NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
भारत
राजनीति
पश्चिम बंगाल: आलू की कीमत में भारी गिरावट, किसानों ने मांगा समर्थन मूल्य
राज्य में आलू की खेती करने वाले किसानों को उनकी पैदावार के औने-पौने दाम मिल रहे हैं। आलू की एक बोरी (50 किलोग्राम) महज 260 रुपये में बिक रही है।
संदीप चक्रवर्ती
14 Sep 2021
पश्चिम बंगाल: आलू की कीमत में भारी गिरावट, किसानों ने मांगा समर्थन मूल्य

पश्चिम बंगाल में आलू उत्पादक किसानों को उनकी पैदावार की बहुत कम कीमत मिल रही है। 50 किलो आलू की एक बोरी के दाम महज 260 रुपये ही मिल रहे हैं। अभी तक सरकार की तरफ से आलू पर कोई समर्थन मूल्य भी नहीं दिया गया है।
 
कोल्ड स्टोरेज पर एक किलो आलू की कीमत महज 5.20 रुपये है, जबकि खुले बाजार में इसकी कीमत 14-15 रुपये प्रति किलो है। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से उत्पादन की लागत बढ़ती ही जा रही है।
 
पूर्वी वर्धमान जिले के मेमारी गांव के एक आलू उत्पादक किसान बिस्वरूप मंडल ने न्यूज क्लिक से कहा कि एक बीघे में आलू की खेती करने पर 32,000 रुपये का खर्चा आता है जबकि बंगाल में मौजूदा कीमत पर आलू बेचने से किसानों को हरेक बीघे पर महज 20,800 रुपये ही मिलते हैं, जिससे उन्हें 11,200 रुपये का सीधा-सीधा नुकसान हो रहा है।
 
इस हिसाब से, पांच बीघे में आलू की खेती करने वाले किसानों को 56,000 रुपये का नुकसान हो रहा है, जबकि उनको सरकार से 2,500 रुपये ही क्षतिपूर्ति के रूप में मिलते हैं। इस राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में फसलों के हिसाब से अंतर होता है।
 
उदाहरण के लिए, किसानों से वादा किया गया है कि अमन किस्म के चावल की खेती करने पर 66,000 रुपये समर्थन मूल्य दिया जाएगा, लेकिन वे एमएसपी के बिना ही, खुले बाजार में बेचने पर विवश हो रहे हैं, जहां उन्हें 28,000 रुपये ही मिल रहे हैं। इस तरह, उन्हें प्रति एकड़ 38,000 रुपये का नुकसान उठाना पड़ा रहा है। आलू एवं अमन चावल उपजाने वाले किसानों को इस समय सालाना औसतन 1,29,000 रुपये का नुकसान हो रहा है।
 
यहां स्मरण किया जा सकता है कि प्रदेश की मौजूदा तृणमूल कांग्रेस सरकार, पूर्ववर्ती वाममोर्चा सरकार की तरह आलू पर एमएसपी नहीं देती है। यहां तक कि फसल नुकसान पर उसकी तरफ से प्रति बीघे 500 रुपये के हिसाब से दी जाने वाली क्षतिपूर्ति राशि भी बहुत कम है। किसानों का कहना है कि अगर वे 5 रुपये प्रतिकिलो के भाव से अपने आलू बेचते हैं तो प्रति बीघे के 25,000 रुपये का घाटा हो रहा है।
 
सरकार से समर्थन मूल्य के अभाव में, किसानों के लिए चीजें काफी कठिन हो गई हैं, क्योंकि आलू उत्पादकों को बिना एमएसपी की गारंटी के साथ महज 5,000 रुपये ही मिल रहे हैं।
 
बोरो चावल (रबी सीजन में होने वाले धान की एक किस्म, जिसे नकदी फसल माना जाता है) उत्पादक किसानों का भी बुरा हाल है, क्योंकि वे अपने पैदावार की बिक्री न होने और दाम घटने के चलते हुए घाटे से उबर ही नहीं पा रहे हैं।
 
बर्द्धवान जिले के ऑल इंडिया किसान सभा (एआइकेएस) के सचिव सैयद हुसैन कहते हैं “यही वजह है कि किसान सरकार से मांग कर रहे हैं कि बोरो फसल पर भी समर्थन मूल्य दिया जाना चाहिए”
 
कुछ आलू उत्पादक किसानों ने याद कर बताया कि 2010 में इसके दाम औंधे मुंह गिरने पर तात्कालीन वाममोर्चा सरकार ने किसानों से उनके आलू खरीद लिए थे और राहत मद में 700 करोड़ रुपये तक खर्च कर डाले थे। इसलिए, ये किसान मांग कर रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस सरकार को भी फसलों की बीमा की प्रीमियम राशि का भुगतान करना चाहिए।
 
बंगाल में आलू के बाजार भाव में गिरावट आती रहती है और प्रायः किसानों को अपने पैदावार मजबूरन 1 से 2 रुपये प्रति किलो के दाम से बेचना पड़ता है, जिसे बिचौलिए खरीदते हैं और उन्हें कोल्ड स्टोरेज में जमा कर देते हैं। जब आलू की किल्लत होने पर बाजार चढ़ता है तो वे इसे बेच कर अकूत मुनाफा कमाते हैं।
 
बाजार में आलू तीन तरीके से पहुंचते हैं। उत्पादन का एक हिस्सा तो किसान स्वयं ही अपने पास रखते हैं, बिचौलियों का भी एक हिस्सा होता है (जो अभी 260 से 280 रुपये में आलू की एक बोरी खरीद रहे हैं), और बाकी आलू कोल्ड स्टोरेज के मालिक ( वे किसानों से 300 रुपये प्रति बोरी खरीद कर) अपने यहां जमा कर लेते हैं।
 
कोल्ड स्टोरेज के मालिक जब देख लेते हैं कि बाजार से नए आलू का स्टॉक खत्म हो गया है, जिसके बाद दाम भी बढ़ गया है, तो वे अपने जमा किए आलू थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बाजार में भेजते हैं और इस तरह से मुनाफा कमाते हैं। यही वजह है कि किसान मांग कर रहे हैं कि प्रति बोरी आलू की न्यूनतम कीमत 600 रुपये तो अवश्य ही होनी चाहिए क्योंकि लागत बढ़ते जाने से पहली दर से किसानों को उनके उत्पादन की लागत की भरपाई तक नहीं हो रही है। पश्चिम बंगाल देश में उत्तर प्रदेश के बाद दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक प्रदेश है।
 
हुगली जिला तो आलू उत्पादन का एक हब ही है, जहां राज्य के कुल उत्पादन का 40 फीसद आलू यहीं होता है। यह इलाका उच्च-गुणवत्ता वाली चंद्रमुखी किस्म के आलू के लिए जाना जाता है। हुगली के 60,000 किसानों की आजीविका आलू की खेती पर ही निर्भर है। वर्धवान जिले में, किसानों का एक बड़ा हिस्सा धान की खेती के बाद मुख्य रूप से आलू की खेती पर निर्भर है।
 
अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित इस लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

West Bengal: Farmers Demand MSP as Potato Prices hit Rock Bottom

bengal
rice
prices
Crop Pricers
farmers
AIKS
Left Front
TMC
farmer suicide
Paddy

Related Stories

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

MSP पर लड़ने के सिवा किसानों के पास रास्ता ही क्या है?

यूपी चुनाव : किसानों ने कहा- आय दोगुनी क्या होती, लागत तक नहीं निकल पा रही

उत्तर प्रदेश चुनाव : डबल इंजन की सरकार में एमएसपी से सबसे ज़्यादा वंचित हैं किसान

उप्र चुनाव: उर्वरकों की कमी, एमएसपी पर 'खोखला' वादा घटा सकता है भाजपा का जनाधार

कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा

केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान

ख़बर भी-नज़र भी: किसानों ने कहा- गो बैक मोदी!

ऐतिहासिक किसान विरोध में महिला किसानों की भागीदारी और भारत में महिलाओं का सवाल


बाकी खबरें

  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश में क्यों पनपती है सांप्रदायिक राजनीति
    24 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले वहां सांप्रदायिक राजनीति की शुरुआत फिर से हो गयी है। सवाल यह है कि उप्र में नफ़रत फैलाना इतना आसान क्यों है? इसके पीछे छिपी है देश में पिछले दस सालों से बढ़ती बेरोज़गारी
  • night curfew
    रवि शंकर दुबे
    योगी जी ने नाइट कर्फ़्यू तो लगा दिया, लेकिन रैलियों में इकट्ठा हो रही भीड़ का क्या?
    24 Dec 2021
    देश में कोरोना महामारी फिर से पैर पसार रही है, ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों ने राज्यों को नाइट कर्फ़्यू लगाने पर मजबूर कर दिया है, जिसके मद्देनज़र तमाम पाबंदिया भी लगा दी गई है, लेकिन सवाल यह है कि रैलियों…
  • kafeel khan
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोरखपुर ऑक्सिजन कांड का खुलासा करती डॉ. कफ़ील ख़ान की किताब
    24 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के इस वीडियो में वरिष्ठ पत्रकार परंजोय गुहा ठाकुरता डॉ कफ़ील ख़ान की नई किताब ‘The Gorakhpur Hospital Tragedy, A Doctor's Memoir of a Deadly Medical Crisis’ पर उनसे बात कर रहे हैं। कफ़ील…
  • KHURRAM
    अनीस ज़रगर
    मानवाधिकार संगठनों ने कश्मीरी एक्टिविस्ट ख़ुर्रम परवेज़ की तत्काल रिहाई की मांग की
    24 Dec 2021
    कई अधिकार संगठनों और उनके सहयोगियों ने परवेज़ की गिरफ़्तारी और उनके ख़िलाफ़ चल रहे मामलों को कश्मीर में आलोचकों को चुप कराने का ज़रिया क़रार दिया है।
  •  boiler explosion
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    गुजरात : दवाई बनाने वाली कंपनी में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा, चपेट में आए आसपास घर बनाकर रह रहे श्रमिक
    24 Dec 2021
    गुजरात के वडोदरा में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो गया, जिसकी चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए जिनका इलाज अस्पताल में जारी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License