NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चंडीगढ़ के अभूतपूर्व बिजली संकट का जिम्मेदार कौन है?
बिजली बोर्ड के निजीकरण का विरोध कर रहे बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान लगभग 36 से 42 घंटों तक शहर की बत्ती गुल रही। लोग अलग-अलग माध्यम से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन पूरी तरह से लाचार दिखाई दिया।
सोनिया यादव
24 Feb 2022
Chandigarh
Image courtesy : Facebook

लंबे समय से 'चंडीगढ़ बिजली बोर्ड' के निजीकरण का विरोध कर रहे बिजली कर्मचारियों ने अपने हड़ताल के दौरान शहर की बिजली गुल कर सभी को सकते में डाल दिया। एक ओर शासन, प्रशासन से लेकर हाई कोर्ट तक मामले ने तूल पकड़ लिया तो, वहीं आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। फिलहाल हाई कोर्ट की फटकार और प्रशासन के साथ बैठक के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों ने हड़ताल तो खत्म कर दी है, लेकिन केंद्र की बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की निजीकरण नीतियों का उनका विरोध अब भी जारी है।

बता दें कि चंडीगढ़ दो राज्यों (पंजाब और हरियाणा) की संयुक्त राजधानी है, लेकिन इसका प्रशासन केंद्र के अंतर्गत आता है। ये एक केंद्र शासित प्रदेश है और पंजाब के राज्यपाल इस शहर के मुख्य प्रशासक भी हैं। हड़ताल की वजह से शहर में बने अभूतपूर्व बिजली संकट के चलते प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए अगले छह महीने के लिए बिजली कर्मियों की हड़ताल पर रोक लगा दी है।

क्या है पूरा मामला?

बीते लंबे समय से बिजली कर्मचारी 'चंडीगढ़ बिजली बोर्ड' के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। लेकिन प्रशासन ने इस विरोध को नजरअंदाज करते हुए बोर्ड को निजी हाथों में सौंपने का फैसला कर लिया। जिसके बाद इस फैसले के विरोध में बिजली कर्मचारियों द्वारा 72 घंटे की हड़ताल का आह्वान किया गया था। हड़ताल सोमवार, 21 फरवरी की मध्यरात्रि 12 बजे शुरू हुई और बुधवार, 23 फरवरी को प्रशासन के साथ बैठक के बाद खत्म हुई। इस दौरान करीब 36 से 42 घंटे तक शहर की बत्ती गुल रही, जिसके चलते कई इलाकों में लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।

'सिटी ब्यूटीफ़ुल' नाम से मशहूर चंडीगढ़ शहर के अधिकतर घरों में बिजली के साथ पानी की सप्लाई तक बंद हो गई थी। पीजीआई समेत चंडीगढ़ के कई हॉस्पिटल अलर्ट मोड में आ गए थे और कुछ इस संकट से दोचार होते नज़र आए। महामारी के कारण घर से परीक्षा देने वाले छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई तो वहीं शहर की ट्रैफिक लाइट तक बंद नज़र आईं, जिस कारण ट्रैफिक नियंत्रित करने का काम पुलिसकर्मियों को मैनुअल तरीके से करना पड़ा।

कुछ स्थानीय लोगों ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में बताया कि ये हड़ताल अचानक नहीं हुई थी। बिजली कर्मचारी बीते लंबे समय से इसकी चेतावनी दे रहे थे। उन्होंने इसकी घोषणा भी काफी समय पहले ही की थी, लेकिन फिर भी प्रशासन पुख्ता इंतजाम नहीं कर सका और मूकदर्शक बनकर बैठा रहा।

प्रशासन और बिजली विभाग स्थिति संभालने में पूरी तरह नाकाम

वैसे चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से बैकअप प्लान होने का दावा तो किया जा रहा था। लेकिन इस संकट की घड़ी में प्रशासन और बिजली विभाग दोनों ही स्थिति संभालने में पूरी तरह नाकाम दिखाई दिए। जिसके चलते पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने खुद इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य अभियंता को तलब किया।

अदालत ने तत्काल दोनों पक्षों को फटकार लगाते हुए बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया, जिसके बाद शहर के लोगों ने राहत की सांस ली। अदालत ने कहा कि बिजली गुल होने से न केवल आम नागरिक बल्कि अस्पतालों में भर्ती गंभीर रूप से बीमार मरीजों पर भी इसका असर पड़ सकता है। इसके अलावा ऑफलाइन पढ़ाई करने वाले छात्रों को भी इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि कई मामलों में कोर्ट की सुनवाई इससे प्रभावित हो सकती है।

उधर, बिजली विभाग को प्राइवेट करने के फैसले का विरोध कर रहे कर्मचारियों का कहना था कि विभाग के प्राइवेट होने की वजह से उनके काम में बदलाव हो जाएगा और इसके बाद बिजली की दरों में बढ़ोतरी भी देखने को मिल सकती है।

प्रशासन से हुई बातचीत के बाद बुधवार को हड़ताल खत्म करने का ऐलान कर दिया गया। कर्मचारी नेता सुभाष लांबा ने मीडिया से कहा कि हमने 5 साल में एक हजार करोड़ से ज्यादा प्रॉफिट दिया है। हमने प्रशासन से पूछा कि इसके बावजूद वह इसका निजीकरण क्यों कर रहे हैं? प्रशासन से भरोसा मिला है कि हड़ताल करने वाले किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। यह भी सहमति बनी कि जब तक यह मामला हाईकोर्ट में है, निजीकरण से जुड़ा कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।

मालूम हो कि बिजली विभाग के निजीकरण का मामला अभी हाई कोर्ट में पेंडिंग है, इसे लेकर अदालत ने कर्मचारी यूनियन से नाराज़गी जाहिर करते हुए सवाल किया कि फैसले से पहले कर्मचारी हड़ताल पर क्यों गए?। यह सीधे तौर पर क्रिमिनल कंटेंप्ट का मामला बनता है।

सांसद किरण खेर की चुप्पी पर सवाल

गौरतलब है कि इस बिजली संकट के दौरान लोग अलग-अलग माध्यम से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन पूरी तरह से लाचार दिखाई दिया। एक ओर शहर की सांसद किरण खेर ने जहां पूरे मामले पर चुप्पी साध ली, तो वहीं आनंदपुर साहिब से सांसद मनीष तिवारी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मदद की गुहार लगाई। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि चंडीगढ़ में अव्यवस्था एवं अराजकता जैसी स्थिति है और सभी आवश्यक सेवाएं ठप्प हो गई हैं।

कांग्रेस नेता ने बुधवार को ट्वीट कर कहा, ‘प्रिय अमित शाह जी, चंडीगढ़ में 36 घंटे से बिजली नहीं है। अव्यवस्था एवं अराजकता जैसी स्थिति है। चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है और यहां सभी आवश्यक सेवाएं ठप्प हैं।’

तिवारी ने केंद्रीय गृह मंत्री ने इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन स्थिति का समाधान करने में विफल रहा है।

सरकार के निज़ीकरण के फैसले से किसको फायदा

मालूम हो कि मार्च 2021 में भी मनीष तिवारी ने लोकसभा में पूछा था कि जब चंडीगढ़ का बिजली विभाग लाभ में है तो इसे क्यों बेचा जा रहा है। इस पर ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आरके सिंह ने लिखित में जवाब दिया था कि निजी कंपनी शहरवासियों को बेहतर सुविधा देगी। यह फैसला आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से लिया गया है। सरकार ने चंडीगढ़ बिजली विभाग के तीन साल के राजस्व व पारेषण (ट्रांसमिशन) और वितरण लॉस के बारे में भी जानकारी दी। बताया कि विभाग अधिशेष (सरप्लस) में है। तीन साल में लाभ करीब चार गुना हो गया है।

बहरहाल, ये तो फिलहाल सिर्फ एक राज्य की समस्या है, लेकिन जल्द ही ऐसे मामले दूसरे राज्यों में भी देखने को मिल सकते हैं क्योंकि केंद्र सरकार के रेलवे, बैंकों से लेकर नवरत्न कंपनियों तक के निजीकरण का विरोध समय-समय पर देखने को मिलता ही रहता है। ऐसे में निकट भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा देखने को मिलें तो कोई आश्चर्य नहीं है।

Chandigarh DISCOM
UT Powermen Union
Privatisation
Eminent Electricity Distribution Limited
RP-Sanjiv Goenka Group
Atma Nirbhar Bharat Abhiyaan
Puducherry
NCCOEEE
CITU

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल


बाकी खबरें

  • Tanzania
    पैन अफ्रीकैनिज़्म टूडे सेक्रेटैरियट
    जिनकी ज़िंदगी ज़मीन है: तंजानिया में किसानों के संघर्ष
    22 Feb 2022
    माउंटंदाओ वा विकुंडी व्या वकुलिमा तंजानिया तक़रीबन 200,000 छोटे-छोटे किसानों का एक नेटवर्क है। यह नेटवर्क ज़मीन पर कब्ज़ा करने और उन लोगों को अपराधी ठहराये जाने के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रहा है, जिनकी…
  • तृप्ता नारंग
    मणिपुर चुनाव: आफ्सपा, नशीली दवाएं और कृषि संकट बने  प्रमुख चिंता के मुद्दे
    22 Feb 2022
    जहां कांग्रेस और एनपीएफ़ ने अपने घोषणापत्र में आफ्सपा को वापस लेने का ज़िक्र किया है, वहीं भाजपा इसमें चूक गई है।
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    ग्राउंड रिपोर्ट : लखनऊ की स्लम बस्तियों के सुनो चुनावी एजेंडे
    21 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह पहुंचीं लखनऊ की ऐशबाग और सदर इलाके की स्लम बस्तियों में, जहां दलित समाज बसता है। उनके चुनावी बोल, चुनाव के एजेंडे टटोले, क्या चल रही साइकिल, या खिलेगा फूल…
  •  Anish Khan
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    छात्र नेता अनीश ख़ान की हत्या का विरोध जारी, कोलकाता उच्च न्यायालय में उठी सुनवाई की मांग
    21 Feb 2022
    एसएफ़आई ने अनीश ख़ान की मौत की निंदा करते हुए इसका ज़िम्मेदार तृणमूल कांग्रेस के गुंडों को बताया है। 
  • RSS
    न्यूज़क्लिक टीम
    "गाँधी के हत्यारे को RSS से दूर करने का प्रयास होगा फेल"
    21 Feb 2022
    1930 से लेकर 1940 तक देश में हुए उतार चढ़ाव ने ही गाँधी के मृत्यु की रचना रची और उस घटना की आज के भारत से सीधी प्रासंगिकता है। "गाँधी के हत्यारे की छवि को सुधारने की जो प्रक्रिया जारी है, वह कभी भी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License