NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बात बोलेगी: बांग्लादेश से जॉय बांग्ला, जय मतुआ समाज से मोदी बंगाल में कितने वोट खींचेंगे?
चुनाव की महिमा: जिस प्रधानमंत्री को अपने घर से कुछ किलोमीटर दूर बैठे लाखों किसानों का दुख-दर्द समझ नहीं आता, वह सरहद पार करके पश्चिम बंगाल के मतुआ समाज को रिझाने के लिए ऐन मतदान वाले दिन वहां पहुंच जाते हैं और समाज के प्रतिनिधियों से मिलते हैं।
भाषा सिंह
27 Mar 2021

पश्चिम बंगाल के मतदाता आज जब 30 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाल रहे थे, उस समय उनके सामने कौन सी सबसे बड़ी तस्वीर आ रही थी। निश्चित तौर पर जॉय बांग्ला जॉय बांग्ला कहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर थी। सरहद पार से वह पश्चिम बंगाल के चुनाव की कमान संभाले हुए नज़र आ रहे थे। जिस प्रधानमंत्री को अपने घर से कुछ किलोमीटर दूर बैठे लाखों किसानों का दुख-दर्द नहीं समझ आता, वह कुछ किलोमीटर चलकर न तो उनके पास पहुंच पाते हैं और न ही उन्हें अपने पास बुला पाते हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल के चुनाव की महिमा कितनी अपरंपार है कि वह सरहद पार करके पश्चिम बंगाल के मतुआ समाज को रिझाने के लिए ऐन मतदान वाले दिन वहां पहुंच जाते हैं और समाज के प्रतिनिधियों से मिलते हैं और उनके गुरु हरिचंद ठाकुर का गुणगान करते हैं।

कहने की जरूरत नहीं इसका सजीव प्रसारण दिन भर चलता रहता है। तमाम मीडिया घराने खुलकर पूरी बेशर्मी के साथ इसे पश्चिम बंगाल फतह से भी जोड़ते हैं। प. बंगाल की आबादी में 24 फीसदी दलित समाज के लोग हैं, जिसमें से करीब 16 फीसदी मतुआ समाज के लोग है। बताया जाता है कि प. बंगाल की 294—विधानसभा सीटों में से 50 सीटों पर मतुआ समाज का वोट निर्णायक होता है। प्रधानमंत्री कहीं भी जाते हैं, विदेश दौरे पर होते हैं, उसका कवरेज मीडिया को करना ही होता है, मीडिया करता ही है। इसका भरपूर फायदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उठाते हैं। इससे पहले कर्नाटक विधानसभा चुनावों के समय भी वह मतदान के दिन नेपाल पहुंचे थे। शिव अराधना करते हुए, उन्होंने कर्नाटक के शिव भक्तों को प्रभावित किया था। 

इसे भी पढ़े : बात बोलेगी : प. बंगाल विजय के इरादे से मोदी की बांग्लादेश यात्रा!

बांग्लादेश में जाकर उन्होंने ओराकांडी में (मतुआ बहुल इलाके) लड़कियों के स्कूल, प्राइमरी स्कूल खोलने आदि तमाम घोषणाएं की। इसका असर पश्चिम बंगाल के मतुआ समाज पर नहीं पड़ेगा, ऐसा कहना-सोचना राजनीतिक नासमझी तो होगी ही, साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्षमता और दूरदृष्टि की अनदेखी भी होगी। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की दलित बस्तियों में जब हमने इस बारे में बात की तो वे भी बहुत आशान्वित नजर आये कि हो सकता है कि उनके दिन भी ऐसे ही फिरें। मौजूदा हालात से बेहद परेशान और ममता सरकार की अनदेखी से नाराज बारी विधानसभा क्षेत्र के सोनू वाल्मीकि ने कहा, देखिए अभी से प्रधानमंत्री दलित समाज के लिए इतनी दूर जाकर इतना कर रहे हैं तो फिर पश्चिम बंगाल में उनकी सरकार आ जाएगी तो वे कितना परिवर्तन करेंगे। जब उनसे पूछा कि ये तो मतुआ समाज के लिए हैं, तो उन्होंने कहा, हैं तो वे भी दलित समाज का ही हिस्सा ना।

image

कोलकाता के हावड़ा में दलित बस्ती- बेलगछिया भगाड़। कूड़े के ढेर के बीच बेहद अमानवीय स्थिति में जीवन।

इसी तरह से घरों में झाड़ू पोछा करने वाली माली हारी का कहना है, आज मैंने सारा काम छोड़कर मोदी जी का भाषण सुना। कितना दर्द से उन्होंने दलित समाज के लिए बात की। वह सबका ध्यान रखते हैं, यहां भी हमारे लिए कुछ करेंगे, इसका मुझे पूरा भरोसा है।

लेकिन वहीं इसी समाज के राम मोंडल ने कहा, ये सब चुनावी जुमला है, ठीक 15 लाख रुपये की तरह। लेकिन अब सब घर में टीवी है, लोग सुबह से शाम तक जयगान सुनता है, तो दिमाग को फिरेगा ही न। बाकी कसर मोबाइल पूरी कर देता है।

मामला साफ है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बांग्लादेश यात्रा से जो हासिल करना था, वह उन्होंने बखूबी कर लिया। अब इसका असर जमीन पर कितनी सीटों पर पड़ेगा , यह तो परिणाम के दिन ही सामने आएगा।

(भाषा सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

इन्हें भी पढ़े :

 बंगाल चुनाव: भाजपा का बंगाली और प्रवासी के बीच ध्रुवीकरण का ख़तरनाक खेल

 बंगाल चुनावः तृणमूल नेताओं को भगवा पहनाकर चुनावी बिसात बैठा रही भाजपा!

 बंगाल चुनाव: महिला विरोधी, अभद्र भाषा पर टिका भाजपा का प्रचार

West Bengal Elections 2021
WB Elections Update
PM Modi's Bangladesh Visit
BJP
TMC
Matua Community

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • ram_navmi
    अफ़ज़ल इमाम
    बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?
    13 Apr 2022
    हिंसा की इन घटनाओं ने संविधान, लोकतंत्र और बहुलतावाद में विश्वास रखने वाले शांतिप्रिय भारतवासियों की चिंता बढ़ा दी है। लोग अपने जान-माल और बच्चों के भविष्य को लेकर सहम गए हैं।
  • varvara rao
    भाषा
    अदालत ने वरवर राव की स्थायी जमानत दिए जाने संबंधी याचिका ख़ारिज की
    13 Apr 2022
    बंबई उच्च न्यायालय ने एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में कवि-कार्यकर्ता वरवर राव की वह याचिका बुधवार को खारिज कर दी जिसमें उन्होंने चिकित्सा आधार पर स्थायी जमानत दिए जाने का अनुरोध किया था।
  • CORONA
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,088 नए मामले, 26 मरीज़ों की मौत
    13 Apr 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 5 लाख 21 हज़ार 736 लोग अपनी जान गँवा चुके है।
  • CITU
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन
    13 Apr 2022
    ये सभी पिछले माह 39 दिन लंबे चली हड़ताल के दौरान की गई कार्रवाई और बड़ी संख्या आंगनवाड़ी कर्मियों को बर्खास्त किए जाने से नाराज़ थे। इसी के खिलाफ WCD के हेडक्वार्टस आई.एस.बी.टी कश्मीरी गेट पर प्रदर्शन…
  • jallianwala bagh
    अनिल सिन्हा
    जलियांवाला बाग: क्यों बदली जा रही है ‘शहीद-स्थल’ की पहचान
    13 Apr 2022
    जलियांवाला बाग के नवीकरण के आलोचकों ने सबसे महत्वपूर्ण बात को नज़रअंदाज कर दिया है कि नरसंहार की कहानी को संघ परिवार ने किस सफाई से हिंदुत्व का जामा पहनाया है। साथ ही, उन्होंने संबंधित इतिहास को अपनी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License