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पश्चिम बंगाल: ईंट-भट्ठा उद्योग के बंद होने से संकट का सामना कर रहे एक लाख से ज़्यादा श्रमिक
बशीरहाट के ईंट-भट्ठों को फिर से खोलने की अपनी मांग को लेकर बड़ी संख्या में भट्ठा मज़दूर मंगलवार को उत्तर 24 परगना ज़िला प्रशासन कार्यालय पहुंचे।
संदीप चक्रवर्ती
06 Nov 2021
brick workers
ईंट-भट्ठा मज़दूरों की रैली

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना के बशीरहाट इलाक़े के ईट-भट्ठा मालिकों ने त्योहारों के इस मौसम के दौरान सरकार की ओर से निर्धारित मानदंडों को दरकिनार करते हुए अपनी इकाइयों को बंद करने का ऐलान कर दिया, जिसके बाद से एक लाख से ज़्यादा ईंट-भट्ठे मज़दूर और उनके  आश्रित भारी मुसीबत में आ गये हैं।

इस ज़िले में इच्छामती नदी के किनारे 150 से ज़्यादा ईंट-भट्ठे हैं, जिनमें से हर एक में 350 से 400 से ज़्यादा लोग काम करते हैं। इन्हें बंद किये जाने के अचानक लिये गये इन फ़ैसलों के चलते सभी श्रमिकों और उनके परिवारों को इस समय भारी वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

राज्य के ईंट-भट्ठा मज़दूरों के आंदोलन में बहुत नज़दीक से भागीदारी कर रहीं सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU) की ज़िला सचिव, गार्गी चटर्जी ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि इस इलाक़े के श्रमिकों का बहुत शोषण किया गया है।

चटर्जी ने कहा, “श्रमिकों को मासिक वेतन के तौर पर 5,000 रुपये से लेकर 6,000 रुपये (यानी प्रति दिन 150 रुपये) मिल रहे थे, जो इस उद्योग से जुड़े राज्य सरकार की घोषित न्यूनतम मज़दूरी से काफ़ी कम है। उन्हें भविष्य निधि या कोई वैधानिक लाभ भी नहीं मिलता और ईंट-भट्ठा मालिक उन्हें बिना किसी संकोच के काम से बाहर भी कर देते हैं। ईंटों के मालिकों ने अब त्योहारों से पहले इस उद्योग के बंद होने के पीछे का बड़ा कारण उत्पाद के अतिरिक्त स्टॉक और ईंटों की बिक्री में आयी कमी को बताया है।”

चटर्जी आगे कहती हैं, "जबकि हक़ीक़त यह है कि कोरोना प्रकोप के चलते निर्माण उद्योग एक मुश्किल दौर में है, हालांकि, यह आरोप कि ईंटें नहीं बिक रही हैं, दरअस्ल मालिकों की ओर से उत्पाद का कृत्रिम संकट पैदा करके अपने फ़ायदे को बढ़ाने के लिए शुरू किया गया एक झूठा अभियान है।"

पहले राज्य सरकार राज्य में सड़कों के निर्माण के लिए ईंटों और पत्थरों के टुकड़े की ख़रीद करती थी। ये ख़रीद अब रुक गयी है, जिससे इस उद्योग के लिए और परेशानी हो रही है।

श्रमिकों के लिए भविष्य निधि सहित 8 दूसरे मांगों के साथ-साथ बशीरहाट अनुमंडल के ईंट-भट्ठों को फिर से खोले जाने की अपनी मांग को लेकर बड़ी संख्या में ईंट-भट्ठा श्रमिकों का प्रतिनिधिमंडल 2 नवंबर को उत्तर 24 परगना ज़िला प्रशासन कार्यालय पहुंचा।

ज़िले के ईंट-टाली-भाटा मज़दूर संघों की ओर से आयोजित उस रैली की शुरुआत कोलकाता के प्रमोद दासगुप्ता भवन से हुई। ईंट भट्ठों के एकतरफ़ा बंदी पर मज़दूरों ने रोष जताया और नारेबाज़ी की और इस बंदी को मज़दूर विरोधी बताया। यह रैली बशीरहाट घाट पर जाकर ख़त्म हुई, जहां यूनियनों की मांगों को सामने रखा गया।

यूनियनों ने यह मांग भी रखी कि ईंट-भट्ठा उद्योग में न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये तय किये जायें, राज्य के सभी ईंट-भट्ठा श्रमिकों का टीकाकरण किया जाये और राज्य प्रशासन क़ानून का पालन करने वाले ठेकेदारों को ही टेंडर दे।

चटर्जी ने इस रैली को सीटू के शंकर घोष और मिरकाशिम मुल्ला के साथ कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। चटर्जी ने बारासात के अनुविभागीय अधिकारी से राज्य में भाईफोंटा उत्सव के पूरा हो जाने के बाद इन ईंट-भट्टों को शुरू करने की ज़िम्मेदारी लेने का आह्वान किया। रैली के दौरान पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इस क्षेत्र के प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने गया और ज़िला प्रशासन के डिप्टी मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन भी सौंपा।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

WB: Over One Lakh Brickfield Workers and Their Dependents Face Crisis as Industry Closes

North 24 Paraganas
CITU
Brickfield workers
Exploitation
COVID-19
minimum wage
West Bengal

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