NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी-बिहार के मज़दूरों को लेकर मोदी सरकार की चिट्ठी और टाइमिंग पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
मज़दूरों को बंधुआ बनाने और ड्रग्स देने का ज़िक्र करते हुए केंद्र ने पंजाब को जो चिट्ठी लिखी है, उसे कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ जारी किसान आंदोलन से जोड़ा जा रहा है। कोई इसे पंजाब के किसानों को बदनाम करने साजिश कह रहा है तो कहीं इसे आंदोलनकारी किसानों में फूट डालने की कोशिश माना जा रहा है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Apr 2021
यूपी-बिहार के मज़दूरों को लेकर मोदी सरकार की चिट्ठी और टाइमिंग पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति भारत में राज करने के लिए अंग्रेजी हुकूमत का प्रमुख हथियार थी। अनेकता में एकता का प्रतीक कहे जाने वाले इस देश की एकता-अखंडता पर प्रहार थी। हालांकि अब यही हथियार आज़ाद भारत में जोर-शोर से प्रयोग होता है।

हाल ही में मोदी सरकार ने पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार को राज्य में बिहार के मज़दूरों को बंधुआ बनाने और ड्रग्स देने का ज़िक्र करते हुए एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी का पंजाब सरकार समेत सभी प्रमुख पार्टियों ने विरोध किया है। इसे आंदोलनकारी किसानों को तोड़ने वाला कदम बताया है, 'किसानों की छवि को ख़राब' करने का आरोप लगाया है।

बता दें कि दिल्ली की सीमाओं पर केंद्र के तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ पंजाब के किसान बीते चार महीने से ज़्यादा समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में दूसरे राज्यों से पंजाब आए मज़दूरों के हालात का जिक्र करती इस चिट्ठी की टाइमिंग पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। यूपी-बिहार से बड़ी संख्या में आए किसानों को इस आंदोलन से अलग करने की साजिश का आरोप लग रहा है।

क्या है पूरा मामला?

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस  के मुताबिक़, गृह मंत्रालय ने पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख को 17 मार्च को एक पत्र लिखा। इस पत्र में बीएसएफ से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा गया है, “गुरदासपुर, अमृतसर, फ़िरोज़पुर और अबोहार जैसे सीमावर्ती इलाक़ों से मिले मज़दूरों से पूछताछ में सामने आया कि उनमें से या तो मानसिक रूप से अक्षम थे या फिर कमज़ोर स्थिति में थे जिनसे बंधुआ मज़दूरी कराई जाती है। पकड़े गए लोग बिहार और उत्तर प्रदेश के दूर-दराज़ इलाक़ों के ग़रीब परिवारों से थे।"

पत्र में मानव तस्करी का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि इन्हें अच्छी तनख़्वाहों के नाम पर उनके घरों से लाया जाता है और यहां पर बंधुआ मज़दूरी कराई जाती है। लंबे समय तक खेतों में काम करने के लिए इन्हें ड्रग्स दी जाती है जो इनको शारीरिक और मानसिक रूप से नुक़सान पहुंचाती है।

इस पत्र में कहा गया कि 2019-20 में बीएसएफ़ ने पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे ज़िलों में ऐसे 58 मज़दूरों को पकड़ा था। चिट्ठी में कहा गया है कि पंजाब के जमींदारों ने इन लोगों को बंधुआ मज़दूर की तरह रखा हुआ था। इनमें से कुछ मज़दूरों को नशे का आदी बना कर उनसे बहुत कम पैसे देकर या फिर मुफ्त में घंटों तक काम करवाया जा रहा था।

पंजाब पुलिस के एक अफ़सर ने नाम न सार्वजनिक करने की शर्त पर अख़बार को पत्र में लिखी बातों की पुष्टि की है लेकिन उनका कहना है कि यह जांच परिणाम 'अवास्तविक' हैं।

किसान संगठनों ने लगाया 'किसानों की छवि को ख़राब' करने का आरोप

इस पत्र के सामने आने के बाद एक ओर किसान संगठन के नेताओं ने इसकी ख़ासी आलोचना की है। तो वहीं पंजाब सरकार के साथ राज्य की तमाम राजनीतिक पार्टियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सभी ने इसे केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन से जोड़ा है। उन्होंने इसे पंजाब के किसानों को बदनाम करने की केंद्र सरकार की साजिश करार दिया है।

भारत किसान यूनियन (बीकेयू) डकौंदा के महासचिव और ऑल इंडिया किसान संघर्ष कॉर्डिनेशन कमिटी के सदस्य जगमोहन सिंह ने मीडिया से बातचीत में केंद्र सरकार पर 'किसानों की छवि को ख़राब' करने का आरोप लगाया है।

जगमोहन सिंह का कहना है कि 'हमें ख़ालिस्तानी और आतंकी कहने के बाद अब केंद्र सरकार एक दूसरा सांप्रदायिक कार्ड खेल रही है। बीएसएफ़ के 2019-20 में किए गए सर्वे को अब पंजाब सरकार को क्यों भेजा जा रहा है जब किसानों का प्रदर्शन चरम पर है।'

राज्य सरकार समेत सभी प्रमुख दलों ने जताई कड़ी आपत्ति

पंजाब के कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर रंधावा ने कहा कि पंजाब में बंधुआ मजदूर जैसी कोई भी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को अपनी चिट्ठी को तुरंत वापस लेना चाहिए और पंजाब के किसानों को इस तरह से बदनाम नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “ये सरासर गलत है पंजाब के किसानों को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। भारत सरकार को तत्काल प्रभाव से अपनी चिट्ठी वापस लेनी चाहिए और पंजाब के किसानों से माफी मांगनी चाहिए। जो किसान दिल्ली में बैठे हैं उनको उथल पुथल करने के लिए ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं।”

वहीं, आम आदमी पार्टी और अकाली दल ने भी इस चिट्ठी को केंद्र सरकार की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के चलते केंद्र सरकार बैकफुट पर है, इसलिए रोजाना इस तरह के हथकंडे अपनाकर किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश में लगी है।

आम आदमी पार्टी के नेता हरपाल चीमा ने कहा कि पंजाब में किसानों और खेत मजदूरों के बीच काफी गहरा नाता है और पंजाब के किसान परिवार इन मजदूरों को काफी सम्मान देते हैं।

उधर, अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने इस चिट्ठी की टाइमिंग पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के चलते जानबूझकर ये चिट्ठी जारी की गई है ताकि किसानों को बदनाम किया जा सके।

सुखबीर सिंह बादल ने कहा, “केंद्र सरकार के मन में पंजाब के किसानों के प्रति नफरत जाग गई है। वो हर चीज पर आरोप लगाने लगते हैं, उन्होंने जो लिखा है उसका सबूत दें। वो अपनी कमजोरी छिपा रहे हैं।”

किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश

गौरतलब है कि कृषि क़ानूनों के विरोध में सड़कों पर उतरे किसानों को इससे पहले भी कई बार बदनाम करने की कोशिशें देखने को मिली है। इसमें किसानों के आंदोलन को खालिस्तानी करार दिए जाने से लेकर, इस पर माओवादी और असामाजिक तत्वों या मोदी विरोधियों द्वारा कब्जे में कर लिए जाने के आरोप लगे। इतना ही नहीं, किसानों से जुड़े छोटे व्यापारियों को किसानों का शोषण करने वाला बिचौलिया बताया गया।

समझा जा रहा है कि किसानों के आंदोलन को व्यापारियों, विपक्षी पार्टियों द्वारा प्रायोजित बताने से लेकर किसानों को ‘खालिस्तानी’ घोषित करना बाजेपी के उसी प्रोपगेंडा का हिस्सा है, जहां उसकी नीतियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वालों को ‘देश-विरोधी’, ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ या ‘अर्बन नक्सल’ बता दिया जाता है।

UttarPradesh
Bihar
farmers
Famers Protest
BJP
Yogi Adityanath
Narendra modi
Amrinder Singh

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है


बाकी खबरें

  • rakeh tikait
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार
    11 Feb 2022
    पहले चरण के मतदान की रपटों से साफ़ है कि साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण वोटिंग पैटर्न का निर्धारक तत्व नहीं रहा, बल्कि किसान-आंदोलन और मोदी-योगी का दमन, कुशासन, बेरोजगारी, महंगाई ही गेम-चेंजर रहे।
  • BJP
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: भाजपा के घोषणा पत्र में लव-लैंड जिहाद का मुद्दा तो कांग्रेस में सत्ता से दूर रहने की टीस
    11 Feb 2022
    “बीजेपी के घोषणा पत्र का मुख्य आकर्षण कथित लव जिहाद और लैंड जिहाद है। इसी पर उन्हें वोटों का ध्रुवीकरण करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घोषणा पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया में लव-लैड जिहाद को…
  • LIC
    वी. श्रीधर
    LIC आईपीओ: सोने की मुर्गी कौड़ी के भाव लगाना
    11 Feb 2022
    जैसा कि मोदी सरकार एलआईसी के आईपीओ को लांच करने की तैयारी में लगी है, जो कि भारत में निजीकरण की अब तक की सबसे बड़ी कवायद है। ऐसे में आशंका है कि इस बेशक़ीमती संस्थान की कीमत को इसके वास्तविक मूल्य से…
  • china olampic
    चार्ल्स जू
    कैसे चीन पश्चिम के लिए ओलंपिक दैत्य बना
    11 Feb 2022
    ओलंपिक का इतिहास, चीन और वैश्विक दक्षिण के संघर्ष को बताता है। यह संघर्ष अमेरिका और दूसरे साम्राज्यवादी देशों द्वारा उन्हें और उनके तंत्र को वैक्लपिक तंत्र की मान्यता देने के बारे में था। 
  • Uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : जंगली जानवरों से मुश्किल में किसान, सरकार से भारी नाराज़गी
    11 Feb 2022
    पूरे राज्य के किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, मंडी, बढ़ती खेती लागत के साथ ही पहाड़ों में जंगली जानवरों का प्रकोप और लगातार बंजर होती खेती की ज़मीन जैसे तमाम मुद्दे लिए अहम हैं, जिन्हें इस सरकार ने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License