NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आज़ादी के बाद की सबसे अधिक बेरोज़गारी से जूझ रहीं हैं औरतें: मरियम ढवले
शैली स्मृति व्याख्यान में "महिलायें; शोषण के पहले निशाने पर हैं तो प्रतिरोध के भी अग्रिम मोर्चे पर हैं" विषय पर बोलते हुए मरियम ढवले ने कहा कि बीमारी के पहले से औरतों को काम नहीं मिल रहा है। महामारी में और स्थिति बिगड़ गई है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
06 Aug 2021
मरियम ढवले

शैलेन्द्र शैली स्मृति व्याख्यान 2021 में बोलते हुए अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की महासचिव मरियम ढवले ने उदारीकरण के दौर में आमतौर से और मोदी राज में खासतौर से महिलाओं की स्थिति भयावह रूप से खराब होने की बात कही। उन्होंने कहा कि कोरोना का बहाना लेकर जो पहलकदमी सरकार कर रही है वह महिलाओं की  परेशानी और भी बढ़ा रही है। इनके आत्मनिर्भर भारत का अर्थ भारत की आत्मनिर्भरता नहीं है जनता को बाजार के हाल पर छोड़ देना और सरकार का सारी जिम्मेदारी से हाथ खींच लेना है। जैसे महामारी के असर से जनता को बचाने के लिए अमरीका ने जीडीपी का 27 प्रतिशत हिस्सा लगाया और लोगों के खातों में डाला। ब्रिटेन ने 17 प्रतिशत डाला और हमारी सरकार ने 2 प्रतिशत से भी कम लगाया। ऊपर से किसी भी क्षेत्र में बजट नहीं बढाया। स्वास्थ्य में, शिक्षा में किसी में भी नहीं। उलटे मनरेगा में कटौती कर ली गयी।

उन्होंने कहा कि बीमारी के पहले से औरतों को काम नहीं मिल रहा है। महामारी में और स्थिति बिगड़ गई है। घरेलू कामगार, मनरेगा कामगार, असंगठित क्षेत्र की मजदूर सबसे अधिक मुश्किल में हैं और सड़कों पर आ रही हैं। काम न होने से उसकी जिंदगी बेहद असुरक्षित हो गयी है। सरकार कह रही है कि मुफ्त अनाज देने वाले हैं कितना? 5 किलो। और वह भी केवल नवंबर तक। लेकिन सूखे अनाज से तो कुछ नहीं होता। उसके साथ जो जिंस देने होते हैं वह नहीं दिये जा रहे हैं। पेट्रोल डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। अपनी जिंदगी चलाने के लिये सम्मान की जिंदगी जीने के लिये जरूरत की चीजें नहीं मिल रही हैं। इन्सानी जिंदगी के सम्मान के लिये आवश्यक चीजें गायब होती जा रही हैं। बस्तियों में, गांवों में अनाज की भारी कमी है। नतीजा यह निकला कि आज भारत दुनियां का सबसे भूखा देश बन गया है। वैश्विक भूख सूचकांक (ग्लोबल हंगर इंडेक्स) के अनुसार 107 देशों में  भारत का 94वां स्थान है।

गैस सिलेंडर उज्ज्वला योजना की ठगी उजागर करते हुए मरियम ढवले ने कहा कि इसके जरिये आधार कार्ड वगैरा जोड़कर कई लोगों को गैस सब्सिडी से बाहर कर दिया गया।  नतीजे में 22,635 करोड रूपये की सब्सिडी आज 3559 हजार करोड़ पर आ गयी है। इसका मतलब कुकिंग गैस की सब्सिडी खत्म करके औरतों की जेब से पैसे निकाला जा रहा है। अब सिलेंडर 1000 रुपये के आसपास आ रहा है। उज्ज्वला का कोई नाम नहीं लेता है। सबका साथ सबका विकास कह कह कर पेट्रोल पर टैक्स लगा कर ढाई लाख करोड़ रुपये कमा रही है। जब जनता बेरोजगार है उसकी जेब से पैसा निकाला जा रहा है चोरी किया जा रहा है तब पूंजीपतियों का टैक्स 1.45 लाख करोड़ रुपये माफ कर दिया गया। मतलब सीधा है कि जनता की जेब से निकाल कर पूंजीपति की जेब भरी जा रही है।

"महिलायें; शोषण के पहले निशाने पर हैं तो प्रतिरोध के भी अग्रिम मोर्चे पर हैं" विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज 2.5 करोड नये बेरोजगार देश में घूम रहे हैं। ऊपर से मनरेगा में कटौती कर दी। 2020-21 और 21-22 के बजट में उन्होंने प्रस्ताव किया है कि जहां पर अधिकतर औरतों को सुरक्षित रोजगार मिलता है उन पब्लिक सैक्टर के रोजगारों में जैसे बैंक, एलआईसी, स्टील, इलेक्ट्रिसिटी, सीमेंट, रेलवे का निजीकरण करके पैसा खड़ा करेंगे। पूंजीपतियों का कर्ज माफ करेंगे। उन्होंने पूछा कि जनता के पैसे से खड़ी की हुयी संपत्ति को बेचने का अधिकार मोदी और शाह को किसने दिया। शिक्षा,बैंक आदि ये रोजगार महिलाओं के लिये सुरक्षित थे यद्यपि ये कम हैं लेकिन हैं तो सही।  वहां पर भी यदि रोजगार खत्म हो गया तो क्या होगा। नये कानूनों में बच्चा होने के बाद मिलने वाली छुट्टी में कटौती की गयी है। यदि महिला छुट्टी लेती है तो उसे नौकरी से निकालने का प्रावधान कर दिया गया है। इसका मतलब औरतों की बेरोजगारी बढेगी।

उन्होंने कहा कि जैसे जैसे रोजगार में कटौती होगी वैसे वैसे महिलाओं की असुरक्षा, मजबूरी, गरीबी, लाचारी, बेहाली बढ़ेगी। क्योंकि आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना एक सम्मानजनक जिंदगी के लिये जरूरी है। इसलिये रोजगार का संघर्ष, औरतों को बराबरी लेने का संघर्ष एक महत्वपूर्ण संघर्ष हैं। आज बड़ी संख्या में औरतें निकल रहीं हैं। मोदी को शर्म आनी चाहिये कि जब जनता की बदहाली बढ़ रही है तब अंबानी और अडानी की संपत्ति करोडों रूपये महामारी के दौरान बढ गयी है। निजीकरण का एक दूसरा अर्थ भी है। निजीकरण का अर्थ केवल किसी इंडस्ट्री को निजी हाथों में देना नहीं है। बल्कि महंगा होना भी है।

शिक्षा के निजीकरण से और महंगी हुयी शिक्षा का अर्थ लड़कियों में अशिक्षा का बढ़ना है। आजादी के पहले ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले ने जो आंदोलन चलाया था उसे ही आगे बढाना होगा।  लॉकडाउन में ऑनलाइन शिक्षा के दौर में गरीब का बच्चा, लड़कियां शिक्षा से बाहर हो गये हैं। एक आदिवासी गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के आचाड गांव में जब हम गये तो वहां की सरपंच हमसे मिलने आईं। उन्होंने कहा कि कैसे भी करके स्कूल चालू करवाइये क्योंकि यहां का एक भी बच्चा पिछले दो सालों में कुछ पढ़ नहीं पाया है क्योंकि गांव तक इंटरनेट है ही नहीं। ऐसे तो कई गांव और कस्बे होंगे। कई शहरों की कई गरीब बस्तियां होंगी।

उन्होंने बदले जा रहे पाठ्यक्रमों के विनाशकारी असर पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बच्चों की सोच को नींव कमजोर करने के लिये मनुस्मृति जैसे पुस्तकों का आधार लिया जा रहा है। पाठ्य पुस्तकों में यह डाला जा रहा है कि दहेज देना हमारी संस्कृति का हिस्सा है और जो परिवार दहेज नहीं देता वह देशद्रोही होता है। यह क्या पढ़ाने वाले हैं हमारे बच्चों को। और यदि बच्चों के नाजुक दिमागों में ऐसी विषैली विचारधारा को रोपा जायेगा तो वह बडे होने पर अपनी पत्नी और अन्य महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करेगा यह सोचा जा सकता है। अंधविश्वास को पाठ्य पुस्तकों में घुसाया जाता है।  सांप्रदायिक मान्यतायें उसमें घुसाई जा रही हैं। आज़ादी के 74वें साल में  शर्म की बात है कि जो उस वक्त हमारे संविधान का हमारी प्रगतिशील सिद्धांतों का विरोध कर रहे थे वे आज सत्ता में हैं।

उन्होंने बताया कि लक्ष्यद्वीप के अंदर कैसा जुल्म ढाया जा रहा है। अपने पूंजीपति दोस्तों को यह सरकार उस द्वीप की पूरी संपत्ति को दे देना चाहते हैं। उसका विरोध करने वाले हर किसी को दबाया जा रहा है। लेकिन वे लड़ रहे हैं, वहां पर एक फिल्मकार आयशा सुल्ताना ने इसके खिलाफ आवाज उठायी तो उसके खिलाफ देशद्रोह की धारा लगा दी।  सीएए और एनआरसी के खिलाफ औरतों ने आवाज उठायी। किसान आंदोलन में भी महिलायें सक्रिय हैं क्योंकि वे जानती हैं कि जमीन जाने का मतलब औरतों की बदहाली है। हर आंदोलन में हर मोड़ पर वे सक्रिय हैं। किसान आंदोलन में महापंचायत में वे भाग ले रही हैं उसका नेतृत्व कर रही हैं। खेती में 70 प्रतिशत काम औरते करती हैं जैसे वनोपज जमा करना, पशुपालन करना जिसका उसे कोई मुआवजा नहीं मिलता लेकिन ये सारे काम खेती से जुड़े काम हैं। क्योंकि जमीन के साथ उसकी जिंदगी, उसका घर जुडा हुआ है। और किसान आंदोलन में भी वे बड़ी संख्या में भाग ले रही हैं।

उन्होंने कहा कि हिंसा मनुवादी सोच की वजह से बढ़ रही है, जो कहता  है कि औरतें सिर्फ उपभोग की वस्तु हैं। अभी दिल्ली के अंदर एक दलित बच्ची पर बलात्कार हुआ। बलात्कारी बेधड़क हैं क्योंकि उन्हें उन लोगों से संरक्षण मिलता है जो ये बाते कर रहे हैं कि औरतों का स्थान घर में है औरतों को बराबरी का अधिकार नहीं मिलना चाहिये। औरतें दोयम स्थान पर हैं। औरतों का स्थान इंसान के नाते नहीं है।

उन्होंने साफ़ किया कि यदि यह बढ़ेगा तो औरतें इसे  सहन नहीं करेगी। मनुवाद को टक्कर देते देते औरतों ने अपनी जिंदगी बनायी है। और यदि उसी आग में फिर से औरतों को ढकेलने की कोशिश की जायेगी तो उसे औरतें सहन नहीं करेंगी। वे एकजुट होंगी और एक नए  भारत के निर्माण के लिये, भारत को बचाने के लिये किये जाने वाले आंदोलन में हजारों लाखों की संख्या में शामिल होंगी।

Mariam Dhawale
AIDWA
Women's unemployment
Narendra modi
Modi government
Gender Based Discrimination

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  •  Punjab security lapse
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब में पीएम की "सुरक्षा चूक" पर पूरी पड़ताल!
    06 Jan 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे में आज अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे की। साथ ही वे नज़र डाल रहे हैं कि किस तरह मीडिया द्वारा किसानों को टारगेट किया जा रहा है
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक : संबित ने जर्जर स्कूलों को सपा सरकार का बताया, स्कूल योगी सरकार के निकले
    06 Jan 2022
    एक बार फिर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विटर पर फ़ेक न्यूज़ के ज़रिये विपक्ष पर निशाना साधने की कोशिश की है।
  • jnu
    रवि कौशल
    जेएनयू हिंसा के दो साल : नाराज़ पीड़ितों को अब भी है न्याय का इंतज़ार 
    06 Jan 2022
    ऐसा लगता है कि दिल्ली पुलिस की जांच भटक चुकी है। अब तक दोषियों की पहचान तक नहीं की जा सकी है।
  • punjab security
    शंभूनाथ शुक्ल
    'सुरक्षा चूक' की आड़ में राजनीतिक स्टंट?
    06 Jan 2022
    प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट में पंजाब के अधिकारियों को दिए बयान से बचना चाहिए था। और जो कुछ करना था, वह सीधे गृह मंत्रालय के आला अधिकारी करते तो भविष्य में ऐसी किसी भी चूक से प्रशासन सतर्क रहते। तथा…
  • election
    सौरभ शर्मा
    यूपी: युवाओं को रोजगार मुहैय्या कराने के राज्य सरकार के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते हैं!
    06 Jan 2022
    लगभग 43 उम्मीदवारो को उत्तर प्रदेश में पिछले साल विभिन्न चिकित्सा विभागों द्वारा विभिन्न कोरोना लहरों के दौरान में रोजगार पर रखा गया था। बाद में इन्हें काम से मुक्त कर दिया गया। उन्होंने इस कदम के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License