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भारत
राजनीति
“उन्हें जेल में मत मारो” : वरवर राव के परिवार ने लगाई गुहार
रविवार सुबह बुलाई गई एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में, वरवर राव के परिवार के सदस्यों ने उनके स्वास्थ्य में आ रही ख़तरनाक गिरावट के बारे में बताया और कहा कि उन्हें किसी भी तरह का इलाज नहीं मिल रहा है।
पार्थ एमएन
13 Jul 2020
Translated by महेश कुमार
varavara rao in jail

11 जुलाई की शाम, जब वरवारा राव की पत्नी 72 वर्षीय हेमलता ने उनसे पूछा कि क्या वे ठीक हैं, तो उन्हे उस सवाल को समझने के लिए काफी जदोजहद करनी पड़ी। वरवर राव के भतीजे एन॰ वेणुगोपाल ने बताया कि जवाब देने के बजाय "वे अपने पिता के अंतिम संस्कार के बारे में बात करने लगे।" उनके पिता की मौत तब हो गई थी “जब वे मात्र तीन साल के थे। यह 75 साल पहले की बात है। वे अब मतिभ्रम में हैं।"

वर्तमान में 79 वर्षीय वरवारा राव मुंबई के बाहरी इलाके की तलोजा जेल में बंद हैं उन्हे विवादास्पद भीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तार किया गया है और वे 11 अन्य राजनीतिक कैदियों में से एक हैं। उन पर आरोप है कि वे प्रतिबंधित माओवादी संगठनों से जुड़े हुए हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रच रहे थे। आलोचकों का कहना है कि राव, एक प्रसिद्ध तेलुगु बुद्धिजीवी, कवि और प्रोफेसर हैं, और मौजूदा राजनीतिक सत्ता के आलोचक होने के कारण उन पर ज़ुल्म किया जा रहा हैं।

जेल में राव का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है। बेहद चिंतित, उनके परिवार ने 12 जुलाई की सुबह एक आभासी (वर्चुअल) प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई जिसमें उनके स्वास्थ्य से जुड़े कुछ विवरणों को सार्वजनिक किया गया।

वेणुगोपाल ने बताया कि जब 28 मई को राव को पहली बार मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब वे जेल में बेहोश हो गए थे। उन्होंने कहा, " कि वे तीन दिनों तक चिकित्सकों की देखरेख में रहे," उन्होंने दावा किया कि उन्हें 1 जून को बिना इलाज़ किए जल्द ही छुट्टी दे दी गई, ताकि "एनआईए और अभियोजन पक्ष अदालत में ये बता सकें कि वे छुट्टी के समय ठीक थे।"

अगले 41 दिनों तक राव जेल में रहे, परिवार के सदस्यों ने उनसे चार बार बात की और उन्होने उनके स्वास्थ्य में लगातार खतरनाक गिरावट का अनुभव किया। वेणुगोपाल ने कहा कि ये चार फोन कॉल 7 जून, 24 जून, 2 जुलाई और 11 जुलाई को की गई थी। पहली कॉल ठीक थी। "दूसरी कॉल में, उनकी आवाज कमजोर, बेमेल और भ्रमित थी।"

2 जुलाई को भी, राव ठीक से बात नहीं कर पा रहे थे। लेकिन 11 जुलाई को जब अंतिम कॉल की गई उसने पूरे परिवार के सदस्यों को हिला कर रख दिया।

अपने पिता के अंतिम संस्कार के बारे में बात करने के अलावा, उन्होंने एक बच्चे की तरह बात की, पावना ने बताया जो उनकी सबसे छोटी बेटी है। "मेरे पिता को पुरानी, ऐतिहासिक तारीखें याद हैं," उन्होंने कहा। “वह एक वक्ता, और एक सार्वजनिक वक्ता है। उन्हे शब्दों के साथ कभी कोई समस्या नहीं हुई। लेकिन आखिरी दो फोन कॉल में वे धाराप्रवाह नहीं बोल पा रहे थे। हर शब्द के बीच, एक अंतराल था। जब हमने पूछा कि वे कैसे है, तो वह एक बच्चे की तरह बोले 'मैं अच्छा हूँ, मैं अच्छा हूँ' और दोहराते  रहे। यह बहुत ही भयानक तजुरबा था।"

आंसू से भरे वेणुगोपाल ने अपील की कि, "उन्हे जेल में मत मारो। उनका दिमाग अस्थिर हो रहा है,'' इसके बाद राव की पत्नी हेमलता ने तेलुगु में प्रेस को संबोधित किया। वे प्रेस को संबोधित करते-करते बीच में ही रो पड़ी, उसके बाद फिर पावना ने प्रेस को संबोधित किया।

कॉल के समय, राव के साथ सह-अभियुक्त वर्नोन गोंजालेस, मानवाधिकार कार्यकर्ता, उनके साथ थे। वर्नोन ने परिवार के सदस्यों को सूचित किया कि राव "अपने दम पर चलने में असमर्थ हैं, अपने दम पर शौचालय जाने में असमर्थ हैं, अपने दम पर ब्रश करने में असमर्थ हैं।" कोई उनकी सहायता कर रहा है। ”वर्नन ने परिवार को आगे बताया कि राव जेल के अस्पताल में मतिभ्रम में थे, और कह रहे थे कि उसके परिवार के सदस्य गेट पर हैं उन्हे रिहा किया जा रहा है। पावना ने कहा, "हमने जब उनसे अस्पताल के अंदर इलाज के बारे में पूछा तो वर्नोन ने हमें बताया कि यहां कोई इलाज नहीं होता है।"

जबसे कोरोनावायरस का प्रकोप बढ़ा है, भीमा कोरेगांव मामले में बंद कैदियों के परिवार के सदस्य गिरते स्वास्थ्य की बिना पर जमानत की मांग कर रहे हैं। उनमें से राव, जो कई बीमारियों के शिकार है, अधिक अनिश्चित स्थिति में है।

महामारी के दौरान, जब जेलें अपनी पूरी क्षमता से भरी हो, तो कैदियों के लिए यह खतरनाक है। महाराष्ट्र में, जेलों में अत्यधिक भीड़भाड़ है और कोरोनोवायरस के प्रसार के लिए यह ज़मीन उपजाऊ है।

इसलिए, 23 मार्च को, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों से बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए जेलों में बंद भीड़ को कम करने के लिए कहा था। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने बाद में कैदियों की रिहाई के बारे में निर्णय लेने के लिए एक हाई पावर कमिटी (एचपीसी) बनाई थी।

हालांकि, 31 मई तक, महाराष्ट्र की 60 जेलों में 28,920 कैदी बंद थे। 19 जून के आंकड़ों के अनुसार, यह संख्या 28,950 है। दूसरे शब्दों में, जून के 20 दिनों में 30 कैदी बढ़े है। राज्य की सभी जेलों की कुल आधिकारिक क्षमता वास्तव में 24,030 है। महामारी के दौरान इसे सुरक्षित स्थान बनाने के लिए, जेलों के भीतर 16,000 कैदियों से अधिक नहीं होने चाहिए।

नवी मुंबई स्थित तलोजा सेंट्रल जेल में 31 मई को 2,186 कैदी थे। 19 जून को यह संख्या बढ़कर 2,313 हो गई थी। जबकि जेल की मूल क्षमता 2,134 है।

चूंकि जेलें महाराष्ट्र सरकार के अधीन हैं, इसलिए राव के परिवार ने राज्य से उचित चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करने की अपील की है। महा विकास अगाड़ी ने इस मामले में जेल में बंद लोगों के प्रति सहानुभूतिपूर्वक ब्यानबाजी की थी। एनसीपी के शरद पवार ने भी एसआईटी जांच के बारे में बात की थी, क्योंकि उनका मानना था कि पिछली भाजपा सरकार के तहत पुणे पुलिस ने इस मामले की जांच उचित ढंग से नहीं की थी।

वेणुगोपाल ने कहा कि परिवार को इसका तजुरबा है कि राव के खिलाफ हमेशा झूठे केस गढ़े जाते है, लेकिन वे हमेशा निर्दोष पाए जाते हैं। लेकिन तब उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता था।

तेलंगाना सरकार पर ध्यान केंद्रित करते हुए, परिवार के सदस्यों ने कहा कि मुख्यमंत्री के॰ चंद्रशेखर राव ने कोई जवाब नहीं दिया हैं। पावना ने कहा, "1960 के दशक के शुरू से, मेरे पिता तेलंगाना के संघर्ष में सबसे आगे रहे थे।" “हम अब राज्य के दर्जे का आनंद उठा रहे हैं। वे उन लोगों में से एक हैं जिन्होंने इसके लिए लड़ाई लड़ी थी। अब मुख्यमंत्री भी मेरी माँ के पत्र का जवाब नहीं देते हैं।]

आखिर में रुँधे गले के साथ, और एक कर्कश आवाज में, पावना ने कहा, "अगर सरकार की लापरवाही के कारण, वरवर राव जैसे कवि और बुद्धिजीवी जेल में मर जाते हैं, तो यह एक दयनीय हादसा होगा।"

मूल रूप से अंग्रेज़ी में प्रकाशित इस लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-

“Don’t Kill Him in Jail. His Brain is Getting Damaged,” says Varavara Rao’s Family

varavara rao
Bhima Koregaon Case
Sudha Bharadwaj
Vernon Gonsalves
gautam navlakha
UAPA

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