NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
भारत
अंतरराष्ट्रीय
2019 में विज्ञान: मानव इतिहास, ईबोला का इलाज और क्वांटम कंप्यूटिंग
2019 में विज्ञान की दुनिया में कुछ अहम खोजें हुईं।
संदीपन तालुकदार
03 Jan 2020
Year 2019 in Science History
Image Courtesy: Smithsonian Magazine

ज्ञान के विकास में सबसे ज़्यादा उस चीज़ की अहमियत होनी चाहिए, जिससे इंसानियत को मदद मिले। ऐसी खोजें जिनमें नए आयाम खोलने का माद्दा है, जो अतीत और भविष्य की हमारी समझ को बेहतर करती हैं। 2019 में विज्ञान की दुनिया में भी ऐसी ही कुछ खोज हुईं। 

जेनेटिक्स के ज़रिये इंसान

इस साल मानव इतिहास के बारे में जेनेटिक रिसर्च के ज़रिये बहुत कुछ पता लगाया गया। 2019 में जीवाश्म और दूसरी चीजों से मिले प्राचीन डीएनए के आधार पर इंसानी अतीत के बारे में कुछ बड़े खुलासे हुए।

1. ऐसी ही एक खोज में ''आधुनिक इंसान'' की उत्पत्ति से संबंधित स्रोत के दावे किए गए। इसके मुताबिक़ आधुनिक इंसान सबसे पहले अफ़्रीका के दक्षिणी हिस्से में नज़र आया। यह एक आर्द्रभूमि है, जहां आजकल बोत्सवाना, नामीबिया और ज़िम्बाब्वे जैसे देश हैं। यहां दो लाख साल पहले आधुनिक इंसान की उत्पत्ति हुई। बाद में इंसान यहां से निकल गए। यह अध्ययन कैसे किया गया? रिसर्चर ने 200 ऐसे लोगों का ब्लड सैंपल इकट्ठा किया, जिनके डीएनए के बारे में आसानी से पता नहीं चलता है। इनमें नामीबिया और दक्षिण अफ़्रीका के चरवाहे और भोजन इकट्ठा करने वाले शिकारी शामिल थे। रिसर्चर ने माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए (mtDNA) का अध्ययन किया, यह डीएनए सिर्फ़ माताओं से बच्चों को मिलता है। इस डीएनए का परीक्षण 1000 दूसरे अफ़्रीकी लोगों से किया गया, जिनमें ज़्यादातर दक्षिण अफ़्रीकी थे। रिसर्चर ने पाया कि खोयसान बोलने वाले लोगों का mtDNA (L0) फ़िलहाल जीवित लोगों में सबसे पुराना है। अध्ययन में खुलासा हुआ कि इस L0 की उत्पत्ति दो लाख साल पहले हुई।  

2. इस क्षेत्र में एक और अहम खोज हुई। खोज में पता चला कि आज के इंसान होमो सेपिएन्स के सबसे क़रीबी रिश्तेदार होमो इरेक्टस आख़िरी बार इंडोनेशिया के जावा आईलैंड पर मौजूद थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक़ यह स्पेशीज़ सोलो नदी के किनारे नगांडोंग नाम की जगह पर पाई जाती थी। हड्डियों के एक जमावड़े से मिले जीवाश्म की डेटिंग से इस बारे में पता चला। यहां होमो इरेक्टस की खोपड़ियां और पैर की हड्डियां मिली थीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि क़रीब बीस लाख साल पहले होमो इरेक्टस अफ़्रीका से प्रवास कर एशिया पहुंचे और चार लाख साल पहले इनका नाश हो गया। लेकिन नई खोज से पता चला है कि नगांडोंग के पास यह स्पेशीज़ 1,08,000 साल से 1,17,000 साल पहले तक रहती थी।

3. रहस्यमयी प्राचीन मानव प्रजाति डेनिसोवन्स के बारे में हमारी जानकारी सिर्फ़ इतनी है कि वे साइबेरिया के अलताई पहाड़ों की डेनिसोवा गुफाओं में रहते थे। क्योंकि इस प्राचीन प्रजाति के जीवाश्म केवल डेनिसोवा की गुफाओं में पाए गए हैं। लेकिन ''नेचर'' में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक़, डेनिसोवन इंसानों से संबंधित एक जबड़ा तिब्बत के पठार में पाया गया है। इससे कई दिलचस्प जानकारियां सामने आई हैं। यह जीवाश्म क़रीब एक लाख साठ हज़ार साल पुराना है। जीवाश्म में मिला जबड़ा मज़बूत और इसके दांत ज़रूरत से ज्यादा बड़े हैं, जो सबसे प्राचीन निएंडरथल की तरह नज़र आते हैं। लेकिन इनके प्रोटीन एनालिसिस से पता चला है कि ये साइबेरियाई डेनिसोवियन्स के क़रीब हैं।

modern human.JPG

क्वांटम कम्प्यूटिंग और सुप्रीमेसी:

QUANTUM.JPG

कंप्यूटर वैज्ञानिक लगातार कंप्यूटिंग की गति बढ़ाए जाने की कोशिश कर रहे हैं, जो मौजूदा क्षमता से कहीं ज़्यादा होगी। अब अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग के लिए क्वांटम मैकेनिक्स के सिद्धांतों का उपयोग किया जा रहा है। इन कोशिशों में कुछ सफलता भी मिली है। लेकिन गूगल द्वारा क्वांटम सुप्रीमेसी हासिल करने के दावे पर विवाद खड़ा हो गया।

गूगल के 53 बिट क्यूबिट कंप्यूटर सायकामोर ने एक ऐसी समस्या को सिर्फ 200 सेकंड में हल कर दिया, जिसे करने में आम कंप्यूटर को क़रीब दस हज़ार साल लगते। दरअसल यह इस दिशा में पहला क़दम है। इससे हमें पता चलता है कि एक क्वांटम कंप्यूटर भी फंक्शनल कंप्यूटेशन कर सकता है और कुछ ख़ास तरह की समस्याओं को पारंपरिक कंप्यूटरों से कई गुना तेज़ी से हल करने में सक्षम है।

लेकिन दूसरी तरफ़ आईबीएम ने गूगल के दावों को ख़ारिज कर दिया और दावा किया कि सायकामोर के ज़रिये कुछ भी अतिरिक्त हासिल नहीं किया गया है। यह टकराव क्वांटम कंप्यूटिंग में व्यावसायिक हितों को काफ़ी हद तक सामने रखता है।

प्रकृति, पर्यावरण और अमेज़न के जंगल

amazon.JPG

मानव जनित मौसम परिवर्तन अब ख़तरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। मौसम विज्ञानी पहले ही बता चुके हैं कि कैसे यह ''क्रिटिकल स्टेट'' वैश्विक मौसम में अपरिवर्तनीय बदलाव लाएगी और इंसानियत के लिए आपदाएं पैदा करेगी। 2019 में भी दुनिया ने तूफान, बाढ़ और जंगली आग के चलते भयानक नुकसान झेला। मौसम परिवर्तन से पैदा हो रहीं खतरनाक पर्यावरणीय परिघटनाओं से इतर, अब प्रकृति ख़ुद संकटग्रस्त स्थिति में आ चुकी है। इसका कारण सिर्फ़ इंसान द्वारा किया गया पर्यावरण का नुकसान है।

''इंटरगवर्मेंटल साइंस पोलिसी प्लेटफॉर्म'' द्वारा जैव-विविधता और इकोसिस्टम सर्विस (IPBES) पर दी गई ग्लोबल रिपोर्ट में क़रीब 15,000 साइंटिफ़िक पेपर्स का परीक्षण किया गया है। साथ ही जैवविविधता में होने वाले बदलावों पर दूसरे स्रोतों का भी अध्ययन है। इसमें जैवविविधता की उन क्षमताओं का भी परीक्षण है जिनके ज़रिये यह भोजन, साफ़ पानी और हवा प्रदान करती है।

रिपोर्ट के मुताबिक़, जानवरों और पेड़-पौधों की क़रीब आठ लाख जानी-पहचानी प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। इसमें 40 फ़ीसदी एमफीबियन स्पेशीज़ (ज़मीन और पानी, दोनों में रहने में सक्षम) और एक तिहाई जलीय स्तनधारियों की प्रजातियां हैं।

अगस्त में अमेज़न के रेनफॉरेस्ट में अभूतपूर्व आग लगी। यह दुनिया की सबसे बड़ी आग थी। आग इतनी भयावह थी कि आसपास के शहरों पर काले धुएं के बादल छा गए। रिपोर्टों के मुताबिक़, ब्राज़ील के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस रिसर्च (INPE) ने इस साल 72,000 आग की घटनाएं दर्ज कीं। यह पिछले साल से 80 फ़ीसदी ज़्यादा हैं। इससे ज़्यादा चिंता की बात यह है कि इनमें से 9000 घटनाएं पिछले एक हफ़्ते में ही हुई हैं।

अमेज़न की आग के पीछे मुख्य वजह बोलसोनारो के नेतृत्व वाली सरकारी नीतियां रहीं, जिनकी वजह से बड़े पैमाने पर ब्राज़ील में जंगलों को काटा गया। अब जंगलों के भीतरी हिस्सों समेत एक बड़े भाग को व्यापार उद्यम लगाने के लिए खोल दिया गया है।

ईबोला के इलाज की ओर एक नया क़दम

ebola.JPG

अतीत में ईबोला के इलाज के लिए कोई दवा मौजूद नहीं थी। लेकिन कांगों में हुए चार में से दो प्रयोगों में मरीज़ की जान बचाने में कामयाबी मिली है। इस नई पद्धति में मौजूदा और नई दवाईयों के एक मिश्रण का उपयोग किया जाता है। इसे PALM ट्रायल का नाम दिया गया। इस नई पद्धति में मोनोक्लोनाल एंटीबॉडीज़ और एंटीवायरल एजेंसीज़ का भी उपयोग होता है।

मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज़ का निर्माण प्रतिरोधी कोशिकाओं से होता है, जो एक ख़ास क़िस्म की ''पेरेंट सेल'' का क्लोन होती हैं। यह एंटीबॉडीज़ कुछ खास कोशिकाओं या प्रोटीन के साथ जुड़ती हैं। इसका उद्देश्य मरीज़ के प्रतिरोधी तंत्र को ईबोला सेल पर हमले के लिए प्रेरित करना होता है।

किलोग्राम को दोबारा तय किया गया

KILOGRAM.JPG

वज़न मापने की ईकाई ''किलोग्राम'' को फ्रांस में एक धातु के टुकड़े से परिभाषित किया गया था। धातु के इस टुकड़े को इंटरनेशनल प्रोटोटाइप किलोग्राम या बिग K नाम से जाना जाता है। यह प्लेटीनियम-इरिडीयम मिश्रधातु से बना होता है, जिसका वजन एक किलो है। यह मिश्रधातु फ्रांस के ''ब्यूरो ऑफ़ वेट्स एंड मीजर्स'' में 1889 से रखी हुई है। इस IPK की दुनिया भर में कई प्रतियां हैं। इनका इस्तेमाल दुनियाभर में वजन के एक मानक पैमाने के लिए होता है।

लेकिन अब किलोग्राम की परिभाषा पहले जैसी नहीं है। इस साल इंटरनेशनल मीट्रॉलॉजी डे पर एक शताब्दी से उपयोग किए जा रहे किलोग्राम को इस्तेमाल करने का तरीक़ा बदल गया है। किलोग्राम को अब ''प्लांक कंस्टेंट (Planck Constant)'' से परिभाषित किया जाएगा, जो कभी बदलता नहीं है।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Year 2019 in Science: History of Humans, Ebola Treatment and Quantum Computing

Quantum Supremacy
Quantum Computing
Amazon fire
Ebola Treatment
Denisovan
Botswana as Cradle of Humanity
Last Homo Erectus in Java
Kilogram Defined on Planck’s Constant.

Related Stories

नए अध्ययन में पाया गया कि आधुनिक मानवों में है 7% जीनोम की विशेषता

चीन : डेनिसोवन या नई मानव प्रजाति की हो सकती है 'ड्रैगन मैन' की खोपड़ी


बाकी खबरें

  • CORONA
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 15 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 278 मरीज़ों की मौत
    23 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 15,102 नए मामले सामने आए हैं। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 28 लाख 67 हज़ार 31 हो गयी है।
  • cattle
    पीयूष शर्मा
    यूपी चुनाव: छुट्टा पशुओं की बड़ी समस्या, किसानों के साथ-साथ अब भाजपा भी हैरान-परेशान
    23 Feb 2022
    20वीं पशुगणना के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि पूरे प्रदेश में 11.84 लाख छुट्टा गोवंश है, जो सड़कों पर खुला घूम रहा है और यह संख्या पिछली 19वीं पशुगणना से 17.3 प्रतिशत बढ़ी है ।
  • Awadh
    लाल बहादुर सिंह
    अवध: इस बार भाजपा के लिए अच्छे नहीं संकेत
    23 Feb 2022
    दरअसल चौथे-पांचवे चरण का कुरुक्षेत्र अवध अपने विशिष्ट इतिहास और सामाजिक-आर्थिक संरचना के कारण दक्षिणपंथी ताकतों के लिए सबसे उर्वर क्षेत्र रहा है। लेकिन इसकी सामाजिक-राजनीतिक संरचना और समीकरणों में…
  • रश्मि सहगल
    लखनऊ : कौन जीतेगा यूपी का दिल?
    23 Feb 2022
    यूपी चुनाव के चौथे चरण का मतदान जारी है। इस चरण पर सभी की निगाहें हैं क्योंकि इन क्षेत्रों में हर पार्टी की गहरी हिस्सेदारी है।
  • Aasha workers
    वर्षा सिंह
    आशा कार्यकर्ताओं की मानसिक सेहत का सीधा असर देश की सेहत पर!
    23 Feb 2022
    “....क्या इस सबका असर हमारी दिमागी हालत पर नहीं पड़ेगा? हमसे हमारे घरवाले भी ख़ुश नहीं रहते। हमारे बच्चे तक पूछते हैं कि तुमको मिलता क्या है जो तुम इतनी मेहनत करती हो? सर्दी हो या गर्मी, हमें एक दिन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License