NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
ओंकारेश्वर बांध विस्थापतों का जल सत्याग्रह 7वें दिन भी जारी
नर्मदा नदी पर मध्यप्रदेश के खंडवा के मंधाता में निर्मित ओंकारेश्वर बांध को पूर्ण क्षमता तक भरने के विरोध में नर्मदा बचाओ आंदोलन की अगुवाई में विस्थापितों का जल सत्याग्रह 7वें दिन भी जारी। इस बीच एक डूब प्रभावित की बैक वाटर बढ़ने से डूबने से मौत हो गई।
राजु कुमार
31 Oct 2019
water satyagraha

नर्मदा नदी पर बने ओंकारेश्वर बांध को 193 मीटर से 196.6 मीटर तक भरा जा रहा है, जिससे कई गांव डूब में आ रहे हैं। ओंकारेश्वर बांध के बढ़ते पानी के कारण अपने घर में पानी भरता देख एखंड गांव के एक गरीब दलित विस्थापित दशरथ मजबूरन अपना घर तोड़ने लगा, ताकि कुछ लकड़ियां बचा सके। इस बीच एक लकड़ी पानी में बह गई, तो उसे पकड़ने के लिए वह आगे गया और गहरे पानी में डूब गया।

बिना समुचित पुनर्वास के ओंकारेश्वर बांध में 193 मीटर से ज्यादा पानी भरने के खिलाफ नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा कामनखेड़ा गांव में जल सत्याग्रह किया जा रहा है। इसमें नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेता आलोक अग्रवाल सहित 14 लोग पानी में रहते हुए महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर के सामने नर्मदा जल सत्याग्रह कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 21 अक्टूबर से एनएचडीसी द्वारा सरकार के आदेश से ओंकारेश्वर बांध का पानी 193 मीटर से आगे 196.6 मीटर तक भरा जा रहा है।

आलोक अग्रवाल का कहना है, ‘यह समझ से परे है कि बांध का पानी बिना पुनर्वास के क्यों भरा जा रहा है, जबकि इस साल अच्छी बारिश के कारण सिंचाई की समस्या भी नहीं है और न ही मध्यप्रदेश में बिजली का संकट है। यदि संपूर्ण पुनर्वास करके 3-4 महीने बाद भी बांध में पानी भरा जाता, तो कोई फर्क नहीं पड़ता। इससे पता चलता है कि सरकार विस्थापितों का समुचित पुनर्वास नहीं करना चाहती। अभी 2 हजार परिवारों का पुनर्वास बाकी है।’
22_0.JPG
जल सत्याग्रह के 6वें दिन दशरथ चैना की मृत्यु से लोगों विस्थापितों में आक्रोश है। नर्मदा बचाओ आंदोलन के अनुसार दशरथ चैना को सिर्फ उसके घर का मुआवजा मिला था एवं कोई पुनर्वास अनुदान या घर प्लाट नहीं मिला था। राज्य सरकार के आदेश दिनांक 7 जून 2013 के अनुसार इन्हें पुनर्वास हेतु पैकेज की पात्रता थी, लेकिन बार-बार मांगने पर भी यह पैकेज आज तक नहीं दिया गया है। वह इस पैकेज का इंतजार कर रहा था। लेकिन घर मे पानी भरने के कारण उसे मजबूरन अपना घर तोडना पड़ा।

आलोक अग्रवाल ने दशरथ चैना की मौत पर कहा कि बिना पुनर्वास डूब लाने के कारण यह घटना हुई है। सरकार निश्चित रूप से इसे बचा सकती थी। हम सरकार से मांग करते हैं कि स्व. दशरथ चैना के परिवार को रु 10 लाख की सहायता राशि दी जाए और सरकार तत्काल बांध का जल स्तर घटाकर 193 मीटर तक लाये और संपूर्ण पुनर्वास के बाद ही पानी भरा जाए।

मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी पर बनाए गए और बनाए जाने वाले बांधों से विस्थापित होने वालों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता नहीं दिखाई दे रही है। जब नर्मदा पर बने सरदार सरोवर बांध का पानी भरा जा रहा था और मध्यप्रदेश के गांव-परिवार डूब रहे थे, तब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रभातिवों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा था कि बिना पूर्ण पुनर्वास के बांधों में पानी नहीं भरा जाना चाहिए, लेकिन सरदार सरोवर बांध का गेट गुजरात में है, तो मध्यप्रदेश सरकार बांध का पानी भरने से नहीं रोक सकती। एक ओर सरकार इस तरह से संवेदनशीलता दिखाने का प्रयास कर रही थी, तो दूसरी ओर बिना संपूर्ण पुनर्वास के मध्यप्रदेश में बने ओंकारेश्वर बांध का पानी भर कर हजारों लोगों को विस्थापित किया जा रहा है। इससे यह लगता है कि वह संवेदनशीलता कम और राजनीति ज्यादा थी।

ओंकारेश्वर बांध पानी भरना शुरू होने के बाद से ग्राम घोघलगांव के एकमात्र रास्ता पानी में डूब गया है। देवास जिले के ग्राम कोथमीर, धाराजी, नयापुरा के अनेक आदिवासी परिवार और उनकी जमीने पानी से घिर गई हैं। पानी लगातार बढ़ाया जा रहा है।
1_17.jpg
ओम्कारेश्वर बांध प्रभावितों ने बांध में जल स्तर पूर्व के स्तर तक नहीं लाए जाने तक डूब में आ रहे कामनखेड़ा गांव में 25 अक्टूबर से जल सत्याग्रह शुरू किया है। उल्लेखनीय है कि ओंकारेश्वर बांध प्रभावितों की गत 12 साल की लड़ाई में 37 दिन के उपवास के साथ डूब ग्राम घोघलगांव में सन 2012 में 17 दिन और सन 2015 में 32 दिन का जल सत्याग्रह किया गया था।

ओंकारेश्वर बांध के प्रभावित पिछले 12 वर्षों से अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। 13 मार्च 2019 को सर्वोच्च न्यायालय ने ओंकारेश्वर बांध के प्रभावितों के पक्ष में निर्णय देते हुए राज्य सरकार के पूर्व में घोषित पैकेज पर 15 फीसदी वार्षिक ब्याज की बढ़ोतरी की थी, साथ ही प्रभावितों द्वारा जमा की गई राशि पर भी 15 फीसदी वार्षिक ब्याज देने का निर्णय लिया गया था।

इस आदेश के पालन में राज्य शासन द्वारा 31 जुलाई 2019 को विस्थापितों को पुनर्वास अधिकार देने का आदेश दिया था। अभी सैकड़ों प्रभावितों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार यह पैकेज दिया जाना बाकी है। अनेक आदिवासी परिवारों की घर-जमीन टापू बनने से इसका अधिग्रहण बाकी है। इसके साथ ही सैकड़ों प्रभावितों को घर प्लॉट एवं अन्य पुनर्वास की सुविधाएं दिया जाना भी बाकी हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने सन 2000, 2004, 2005 सन 2011 के अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि कोई भी डूब लाने के 6 माह पूर्व विस्थापितों का सभी दृष्टि से पुनर्वास पूरा होना जरूरी है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी माना है कि विस्थापितों का पुनर्वास भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीने के अधिकार) के अंतर्गत आता है। कानून स्पष्ट है इसलिए बिना पुनर्वास के पानी भरने की कार्रवाई को गैरकानूनी बताया जा रहा है।

ओंकारेश्वर बांध प्रभावितों के पुनर्वास में निम्न पुनर्वास अधिकार दिया जाना बाकी है:

-सैकड़ों प्रभावितों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश अनुसार पैकेज का वितरण।

-पुनर्वास नीति के अनुसार लगभग 500 परिवारों को घर प्लॉट का वितरण।

-देवास जिले के डूब में आ रहे सैकड़ों आदिवासी परिवारों के घर-जमीन के टापू बनने के कारण उसका अधिग्रहण किया जाना।

-लगभग 400 परिवारों को राज्य शासन के आदेश दिनांक 7 जून 2013 के अनुसार प्लॉट के एवज में धनराशि दिया जाना।

-राज्य शासन के आदेश दिनांक 7 जून 2013 के अनुसार जिन परिवारों का सिर्फ घर डूब में गया है उनको धनराशि दिया जाना।

-राज्य शासन के आदेश दिनांक 31 जुलाई 2019 के तहत भूमिहीन को पुनर्वास पैकेज।

-सर्वोच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 13 मार्च 2019 व राज्य शासन के आदेश दिनांक 31 जुलाई 2019 के तहत अतिरिक्त पैकेज प्राप्त करने वाले विस्थापितों को मिलने वाली राशि से खरीदी जाने वाली संपत्ति की रजिस्ट्री पर स्टाम्प ड्यूटी शुल्क की छूट।

-अनेक विस्थापितों को अन्य पुनर्वास की सुविधाएं।

Madhya Pradesh
Narmada River
Omkareshwar Dam
Water Satyagraha
Displaced people
Narmada Bachao Andolan
Narmada Development Department
Narmada challenge satyagraha

Related Stories

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

एमपी : ओबीसी चयनित शिक्षक कोटे के आधार पर नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे

मध्य प्रदेश : आशा ऊषा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन से पहले पुलिस ने किया यूनियन नेताओं को गिरफ़्तार

बाल विवाह विधेयक: ग़ैर-बराबरी जब एक आदर्श बन जाती है, क़ानून तब निरर्थक हो जाते हैं!

सामूहिक वन अधिकार देने पर MP सरकार ने की वादाख़िलाफ़ी, तो आदिवासियों ने ख़ुद तय की गांव की सीमा

कोरबा : रोज़गार की मांग को लेकर एक माह से भू-विस्थापितों का धरना जारी

मध्यप्रदेश में खाद की किल्लत: 11 अक्टूबर को प्रदेशभर में होगा किसान आंदोलन

भोपाल : लखीमपुर नरसंहार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन


बाकी खबरें

  • Assam
    संदीपन तालुकदार
    असम के दक्षिण-पश्चिमी जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद दयनीय – I
    13 Nov 2021
    भले ही महामारी हो या न हो, किंतु कर्मचारियों की भारी कमी, आवश्यक उपकरणों और बुनियादी व्यवस्था के अभाव और खराब कनेक्टिविटी ने स्वास्थ्य सेवाओं को दूर-दराज के इलाकों में रह रहे लोगों की पहुँच से बाहर…
  • The Human Cost of War
    न्यूज़क्लिक टीम
    जंग की इंसानी कीमत
    13 Nov 2021
    11 अक्टूबर 2021 को LOC के पास के इलाके में एन्टी-इंसर्जेंसी ऑपरेशन के दौरान पांच जवान शहीद हो गए। न्यूज़क्लिक की टीम मारे गए सैनिकों के परिवारों से मिलने के लिए पंजाब गई।
  • US China
    जोसेफ गेर्सन
    पेंटागन को चीनी ख़तरे के ख़्वाब से बाहर आने की ज़रूरत
    13 Nov 2021
    यह पल राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनके आजू-बाजू के लोगों पर इस बात का दबाव बनाने का है कि वे ‘पहले परमाणु हमला न करने के सिद्धांत’ को अपनाएं। वहीं, कांग्रेस के लिए यह क्षण भूमि-आधारित आइसीबीएम और अन्य…
  • Kangana Ranaut
    राजेंद्र शर्मा
    नया इंडिया आला रे!
    13 Nov 2021
    अब तो आजादी की भी नयी डेट आ चुकी है। संविधान की नयी डेट तो पहले ही आ चुकी थी। संसद की तो नयी डेट क्या, पूरी की पूरी इमारत ही नयी बन रही है।
  • Mahapanchayat
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    किसान आंदोलन: 14 नवंबर को पूरनपुर में लखीमपुर न्याय महापंचायत
    13 Nov 2021
    एसकेएम ने दावा किया है कि लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड में घायलों को वायदा किए गए मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया है। 4 अक्टूबर 2021 को यूपी सरकार ने प्रत्येक घायल किसान को दस लाख रुपये के मुआवजे को…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License