NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कोविड-19
भारत
राजनीति
दिल्ली की सीमाओं पर मौजूद धरना स्थलों पर मज़दूर, किसान साथ में मनाएंगे मई दिवस
यह फैसला लिया गया है कि बढ़ते कोविड-19 के मामलों के मद्देनजर कोई भी रैली आयोजित नहीं की जायेगी, गाँव और मोहल्ला स्तर पर मजदूर दिवस को संयुक्त रूप से मनाया जायेगा, जिसमें श्रम संहिता एवं कृषि कानूनों के खतरों को प्रमुखता से दर्शाया जायेगा।
रवि कौशल
30 Apr 2021
दिल्ली की सीमाओं पर मौजूद धरना स्थलों पर मज़दूर, किसान साथ में मनाएंगे मई दिवस
फाइल फोटो।

नई दिल्ली: साझा संघर्षों की खातिर अपने गठबंधन को आगे बढ़ाते हुए किसान संगठनों और केन्द्रीय मजदूर यूनियनों ने बृहस्पतिवार को घोषणा की है कि राष्ट्रीय राजधानी के प्रवेश द्वारों पर जारी विरोध स्थलों और सारे देश भर में मई दिवस या मजदूर दिवस को संयुक्त रूप से मनाया जायेगा। किसान नेताओं ने कहा कि महामारी की विभीषिका को देखते हुए, इस बार बिना किसी बड़े जमावड़े या रैली के ही मई दिवस को गांवों और मोहल्ला  स्तर पर मनाया जायेगा। 

इस बैठक में शामिल आल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) के अध्यक्ष, अशोक धवले ने न्यूज़क्लिक  को बताया कि आगामी कार्यों की रुपरेखा तैयार करने के लिए दोनों समूहों के बीच बने राज्य-स्तरीय समन्यव का रोड-मैप भी तैयार कर लिया गया है।

उन्होंने कहा “पारंपरिक तौर पर श्रमिक भारी संख्या में इकट्ठा होकर शहरों में मार्च निकालते हुए आठ घंटों के काम के अधिकार के लिए किये गए बहादुराना संघर्षों को याद किया करते थे। लेकिन कोरोनावायरस के उभार और एक अक्षम सरकार, जो आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधायें मुहैय्या करा पाने में नाकाम है, को देखते हुए हमने फैसला लिया है कि इस बार कोई भी बड़ा जमावड़ा या रैलियां नहीं निकाली जायेंगी। हम अपनी इकाईयों से इस दिवस को स्थानीय स्तर पर मनाने के लिए कहेंगे।”

धवले ने कहा कि मजदूर, जो मुनाफा उत्पन्न करते हैं, और किसान जो कि उत्पादक वर्ग है, ये दोनों ही वर्तमान में मौजूदा शासन के हमले के अधीन हैं। उन्होंने आगे कहा, “सरकार ने लगभग एक ही समय में चार श्रम संहिता और तीन कृषि कानूनों को लाने का काम किया था। इसलिए विपक्ष को भी संयुक्त रूप से काम करना चाहिए। बैठक में पांच बिंदुओं पर कार्यवाई करने को लेकर सहमति बनी है, जिसमें कृषि कानूनों को निरस्त करने, श्रम संहिता को निरस्त करने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक न्यूनतम समर्थन मूल्य की क़ानूनी गारंटी, विद्युत संशोधन अधिनियम को रद्द करने और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के निजीकरण पर रोक। मैं समझता हूँ कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है, जो किसानों और मजदूरों को संघर्ष करने के लिए एकजुट कर रहा है।”

यह पूछे जाने पर कि इस भयावह महामारी के बीच में कैसे किसान संगठन अपने संघर्ष को जारी रखने के बारे में योजना बना रहे हैं, पर धवले का कहना था: “स्थिति वास्तव में चिंताजनक है और मौतों में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिल रही है। यह बात भी सच है कि अब हमारी लड़ाई दीर्घकालीन हो चुकी है। लेकिन हमें इस बात को कत्तई नहीं भूलना चाहिए कि अब तीन महीनों से भी अधिक समय से वार्ता रुकी हुई है। संवाद के जरिये संकट का हल निकालने के लिए केंद्र के पास जो सुनहरा अवसर था, उसे उसने गंवा दिया है। इसलिए वह दूसरों पर आरोप नहीं लगा सकता। इसने पहले किसानों को विफल किया, और अब यह नागरिकों को विफल कर रहा है। जहाँ तक किसान संगठनों का संबंध है, हम इस बात के लिए दृढ प्रतिज्ञ हैं कि हम तभी वापस लौटेंगे, जब कृषि कानून रद्द कर दिए जाएँ, भले ही कुछ भी हो जाए।”

जम्हूरी किसान सभा के अध्यक्ष कुलवंत सिंह संधू ने न्यूज़क्लिक  को बताया कि किसानों के संगठनों ने 10 मई को सिंघु बॉर्डर पर एक आल इंडिया कन्वेंशन का आह्वान किया है, जहाँ से वे आगामी कार्यक्रमों की घोषणा करेंगे। “फिलहाल, हमने फैसला लिया है कि मजदूर दिवस को संयुक्त रूप से मनाएंगे। इसी प्रकार बंदा बहादुर सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की जायेगी, जिन्होंने 17वीं शताब्दी के पंजाब में व्यापक पैमाने पर भूमि सुधार के काम को संपन्न किया था।”

जब उनसे इस बारे में पूछा गया कि मौजूदा कोविड लहर को तो शांत होने में महीनों लग सकते हैं, ऐसे में वे अपने आंदोलन को कैसे जारी रख पाने के बारे में सोचते हैं, पर संधू का कहना था: “हम कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए हर जरुरी कदम को अपना रहे हैं। अगर किसी को भी इसके लक्षणों की शिकायत होती है तो हमने इसके लिए ऑक्सीजन सिलिंडर और अम्बुलेंसों की व्यवस्था कर रखी है। जो लोग हमसे आंदोलन को स्थगित करने के लिए कह रहे हैं, उन्हें यह बात अच्छे से समझ लेनी चाहिए कि कोरोनावायरस तो हमें एक बार में ही मार सकता है, लेकिन ये कृषि कानून तो हमें हजारों घाव देकर रोज-रोज तिल-तिलकर मार डालेगा। हमें ऐसी मौत मंजूर नहीं है।”

संगठनों ने महामारी से निपटने के लिए सरकार की लचर नीति की भी जमकर आलोचना की, जिसके चलते रोकी जा सकने वाली मौतों में लगातार इजाफा होता जा रहा है। सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के महासचिव, तपन सेन ने न्यूज़क्लिक  के साथ अपनी बात में कहा कि महामारी के बीच में टीकाकरण नीति को निजी खिलाडियों के लिए छप्पर फाड़ मुनाफा कमाने के लिए तैयार किया गया है।”

सेन के अनुसार “देश में आज तक कभी भी टीकाकरण को इस प्रकार से निजी क्षेत्र के लिए मुनाफा कमाने के लिए नियंत्रण मुक्त नहीं किया गया। यही वजह है कि हमने मुफ्त और सार्वभौमिक टीकाकरण नीति की मांग की है। इस बात को भी अवश्य ध्यान में रखा जाना चाहिए कि सार्वजनिक क्षेत्र की वे कंपनियां जो इन टीकों का उत्पादन करने में सक्षम है, उन्हें पिछले सात वर्षों में पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया और उनके पुनरुद्धार के बारे में कोई ध्यान नहीं दिया गया है।”

सेंट्रल ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के एक संयुक्त बयान में यूनियनों ने कहा है: “कोविड महामारी की दूसरी लहर से निपटने में भी सरकार की इसी प्रकार की विनाशकारी और बर्बर नीतियों के जरिये उसका क्रूर असंवेदनशील व्यवहार काफी कुछ परिलक्षित होता है। परिणामस्वरूप सारे देश में असंख्य रोकी जा सकने वाली मौतें हो रही हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के नेटवर्क की दुःखद अक्षमता देखने में आ रही है - और यह सब हर चीज में निजीकरण के साथ साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को ध्वस्त करने और कमजोर करने के ही नतीजे के रूप में सामने आ रहा है। उपर से मोदी सरकार द्वारा आम लोगों की जिंदगियों की कीमत पर वैक्सीन को बेचकर मुनाफा कमाने वाली प्रतिगामी वैक्सीन पालिसी को बढ़ावा दिया जा रहा है। बैठक में सरकार की इस प्रकार की बर्बर नीतियों की जमकर आलोचना की गई, जो महामारी का मुकाबला कर पाने में विफल रही है और मांग की गई है कि घोषित टीकाकरण नीति को रद्द किया जाए और सभी के लिए निःशुल्क सार्वभौमिक टीकाकरण को सुनिश्चित किया जाए।”

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Workers, Farmers to Observe May Day Together at Protest Sites on Delhi’s Borders

MSP
farmers movement
CITU
AIKS

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर


बाकी खबरें

  • working women
    सोनिया यादव
    ग़रीब कामगार महिलाएं जलवायु परिवर्तन के चलते और हो रही हैं ग़रीब
    03 Feb 2022
    सीमित संसाधनों में रहने वाली गरीब महिलाओं का जीवन जलवायु परिवर्तन से हर तरीके से प्रभावित हुआ है। उनके स्वास्थ्य पर बुरा होने के साथ ही उनकी सामाजिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है, इससे भविष्य में…
  • RTI
    अनुषा आर॰
    गुजरात में भय-त्रास और अवैधता से त्रस्त सूचना का अधिकार
    03 Feb 2022
    हाल ही में प्रदेश में एक आरटीआई आवेदक पर अवैध रूप से जुर्माना लगाया गया था। यह मामला आरटीआई अधिनियम से जुड़ी प्रक्रियात्मक बाधाओं को परिलक्षित करता है। यह भी दिखाता है कि इस कानून को नागरिकों के…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: ये दुःख ख़त्म काहे नहीं होता बे?
    03 Feb 2022
    तीन-तीन साल बीत जाने पर भी पेपर देने की तारीख़ नहीं आती। तारीख़ आ जाए तो रिज़ल्ट नहीं आता, रिज़ल्ट आ जाए तो नियुक्ति नहीं होती। कभी पेपर लीक हो जाता है तो कभी कोर्ट में चला जाता है। ऐसे लगता है जैसे…
  • Akhilesh Yadav
    भाषा
    लोकतंत्र को बचाने के लिए समाजवादियों के साथ आएं अंबेडकरवादी : अखिलेश
    03 Feb 2022
    सपा प्रमुख अखिलेश ने कहा कि, "मैं फिर अपील करता हूं कि हम सब बहुरंगी लोग हैं। लाल रंग हमारे साथ है। हरा, सफेद, नीला… हम चाहते हैं कि अंबेडकरवादी भी साथ आएं और इस लड़ाई को मजबूत करें।"
  • Rahul Gandhi
    भाषा
    मोदी सरकार ने अपनी नीतियों से देश को बड़े ख़तरे में डाला: राहुल गांधी
    03 Feb 2022
    कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि एक किंग हैं, शहंशाह हैं, शासकों के शासक हैं। राहुल गांधी ने दो उद्योगपतियों का उल्लेख करते हुए सदन में कहा कि कोरोना के समय कई…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License