NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
टीएसआरटीसी कर्मचारियों की मौतों की ज़िम्मेदार कौन?
टीएसआरटीसी कर्मचारियों को भाजपा सहित सभी विपक्षी पार्टियां और प्रगतिशील संगठन समर्थन कर रहे हैं लेकिन आरटीसी में केन्द्र की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के बावजूद भाजपा कोई हस्तक्षेप नहीं कर रही है।
सुनील कुमार
29 Nov 2019
TSRTC
Image courtesy: Livemint

टीएसआरटीसी के लगभग 50 हज़ार कर्मचारी 26 सूत्री मांगों को लेकर 5 अक्टूबर, 2019 से हड़ताल पर थे। इन कर्मचारियों की प्रमुख मांगे इस प्रकार थीं : टीएसआरटीसी को राज्य सरकार के अधीन किया जाए; बजट का एक प्रतिशत टीएसआरटीसी को दिया जाए; ड्राइवर और कंडक्टर की नौकरी पक्की की जाए; एक अप्रैल 2017 से बढ़े हुए वेतन का भुगतान किया जाए; सीसीएस, पीएफ़, एसआरबीएस, एसबीटी की बक़ाया राशि ब्याज सहित दी जाए; अचानक मृत कर्मचारियों के परिवार को उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी दी जाए। तेलंगाना सरकार ने काम पर नहीं आने वाले कर्मचारियों को 7 अक्टूबर से बर्खास्तगी की घोषणा कर दी, जिसके बाद क़रीब 24 कर्मचारियों की हार्ट अटैक और आत्महत्या में मृत्यु हो चुकी है। कई कर्मचारियों को हार्ट अटैक, घबराहट और आत्महत्या करने के प्रयास में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। 

18 अक्टूबर, 2019 को तेलंगाना उच्च न्यायलय ने सरकार को आदेश दिया कि वह कर्मचारी यूनियनों से बातचीत करे और उनका सितम्बर माह का भुगतान करे। कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार ने कर्मचारियों की कमाई हुई रकम का भुगतान नहीं किया। 26 अक्टूबर, 2019 को टीएसआरटीसी प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच वार्ता हुई, जो विफल रही। कर्मचारी यूनियनों ने कहा कि कोर्ट के दबाव में सरकार ने बातचीत की औपचारिकता पूरी की। केवल 4 लोगों को ही अंदर बुलाया गया और उनके मोबाइल फ़ोन भी ले लिये गये और इस बातचीत में कार्यकारी निदेशक उपस्थित नहीं थे। बातचीत में पहले ही कह दिया गया था कि सरकार में टीएसआरटीसी के विलय पर चर्चा नहीं होगी, अंततः यह चर्चा विफल रही। बातचीत से पहले ही 24 अक्टूबर को मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने कह दिया था कि हड़ताल पर जाकर कर्मचारियों ने ख़ुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है और कहा कि हड़ताल तभी ख़त्म होगी जब आरटीसी बंद हो जायेगा। उन्होंने आरटीसी को सरकार में विलय से साफ़ इनकार कर दिया। 

IMG-20191110-WA0004.jpg

हड़ताल के दौरान सरकार ने 5100 रूटों को निजी हाथों में सौंप दिया और वह 5000 रूटों को भी निजी हाथों में सौंप देने की तैयारी कर रही है। मप्र के बाद तेलंगाना ऐसा राज्य होगा जहां पर सरकारी बसें नहीं होंगी। हड़ताल के 45वें दिन कोर्ट ने इस मामले को लेबर कोर्ट के हवाले कर दिया और कहा कि लेबर कोर्ट तय करे कि हड़ताल वैध है या अवैध। 

हड़ताल के दौरान क़रीब 50-60 प्रतिशत बसों को चलाया गया जिससे आम जनता को काफ़ी परेशानी हुई। स्कूलों की छुट्टियों को बढ़ाना पड़ा। सरकार ने 1500 और 1000 रुपये के दैनिक वेतनभोगी ड्राइवर और कंडक्टर को रखा और उनको छूट दे दी कि शहरी रूटों पर 5000 रुपये और ग्रामीण रूटों पर 4000 रुपये से अधिक कमाई होने पर ड्राइवर और कंडक्टर उस पैसे को रख सकते हैं। उस समय एक वीडियो वायरल हो रहा था जिसमें कंडक्टर यात्री से ज़्यादा किराया ले रहा था। कई जगह से दुर्घटना होने की भी ख़बरें आई जिसका कारण आनन-फानन में अनुभवहीन ड्राइवर और कंडक्टर का रखना था। यहां तक कि एक बस चालक ने महिला कंडक्टर से बलात्कार करने की भी कोशिश की। 

टीएसआरटीसी कर्मचारी यूनियनों ने 25 नवम्बर, 2019 को 52 दिन बाद हड़ताल को एकतरफ़ा वापस लेने की घोषणा कर दी। हड़ताल वापस लेने के बाद भी कर्मचारियों को काम पर वापस नहीं लिया जा गया और न ही उनके सितम्बर माह के कमाये हुए वेतन दिए जा रहे हैं। काम पर वापस नहीं लिये जाने से 26 नवंबर को निज़ामाबाद ज़िले के बोधन डिपो में चालक राजेन्द्र (55) की हार्ट अटैक से मौत हो गई। संगारेड्डी डिपो के कंडक्टर भीमला डिपो आया था कि उसे काम पर वापस लिया जाए पर उसे काम पर वापस नहीं लिया गया और पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया, जहां थाने में उसे हार्ट अटैक आने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी तरह हैदराबाद में एक महिला कर्मचारी पुलिस हिरासत में फ़िट्स आने से बेहोश हो गई। डिपो आए हुए कर्मचारियों को पुलिस गिरफ़्तार कर रही है। 

आरटीसी प्रबंधन ने कोर्ट में बताया है कि एक दिन हड़ताल पर जाने से एक सप्ताह का वेतन काटने का प्रावधान है। 16 नवंबर को आरटीसी प्रबंधन ने शपथ पत्र दायर कर कहा है कि यदि कर्मचारी स्वयं हड़ताल ख़त्म कर ड्यूटी पर लौटना चाहें तो उन्हें ड्यूटी पर लेना मुश्किल काम है। कर्मचारियों की हो रही मौतों पर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा है कि हड़ताल पर जाने का फ़ैसला यूनियनों का था तो कर्मचारियों की आत्महत्या या सामान्य मौत (हार्ट अटैक) की ज़िम्मेदारी भी यूनियनों को लेनी चाहिए; आत्महत्या या सामान्य मौत को अदालत कैसे रोक सकता है। क्या अपने कर्मचारियों की मौत की ज़िम्मेदार यूनियनें हैं, जो कि अपने भविष्य सुरक्षित करने की मांग को लेकर संवैधानिक अधिकार के तहत शांतिपूर्वक आंदोलन चला रही थीं।

अब ताज़ा ख़बर यह है कि  आरटीसी कर्मचारियों को सरकार ने काम पर लौटने की अनुमति दे दी है। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने घोषणा की है कि तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीएसआरटीसी) के कर्मचारी शुक्रवार से ड्यूटी पर लौट सकते हैं।

हालांकि बड़ा सवाल यह है कि आरटीसी कर्मचारियों को भाजपा सहित सभी विपक्षी पार्टियां और प्रगतिशील संगठन समर्थन कर रहे हैं लेकिन आरटीसी में केन्द्र की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के बावजूद भाजपा कोई हस्तक्षेप नहीं कर रही है। भाजपा नेता कई बार दिल्ली आकर केन्द्रीय मंत्री से मुलाकात कर चुके हैं उसके बाद केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने यह कहते हुए अपने कर्तव्य से इतीश्री कर लिया है कि आरटीसी की निजीकरण के लिए केन्द्र से अनुमति लेनी होगी। तेलंगाना सरकार ने कहा है कि हम केन्द्र की परिवहन नीति का ही पालन कर रहे हैं। क्या भाजपा वोट के लिए आरटीसी कर्मचारियों का समर्थन दे रही है जबकि 30 प्रतिशत हिस्सेदारी रहते हुए केन्द्र सरकार चुप बैठी है?

TSRTC
TSRTC Employees Strike
BJP
opposition parties
Telangana
Central Government

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात


बाकी खबरें

  • Hijab controversy
    भाषा
    हिजाब विवाद: बेंगलुरु के कॉलेज ने सिख लड़की को पगड़ी हटाने को कहा
    24 Feb 2022
    सूत्रों के अनुसार, लड़की के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी पगड़ी नहीं हटायेगी और वे कानूनी राय ले रहे हैं, क्योंकि उच्च न्यायालय और सरकार के आदेश में सिख पगड़ी का उल्लेख नहीं है।
  • up elections
    असद रिज़वी
    लखनऊ में रोज़गार, महंगाई, सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन रहे मतदाताओं के लिए बड़े मुद्दे
    24 Feb 2022
    लखनऊ में मतदाओं ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर वोट डाले। सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की बहाली बड़ा मुद्दा था। वहीं कोविड-19 प्रबंधन, कोविड-19 मुफ्त टीका,  मुफ्त अनाज वितरण पर लोगों की अलग-अलग…
  • M.G. Devasahayam
    सतीश भारतीय
    लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्याप्त खामियों को उजाकर करती एम.जी देवसहायम की किताब ‘‘चुनावी लोकतंत्र‘‘
    24 Feb 2022
    ‘‘चुनावी लोकतंत्र?‘‘ किताब बताती है कि कैसे चुनावी प्रक्रियाओं की सत्यता को नष्ट करने के व्यवस्थित प्रयासों में तेजी आयी है और कैसे इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
  • Salempur
    विजय विनीत
    यूपी इलेक्शनः सलेमपुर में इस बार नहीं है मोदी लहर, मुकाबला मंडल-कमंडल के बीच होगा 
    24 Feb 2022
    देवरिया जिले की सलेमपुर सीट पर शहर और गावों के वोटर बंटे हुए नजर आ रहे हैं। कोविड के दौर में योगी सरकार के दावे अपनी जगह है, लेकिन लोगों को याद है कि ऑक्सीजन की कमी और इलाज के अभाव में न जाने कितनों…
  • Inequality
    प्रभात पटनायक
    आर्थिक असमानता: पूंजीवाद बनाम समाजवाद
    24 Feb 2022
    पूंजीवादी उत्पादन पद्धति के चलते पैदा हुई असमानता मानव इतिहास में अब तक पैदा हुई किसी भी असमानता के मुकाबले सबसे अधिक गहरी असमानता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License