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ऑस्ट्रेलिया में महिलाओं ने यौन हिंसा के ख़िलाफ़ रैली निकाली
सरकारी अधिकारियों पर हाल ही में यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर कैनबरा, सिडनी और मेलबर्न जैसे प्रमुख शहरों सहित 40 से अधिक शहरों और कस्बों में हज़ारों की संख्या में महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया।
पीपल्स डिस्पैच
16 Mar 2021
ऑस्ट्रेलिया में महिलाओं ने यौन हिंसा के ख़िलाफ़ रैली निकाली

ऑस्ट्रेलिया में हजारों महिलाओं ने सोमवार 15 मार्च को यौन उत्पीड़न और हिंसा के खिलाफ रैली निकाली। खबरों के अनुसार, सभी प्रमुख शहरों और यहां तक कि छोटे शहरों में हज़ारों महिलाएं न्याय और यौन हिंसा व कार्यस्थल पर उत्पीड़न को समाप्त करने की मांग करते हुए सड़कों पर उतर गईं। ये राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन हाल ही में सत्ताधारी रूढ़िवादी लिबरल-नेशनल गठबंधन सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को यौन उत्पीड़न के मामले में जिम्मेदार ठहराने के बाद हुआ है।

लिबरल पार्टी के कर्मचारी ब्रिटानी हिगिंस जिन्होंने अपने सहयोगियों द्वारा 2019 में कथित रेप की घटना के बारे में खुलासा किया था वह कैनबरा में संसद भवन के बाहर की रैली में प्रमुख वक्ताओं में से एक थीं।

फरवरी महीने में रेप के दो आरोपों के चलते ऑस्ट्रेलियाई संसद में हंगामा हुआ था खासकर सत्तारूढ़ रूढ़िवादी गठबंधन को इस नाराजगी का सामना करना पड़ा। इन मामलों में कार्रवाई के तरीकों को लेकर भी नाराजगी रही। सबसे पहले हिगिंस ने खुलासा किया था। उन्होंने 2019 में रक्षा मंत्री और सीनेटर लिंडा रेनॉल्ड्स के कार्यालय से वरिष्ठ सहयोगियों द्वारा कथित रूप से रेप किए जाने को लेकर खुलासा किया था।

हिगिंस ने यह भी कहा था कि उन्हें अपनी नौकरी खोने का खतरा था और इसलिए उन्होंने इस मामले को वापस ले लिया। उन्होंने सीनेटर रेनॉल्ड्स और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं पर उनकी मदद नहीं करने का भी आरोप लगाया।

हिगिंस के मामले के सामने आने के महज एक हफ्ते बाद एबीसी ने जून 2020 में एक दिवंगत महिला द्वारा संसद के वरिष्ठ सदस्यों को लिखे गए पत्रों को प्रकाशित किया था। उन्होंने 1988 में मॉरिसन सरकार में मंत्री द्वारा रेप किए जाने का आरोप लगाया था। उस समय वह 16 वर्ष की थी। इसी महीने मामला वापस लेने के कुछ दिनों बाद ही पीड़िता ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।

अटॉर्नी जनरल क्रिश्चियन पोर्टर जो मॉरिसन सरकार में सदन के नेता और औद्योगिक मामलों के मंत्री थे बाद में उन्होंने आरोपी मंत्री होने की बात स्वीकार की थी। लेकिन पोर्टर ने इन आरोपों से इनकार किया और रैली के दिन इस मामले को प्रकाशित करने वाले एबीसी और लुईस मिलिगन के खिलाफ मामला दायर किया।

दोनों मामलों में नारीवादियों और जमीनी स्तर के एक्टिविस्टों ने सरकार पर पीड़ितों के प्रति घोर असंवेदनशीलता का आरोप लगाया और जवाबदेही की मांग की। 

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