NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आधी आबादी
महिलाएं
भारत
बिहार विधानसभा में महिला सदस्यों ने आरक्षण देने की मांग की
मौजूदा 17वीं विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या 26 है। 2020 के चुनाव में 243 सीटों पर महज 26 महिलाएं जीतीं यानी सदन में महिलाओं का प्रतिशत महज 9.34 है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 Mar 2022
बिहार विधानसभा में महिला सदस्यों ने आरक्षण देने की मांग की

भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी संतोषजनक नहीं है। इसको लेकर पहले कई रिपोर्ट आ चुकी हैं। ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2020 के अनुसार राजनीतिक सशक्तिकरण के मामले में भारत 18वें स्थान पर रहा। भारत में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों के नेता महिला सशक्तिकरण की बातें तो करते है,  लेकिन जब उन्हें चुनावों के समय टिकट देने की बात आती है, तो वह पीछे हट जाते हैं। ऐसे में जब तक महिला राज्यों के विधानमंडल और संसद में चुन कर नहीं आएंगी तो भला राजनीतिक तौर पर वे सशक्त कैसे हो पाएंगी।

इसी क्रम में मंगलवार 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर महिला विधायकों ने बिहार विधानसभा में महिलाओं के लिए 35 फीसदी आरक्षण देने की मांग की। कार्रवाई शुरु होते ही सत्ता और विपक्ष की महिला सदस्य वेल में आ गईं और नारेबाजी करते हुए आरक्षण देने की मांग करने लगी। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार स्पीकर विजय सिन्हा द्वारा महिला सदस्यों के आग्रह करने पर वो अपने सीट पर तुरंत लौट भी गई। इसके बाद बिहार विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर स्पीकर ने स्त्री शक्ति की प्रशंसा करते हुए सभी महिलाओं को बधाई दी। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवताओं का वास होता है।

इस दौरान राजद के आलोक मेहता ने महिला दिवस पर कहा कि विधानसभा में महिला को पीठासीन सदस्य तो बनाया ही गया है, एक दिन के लिए महिला मुख्यमंत्री भी बनाया जाना चाहिए। इस पर स्पीकर विजय सिन्हा ने पलटते हुए कहा कि महिला विधायक को एक दिन के लिए नेता प्रतिपक्ष बनाकर विपक्ष पहले अपनी तरफ से शुरुआत करे।

विधान परिषद में कार्यकारी सभापति ने कहा कि बिहार में महिला सशक्तिकरण के लिए कई कार्य हुए। बिहार का अनुसरण अब दूसरे राज्य भी कर रहे हैं। उन्होंने महिला सदस्यों को पहले अपनी बात रखने का मौका दिया।

बता दें कि मौजूदा 17वीं विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या 26 है। 2020 के चुनाव में 243 सीटों पर महज 26 महिलाएं जीतीं यानी सदन में महिलाओं का प्रतिशत महज 9.34 है। पार्टियों के आधार पर बात करें तो भाजपा की 9 विधायक हैं वहीं जदयू की 8 महिला विधायक हैं जबकि राजद की 5, कांग्रेस की 2, वीआईपी की 1 और हम की 1 महिला विधायक हैं।

उधर 16वीं विधानसभा में महिला विधायकों की बात करें तो इसमें 29 सदस्य थीं। इस तरह मौजूदा विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या तीन घट गई।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली बीजेपी ने 2020 में बिहार विधानसभा के हुए चुनाव में 13 महिलाओं को टिकट दिया था जिनमें से 9 महिला जीतकर विधानसभा पहुंची हैं। इस चुनाव में बीजेपी 108 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी। वहीं 2015 में बीजेपी से सिर्फ चार महिला विधायक ही जीत हासिल कर पाई थीं। इस चुनाव में पार्टी ने 14 सीटों पर महिलाओं को उतारा था।

उधर बीजेपी की सहयोगी दल जदयू की बात करें तो 2020 के चुनाव में वह 115 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी जिसमें उसने सिर्फ 22 सीटों पर महिलाओं को टिकट दिया था। इस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल ने 144 में 16 सीटों पर और इसकी सहयोगी कांग्रेस ने अपने हिस्से में 70 सीटों में महज सात सीट पर महिलाओं को टिकट दिया था।

हालांकि बिहार में पंचायत में महिलाओं को नीतीश सरकार ने 50 फीसदी आरक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाने का काम किया है लेकिन विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण देने की बात अभी आगे नहीं बढ़ी है। वर्ष 2006 में पंचायत में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने वाला बिहार देश का पहला राज्य बना था।

वर्ष 1992 के 73वें संवैधानिक संशोधन में देश में ग्राम-पंचायत के मुखिया के एक तिहाई पद महिलाओं के लिए आरक्षित होने को अनिवार्य कर दिया। इससे स्थानीय स्तर पर महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ा।

Bihar
Assembly
Women
Reservation
India
politics
BJP
jdu
RJD
local bodies
Panchayat

Related Stories

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

लड़कियां कोई बीमारी नहीं होतीं, जिनसे निजात के लिए दवाएं बनायी और खायी जाएं

सवाल: आख़िर लड़कियां ख़ुद को क्यों मानती हैं कमतर

यूपी से लेकर बिहार तक महिलाओं के शोषण-उत्पीड़न की एक सी कहानी

रूस और यूक्रेन: हर मोर्चे पर डटीं महिलाएं युद्ध के विरोध में

भाजपा ने अपने साम्प्रदायिक एजेंडे के लिए भी किया महिलाओं का इस्तेमाल

2022 में महिला मतदाताओं के पास है सत्ता की चाबी

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'

बिहार शेल्टर होम कांड-2’: मामले को रफ़ा-दफ़ा करता प्रशासन, हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी: अयोध्या में चरमराई क़ानून व्यवस्था, कहीं मासूम से बलात्कार तो कहीं युवक की पीट-पीट कर हत्या
    19 Mar 2022
    कुछ दिनों में यूपी की सत्ता पर बीजेपी की योगी सरकार दूसरी बार काबिज़ होगी। ऐसे में बीते कार्यकाल में 'बेहतर कानून व्यवस्था' के नाम पर सबसे ज्यादा नाकामी का आरोप झेल चुकी बीजेपी के लिए इसे लेकर एक बार…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 
    19 Mar 2022
    दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए सभी ट्रेड यूनियन जुट गए हैं। देश भर में इन संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठकों का सिलसिला जारी है।
  • रवि कौशल
    पंजाब: शपथ के बाद की वे चुनौतियाँ जिनसे लड़ना नए मुख्यमंत्री के लिए मुश्किल भी और ज़रूरी भी
    19 Mar 2022
    आप के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने बढ़ते क़र्ज़ से लेकर राजस्व-रिसाव को रोकने, रेत खनन माफ़िया पर लगाम कसने और मादक पदार्थो के ख़तरे से निबटने जैसी कई विकट चुनौतियां हैं।
  • संदीपन तालुकदार
    अल्ज़ाइमर बीमारी : कॉग्निटिव डिक्लाइन लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी का प्रमुख संकेतक है
    19 Mar 2022
    आम तौर पर अल्ज़ाइमर बीमारी के मरीज़ों की लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी 3-12 सालों तक रहती है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    स्लोवेनिया : स्वास्थ्य कर्मचारी वेतन वृद्धि और समान अधिकारों के लिए कर रहे संघर्ष
    19 Mar 2022
    16 फ़रवरी को स्लोवेनिया के क़रीब 50,000 स्वास्थ्य कर्मचारी काम करने की ख़राब स्थिति, कम वेतन, पुराने नियम और समझौते के उल्लंघन के ख़िलाफ़ हड़ताल पर चले गए थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License