NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
कोविड-19 की दूसरी लहर में पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य ढांचे को कड़ी चुनौती
राज्य में कोविड-19 के दैनिक मामले लगभग 10,000, अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की भारी कमी गंभीर चिंता का विषय।
संदीप चक्रवर्ती, अरित्री दास
22 Apr 2021
Translated by महेश कुमार
कोविड-19 की दूसरी लहर में पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य ढांचे को कड़ी चुनौती

कोलकाता: 87 वर्षीय एमएस चक्रवर्ती को 3 मार्च को कोविशील्ड वैक्सीन की पहली खुराक मिली। अब उनकी दूसरी खुराक का समय आ गया है और बुजुर्ग व्यक्ति दूसरी खुराक के लिए अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं क्योंकि कोलकाता के कई अस्पतालों में टीकों का स्टॉक खत्म हो गया या काफी कम है। चक्रवर्ती की पत्नी, जो दूसरों की मदद पर ज़िंदगी जीती है, इस स्थिति में भी संघर्ष कर रही है क्योंकि बुजुर्ग दंपत्ति को इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं है कि उन्हे कोविड-19 के टीके की खुराक कैसे और कब मिलेगी। 

कोरोनावायरस मामलों की बढ़ती संख्या ने राज्य की स्वास्थ्य ढांचे पर गंभीर दबाव बना दिया है। राज्य में दैनिक नए कोविड-19 मामले 10,000 के आसपास हैं और मंगलवार को करीब  9,819 ताजा मामले दर्ज़ किए गए हैं। 20 अप्रैल तक राज्य में 58,386 सक्रिय कोविड-19 मामले दर्ज़ हो चुके थे।

चूंकि मामले अभूतपूर्व तेजी से बढ़ रहे हैं, दूसरी लहर के कारण पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में कोविड के इलाज़ के लिए चिकित्सा सुविधाएं चरमरा रही है और स्थिति काफी डरावनी नज़र आ रही है। 

एमके चटर्जी, जो हाल ही में कोविड से संक्रमित हो गए थे और उन्हें कुछ दिनों के लिए कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उनके मुताबिक अस्पताल की स्थिति कब्रिस्तान जैसी है। “दवाओं, ऑक्सीजन सिलेंडर और न जाने किस-किस चीज़ की कमी है। यहां तक कि अगर आप किसी तरह से भर्ती हो भी जाए तो ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी पूरी व्यवस्था को प्रभावित कर रही है।

कोविड बेड की कमी, टीकों और ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी और पश्चिम बंगाल में मामलों की उचित रिपोर्टिंग न होने जैसी कई शिकायतें मिली हैं। बेड और ऑक्सीजन से संबंधित मदद मांगने के लिए आपातकालीन फोन कॉलों और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर जैसे बाढ़ आ गई है।

अभाव की लंबी दास्तान

“स्थिति ऐसी है कि बेड और ऑक्सीजन की भारी कमी है, और जांच भी काफी कम की जा रही है। किसे रिपोर्ट करना है, किसे नहीं, इस पर भी कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं है; राज्य का स्वास्थ्य ढांचा चरमराने को है, उक्त बातें सार्वजनिक सेवा के डॉक्टरों की नोडल संस्था एसोसिएशन ऑफ हेल्थ सर्विस डॉक्टर्स (AHSD) के सचिव मानस गुमटा ने बताई।"

“यहां तक कि क्रिटिकल केयर यूनिट बेड भी अपर्याप्त हैं, और टीके की कमी तो जगजाहिर है। कुछ दिनों के बाद, शवों को रखने के लिए जगह की आम कमी हो जाएगी,” एएचएसडी के सचिव ने यह भी कहा कि, दूसरी लहर को अपने चरम पर पहुंचने में कम से कम तीन महीने लगेंगे।

इन हालात में, राज्य के भीतर 20 अप्रैल को कोविड बिस्तरों की कुल संख्या 7,776 थी। सरकारी अस्पतालों में कोविड के इलाज के लिए 62 अस्पतालों में से 50 में कोविड के सबसे ज्यादा बिस्तर हैं। पश्चिम बंगाल सरकार के सूत्रों के अनुसार, निजी अस्पतालों में यह संख्या कुल 3,403 बिस्तरों की हैं।

इस बीच, अस्पतालों में खाली पड़े बेड का सरकारी डेटा भी पूरी तरह से विश्वसनीय और अपडेट नहीं है। उदाहरण के लिए, 19 अप्रैल को सरकार के आंकड़ों के अनुसार, एएमआरआई साल्ट लेक और डेसून अस्पताल में क्रमशः 25 और 17 कोविड बेड उपलब्ध थे। हालांकि, जब 20 अप्रैल की सुबह अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया गया, तो दोनों निजी अस्पतालों ने कहा कि उनके पास एक भी बिस्तर खाली नहीं है और दिया गया सरकारी डेटा पुराना है।

राज्य सरकार के बुलेटिन के मुताबिक, राज्य भर में कोविड के बिस्तरों का दाखिला लगभग 48 प्रतिशत था। लेकिन जमीनी हक़ीक़त कुछ और ही बयां कर रही है।

जब न्यूजक्लिक ने अस्पताल की हेल्पलाइन पर बिस्तर की उपलब्धता जानने के लिए फोन किया तो ऑपरेटर ने जवाब दिया कि सरकारी अस्पतालों में खाली बेड के बारे में सीधे पूछताछ नहीं की जा सकती है और इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की कोविड हेल्पलाइन नंबर पर बात की जानी चाहिए और फोन करने के 24 घंटे के भीतर बिस्तर आवंटित किया जाएगा। हालांकि, यह विकल्प उन लोगों के लिए ठीक नहीं है जिनकी स्थिति नाज़ुक है और उनके परिवार के सदस्य बिस्तर की तलाश कर रहे हैं। ऐसे मामलों में, जब निजी अस्पताल बिस्तर न उपलब्ध होने की बात करते हैं तो लोग व्यक्तिगत संपर्क के जरिए, किसी राजनीतिक नेता की मदद के जरिए या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एसोएस लीड साझा करते हैं।

वित्त क्षेत्र में काम करने वाली 58 वर्षीय व्यक्ति के बेटे, जिन्हे डायबिटीज है और कोविड-19 के कारण स्थिति गंभीर है, ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर मदद मांगने के लिए गुहार लगाई थी तब जब उनके डॉक्टर ने परिवार को उन्हे अस्पताल में भर्ती करने के लिए कहा था। जब  मंगलवार को उनके ऑक्सीजन के स्तर में उतार-चढ़ाव हुआ, तो परिवार ने स्वास्थ्य विभाग से लेकर निजी अस्पतालों में बिस्तर खोजने के लिए हर जगह फोन घुमाया। अंत में, उन्हें निजी संपर्कों के माध्यम से कोलकाता के एक निजी अस्पताल में एक बिस्तर मिला। “मैं मानसिक रूप से तैयार था कि मुझे बिस्तर की तलाश करनी पड़ेगी और पिछले कुछ दिनों से नोट्स बना रहा था। विशेषाधिकार के कारण, हमें बिस्तर मिल गया। मैं यह नहीं सोचना चाहता हूँ कि छत्तीसगढ़ या यूपी में क्या हो रहा है, ”मरीज के बेटे ने न्यूज़क्लिक को बताया।

कई निजी जांच करने वाली प्रयोगशालाएँ भी बढ़ती जांच की संख्या से अभिभूत नज़र आ रही हैं। जबकि शीर्ष नैदानिक प्रयोगशालाओं को अपोलो और डॉ॰ लाल पेथलेब द्वारा संचालित लिया जाता है वे अपनी वेबसाइटों पर संदेश दे रही हैं कि वर्तमान स्थिति के मद्देनजर मांगी गई सेवा में और परिणामों में देरी होगी, और इसलिए आम लोग कोविड जांच की बुकिंग के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

मधुरिमा सरकार (30) जो महाराष्ट्र से दो हफ्ते पहले कोलकाता पहुंची को अपनी हालत कुछ  ठीक नहीं लग रही थी। जब उन्होने कोविड-19 की जांच करानी चाही तो उन्होने शहर के तीन प्रमुख निजी नैदानिक प्रयोगशालाओं से संपर्क किया, जिनमें से कोई भी तीन दिनों से पहले जांच की तारीख नहीं दे सका। “वे मुझे एक ही बात कहते रहे कि उनके पास कोई तकनीशियन नहीं है। हालांकि उन्होंने मुझे स्पष्ट रूप से मना नहीं किया, ”उन्होने बताया कि तीन दिनों के बाद वे बेहतर महसूस करने लगी और तय किया कि जांच कराने के बजाय, वे घर पर रहकर ही अपने स्वास्थ्य की देखभाल करने लगी। 

बिस्तरों की संख्या को बढ़ाने की ज़रूरत

चूंकि राज्य आठ चरणों के मतदान के जरिए अपनी अगली सरकार चुनने में व्यस्त है, इसलिए चुनाव अभियानों ने कोविड-19 प्रसार की चेतावनी को बेअसर कर दिया। इसलिए, कोविड-19 की दूसरी लहर के हमले का सामना करने के लिए राज्य तैयार नहीं दिखा। 

कोलकाता और उत्तरी 24 परगना में सबसे अधिक कोविड के मामले सामने आए हैं, जिसमें 20 अप्रैल को क्रमशः 2,234 और 1,902 मामले दर्ज़ किए गए। अन्य जिलों में, दक्षिण 24 परगना (581), हावड़ा (577), पश्चिम बर्दवान (547), और बीरभूम (562) मामलों की उच्च संख्या दर्ज़ की गई है। 

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़े सभी मामलों की पूरी तस्वीर पेश नहीं करते हैं और केवल सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने वाले कोविड रोगियों की संख्या पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

इस बीच, 16 अप्रैल को जब सरकार ने निजी अस्पतालों को अपने कोविड बिस्तरों की संख्या को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए कहा, तो 20 अप्रैल तक, पूरे राज्य में केवल 100 बिस्तरों की वृद्धि हुई थी। मंगलवार को, राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों को 20 प्रतिशत अधिक बेड जोड़ने का आदेश दिया, जबकि निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को अपनी कोविड बिस्तर क्षमता को 25 प्रतिशत बढ़ाने के लिए कहा था।

वर्तमान हालात को ध्यान में रखते हुए, एएचएसडी (AHSD) ने राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों और सामान्य अस्पतालों में कोविड ब्लॉक खोलने की भी मांग की है और इसके बारे में मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। इसने सरकार से कोविड रोगियों के लिए निजी सुविधाओं में 50 प्रतिशत से अधिक बेड जोड़ने की मांग की है। एएचएसडी ने एक कोविड नियंत्रण कक्ष की स्थापना और कोविड रोगियों के लिए 24*7 टेली-परामर्श शुरू करने की मांग की है।

डॉक्टरों की संस्था ने सरकार से कड़े कदम उठाने का आग्रह किया है ताकि कोविड के नियमों का पालन किया सके। इसने सरकार से राज्य में फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मचारियों को बीमा देने  और उनके सभी लंबित बकाए का भुगतान करने के लिए भी कहा है।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

West Bengals’ Health Infrastructure Faces Grave Challenge as Covid-19 Second Wave Hits Hard

West Bengal
Covid-19 West Bengal
Covid Beds
kolkata
Covid Tests
Oxygen Cylinder Kolkata
Covid-19 second wave

Related Stories

कोविड की तीसरी लहर में ढीलाई बरतने वाली बंगाल सरकार ने डॉक्टरों को उनके हाल पर छोड़ा

बिहार के बाद बंगाल के तीन अस्पतालों में 100 से अधिक डॉक्टर कोरोना पॉज़िटिव

कोविड-19: क़स्बा वैक्सीन घोटाले के ख़िलाफ़ वाम मोर्चा का पश्चिम बंगाल भर में विरोध प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल : लॉकडाउन में कमाई नहीं, हौज़री कर्मचारी कर रहे ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष

पश्चिम बंगाल: रेड वॉलंटियर्स को राज्य सरकार का नहीं, बल्कि सिविल सोसाइटी की तरफ़ से भारी समर्थन

कोविड-19: दूसरी लहर अभी नहीं हुई ख़त्म

इंदौर: आंकड़ों के अनुसार शहर कोरोना की सबसे बुरी चपेट में, दूसरी लहर के दौरान 50% मामलों को छुपाया 

मुफ्त सार्वजनिक टीकाकरण का मतलब होगा जीवन के अधिकार को सुनिश्चित करना

सात सालों में मोदी के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती

भारत एक मौज : बीजेपी की बंगाल में हार, यूपी का ऑक्सिजन संकट और तेजस्वी सूर्या


बाकी खबरें

  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश में क्यों पनपती है सांप्रदायिक राजनीति
    24 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले वहां सांप्रदायिक राजनीति की शुरुआत फिर से हो गयी है। सवाल यह है कि उप्र में नफ़रत फैलाना इतना आसान क्यों है? इसके पीछे छिपी है देश में पिछले दस सालों से बढ़ती बेरोज़गारी
  • night curfew
    रवि शंकर दुबे
    योगी जी ने नाइट कर्फ़्यू तो लगा दिया, लेकिन रैलियों में इकट्ठा हो रही भीड़ का क्या?
    24 Dec 2021
    देश में कोरोना महामारी फिर से पैर पसार रही है, ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों ने राज्यों को नाइट कर्फ़्यू लगाने पर मजबूर कर दिया है, जिसके मद्देनज़र तमाम पाबंदिया भी लगा दी गई है, लेकिन सवाल यह है कि रैलियों…
  • kafeel khan
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोरखपुर ऑक्सिजन कांड का खुलासा करती डॉ. कफ़ील ख़ान की किताब
    24 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के इस वीडियो में वरिष्ठ पत्रकार परंजोय गुहा ठाकुरता डॉ कफ़ील ख़ान की नई किताब ‘The Gorakhpur Hospital Tragedy, A Doctor's Memoir of a Deadly Medical Crisis’ पर उनसे बात कर रहे हैं। कफ़ील…
  • KHURRAM
    अनीस ज़रगर
    मानवाधिकार संगठनों ने कश्मीरी एक्टिविस्ट ख़ुर्रम परवेज़ की तत्काल रिहाई की मांग की
    24 Dec 2021
    कई अधिकार संगठनों और उनके सहयोगियों ने परवेज़ की गिरफ़्तारी और उनके ख़िलाफ़ चल रहे मामलों को कश्मीर में आलोचकों को चुप कराने का ज़रिया क़रार दिया है।
  •  boiler explosion
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    गुजरात : दवाई बनाने वाली कंपनी में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा, चपेट में आए आसपास घर बनाकर रह रहे श्रमिक
    24 Dec 2021
    गुजरात के वडोदरा में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो गया, जिसकी चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए जिनका इलाज अस्पताल में जारी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License