यस बैंक की उठापटक की कहानी भी सामने आयी है। यह कहानी भारत के बैंक के साथ किए जा रहे खिलवाड़ को दर्शाती है। बताती है कि किसी तरह से सरकार और बैंकों की रेगुलेटरी अथॉरिटी भारत में क्रोनी कैपिटलिज्म को पनपाने में मदद कर रही हैं।
यस बैंक की उठापटक की कहानी भी सामने आयी है। यह कहानी भारत के बैंक के साथ किए जा रहे खिलवाड़ को दर्शाती है। बताती है कि किसी तरह से सरकार और बैंकों की रेगुलेटरी अथॉरिटी भारत में क्रोनी कैपिटलिज्म को पनपाने में मदद कर रही हैं। आरबीआई यस बैंक के हरकतों के बारे में बहुत पहले से जान रही थी लेकिन फिर भी आरबीआई ने कड़ी कार्रवाई नहीं की। अब प्राइवेट बैंक को पब्लिक बैंक के सहारे बचाने की कोशिश की जा रही है। यानी जनता के डूब रहे हुए पैसे को फिर से जनता के पैसे से उबारा जाएगा। इसी मुद्दे पर आर्थिक पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता ने वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार कावेरी बामजई से बात की। सुनिए इस बातचीत का हिस्सा
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