NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
समाज
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
वाराणसी के घाटों पर हो रहे हैं रोज़ 100 से ज़्यादा शवदाह : श्मशान के कर्मचारी
रिश्तेदार कोविड से होने वाली मौतों के लिए ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, बेड की कमी को ज़िम्मेदार मानते हैं।
अब्दुल अलीम जाफ़री
20 Apr 2021
Varanasi
प्रतीकात्मक तस्वीर

लखनऊ: योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी (उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार) की तरफ़ से अस्पतालों में ऑक्सीजन की सुविधा के साथ-साथ बेड की पर्याप्त व्यवस्था के लम्बे-चौड़े दावों की कलई शनिवार को उस समय खुल गयी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र, वाराणसी में बेड की कमी के चलते दो गंभीर कोविड-19 पॉजिटिव मरीजों की जान चली गयी।

अनीता गौड़ नाम की महिला ने अपने पिता को भर्ती कराने के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल और पंडित दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल, दोनों ही सरकारी अस्पतालों के कई चक्कर लगाये, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ। अपने पिता की कोविड-19 रिपोर्ट का इंतजार कर रही अनीता ने कहा, “अगर समय पर ऑक्सीजन दी जाती, तो मेरे पिता को बचाया जा सकता था। यह पूरी तरह से सरकार की ग़लती है।”

वाराणसी से 65 किलोमीटर दूर जौनपुर ज़िले के रोहनिया गांव की मूल निवासी अनीता ने अपने बीमार पिता के साथ ऑक्सीजन की तलाश में अकेले ही यहां तक का सफ़र तय किया था। एड़ी-चोटी की कोशिश करने के बावजूद उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिल पायी थी, जिससे उनके पिता की मौत हो गयी।

परेशान अनीता ने न्यूज़क्लिक से कहा कि अस्पतालों में हताश रोगियों के कॉल के जवाब नहीं दिये जाते हैं। उन्होंने आगे बताया, "मैं इन हालात से दो-चार होने वाली अकेली नहीं हूं, मेरे पिता की तरह कई और ऐसे मरीज़ हैं, जो ऑक्सीजन, बेड, वेंटिलेटर या एम्बुलेंस की कमी के कारण अपनी आखिरी सांसें गिन रहे हैं। हम एक ध्वस्त हो चुकी व्यवस्था का शिकार हो गये हैं।" अगर यूपी सरकार उन लोगों को उस ऑक्सीजन सिलेंडर की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित कर दे, जिनकी सख़्त ज़रूरत है, तो कई लोगों की जान बचायी जा सकती है।

वाराणसी के रमाकांत नगर के एक दूसरे परिवार का अनुभव भी ऐसा ही रहा, जब उन्हें शहर के कई अस्पतालों में चक्कर लगाने के बावजूद वेंटिलेटर नहीं मिला, तो उस परिवार ने अपना एक परिजन खो दिया। उन्हें तीव्र हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी) हो गयी और कई अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

मृतक की पत्नी, सविता ने अस्पताल के बेड खोजने में हुई अपनी ज़बरदस्त परेशानी पर बात करते हुए कहा, “मेरे पति की कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट 10 अप्रैल को आयी थी, अगले दिन उनका ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल 90 था। हमने पहले उनके ऑक्सीजन लेवल की निगरानी के लिए कोविड कंट्रोल रूम को फ़ोन लगाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। हमने एक और नंबर पर फ़ोन किया, लेकिन बताया गया कि बेड उपलब्ध नहीं है। हमें पता चला कि रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम लक्सा में बेड तो उपलब्ध हैं, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए हमें एम्बुलेंस नहीं मिली।

परिवार की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। किसी तरह, वह वहां पहुंचने में कामयाब तो रहीं, लेकिन वेंटिलेटर की कमी के चलते इलाज से इनकार कर दिया गया। उनकी आख़िरी उम्मीद अब बीएचयू का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल था, लेकिन फिर से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा और उनका कहना था कि वहां से वह अपने पति को दीनदयाल अस्पताल ले गयीं, जहां रास्ते में ही उनके पति की मौत हो गयी।

बीएचयू छात्र की मौत

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में 14 अप्रैल को 29 वर्षीय कोविड-19 पॉजिटिव रिसर्च स्कॉलर, अभय जायसवाल की मौत ने उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया है। उनके परिवार का कहना है कि वेंटिलेटर और ज़रूरी दवाएं नहीं मिल पाने से उनकी मृत्यु हो गयी।

अभय ने अपने माता-पिता को बहुत पहले ही खो दिया था। वह आईआईटी दिल्ली से विज्ञान में स्नातक थे और भौतिकी में शोध कर रहे थे। अभय के दोस्त ने न्यूज़क्लिक को बताया, “अभय एक मधावी छात्र था। हाल ही में वह अपने प्रोजेक्ट को पूरा करने के बाद पेरिस से लौटा था। तबीयत बिगड़ने के बाद उसे बीएचयू के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया था। अगले ही दिन वह पोज़िटिव निकला था।”

छात्रों का आरोप है कि उनकी हालत बिगड़नी शुरू हुई और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट की ज़रूरत पड़ी, इसके बावजूद उसे ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ नहीं रखा गया। एक छात्र का कहना था, “बीएचयू या दीनदयाल अस्पताल में एक भी वेंटिलेटर ख़ाली नहीं था। नौजवान होने के नाते अगर अभय को वेंटिलेटर सपोर्ट मिल जाता, तो वह बच सकता था, लेकिन वेंटिलेटर उपलब्ध ही नहीं था।”

प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र के एक जाने-माने सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की कमी के चलते होने वाली इन तीन मौतों की घटना ने योगी आदित्यनाथ सरकार की तरफ़ से किये जा रहे उस लंबे-चौड़े दावों के झूठ से पर्दा उठा दिया है, जिसके मुताबिक़ राज्य भर के सभी अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति है।

इस बीच, वाराणसी के मानवाधिकार कार्यकर्ता, लेनिन रघुवंशी ने कहा कि वाराणसी में हालात हर बीतते दिन के साथ ख़राब होते जा रहे हैं। लेनिन ने बताया, “अस्पताल न सिर्फ़ बेड और ऑक्सीजन की आपूर्ति की कमी के कारण रोगियों के दाखिले से इनकार कर रहे हैं, बल्कि लोगों को सड़कों पर मरने के लिए छोड़ दे रहे हैं। इससे सरकार के उस लंबे-चौड़े दावों की पोल खुल गयी है कि संकट से निपटने के लिए चिकित्सा बुनियादी ढांचा बनाया गया है और सरकारी अस्पतालों में गंभीर कोविड पोज़िटिव रोगियों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जा रही है।"

मौत छुपाती यूपी सरकार ?

उत्तर प्रदेश के मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र श्मशान और क़ब्रग़ाहों में लाशों का अंबार लगा हुआ हैं, जो इस बात का संकेत है कि कोविड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार की तरफ़ से जारी आधिकारिक दैनिक मृत्यु और ज़मीनी हकीकत के बीच एक अस्पष्ट फ़ासला है।

उत्तर प्रदेश सरकार के कोविड-19 बुलेटिन में वाराणसी में शनिवार को आठ मौतों की सूचना दी गयी, जबकि वास्तविक संख्या प्रशासन की तरफ़ से जारी मौत की सूची के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा है।

हरिश्चंद्र घाट के एक श्मशान कर्मचारी, जीतन रवि के मुताबिक़, यहां सिर्फ़ दो इलेक्ट्रिक भट्ठियां हैं और लकड़ी से शवदाह के लिए तीन चबूतरे हैं और शवों की बड़ी संख्या में होने से प्रबंधन यहां पूरी तरह से विफल हो गया है।

जीतन ने न्यूज़क्लिक को बताया कि दोनों घाटों में शवों का अंबार लगा हुआ है। वह आगे बताते हैं, “कोरोना से पहले, इन घाटों पर तक़रीबन 40-50 शवों का अंतिम संस्कार किया जाता था। लेकिन, कोविड मामलों में अचानक आयी तेज़ी के बाद हम रोज़ाना 100-150 लाशों का शवदाह कर रहे हैं। ज़्यादातर शव कोरोना पॉजिटिव हैं। ” यहां कोई भी आकर ख़ुद ही देख सकता है कि कोई जगह बची नहीं है।

नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर एक अन्य घाट कर्मचारी ने आरोप लगाया कि वाराणसी की स्थिति लखनऊ की तुलना में ख़राब है, लेकिन मामले दर्ज नहीं किये जा रहे हैं। वह आगे बताते हैं, "मुझे पता चला है कि वाराणसी में प्रशासन शुक्रवार से ही मौत की संख्या को एक-अंकों में बता रहा है, जबकि हक़ीक़त यह है कि हम हर दिन 100 से ज़्यादा शवों की चिता सजाते हैं।"

कोविड की वजह से मरने वालों के परिवार के सदस्यों को घाटों पर क़तार लगते देखा जा रहा है। उन्होंने ज़िला प्रशासन पर इस संकट के समय में भी उनसे ज़्यादा पैसे वसूलने का आरोप लगाया।

ग़ाज़ीपुर का एक परिवार, जो रविवार की सुबह अपने चाचा का शव घाट पर लाया था, उसने संवाददाताओं से कहा, “हमारे चाचा की शनिवार को मौत हो गयी और हमने दाह संस्कार के लिए 20, 000 रुपये का भुगतान किया, क्योंकि हमारे पास कोई विकल्प ही नहीं था।" उस परिवार के एक सदस्य, रामू ने न्यूज़क्लिक को बताया कि उनके चाचा बूढ़े थे और उन्हें सांस लेने में तकलीफ़ थी और ऑक्सीजन की कमी के चलते उनकी मौत हो गयी। रामू ने बताया, "उनकी मृत्यु के छह दिन बाद भी हमें कोविड रिपोर्ट नहीं मिली। वाराणसी में तैयारी का स्तर तो यही है।"

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/We-are-Handling-100-Bodies-Daily-Varanasi-Ghats-Crematorium-Staff

 

varanasi
COVID-19
Coronavirus
COVID Deaths
Yogi Adityanath

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • Forests of Doodhpathri area
    राजा मुज़फ़्फ़र भट
    सरकार जम्मू और कश्मीर में एक निरस्त हो चुके क़ानून के तहत क्यों कर रही है ज़मीन का अधिग्रहण?
    08 Oct 2021
    जम्मू और कश्मीर को अपना विशेष संवैधानिक और राज्य का दर्जा छिन जाने के तक़रीबन दो साल बाद भी यहां के नागरिकों की ज़मीन का अधिग्रहण उन क़ानूनों के तहत आज भी हो रहा है, जो निरस्त हो चुके हैं। डॉ राजा…
  • coal
    अजय कुमार
    क्या भारत में कोयले की वाकई किल्लत है या कोई और बात है?
    08 Oct 2021
    भारत के अधिकतर थर्मल पावर प्लांट में इस्तेमाल होने वाला कोयला महज 4 दिन के लिए बचा है। इस ख़बर के पीछे की असली मंशा क्या है?
  • kisan
    विजय विनीत
    किसानों की चंपारण से बनारस यात्रा ने बढ़ाई भाजपा सरकार की बेचैनी
    08 Oct 2021
    सवाल कभी नहीं मरते। जवाब मिलने तक वह जिंदा रहते हैं। किसान सत्याग्रह पदयात्रा ने जो सवाल खड़े किए हैं वह मोदी-योगी का पीछा कतई नहीं छोड़ेंगे। किसानों के बीच कुछ वैसा ही संदेश पहुंच रहा है जैसा…
  • teacher
    रवि कौशल
    दिल्ली : याचिका का दावा- स्कूलों से अनुपस्थित हैं 40,000 शिक्षक, कोविड संबंधी ज़िम्मेदारियों में किया गया नियुक्त
    08 Oct 2021
    याचिका जाने-माने आरटीई कार्यकर्ता और वरिष्ठ वकील अशोक अग्रवाल के ज़रिए लगाई गई है। याचिका में दावा किया गया है कि शिक्षण निदेशालय में पदस्थ 57,000 शिक्षकों में से 70 फ़ीसदी स्कूली सेवाओं के लिए…
  • bhasha
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर: मोदीजी, राजनीति की धुरी हैं किसान
    07 Oct 2021
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने लखीमपुर खीरी में हुई आठ नागरिकों की मौत पर योगी-मोदी सरकारों की चुप्पी, किसी की गिरफ़्तारी न होने पर सवाल उठाया और दिल्ली दंगों की सुनवाई कर रहे जज के तबादले…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License