NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कानून
भारत
राजनीति
नीतीश सरकार का सड़क से सोशल मीडिया पर पहरा ‘अलोकतांत्रिक’ क्यों है?
बिहार सरकार के प्रदर्शन और चक्का जाम संबंधी नए आदेश की खूब आलोचना हो रही है। विपक्षी नेता इसे ‘किम जोंग उन का फरमान’ बता रहे हैं, तो वहीं नौकरी की आस लगाए बिहारी युवा इसे ‘अलोकतांत्रिक’ मान रहे हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
04 Feb 2021
Bihar Protest

बिहार सरकार बीते कई दिनों से अपने विवादित आदेशों के चलते चर्चा में है। सोशल मीडिया पर मंत्रियों और अधिकारियों के खिलाफ ‘आपत्तिजनक’ टिप्पणी करने वालों पर कार्रवाई करने का आदेश देने के बाद अब प्रदर्शन और चक्का जाम को लेकर एक नया फरमान सामने आया है।

इस नए नियम के तहत अगर किसी ने भी विरोध प्रदर्शन किया या सड़क जाम की तो उसे सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। जहां सरकार इस फैसले को तर्क संगत बता कर बचाव करने में लगी है तो वहीं युवा, नागरिक समाज और विपक्ष इसे अलोकतांत्रिक बता रहे हैं।

आख़िर विरोध क्यों हो रहा है इस आदेश का?

छात्र, युवा संगठन समेत तमाम नागरिक समाज के लोग सोशल मीडिया पर इस आदेश को तुगलकी फरमान बता रहे हैं, तो वहीं कई लोग भारत की मूल आत्मा यानी संविधान का हवाला देते हुए इसे लोकतांत्रिक और नागरिक अधिकारों पर हमला तक करार दे रहे हैं।

आइए बिहार से सरोकार रखने वाले कुछ लोगों से समझते हैं इस आदेश के क्या मायने हैं।

पटना यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र सूरज कुमार बताते हैं कि ये विडंबना ही है कि जिस प्रदर्शन का रास्ता अपनाकर बिहार पुत्र जेपी लोक नेता बने, आज उसी आंदोलन से जन्में लोग अपना डर दिखाकर प्रदर्शन की आवाज़ को कुचलने का प्रयास कर रहें हैं।

सूरज के अनुसार, “नीतीश कुमार धीरे-धीरे एक सीएम के तौर पर विफल साबित हो रहे हैं। विकास, बेरोज़गारी और गरीबी के सवालों से बचना चाहते हैं और शायद यही सबसे आसान रास्ता है कि ऐसे उलूल-जुलूल आदेश पारित कर दो। लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि जेपी ने इंदिरा के शासन को हिला दिया था, फिर नीतीश बाबू का ‘कुशासन’ क्या चीज़ है।”

बिहार शिक्षक अभ्यार्थी आशा सिंह न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहती हैं, “हम अपनी नियुक्ति के लिए कब से प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन बात नहीं बन पा रही। अब ज़रा सोचिए प्रदर्शन करने पर ये हाल है तो बिना प्रदर्शन तो सालों साल कोई आपकी सुध ही नहीं लेगा।”

आशा के मुताबिक, “लोकतंत्र में लोगों की आवाज़, उनके विरोध प्रदर्शन का एक माध्यम है। ये बात सुप्रीम कोर्ट भी कई बार कह चुका है, ऐसे में सरकार का ये नया फरमान समझ के परे है। जब यूनिवर्सीटी में सालों-साल पेपर नहीं होते, परीक्षा पास करने के बाद भी नियुक्ति नहीं होती, जरूरतमंदों के यहां राशन नहीं पहुंचता, तो लोग प्रदर्शन न करें तो क्या करें।”

पीपल्स यूनियन ऑफ़ सिविल लिबर्टीज़ (पीयूसीएल) से जुड़े शाबाज़ का मानना है कि ये आदेश पुलिस को किसी भी व्यक्ति पर बहुत आसानी से कार्रवाई करने और उसे सरकारी नौकरी पाने से रोक सकता है। संविधान कहता है कि सरकारें विरोध प्रदर्शन के हक को नहीं रोक सकतीं। ऐसे में ये नया क़ानून तो लोकतांत्रिक और नागरिक अधिकारों पर हमला है।

अब समझते हैं इस आदेश में है क्या?

एक फ़रवरी को बिहार के DGP की ओर से जारी इस सरकारी आदेश में लिखा है, “यदि कोई व्यक्ति विधि-व्यवस्था की स्थिति, विरोध प्रदर्शन, सड़क जाम इत्यादि मामलों में संलिप्त होकर किसी आपराधिक कृत्य में शामिल होता है और उसे इस कार्य के लिए पुलिस के द्वारा आरोप पत्र दिया जाता है, तो उनके संबंध में चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन में विशिष्ट एवं स्पष्ट रूप से प्रविष्टि की जाए। ऐसे व्यक्तियों को गंभीर परिणामों के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि उनमें सरकारी नौकरी/सरकारी ठेके आदि नहीं मिल पाएंगे।”

यानी अब अगर आप प्रदर्शन करते पकड़े जाते हैं तो आपके चरित्र प्रमाण-पत्र पर इसका असर दिखेगा। सरकारी नौकरी और सरकारी ठेके मिलने का सपना टूट सकता है। गंभीर नतीजों की चेतावनी भी दी गई है। थानेदारों से इस आदेश का पालन करने को कहा गया है।

अमर उजाला के अनुसार, राज्य सरकार से जुड़े ठेके में चरित्र प्रमाण पत्र अनिवार्य किए जाने के बाद डीजीपी एसके सिंघल ने पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट के संबंध में एक विस्तृत आदेश जारी किया है। पुलिस सत्यापन रिपोर्ट के दौरान किन बातों का ख्याल रखना है और किन बिंदुओं पर जांच करनी है, इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है।

आदेश में कहा गया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम करने, हिंसा फैलाने या किसी भी तरह विधि व्यवस्था में समस्या उत्पन्न करने जैसे आपराधिक कृत्य में शामिल होता है और अगर उसके खिलाफ पुलिस चार्जशीट दाखिल कर देती है, तो उनके पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख होगा। ऐसे में न सरकारी नौकरी मिलेगी और न ही सरकारी ठेका ले सकेंगे।

विपक्ष ने मुख्यमंत्री को बताया ‘डरपोक’

सरकार के इस फैसले को लेकर विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा है, “मुसोलिनी और हिटलर को चुनौती दे रहे नीतीश कुमार कहते है अगर किसी ने सत्ता व्यवस्था के विरुद्ध धरना-प्रदर्शन कर अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग किया तो आपको नौकरी नहीं मिलेगी। मतलब नौकरी भी नहीं देंगे और विरोध भी प्रकट नहीं करने देंगे। बेचारे 40 सीट के मुख्यमंत्री कितने डर रहे है?”

वहीं, तेजस्वी यादव के ट्वीट को उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के ट्विटर हैंडल से रिट्वीट करते हुए लिखा गया है, ‘तानाशाही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार में सजग, जागरूक और मुखर नागरिक नहीं चाहिए, सिर्फ गुलाम कठपुतली चाहिए! न्यायालय को ऐसे मूल अधिकारों पर कुठाराघात करने वाले निर्देशों का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए!’

प्रभात खबर के मुताबिक कांग्रेस एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्रा ने सरकार के इस फैसले को अलोकतांत्रिक करार देते हुए कहा, “क्या बिहार में धरना-प्रदर्शन करना अपराध हो गया है। ये नया पैटर्न बीते तीन-चार साल से नीतीश कुमार ने शुरू किया है। गैर भाजपा, गैर जदयू को लोगों पर अकारण केस दर्ज किया जाता है।”

उन्होंने कहा, “सरकार ये याद रखे कि आप हमेशा सत्ता में नहीं रहेंगे। प्रदेश की जनता इस फैसले का जवाब जरूर देगी।”

गौरतलब है कि इससे पहले भी 21 जनवरी को बिहार पुलिस मुख्यालय से एक चिट्ठी जारी हुई थी। इस आदेश में कहा गया था कि जो भी उनकी सरकार, मंत्रियों एवं अधिकारियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर तथाकथित ‘अपमानजनक टिप्पणी’ करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और यह साइबर अपराध की श्रेणी में माना जाएगा।

इस आदेश के खिलाफ भी जमकर बवाल हुआ था। इस आदेश के बाद भी विपक्ष की ओर से ये सवाल उठाया गया कि क्या बिहार सरकार आलोचना का दमन क़ानून के ज़रिए करना चाहती है।

 

Bihar Protests
Nitish Kumar
Bihar

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

पटना : जीएनएम विरोध को लेकर दो नर्सों का तबादला, हॉस्टल ख़ाली करने के आदेश

बिहार: 6 दलित बच्चियों के ज़हर खाने का मुद्दा ऐपवा ने उठाया, अंबेडकर जयंती पर राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया

बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता

पटना: विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त सीटों को भरने के लिए 'रोज़गार अधिकार महासम्मेलन'

बिहार बजट सत्र: विधानसभा में उठा शिक्षकों और अन्य सरकारी पदों पर भर्ती का मामला 

बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन

बिहार : आशा वर्कर्स 11 मार्च को विधानसभा के बाहर करेंगी प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • resident doctors' strike
    सोनिया यादव
    महाराष्ट्र: रेज़िडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल और सरकार की अनदेखी के बीच जूझते आम लोग
    04 Oct 2021
    महाराष्ट्र में लगभग सभी मेडिकल कॉलेज के करीब 5 हजार से अधिक रेसिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर हैं। उनका दावा है कि वे पिछले छह महीने से सरकार तक अपनी मांगों को पहुंचाने में लगे हैं। लेकिन सरकार उनकी बातों…
  • Lakhimpur massacre
    बादल सरोज
    भोपाल : लखीमपुर नरसंहार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
    04 Oct 2021
    उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को हुई किसानों की हत्या का विरोध मध्यप्रदेश के कई ज़िलों में हुआ। प्रदर्शनकारियों ने 'टेनी, खट्टर को बर्खास्त करो ; हत्यारों को गिरफ्तार करो' का नारा लगाया…
  • Protest
    सरोजिनी बिष्ट
    क्या "महामारी एक्ट" के बहाने विपक्षियों और जनसंगठनों को निशाना बना रही है योगी सरकार
    04 Oct 2021
    लखनऊ में 5 अक्टूबर को होने वाले प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियां ज़ोरों पर हैं लेकिन तस्वीर का दूसरा रुख यह भी है कि इधर लगातार विपक्षी दलों या आंदोलनकारियों के ख़िलाफ़ कार्यक्रम आयोजित करने के…
  • Hey Raam
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    वे कौन लोग हैं जो गोडसे की ज़िंदाबाद करते हैं?
    04 Oct 2021
    देश के भीतर ऐसी परस्पर विरोधी प्रवृत्तियां क्या हैं और क्यों हैं? यह इस समाज का पाखंड है, हमारी राजनीति का पाखंड है या फिर संघ परिवार का पाखंड है? आखिर वे कौन लोग हैं जो नाथूराम गोडसे जिंदाबाद के…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: किसानों को नहीं लोकतंत्र को कुचला!
    04 Oct 2021
    लखीमपुर खीरी में केवल किसान नहीं कुचले गए हैं बल्कि एक बार फिर भारत के लोकतंत्र को कुचला गया है। आज आम जन की यही आवाज़ है। इसी को कार्टूनिस्ट इरफ़ान ने अभिव्यक्ति दी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License