NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
योगी जी ने नाइट कर्फ़्यू तो लगा दिया, लेकिन रैलियों में इकट्ठा हो रही भीड़ का क्या?
देश में कोरोना महामारी फिर से पैर पसार रही है, ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों ने राज्यों को नाइट कर्फ़्यू लगाने पर मजबूर कर दिया है, जिसके मद्देनज़र तमाम पाबंदिया भी लगा दी गई हैं, लेकिन सवाल यह है कि रैलियों में इकट्ठा होती भीड़ में क्या कोरोना नहीं पनप सकता?
रवि शंकर दुबे
24 Dec 2021
night curfew
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

कोरोना के नए वैरियंट की रफ्तार ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है, जिसको देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा फ़ैसला लिया है, योगी सरकार ने पूरे प्रदेश में रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक कर्फ़्यू लगाने का फ़ैसला लिया है। जबकि 1 जनवरी तक नोएडा में धारा 144 लागू कर दी गई है।

योगी सरकार की ओर से नाइट कर्फ़्यू लगाने की तारीख़ 25 दिसंबर की रात से तय की गई है। जिसके बाद से शादी-विवाह समेत सार्वजनिक कार्यक्रमों में 200 से ज्यादा लोग शामिल नहीं हो सकेंगे। इसमें भी कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना होगा।

मौजूदा दौर की बात करें तो उत्तर प्रदेश में 266 से ज्यादा कोरोना के एक्टिव केस हैं, वहीं दूसरी ओर भारत में तेज़ी से बढ़ता ओमिक्रोन भी चिंता का विषय बना हुआ है, देश में ओमिक्रोन के मामले 350 का आंकड़ा पार कर चुके हैं, जिसको लेकर केंद्र ने राज्यों को नाइट कर्फ़्यू पर विचार के लिए चिट्ठी भी लिखी थी। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा था कि ओमिक्रोन कोरोना के पुराने वैरियंट डेल्टा से 3 गुना ज्यादा तेजी से फैलता है, इसलिए राज्य ज़रूरी उपाए अपनाने शुरू कर दें।

केंद्र ने राज्यों से क्या कहा?

  • ज़रूरत पड़ने पर नाइट कर्फ़्यू, आयोजनों और भीड़ जुटने पर पाबंदी लगाएं।
  • कंटेनमेंट और बफर ज़ोन बनाएं, हर सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग की जाए।
  • हॉस्पिटल में बेड, एंबुलेंस, ऑक्सीजन इक्विपमेंट और दवाओं के लिए इमरजेंसी फंड इस्तेमाल करें।
  • डोर-टू-डोर टेस्टिंग कैंपेन चलाई जाए, हर पॉजीटिव मरीज़ की कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग की जाए।
  • होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की मॉनिटरिंग की जाए।

उत्तर प्रदेश से पहले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राज्य में नाइट कर्फ़्यू लगाने की घोषणा की थी, जिसके लिए उन्होंने सोशल सोशल मीडिया समेत अन्य प्लेटफॉर्म पर भी इसकी जानकारी साझा की थी। इसके अलावा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी राज्य में नाइट कर्फ़्यू लगाने का ऐलान कर दिया है।वहीं महाराष्ट्र की उद्धव सरकार ने नाइट कर्फ़्यू की घोषणा  कर दो है, महाराष्ट्र में रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक पाबंदियां लागू रहेंगी।साथ ही महाराष्ट्र में आने के लिए फुली वैक्सीनेटेड होना या फिर 72 घंटे पहले की निगेटिव RT-PCR दिखानी पहले से ज़रूरी है।अन्य राज्यों की बात करें तो गुजरात, कर्नाटक और दिल्ली में पहले से ही कुछ पाबंदियों का ऐलान कर दिया गया है, जैसे दिल्ली में क्रिसमस और न्यू ईयर की सैलिब्रेशन पर पाबंदी लगा दी गई है, गुजरात की बात करेंगे तो यहां अहमदाबाद, सूरत, राजकोट, वड़ोदरा, गांधीनगर, जामनगर, भावनगर और जूनागढ़ में 31 दिसंबर तक नाइट कर्फ़्यू लगाया गया है। कर्नाटक में 30 दिसंबर से 2 जनवरी तक न्यू ईयर पार्टी पर रोक लगा दी गई है।

कहने को तो केंद्र सरकार और राज्य सरकारें कोरोना को लेकर गंभीर दिख रही हैं, लेकिन चुनावीं रैलियों में दिख रहा लोगों का हुजूम सभी नियमों पर सरकारी गंभीरता की धज्जियां उड़ा रहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी रैलियों में बिना मास्क लगाए दिख ही जाते हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार को कोसने वाला विपक्ष भी कानून को ताक पर रखने में पीछे नहीं है, अखिलेश यादव से लेकर, ओम प्रकाश राजभर तक अपनी रैलियों में बिना मास्क लगाए दिखाई पड़ जाते हैं। हद तो वहां हो जाती है जब नेता, रैलियों में इकट्ठा होने वाले समर्थकों को अपने काम और विपक्षियों की बुराइयां गिनाते हैं जबकि एक बार भी कोरोना से बचने के उपाय नहीं बताते। खैर, यूपी समेत पांच राज्यों में चुनाव हैं, लेकिन रैलियों में इकट्ठा हो रही भीड़ ये दर्शाती है कि सरकार के कोरोना को लेकर सारे नियम सिर्फ कागज़ी हैं।

Uttar pradesh
Night curfew
COVID-19
Coronavirus
Yogi Adityanath
BJP
PM Modi Rally

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  • अफ़ग़ानिस्तान: आतंकी हमले के ख़ूनी छींटे भविष्य पर
    न्यूज़क्लिक टीम
    अफ़ग़ानिस्तान: आतंकी हमले के ख़ूनी छींटे भविष्य पर
    27 Aug 2021
    वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के हवाई अड्डे पर हुए सुसाइड आतंकी हमले और आईएसआईएस-के की ख़ौफ़नाक साज़िशों के संदर्भ में अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य को लेकर चिंता पर…
  • डॉ. कफ़ील को ‘भड़काऊ भाषण’ मामले में राहत: “योगी सरकार की मनमानी पूरी तरह उजागर”
    सोनिया यादव
    डॉ. कफ़ील को ‘भड़काऊ भाषण’ मामले में राहत: “योगी सरकार की मनमानी पूरी तरह उजागर”
    27 Aug 2021
    डॉ. कफ़ील ख़ान को एक के बाद एक मिलती राहत, राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार और पुलिस प्रशासन की मंशा पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
  • नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन का फायदा किसको?
    अजय कुमार
    नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन का फायदा किसको?
    27 Aug 2021
    सड़क और रेलवे लाइन तो बहुत दूर की बात है, गांव-देहात के इलाकों में ढंग के प्राइवेट स्कूल तक नहीं होते हैं। यह भारत के प्राइवेट सेक्टर की एक कड़वी हकीकत है।
  • अफ़ग़ानिस्तान पर असमंजस में मोदी सरकार
    न्यूज़क्लिक टीम
    अफ़ग़ानिस्तान पर असमंजस में मोदी सरकार
    27 Aug 2021
    विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कल विपक्ष के साथ अफ़ग़ानिस्तान में उपज रहे हालात पर बात की। मगर भारत सरकार की अफ़ग़ान नीति में इस वक़्त बहुत असमंजस है। न्यूज़ में तालिबान पर बहस के ज़रिए राजनीतिक एजेंडा…
  • अस्पताल में भर्ती हुए कोविड-19 के आधे मरीज़ों में एक साल बाद भी लक्षण मौजूद : अध्ययन
    भाषा
    अस्पताल में भर्ती हुए कोविड-19 के आधे मरीज़ों में एक साल बाद भी लक्षण मौजूद : अध्ययन
    27 Aug 2021
    चीन के वुहान में 1,276 मरीजों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि तीन लोगों में से एक को 12 महीने बाद भी सांस लेने में दिक्कतें बनी हुई थी जबकि गंभीर रूप से बीमार कुछ मरीजों में फेफड़े से जुड़ी समस्याएं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License