NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या है सच?: मज़दूरों ने कहा फिर से पलायन के हालात, सरकारी तंत्र ने कहा दावा भ्रामक है
उत्तर प्रदेश सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के एक आधे-अधूरे फ़ैक्ट चेक के जरिये मज़दूरों की पूरी बात और हालात को नकार दिया गया। लेकिन सच्चाई सिर्फ़ इतनी नहीं हैं। पढ़िए यह पड़ताल
राज कुमार
18 Jan 2022
workers
फोटो एएनआई ट्विटर से साभार।

लगातार कोविड के मामले बढ़ते जा रहे हैं। जिसके चलते विभिन्न राज्यों एवं प्रमुख शहरों में प्रतिबंध लगाए गए हैं और दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। स्कूल और कॉलेज आदि बंद कर दिये गये हैं। दफ़्तर या तो आधे कर्मचारियों के साथ खुले हैं या फिर वर्क फ्रोम होम हो रहा है। लेकिन, हमें ये नहीं भूलना चाहिये कि बहुत सारे ऐसे लोग और पेशे हैं जिन्हें वर्क फ्रोम होम की सुविधा उपलब्ध नहीं है। दिहाड़ी मज़दूर, दफ़्तरों आदि में हाउसकीपिंग का स्टाफ, सफाई कर्मचारी, भवन निर्माण मज़दूर आदि अनेक ऐसे असंगठित क्षेत्र के मज़दूर हैं जो वर्क फ्रोम होम नहीं कर सकते। इन मज़दूरों के सामने एक बार फिर से पलायन का संकट आ गया है। लेकिन सरकारी तंत्र इस संकट को स्वीकार और संबोधित करने की बजाय संकट को मानने से ही इंकार कर रहा है।

क्या है मामला?

16 जनवरी को एएनआई न्यूज़ एजेंसी ने दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर एक ट्वीट किया। आर्काइव लिंक। ट्वीट में नोएडा के एक मज़दूर के हवाले से लिखा है कि “हमारे पास कोई काम नहीं है क्योंकि कर्फ्यू की वज़ह से कंपनियां बंद हैं। हमें सरकार की तरफ से कोई राशन भी नहीं मिल रहा है जैसा कि पहले लॉकडाउन के समय मिला था। ग़रीब आदमी ख़त्म हो गया है, ग़रीबी नहीं।”

नोएडा में कोविड के कारण प्रतिबंधों के चलते एक मज़दूर ने एएनआई को ऐसा कहा है। रात 9 बजकर 5 मिनट पर एएनआई ने इस ट्वीट पर स्पष्टीकरण जारी किया और एक और ट्वीट किया। एएनआई ने स्प्ष्टीकरण में कहा कि नोएडा में कर्फ्यू नहीं लगाया गया है ये एक मज़दूर के शब्द हैं।

उसके बाद मामले में उत्तर प्रदेश सूचना एवं लोक संपर्क विभाग प्रवेश करता है। सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के फ़ैक्ट चेक अकाउंट से इस बारे में रात 10 बजकर 19 मिनट पर फ़ैक्ट चेक ट्वीट किया गया। फ़ैक्ट चेक में लिखा है कि “सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ एकाउंट्स द्वारा मज़दूरों के लॉकडाउन में भटकने और भोजन न मिलने की फोटो वायरल की जा रही है। संबंधित अधिकारी द्वारा जानकारी दी गई है कि ये फोटो उत्तर प्रदेश की नहीं है। यहां ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। कृपया भ्रामक सूचनाओं को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने से बचें।”

इस तरह अधकचरे फ़ैक्ट चेक के जरिये मज़दूरों की पूरी बात और हालात को नकार दिया गया।

उप्र सूचना एवं लोक संपर्क विभाग का फ़ैक्ट चेक संदिग्ध है

सूचना एवं लोक संपर्क विभाग का फ़ैक्ट चेक संदिग्ध है। क्योंकि इसमें कुछ नहीं बताया गया है कि उन्होंने फोटो का वेरिफिकेशन कैसे किया है? वो संबंधित अधिकारी कौन है जिसने पुष्टि की है कि फोटो उत्तर प्रदेश की नहीं है? उसका नाम, पद और विभाग क्यों नहीं बताया गया? क्या उत्तर प्रदेश सरकार के पास फोटो की वेरिफिकेशन के लिए अलग से कोई स्पेशल विभाग और “संबंधित” अधिकारी है?

न्यूज़ एजेंसी एएनआई के अनुसार ये तस्वीरें लेबर चौक, नोएडा, उत्तर प्रदेश की हैं। सूचना एवं लोक संपर्क विभाग कह रहा है कि तस्वीरें उत्तर प्रदेश की नहीं है। तो फ़ैक्ट चेक करने वाले सूचना एवं लोक संपर्क विभाग को बताना चाहिये कि तस्वीरें उत्तर प्रदेश की नहीं हैं तो फिर कहां की हैं?

वेरिफिकेशन के भी कुछ तौर-तरीके होते हैं, ये थोड़े होता है कि संबंधित अधिकारी ने कह दिया और बात ख़त्म। सूचना एवं लोक संपर्क विभाग को सरकारी फतवा देने की बजाय, साक्ष्यों के साथ ये साबित करना चाहिये कि फोटो उत्तर प्रदेश का नहीं है।

क्या है मज़दूरों की पूरी ख़बर?

न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने अपनी वेबसाइट पर पूरी रिपोर्ट प्रकशित की है। आर्कइव लिंक। रिपोर्ट का शीर्षक है “कोविड प्रतिबंधों के चलते नोएडा में काम का इंतज़ार करते एक मज़दूर ने कहा, वर्क फ्रोम होम हर कोई नहीं कर सकता”। एएनआई ने नोएडा उत्तर प्रदेश के चार मज़दूरों से बातचीत की है और उसे रिपोर्ट में प्रकाशित किया है।

रिपोर्ट के अनुसार दिहाड़ी मज़दूर विशाल कुमार ने एएनआई से कहा कि “खोड़ा के लेबर चौक पर लगातार चार दिन तक बैठने पर भी काम नहीं मिला। ऊपर से शोषण हो रहा है। जिस काम के लिए पहले लोग 500 रुपये देते थे अब 200 रुपये बोल रहे हैं। मैं हर महीने अपने मां-बाप के पास 2000 रुपये घर भेजता था। लेकिन इस महीने असंभव है। हर कोई वर्क फ्रोम होम नहीं कर सकता। मुझे अपने बच्चों का पेट भरना है तो काम खोजने के लिए सड़क पर जाना पड़ेगा।”

एक और मज़दूर संतोष कुमार ने कहा कि “पहले प्रदूषण की वज़ह से निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लग गया था अब कोविड के चलते काम बंद है। अगले महीने मेरी बेटी की शादी थी जिसे मुझे टालना पड़ा। सारी जमा पूंजी घर के किराये, बच्चों की फीस और रोज़मर्रा की दिनचर्या में ख़र्च हो गयी है। पिछले चार महीने से मेरे पास कोई काम नहीं है। हर रोज सुबह एक उम्मीद के साथ शुरु करता हूं कि हालात बदलेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं।”

संतोष ने आगे बताया कि “पिछला लॉकडाउन अब तक आतंकित करता है। लेकिन उस समय सरकार और लोगों ने मदद की थी।”

मज़दूर राम सिंह ने एएनआई को कहा है कि “मेरे मकान मालिक ने कहा है कि या तो दो दिन के अंदर किराया दो या घर खाली कर दो। हम लेबर चौक पर इस उम्मीद से आते हैं कि आज कुछ काम मिलेगा लेकिन दोपहर दो बजे खाली हाथ ही लौटना पड़ता है। इस महीने फोन तक रिचार्ज कराने के पैसे नहीं है।”

मज़दूर प्रमोद ने कहा कि “मेरा लेबर कार्ड भी बना हुआ है। लेकिन इससे ना तो काम मिला और न ही कोई अन्य ऐसी मदद मिली कि मैं इस मुश्किल समय में अपना गुजारा कर पाऊं। मैं 6 महीने पहले दिल्ली आया था। मेरी योजना थी कि कुछ समय बाद मां-बाप को भी दिल्ली ही ले आऊंगा। लेकिन जैसे हालात चल रहे हैं, मैं खुद वापस जाने की सोच रहा हूं।”

सूचना एवं लोक संपर्क विभाग से कुछ सवाल

एएनआई द्वारा प्रकाशित की गई ख़बर के बारे में सूचना और लोक संपर्क विभाग की क्या राय है? क्या जिन चार मज़दूरों की बातें रिपोर्ट में शामिल की गई हैं, उन मज़दूरों का भी फ़ैक्ट चेक किया जाएगा? फोटो उत्तर प्रदेश की नहीं है क्योंकि किसी “संबंधित” अधिकारी ने ऐसा कहा है, क्या मात्र ये कह देने से मज़दूरों की परिस्थितियों को खारिज किया जा सकता है? सूचना एवं लोक संपर्क विभाग स्पष्ट करे कि उसकी वेरिफिकेशन की प्रक्रिया क्या है?

एएनआई को भी सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के इस फ़ैक्ट चेक पर प्रतिक्रिया देनी चाहिये। अगर फोटो नोएडा उत्तर प्रदेश के नहीं हैं तो खेद प्रकट करना चाहिये और अगर हैं तो सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के फ़ैक्ट चेक का प्रतिवाद करना चाहिये। सूचना एवं लोक संपर्क विभाग या तो साक्ष्यों के साथ साबित करे कि फोटो उत्तर प्रदेश की नहीं है और रिपोर्ट फ़र्ज़ी है, या फिर खेद प्रकट करे और ट्वीट को हटा ले।

वर्ष 2020 में मज़दूरों के पैदल ही अपने घर को चल देने की दर्दनाक तस्वीरें पूरी दुनिया ने देखी है और आज भी हालात कोई बेहतर नहीं हुए हैं। उत्तर प्रदेश का सूचना और लोक संपर्क विभाग संवेदनहीनता की मिसाल पेश कर रहा है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। आप सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते हैं।)

इन्हें भी पढ़ें : फ़ैक्ट चेकः सूचना एवं लोकसंपर्क विभाग के फ़ैक्ट चेक का फ़ैक्ट चेक

फ़ैक्ट चेकः  महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध में यूपी नंबर वन, है या नहीं?

Uttar pradesh
UP Assembly Elections 2022
Workers and Labors
Migrant workers
Uttar Pradesh Information and Public Relations Department
COVID-19
Yogi Adityanath
fact check

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट


बाकी खबरें

  • उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा : क्या रहे जनता के मुद्दे?
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा : क्या रहे जनता के मुद्दे?
    09 Mar 2022
    उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा के चुनाव की चर्चा भले ही मीडिया में कम हुई हो, मगर चुनावी नतीजों का बड़ा असर यहाँ की जनता पर पड़ेगा।
  • Newschakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    Akhilesh Yadav का बड़ा आरोप ! BJP लोकतंत्र की चोरी कर रही है!
    09 Mar 2022
    न्यूज़चक्र के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार Abhisar Sharma बात कर रहे हैं चुनाव नतीजे के ठीक पहले Akhilesh Yadav द्वारा की गयी प्रेस कांफ्रेंस की।
  • विजय विनीत
    EVM मामले में वाराणसी के एडीएम नलिनीकांत सिंह सस्पेंड, 300 सपा कार्यकर्ताओं पर भी एफ़आईआर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले राज्य कई स्थानों पर ईवीएम को लेकर हुए हंगामे के बाद चुनाव आयोग ने वाराणसी के अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) नलिनी कांत सिंह को सस्पेंड कर दिया। इससे पहले बना
  • बिहार विधानसभा में महिला सदस्यों ने आरक्षण देने की मांग की
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार विधानसभा में महिला सदस्यों ने आरक्षण देने की मांग की
    09 Mar 2022
    मौजूदा 17वीं विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या 26 है। 2020 के चुनाव में 243 सीटों पर महज 26 महिलाएं जीतीं यानी सदन में महिलाओं का प्रतिशत महज 9.34 है।
  • सोनिया यादव
    उत्तराखंड : हिमालयन इंस्टीट्यूट के सैकड़ों मेडिकल छात्रों का भविष्य संकट में
    09 Mar 2022
    संस्थान ने एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे चौथे वर्ष के छात्रों से फ़ाइनल परीक्षा के ठीक पहले लाखों रुपये की फ़ीस जमा करने को कहा है, जिसके चलते इन छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License