NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
“हम आदिवासी हैं, सनातनी नहीं; मंदिर निर्माण में सरना की मिट्टी ले जाना नहीं है स्वीकार”
झारखंड में आदिवासी सरना स्थलों की मिट्टी और नदियों का पानी राम मंदिर के निर्माण के लिए अयोध्या ले जाने की संघ-भाजपा और उससे जुड़े संगठनों की कोशिशों का पुरज़ोर विरोध हो रहा है।  
अनिल अंशुमन
27 Jul 2020
 आदिवासी

झारखंड प्रदेश के व्यापक आदिवासी संगठन इनदिनों एकबार फिर से भाजपा व संघ परिवार के हिंदूवादी संगठनों के खिलाफ ज़ोरदार आक्रोश प्रकट कर रहें हैं। राजधानी रांची समेत कई आदिवासी इलाकों में भाजपा के जुड़े सभी आदिवासी नेताओं व कार्यकर्ताओं के पुतले भी फूंके जा रहें हैं। तो कई स्थानों पर इनके खिलाफ सामाजिक बहिष्कार की भी तैयारी हो रही है। उक्त सभी कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापक ऐलान किया जा रहा है कि आदिवासयों की अपनी स्वतंत्र धार्मिक अस्मिता और परम्परा पर कोई भी अतिक्रमण अथवा हमला नहीं बर्दाश्त किया जाएगा। आदिवासियों के इस चौतरफा विरोध का मुख्य मुद्दा है आगामी 5 अगस्त से अयोध्या में शुरू होनेवाले राममंदिर निर्माण में झारखंड के आदिवसियों के सभी सरना स्थलों से मिट्टी और नदियों का पानी ले जाने की घोषणा किया जाना।

प्रदेश भाजपा व संघ परिवार के कतिपय हिंदूवादी संगठनों और विश्व हिन्दू परिषद् प्रवक्ताओं ने मंदिर निर्माण कार्य शुरू किये जाने की घोषणा के तत्काल बाद ही ऐलान कर दिया कि झारखंड के सभी आदिवासी सरना स्थलों की मिट्टी और नदियों का पानी राम मंदिर निर्माण में लगाने के लिए अयोध्या ले जाया जाएगा । जिसके लिए कुछेक स्थलों पर सरना स्थलों की मिट्टी एकत्र करने का काम शुरू भी कर दिया गया। उक्त मामले के प्रकाश में आते ही प्रदेश के सभी आदिवासी समुदायों के पाहन, राजी पड़हा प्रार्थना सभा, कई केन्द्रीय सरना समितियों के साथ साथ मुंडा महासभा, हो महासभा तथा उराँव सामाजिक संगठनों के लोग आक्रोशित हो उठे हैं।

सभी एक स्वर से इसे आदिवासी समाज की स्वतंत्र अस्मिता और परम्परा पर हमला करार देते हुए मंदिर–निर्माण में सरना की मिट्टी ले जाने का तीखा विरोध प्रकट कर रहें हैं। प्रायः हर दिन ही जगह जगह आयोजित की जा रही सामाजिक बैठकों से आदिवासी संगठनों के प्रवक्ताओं, सामाजिक एक्टिविस्ट तथा बुद्धिजीवियों द्वारा बयान जारी करते हुए यह चेतावनी दी जा रही है कि उनके सरना स्थलों से मिट्टी का एक ढेला भी नहीं उठाया जाए। इसके बावजूद कोई ऐसा करेगा तो उसपर कानूनी कार्रवाई के साथ साथ सपरिवार सामाजिक बहिष्कार भी किया जाएगा।

adiwasi wirodh 4.jpg

बढ़ते विरोध का आलम यह है कि अब तक जिन चंद सरना स्थलों से मिट्टी ली गयी है उसका अविलम्ब शुद्धिकरण करने की भी घोषणा की जा चुकी है।     

आदिवासी समाज के नेताओं ने स्पष्ट तौर पर यह भी कहा है कि – अन्य समुदायों के लोग अपने अधिकृत क्षेत्रों में मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारा कुछ का भी निर्माण करें तो हमें कभी कोई आपत्ति नहीं रही है। लेकिन आज राम मंदिर निर्माण के लिए हमारे सरना देशाउली की पवित्र मिट्टी जबरन ले जाना, एक बड़ी राजनीतिक साज़िश है। यह जानते हुए कि हम आदिवासी हमेशा से सरना अर्थात प्रकृति के पुजारी रहें हैं और हिन्दू धर्म और अयोध्या से हमारा कोई सम्बन्ध नहीं है। खुद देश के सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि आदिवासी समाज हिन्दू धर्म का अंग नहीं है। तब भी संघ परिवार – विहिप द्वारा हमारे सरना स्थलों से मिट्टी ले जाना दरअसल, आदिवासी समाज को सनातनी घोषित करने की इनकी बरसों से जारी षड्यंत्र का ही परिचायक है। आदिवासी अधिकार मोर्चा के संयोजक तथा रांची विश्वविद्यालय के पीजी  एन्थ्रोपोलोजी के विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ समाजशात्री प्रोफ़ेसर रहे डाक्टर करमा उराँव ने भाजपा व हिंदूवादी संगठनों को आगाह करते हुए कहा है आदिवासियों की धार्मिक स्वतन्त्रता में दखल देना तथा सरना को सनातनी कहना फ़ौरन बंद करे।

दूसरी ओर, आदिवासी सेना समेत कई युवा आदिवासी संगठनों ने सरना से मिट्टी ले जाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की भी चेतावनी जारी कर दी है ।बेदिया समाज के युवा आदिवासी चिन्तक सुरेन्द्र कुमार बेदिया ने सोशल मीडिया में बाजाब्ता पोस्ट लगाकर आदिवासी समाज को आगाह किया है कि –मंदिर निर्माण में सरना की मिट्टी ले जाने का एकमात्र यही लक्ष्य है कि किसी भी तरह आदिवासी समाज को हिन्दू धर्म के मातहत करो। जबकि आज तक का हमारा भोगा हुआ यथार्थ यही बताता है कि अबतक का हमारा सबसे बड़ा शत्रु अगर कोई है तो वह है भाजपा–आरएसएस–विश्व हिन्दू परिषद है, जिन्होंने वर्षों से हमारे जंगल ज़मीन और प्राकृतिक– खनिज संसाधनों पर कब्जा कर रखा है। खुद सर संघचालक तक ने कई मौकों पर यह खुलकर कहा है कि आदिवासी क्षेत्र को लोगों को अधिक  से अधिक की संख्या में लाना है।

ADIWASI WIRODH 01.PNG

ख़बरों के अनुसार 24 जुलाई को राजधानी रांची के बिरसा चौक स्थित बिरसा मुंडा स्मारक स्थल और मोरहाबादी स्थित गाँधी स्मारक के पास पूर्व भाजपा विधायक गंगोत्री कुजुर और रांची की मेयर आशा लकड़ा समेत उन सभी आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं के पुतले फूंके गए जिन्होंने सरना की मिट्टी उठायी है। वहीं धुर्वा थाना में इन सबों के खिलाफ सरना से मिट्टी चोरी आरोप लगाकर मुकदमा भी दर्ज किया गया है। 

27 जुलाई को रांची स्थित बरियातू तेतर टोली में सभी प्रतिनिधि आदिवासी संगठनों की ओर से पंचायत बिठाकर–सरना स्थाल से मिट्टी का एक ढेला तक नहीं उठाने देने की घोषणा की गयी। आदिवासी संगठनों ने यह भी ऐलान किया है कि इस बार 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर ‘ट्राइबल कॉलम’ की मांग व्यापक स्तर पर उठायी जायेगी। साथ ही आदिवासियों की स्वतंत्र धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान मिटाने की साजिशों के खिलाफ उसी भाषा में जवाब देने का अभियान शुरू किया जाएगा।  

सोशल मीडिया में तो यह भी कॉमेंट खूब वायरल किया जा रहा है कि –कोरोना महाआपदा काल की विपत्ति में भी लोगों के इलाज़ के लिए अस्पताल बनाना छोड़, मंदिर निर्माण की शुरुआत खुद प्रधान मंत्री द्वारा किया जाना धार्मिक फासीवाद है!

Jharkhand
aadiwasi
Sanatan
Tribal organization
Ram Mandir
ayodhya
RSS
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • SFI PROTEST
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई
    09 Feb 2022
    दिल्ली विश्वविद्यालय को फिर से खोलने के लिए SFI ने प्रदर्शन किया, इस दौरान छात्रों ने ऑनलाइन कक्षाओं का विरोध किया। साथ ही सड़क पर कक्षा लगाकर प्रशासन को चुनौत दी।
  • PTI
    समीना खान
    चुनावी घोषणापत्र: न जनता गंभीरता से लेती है, न राजनीतिक पार्टियां
    09 Feb 2022
    घोषणापत्र सत्ताधारी पार्टी का प्रश्नपत्र होता है और सत्ताकाल उसका परीक्षाकाल। इस दस्तावेज़ के ज़रिए पार्टी अपनी ओर से जनता को दी जाने वाली सुविधाओं का जिक्र करती है और जनता उनके आधार पर चुनाव करती है।…
  • हर्षवर्धन
    जन्मदिन विशेष : क्रांतिकारी शिव वर्मा की कहानी
    09 Feb 2022
    शिव वर्मा के माध्यम से ही आज हम भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुखदेव, राजगुरु, भगवती चरण वोहरा, जतिन दास और महाबीर सिंह आदि की कमानियों से परिचित हुए हैं। यह लेख उस लेखक की एक छोटी सी कहानी है जिसके बारे…
  • budget
    संतोष वर्मा, अनिशा अनुस्तूपा
    ग्रामीण विकास का बजट क्या उम्मीदों पर खरा उतरेगा?
    09 Feb 2022
    कोविड-19 महामारी से पैदा हुए ग्रामीण संकट को कम करने के लिए ख़र्च में वृद्धि होनी चाहिए थी, लेकिन महामारी के बाद के बजट में प्रचलित प्रवृत्ति इस अपेक्षा के मामले में खरा नहीं उतरती है
  • Election
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः प्रचार और भाषणों में स्थानीय मुद्दों को नहीं मिल रही जगह, भाजपा वोटर भी नाराज़
    09 Feb 2022
    ऐसे बहुत से स्थानीय मुद्दे हैं जिनको लेकर लोग नाराज हैं इनमें चाहे रोजगार की कमी का मामला हो, उद्योग की अनदेखी करने का या सड़क, बिजली, पानी, महिला सुरक्षा, शिक्षा का मामला हो। इन मुद्दों पर चर्चा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License