NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भारत में महिलाओं की ख़राब होती स्थिति की वजह क्या है?
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ताज़ा जारी ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2021 में भारत 28 पायदान फिसलकर 140वें स्थान पर आ गया है। इस गिरावट को कई मायनों में गंभीर माना जा रहा है। आर्थिक भागीदारी का मसला हो, समान अवसर की उपलब्धता देश में महिलाओं की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
01 Apr 2021
भारत में महिलाओं की ख़राब होती स्थिति की वजह क्या है?
image credit - feminisminindia.com

विकास के लंबे-चौड़े दावों के साथ देश की सत्ता के केंद्र में आई बीजेपी नेतृत्व वाली मोदी सरकार फिलहाल हर मोर्चे पर पिछड़ती ही नज़र आ रही है। डेमोक्रेसी इंडेक्स में दस स्थान खिसकने के बाद अब वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ताज़ा जारी वैश्विक लैंगिक भेद अनुपात रिपोर्ट 2021 में भी भारत पिछड़ गया है। 156 देशों की सूची में भारत 28 पायदान फिसलकर 140वें स्थान पर आ गया है, साथ ही दक्षिण एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला तीसरा देश भी बन गया है।

आपको बता दें कि इससे पहले ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2020 में 153 देशों में भारत का स्थान 112वें नंबर पर था। इस गिरावट को कई मायनों में गंभीर माना जा रहा है। आर्थिक भागीदारी का मसला हो समान अवसर की उपलब्धता देश में महिलाओं की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।

आपको शायद साल 2019 में आई फिल्म मर्दानी 2 का ये फेमस डायलॉग याद हो, “बराबरी तो बहुत दूर की बात है सर, फिलहाल हिस्सेदारी मिल जाए न वही बड़ी बात है।” इस फिल्म में रानी मुखर्जी एक टीवी इंटरव्यू के दौरान समाज में मर्द और औरत की बराबरी के हक़ीकत को समझाती हैं। रानी कहती हैं कि महज़ कुछ औरतों के पढ़-लिखकर नौकरी कर लेने भर से समाज में औरत को बराबरी का दर्जा नहीं मिल जाता। बस से लेकर मेट्रो तक औरत अपने अधिकार के लिए हर जगह संघर्ष करती है। ठीक कुछ ऐसी ही बातें इस रिपोर्ट में भी सामने आई हैं।

ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2021 की गौर करने वाली बातें

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2021 के अनुसार भारत में आर्थिक भागीदारी और अवसर के क्षेत्र में भी गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में लैंगिक भेद अनुपात 3 प्रतिशत बढ़कर 32.6 फीसदी तक पहुंच गया है।

* रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा गिरावट राजनीतिक सशक्तिकरण सबइंडेक्स में आई है, जिसमें महिला मंत्रियों की संख्या में फिर से 13.5 प्रतिशत (जो कि साल 2019 में 23.1 प्रतिशत थी, वह अब घटकर 9.1 प्रतिशत रह गई है) की कमी आई है। इसके अलावा इस रिपोर्ट में महिला श्रम भागीदारी दर में भी गिरावट आई है, जो कि 24.8 प्रतिशत से गिरकर 22.3 प्रतिशत रह गई है।

* वहीं इस रिपोर्ट में प्रोफेशनल और टेक्निकल फील्ड में भी महिलाओं की भूमिका घटकर 29.2 प्रतिशत रह गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र में सीनियर और मैनेजमेंट लेवल से जुड़ी पोजीशन में भी महिलाओं की भागीदारी सिर्फ 14.6 प्रतिशत है और टॉप मैनेजर लेवल पर महिलाओं की संख्या सिर्फ 8.9 प्रतिशत है।

* स्वास्थ्य और अस्तित्व से जुड़े सबइंडेक्स में भी महिलाओं के साथ भेदभाव की बात सामने आई है। इस मामले में भारत निचले 5 देशों में शामिल है।

* रिपोर्ट के अनुसार, लिंग आधारित सोच के कारण, जन्म के समय लिंगानुपात में भी बड़ा अंतर सामने आया है। इसके अलावा चार में से एक महिला को जीवन में अन्तरंग हिंसा का सामना करना पड़ा है।

* लैंगिक साक्षरता के मामले में, 17.6 प्रतिशत पुरुषों की तुलना में एक तिहाई महिलाएं (34.2 प्रतिशत) निरक्षर हैं।

पड़ोसी देशों के क्या हैं हाल?

ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट में दक्षिण एशिया विश्व का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला दूसरा क्षेत्र है। भारत के पड़ोसी देशों में से बांग्लादेश ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2021 में 65वें नंबर पर, नेपाल 106, पाकिस्तान 153, अफगानिस्तान 156, भूटान 130 और श्रीलंका 116वें स्थान पर है।

गौरतलब है कि हाल ही जारी ऑनलाइन पेशेवर नेटवर्क लिंक्डइन अपॉर्च्युनिटी इंडेक्स की एक सर्वे रिपोर्ट ने भी देश में महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव को उज़ागर किया था। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पूरे एशिया पेसिफिक देशों में महिलाओं को काम और सैलरी के लिए कड़ी लड़ाई लड़नी पड़ी है। साथ ही कई जगह पर पक्षपात का भी सामना करना पड़ा।

इस सर्वे में 22 प्रतिशत महिलाओं का कहना था कि उन्हें पुरुषों की तुलना उतनी वरियता नहीं दी जाती। वहीं 85% महिलाओं ने कहा कि 60% क्षेत्रीय औसत की तुलना में न तो उन्हें सही टाइम पर प्रमोशन, न ही सैलरी हाइक या वर्क ऑफर मिलता है। इतना ही नहीं सर्वे रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि भारत में 85 प्रतिशत महिला कर्मचारियों ने महिला होने के कारण वेतन वृद्धि, पदोन्नति सहित अन्य लाभ के मौके गंवा दिए।

हमारे देश में लिंग आधारित भेदभाव पितृसत्ता के आड़ में बहुत व्यापक स्तर पर काम कर रहा है। जन्म से लेकर मौत तक, शिक्षा से लेकर रोजगार तक, हर जगह पर लैंगिक भेदभाव साफ-साफ नजर आता है। इस भेवभाव को कायम रखने में सामाजिक और राजनीतिक पहलू बहुत बड़ी भूमिका निभाते है। वर्ल्ड इकनोमिक फोरम और लिंक्डइन द्वारा जारी इन रिपोर्ट्स से साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारे देश में लैगिंक भेदभाव की जड़ें कितनी मजबूत और गहरी है।

महिलाओं की खराब होती स्थिति की वजह क्या है?

ये विडंबना ही है कि हमारे देश की महिलाएं राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक महत्वपूर्ण पदों को सुसज्जित कर चुकी हैं बावजूद इसके देश में महिलाओं की स्थिति में कोई खास उत्साहजनक सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। महिला आरक्षण बिल सालों से संसद में लटका पड़ा है तो वहीं सड़क पर रोज़ाना किसी न किसी महिला को दरिंदगी का शिकार होना पड़ता है।

हालांकि सरकार इस ओर कितना ध्यान दे रही है ये किसी से छुपा नहीं है। आए दिन सत्ताधारी पार्टी के नेता या तो महिला विरोधी उलूल-जुलूल बातें करते मिल जाते हैं या किसी महिला के खिलाफ अपराध में लिप्त पाए जाते हैं। और तो और अपराधियों और आरोपियों का खुले तौर पर समर्थन करने में भी नहीं हिचकिचाते। ऐसे में देश की आधी आबादी की स्थिति कब और कैसे सुधरेगी ये बड़ा सवाल है।

Women in India
Global Gender Gap Report 2021
gender discrimination
gender inequality

Related Stories

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: महिलाओं के संघर्ष और बेहतर कल की उम्मीद

लॉकडाउन में लड़कियां हुई शिक्षा से दूर, 67% नहीं ले पाईं ऑनलाइन क्लास : रिपोर्ट

राष्ट्रीय बालिका दिवस : लड़कियों को अब मिल रहे हैं अधिकार, पर क्या सशक्त हुईं बेटियां?

1000 मर्दों पर 1020 औरतों से जुड़ी ख़ुशी की ख़बरें सच की पूंछ पकड़कर झूठ का प्रसार करने जैसी हैं!

रश्मि रॉकेट : महिला खिलाड़ियों के साथ होने वाले अपमानजनक जेंडर टेस्ट का खुलासा

प्रेरक पहलः बीएचयू में दलित महिला प्रोफेसर ने हटवाया लैंगिक नाइंसाफ़ी का ठप्पा

छत्तीसगढ़ की वीडियो की सच्चाई और पितृसत्ता की अश्लील हंसी

जेंडर के मुद्दे पर न्यायपालिका को संवेदनशील होने की ज़रूरत है!


बाकी खबरें

  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड: NIOS से डीएलएड करने वाले छात्रों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति नहीं
    23 Oct 2021
    उत्तराखंड सरकार द्वारा नवंबर 2020 में प्राथमिक शिक्षक के 2287 पदों पर भर्ती के लिए सूचना जारी की गई थी, इसमें राज्य सरकार द्वारा इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से होने वाले डीएलएड को मान्य किया गया…
  • Supreme Court
    न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    खोरी पुनर्वास संकट: कोर्ट ने कहा- प्रोविजनल एलॉटमेंट के समय कोई पैसा नहीं लिया जाएगा, फ़ाइनल एलॉटमेंट पर तय होगी किस्त 
    23 Oct 2021
    मजदूर आवास संघर्ष समिति ने कहा कि अस्वीकृत आवेदन की प्रकिया में अपारदर्शिता है एवं प्रार्थी को अपील का मौका न देना सरासर अत्याचार एवं धोखा है।
  • inflation
    अजय कुमार
    सरकारी आंकड़ों में महंगाई हो गई कम, ग़रीब जनता को एहसास भी नहीं हुआ! 
    23 Oct 2021
    आख़िर क्या वजह है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों में कमी आने के बाद भी आम आदमी इस पर भरोसा नहीं कर पाता।
  • 100 crore vaccines
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक: क्या भारत सचमुच 100 करोड़ टीके लगाने वाला दुनिया का पहला देश है?
    23 Oct 2021
    भारत न तो पहला देश है जिसने 100 करोड़ डोज़ लगाई है और न ही भारत का टीकाकरण विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है।
  • shareel
    द लीफलेट
    सीएए विरोधी भाषण: भीड़ उकसाने के ख़िलाफ़ ‘अपर्याप्त और आधे-अधूरे सुबूत’, फिर भी शरजील इमाम को ज़मानत से इनकार
    23 Oct 2021
    दिल्ली की एक अदालत ने दिसंबर 2019 में राष्ट्रीय राजधानी में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA)-राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर अपने कथित भड़काऊ भाषण के सिलसिले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License