NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
जहां हमेशा धर्म संकट में रहता है, वहां वैज्ञानिक दृष्टिकोण की ज़रूरत आन पड़ी!
इस समय वैज्ञानिक सोच की बड़ी ज़रूरत महसूस की जा रही है। उस अख़बार में भी वैज्ञानिक सोच का इश्तिहार छप रहा है जिस अख़बार को लोग ख़रीदते ही राशिफल देखने के लिये हैं।
राज कुमार
25 Apr 2021
कोरोना
फोटो साभार: आजतक

देश का स्वास्थ्य ढांचा चरमराया हुआ है। ऑक्सीजन, बेड और वेंटिलेटर के लिये हाहाकार मचा है। लोगों को लगातार संदेश दिया जा रहा है कि वो मास्क पहनें, दो गज की दूरी रखें, घर पर रहें, रूढ़िवादी और अंधविश्वासी सोच और तौर-तरीकों से बचें, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाएं। लापरवाही ना करें, इससे स्वास्थ्य ढांचे पर दबाव बढेगा और लचर व्यवस्था पसर जाएगी।

इस समय वैज्ञानिक सोच की बड़ी ज़रूरत महसूस की जा रही है। उस अख़बार में भी वैज्ञानिक सोच का इश्तिहार छप रहा है जिस अख़बार को लोग ख़रीदते ही राशिफल देखने के लिये हैं। उन चैनलों से भी गाहे-बगाहे वैज्ञानिकता का संदेश दिया जा रहा है जिन पर ख़बर कम और बाबाओं के प्रवचन ज्यादा प्रसारित होते हैं। जिस देश में हमेशा धर्म संकट में रहता है वहां वैज्ञानिक दृष्टिकोण की सख़्त ज़रूरत आन पड़ी है।

जिस जनता को सदियों से कूट-कूट कर कर्मकांड और अंधविश्वास का पाठ पढ़ाया गया है अब उससे एकदम वैज्ञानिक व्यवहार की उम्मीद की जा रही है। वो भी अधूरी। क्योंकि सवाल पूछना वैज्ञानिक दृष्टिकोण का मूल है, लेकिन सवाल पूछने की मनाही है। धार्मिक अंधविश्वास और भाग्यवाद कहता है सवाल मत करो जो कह दिया उसे मानो। जबकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण कहता है सवाल करो और जानों। जानने के लिए सवाल पूछना ज़रूरी है, जिसकी मनाही है। तो इसलिये आपसे मात्र इतनी ही उम्मीद है कि बस हाथ धोओ, मास्क लगाओ, बाहर मत निकलो, घर में रहो, सवाल मत पूछो, प्रचार पर भरोसा करो और उसे मानो। भाषणवीर कोरोना योद्धा चुनाव प्रचार से वापस आ गया है। वो युगपुरुष अकेला ही कोरोना को मार भगाएगा। वो मात्र भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को बचाएगा। आप उसे वोट दो, भाग्य पर भरोसा रखो, किस्मत के भरोसे रहो, जो होगा देखा जाएगा, हौसला ज्यादा रखो क्योंकि आक्सीजन कम है।

भयानक लापरवाही करके देश में आपातकालीन हालात बना देने वाले नेता साधारण लोगों को लापरवाही ना बरतने के भाषण पिला रहे हैं। लेकिन लोगों के पास सिर्फ भाषण सुनने के लिए कान ही नहीं हैं, बल्कि देखने के लिए आंखें भी हैं। जब मास्क पहनने की बात होती है तो कान उसे रिसिव करके दिमाग तक पहुंचाता है, तभी आंखें भाषणबाज़ को पब्लिक में बिना मास्क देख लेती हैं और अपना संदेश दिमाग को भेज देती हैं। दिमाग में उलझन खड़ी हो जाती है। लोग सोचने लगते हैं सब ढोंग ही है। महामारी और ढोंग गुत्थम-गुत्था कर दिए जाते हैं और देखते-देखते बात बिगड़ जाती है। जिस राज्य में अब तक चुनाव की बहार थी वहां भी कोरोना का विस्फोट हो जाता है। सारा मज़ा ही चौपट हो जाता है। प्रधान सेवक और गृहमंत्री बेमन से चुनाव रणक्षेत्र से वापस लौटते हैं और लोगों को कहते हैं कि लापरवाही ना करें।

लोग तबाही की आहट सुनते हैं। लॉकडाउन लग गया तो, खाएंगे क्या, गांव कैसे जाएंगे, ऑक्सीज़न की कमी है, बेड मिल नहीं रहे, टेस्ट कहां कराएं, हमें कोरोना हो गया तो, क्या इलाज़ मिल पाएगा वगैरह-वगैरह सवाल उन्हें घेर लेते हैं। तभी वर्चुअल चुनाव रैली से भाषण निपटाकर प्रधानमंत्री अवतरित होते हैं और कहते हैं लापरवाही नहीं बरतनी। ऐसे में डरे हुये लोग लापरवाही से तौबा कर मास्क और हाथ धोने पर फोकस कर लेते हैं। जब पूरा विश्व समाधान के लिए विज्ञान की तरफ टकटकी लगाए देख रहा होता है। तभी भाजपा के सांसद समेत अनेक नेता उम्मीद की एक किरण फोड़ते हैं। जिनका चिकित्सा से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है, वो कोरोना का इलाज़ खोज लाते हैं। कहते हैं गौमूत्र से कोरोना ठीक हो जाएगा। वो बस यहीं तक नहीं रूकते बल्कि जनहित के लिए गोबर स्नान व गौमूत्र पार्टी का भव्य आयोजन करते हैं। स्नान के दौरान गोबर आंख में फंसता है और वैज्ञानिक दृष्टि को मोतियाबिंद हो जाता है। गोबर से लिपटी वैज्ञानिक दृष्टिकोण की ज़रूरत सूखकर और भी सख़्त हो जाती है।

हर विषय पर ज्ञान झाड़ने वाले प्रधान सेवक वैज्ञानिक दृष्टिकोण जैसे गंभीर विषय को कैसे छोड़ते। उनकी एक महान उक्ति याद आ रही है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक समस्या पर बोलते हुए कहा था कि जलवायु परिवर्तन कोई ख़तरा नहीं है, बल्कि असल में हम बूढ़े हो रहे हैं। इस बात पर बच्चे भी हंसने लगे थे। आप भी हंस रहे होंगे। लेकिन बात हंसी की नहीं बल्कि चिंता की है। सोचकर देखिये अगर ऐसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले व्यक्ति के भाषणों को सारे प्रचार माध्यम, सभी भाषाओं में लाइव करने लगें तो देश में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की हालत क्या होगी। और अगर ऐसा आदमी ऐसी बातें लगातार बोलता ही रहे तो? अगर हर प्रचार माध्यम पर वो ही हर समय बोलता रहे तो? अगर उसे हरेक विषय पर बोलना हो तो? आप समझ सकते हैं कि वो अकेला ही हर कोण से वैज्ञानिक दृष्टिकोण की चूलें हिला सकता है। जबकि हमारे पास तो ऐसी विभूति हर शाख पे बैठी है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। आप सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Coronavirus
COVID-19
Religion Politics
Corona Crisis
Pandemic Coronavirus

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • working women
    सोनिया यादव
    ग़रीब कामगार महिलाएं जलवायु परिवर्तन के चलते और हो रही हैं ग़रीब
    03 Feb 2022
    सीमित संसाधनों में रहने वाली गरीब महिलाओं का जीवन जलवायु परिवर्तन से हर तरीके से प्रभावित हुआ है। उनके स्वास्थ्य पर बुरा होने के साथ ही उनकी सामाजिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है, इससे भविष्य में…
  • RTI
    अनुषा आर॰
    गुजरात में भय-त्रास और अवैधता से त्रस्त सूचना का अधिकार
    03 Feb 2022
    हाल ही में प्रदेश में एक आरटीआई आवेदक पर अवैध रूप से जुर्माना लगाया गया था। यह मामला आरटीआई अधिनियम से जुड़ी प्रक्रियात्मक बाधाओं को परिलक्षित करता है। यह भी दिखाता है कि इस कानून को नागरिकों के…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: ये दुःख ख़त्म काहे नहीं होता बे?
    03 Feb 2022
    तीन-तीन साल बीत जाने पर भी पेपर देने की तारीख़ नहीं आती। तारीख़ आ जाए तो रिज़ल्ट नहीं आता, रिज़ल्ट आ जाए तो नियुक्ति नहीं होती। कभी पेपर लीक हो जाता है तो कभी कोर्ट में चला जाता है। ऐसे लगता है जैसे…
  • Akhilesh Yadav
    भाषा
    लोकतंत्र को बचाने के लिए समाजवादियों के साथ आएं अंबेडकरवादी : अखिलेश
    03 Feb 2022
    सपा प्रमुख अखिलेश ने कहा कि, "मैं फिर अपील करता हूं कि हम सब बहुरंगी लोग हैं। लाल रंग हमारे साथ है। हरा, सफेद, नीला… हम चाहते हैं कि अंबेडकरवादी भी साथ आएं और इस लड़ाई को मजबूत करें।"
  • Rahul Gandhi
    भाषा
    मोदी सरकार ने अपनी नीतियों से देश को बड़े ख़तरे में डाला: राहुल गांधी
    03 Feb 2022
    कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि एक किंग हैं, शहंशाह हैं, शासकों के शासक हैं। राहुल गांधी ने दो उद्योगपतियों का उल्लेख करते हुए सदन में कहा कि कोरोना के समय कई…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License