी व प्रदर्शन जारी रखा। ये विधायक तीन कार्यदिवसों से इसको लेकर सदन में प्रदर्शन कर…
  • ISRO
    भाषा
    इसरो का 2022 का पहला प्रक्षेपण: धरती पर नज़र रखने वाला उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित
    14 Feb 2022
    पीएसएलवी-सी 52 के जरिए धरती पर नजर रखने वाले उपग्रह ईओएस-04 और दो छोटे उपग्रहों को सोमवार को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया। इसरो ने इसे ‘‘अद्भुत उपलब्धि’’ बताया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License