NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
एमवे के कारोबार में  'काला'  क्या है?
साल 2021 में इस सम्बन्ध में उपभोक्ता संरक्षण नियम बने। इसके तहत नियम बना कि कोई भी डायरेक्ट सेलिंग कंपनी यानी वैसी कम्पनी जो उपभोक्ताओं को सीधे अपना माल बेचती हैं, वह कमीशन देने की शर्त पर अपना माल नहीं बेच सकती हैं।
अजय कुमार
26 Apr 2022
amway

एमवे (Amway) का नाम तो आपने सुना ही होगा। अगर आपके घर की आमदनी 20 हजार प्रति महीना से ज्यादा है, तो आपने एमवे के सामानों को जरूर देखा होगा। रिश्तेदारों से इसके बारे में सुना होगा। बैग में भरकर एमवे ब्रांड से साबुन, क्रीम, परफ्यूम, दन्तमजन जैसे कई सामान दिखाने वालों से आपकी मुलाकात जरूर हुई होगी। एमवे का सामान दिखाने वाले ने केवल सामान नहीं दिखाया होगा। कहा होगा कि सामान खरीदिये और एमवे के सदस्य भी बनिए। यह भी कहा होगा कि एमवे के सामान सबसे बढ़िया हैं। सामान खरीदकर आप सदस्य बनेंगे। सदस्य बनकर आप भी सामान बेचेंगे। दूसरे सामान खरीदेंगे और वह भी एमवे के सदस्य बनेंगे। इस तरह से हर सामान खरीदने वाला एमवे का सदस्य होगा। सबको कमीशन मिलेगा। सबकी कमाई होगी। जो जितना सदस्य बनाएगा वह उतना पैसा कमा कमायेगा। वह उतना अमीर बनेगा। 

इस सपने के साथ एमवे ने भारत में कारोबार किया। एमवे ने खूब कमाई की। लेकिन एमवे के सभी डिस्ट्रीब्यूटरों और सदस्यों ने नहीं। सिर्फ उनकी ही जेबें भारी हुईं जो नेटवर्क चेन में सबसे ऊपर थे। इस कम्पनी पर भारत सरकार के प्रवर्तन  निदेशालय यानी इनफोर्समेंट डाइरेक्टोरेट ने हाल ही में  छपा मारा है। ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने एमवे के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसकी 757 करोड़ 77 लाख  रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। जब्त की गयी सम्पति में कम्पनी की जमीन, फ़ैक्ट्री, गाड़ी और कई तरह की स्थाई और अस्थाई सम्पत्तियां शामिल हैं। जब्त करने का मतलब है कि एमवे इन सम्पतियों का इस्तेमाल नहीं कर सकती है। प्रवर्तन निदेशालय ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉड्रिंग एक्ट के तहत की है।  

एमवे पर यह ईडी की प्रेस रिलीज बताती है कि एमवे ने 2002-03 से 2021-22 के दौरान अपने बिजनेस ऑपरेशन से 27 हजार 562 करोड़ रुपए कमाए। इनमें से 7,588 करोड़ रुपए उसने कमीशन के रूप में अपने अमेरिका और भारत के डिस्ट्रीब्यूटर्स और मेंबर्स को दिए। एमवे एक अमेरिकी कंपनी है। एमवे ने साल 1995 -96 में भारत में कदम रखा था। कंपनी ने 21 करोड़ 39 लाख रूपये से शुरुआत की थी। इंवेस्टर्स और मूल संस्थाओं को लाभांश, रॉयल्टी और अन्य भुगतान के नाम पर 2020-21 तक 2,859.10 करोड़ रुपए भुगतान किये।

यह एक तरह की पिरामिड स्कीम है। यहां प्रोडक्ट यानी सामान बेचने का काम नहीं किया जाता, बल्कि सदस्य बनाकर कमीशन से कमाई करने का काम किया जाता है। ग्रहाकों को लुभाने के लिए यह कंपनियां बड़े-बड़े सेमिनार करती है। सोशल मीडिया से लेकर हर जगह प्रचार करती है। इसके प्रचार का जरिया इसके ग्राहक होते हैं, जो केवल ग्राहक नहीं होते, बल्कि इसके सदस्य भी होते हैं। यह लोगों के सामने उन लोगों का उदाहरण पेश करते हैं, जो पिरमिड में सबसे ऊपर हैं।  जिनकी अच्छी खासी कमाई है। इनके लाइफस्टाइल को दिखाकर अमीर बनने का सपना बेचा जाता है।  

एमवे पर ED  का कहना है कि एमवे ने अपने सामानों को बहुत ऊँचे कीमत पर बेचा। जबकि वैसे ही सामान जो एमवे के जरिये बेचे जा रहे था, उनकी कीमत दूसरे ब्रांड में कम थी। इस तरह का कारोबार लोगों की मेहनत की कमाई लूटने की तरह है।  पिरामिड में सबसे ऊपर बैठे लोगों को कमीशन के जरिये बहुत कमाई होती है और जो नीचे मौजूद है उसकी कमाई कम रहती है या बिलकुल नहीं होती है। एमवे के मुताबिक यह कार्रवाई 2011 के जाँच के संबंध में है। तब से कंपनी विभाग के साथ सहयोग कर रही है।  

जानकरों का कहना है कि एमवे के कामकाज पर संदेह पैदा होता है। ऐसे कैसे मुमकिन है कि दूसरे फ़ास्ट मूविंग कंस्यूमर गुड्स से जुड़े ब्रांड की कंपनियां एमवे से बड़ी हैं, लेकिन एमवे जितनी कैटेगरी का सामान बनाता है उतनी कैटेगरी का सामान दूसरे नहीं बनाते। उसका कारोबार भी उतना बड़ा नहीं है, जितना हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड और नेशले का है। वह रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर भी उतना ख़र्च नहीं करता जितना दूसरी कंपनियां करती हैं। इनोवेशन के क्षेत्र में उसका खर्च दूसरों के मुकाबले कम है। तो कंपनी ऐसा कैसे कह सकती है कि उनके सामान सबसे अच्छी क्वालिटी के हैं? वह सबसे  क्वालिटी के अच्छे साबुन, क्रीम, दवाइयां बेचता है? इसलिए उसके कामकाज पर संदेह तो पैदा होता ही है।  

आर्थिक पत्रकार सुचेता दलाल कहती हैं कि एमवे की धांधली बहुत लम्बे समय से चलते आ रही है। पिरामिड स्कीम, डायरेक्ट सेलिंग, मल्टी लेवल सेलिंग को लेकर भारत में कोई सख्त कानून नहीं था। साल 2021 में इस सम्बन्ध में उपभोक्ता संरक्षण नियम बने। इसके तहत नियम बना कि कोई भी डायरेक्ट सेलिंग कम्पनी यानी वैसी कम्पनी जो उपभोक्ताओं को सीधे अपना माल बेचती हैं  वह कमीशन देने की शर्त पर अपना माल नहीं बेच सकती है। वह ऐसा नहीं कह सकती कि जो कम्पनी का माल खरीदेगा, वह कम्पनी का सदस्य बनेगा। इन कंपनियों के डायरेक्ट सेलर के पहचान से जुड़े कागज़ात कम्पनी अपने पास रखेगी। एक शिकायत निवारण तंत्र होगा। इसके तहत शिकायतों का निपटारा होगा। हाल फिलाहल ऐसा है कि कोई भी शिकायत निवारण तंत्र नहीं है। एमवे का सामान खरीदने वाला जिससे सामान खरीदता है, उसके सिवाय नेटवर्क के अन्य सदस्यों को नहीं जानता।  

आर्थिक पत्रकार अंशुमन तिवारी का कहना है कि साल 2021 में कानून बना तब से एमवे के सामने चुनौतियां आनी  शुरू हुईं। हालाँकि, यह एमवे पर साल 2011 के मामले को लेकर कार्रवाई की गयी है। लेकिन जिस स्तर पर सरकार ने एमवे पर कार्रवाई की है, उससे लगता है कि पूरा कारोबार सरकारी कार्रवाई के चपेट में आ गया है। यहां पर जो सबसे बड़ी चूक दिखती है वह यह है कि मल्टीलेवल और पिरामिड कारोबार का थंब रूल है कि कम्पनी 70 प्रतिशत से ज्यादा अपने डिस्ट्रीब्यूटरों के बाहर बेचेंगी, यानि उन्हें बेचेगी जो कम्पनी के सदस्य नहीं होंगे। एमवे के कारोबार से लगता है उसने यही काम किया है। उसने माल बेचने से ज्यादा कमाई सदस्य बनाकर की है।  

Amway
Multi-level marketing company
Amway Marketing Scam
ED

Related Stories

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

सरकारी एजेंसियाँ सिर्फ विपक्ष पर हमलावर क्यों, मोदी जी?

ईडी ने फ़ारूक़ अब्दुल्ला को धनशोधन मामले में पूछताछ के लिए तलब किया

ईडी ने शिवसेना सांसद संजय राउत से संबंधित संपत्ति कुर्क की

जनता के पैसे का इस्तेमाल ख़ुद के लिए नहीं किया : राना अय्यूब

धनशोधन का मामला: अदालत ने अनिल देशमुख को न्यायिक हिरासत में भेजा

ईडी ने 12 घंटे की पूछताछ के बाद अनिल देशमुख को किया गिरफ़्तार

कार्टून क्लिक: मैनेजमेंट सबसे बढ़िया!

पेगासस प्रोजेक्ट: बीएसएफ़ के पूर्व प्रमुख, रॉ और ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ केजरीवाल के क़रीबी का नाम निगरानी सूची में

मुम्बई के सफ़ाई कर्मचारियों के हक़ में फ़ैसला, एकनाथ खडसे की ईडी में पेशी और अन्य ख़बरें


बाकी खबरें

  • sex ratio
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु: चिंताजनक स्थिति पेश कर रहे हैं लैंगिक अनुपात और घरेलू हिंसा पर NFHS के आंकड़े
    04 Dec 2021
    जन्म के दौरान लड़के-लड़कियों के अनुपात में पिछले पांच सालों में बहुत गिरावट आई है. अब 1000 लड़कों पर सिर्फ़ 878 महिलाएं हैं। जबकि 2015-16 में 1000 लड़कों पर 954 लड़कियों की संख्या मौजूद थी।
  • NEET-PG 2021 counseling
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नीट-पीजी 2021 की काउंसलिंग की मांग को लेकर रेजीडेंट डॉक्टरों ने नियमित सेवाओं का किया बहिष्कार
    04 Dec 2021
    ‘‘ओपीडी सेवाएं निलंबित करने से प्राधिकारियों से कोई ठोस जवाब नहीं मिला तो हमें दुख के साथ यह सूचित करना पड़ रहा है कि हम फोरडा द्वारा बुलाए देशव्यापी प्रदर्शन के समर्थन में तीन दिसंबर से अपनी सभी…
  • Pilibhit
    तारिक अनवर
    भाजपा का हिंदुत्व वाला एजेंडा पीलीभीत में बांग्लादेशी प्रवासी मतदाताओं से तारतम्य बिठा पाने में विफल साबित हो रहा है
    04 Dec 2021
    नागरिकता और वैध राजस्व पट्टे की उम्मीदें टूट जाने के साथ शरणार्थियों को अब पिछले चुनावों में भाजपा का समर्थन करने पर पछतावा हो रहा है।
  • Gambia
    क्रिसपिन एंवाकीदेऊ
    गाम्बिया के निर्णायक चुनाव लोकतंत्र की अहम परीक्षा हैं
    04 Dec 2021
    गाम्बिया में राष्ट्रपति पद का चुनाव हो रहा है। पर्यवेक्षकों का मानना है ये चुनाव गाम्बिया के लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण अग्निपरीक्षा हैं। 
  • prashant kishor
    अनिल सिन्हा
    नज़रिया: प्रशांत किशोर; कांग्रेस और लोकतंत्र के सफ़ाए की रणनीति!
    04 Dec 2021
    ग़ौर से देखेंगे तो किशोर भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ तोड़ने में लगे हैं। वह देश को कारपोरेट लोकतंत्र में बदलना चाहते हैं और संसदीय लोकतंत्र की जगह टेक्नोक्रेट संचालित लोकतंत्र स्थापित करना चाहते हैं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License