NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
युवा
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
भाजपा से क्यों नाराज़ हैं छात्र-नौजवान? क्या चाहते हैं उत्तर प्रदेश के युवा
उत्तर प्रदेश के नौजवान संगठनों का कहना है कि भाजपा ने उनसे नौकरियों के वादे पर वोट लिया और सरकार बनने के बाद, उनको रोज़गार का सवाल करने पर लाठियों से मारा गया। 
असद रिज़वी
19 Feb 2022
Youth

उत्तर प्रदेश के चुनावों में “किसानों” के बाद अब “नौजवानों” का कहना है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उनके अधिकारों को अनदेखा किया है। नौजवानों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ग़लत नीतियों के कारण देश-प्रदेश में बेरोज़गारी बढ़ी है और अर्थव्यस्था कमज़ोर हुई है।

रोज़गार के सवाल का जवाब लाठियाँ!

प्रदेश के नौजवान संगठनों का कहना है कि भाजपा ने उनसे नौकरियों के वादे पर वोट लिया और सरकार बनने के बाद, उनको रोज़गार का सवाल करने पर लाठियों से मारा गया। संगठनों का कहना है कि भगवा सरकार में शिक्षण संस्थाओं में बढ़ती साम्प्रदायिकता से विद्यार्थीयों के भविष्य को ख़तरा पैदा हो रहा है।

काम का अधिकार

प्रदेश में हो रहे विधानसभा चुनावों में नौजवानों ने छात्र-नौजवान अधिकार अभियान की शुरुआत की है। अभियान का उद्देश्य राजनीतिक पार्टियों पर “राइट टू वर्क” (काम का अधिकार) मौलिक अधिकार बनाने के लिये दबाव बनाना है।

राजधानी लखनऊ आये छात्र एवं नौजवान संगठनों ने कहा कि मोदी-योगी सरकार की आर्थिक व शिक्षा नीतियाँ छात्रों और नौजवानों की विरोधी हैं। केंद्र की मोदी सरकार में सिर्फ़ कुछ उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने के लिए नीतियां बनाई जाती हैं।

जीएसटी और नोटबन्दी से रोज़गार ख़त्म

इस संगठनों का कहना है कि जीएसटी और नोटबन्दी ने रोज़गार ख़त्म कर दिये हैं।जिसके कारण देश में बेरोज़गारों की संख्या बहुत बढ़ गई है। लेकिन जब भी छात्रों और नौजवानों ने अपने हक़ के लिये आवाज़ उठाई, उन्हें लाठियाँ, मुकदमे, और जेल ही मिली।

छात्रों और नौजवानों का कहना है कि लाखों की संख्या में रिक्त पद हैं। लेकिन न राज्य सरकार और न केंद्र सरकार में भर्तियाँ हो रही हैं। छोटे उद्योगों के समाप्त होने से जो बदहाली हुई है उसके कारण नौजवान भूखमरी की कगार पर है।

नौजवानों का कहना है कि मोदी-योगी सरकारों ने कोविड-19 जैसी महामारी में जनता को मरने के लिए छोड़ दिया। छात्र संगठन मानते हैं नई शिक्षा नीति पूरा तरह से आम व गरीब छात्रों की विरोधी है।

अभियान ने यह तय किया है कि छात्र -नवजवान मौजूदा चुनाव में छात्र नवजवान विरोधी ताकतों को पराजित करने का कार्य करेंगे। न्यूज़क्लिक ने अभियान से जुड़े कुछ नौजवानों, छात्रों, एक अधिवक्ता और संविदा कर्मी से उनके मुद्दों, आरोपों और समस्याओं पर लखनऊ में बात करी।

'गर्मी' नहीं 'भर्ती' निकाले सरकार

इंकलाबी नवजवान सभा की प्रदेश संयुक्त सचिव राजीव गुप्ता का कहना है कि चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा “गर्मी” निकालने की बात कर रही है, लेकिन “भर्ती” निकालने का नाम भी नहीं ले रही है। गुप्ता के अनुसार एक सर्वेक्षण में मालूम हुआ कि कोविड-19 के दौरान लाखों की संख्या में लोग दिल्ली और मुंबई आदि शहरों से  “पूर्वांचल” के गाँवों में वापिस आये। जो बेरोज़गार बैठे हैं जिनकी बात चुनावों में कोई नहीं कर रहा है।

इंकलाबी नवजवान सभा के नेता गुप्ता मानते हैं कि मोदी सरकार की नई शिक्षा नीति से शिक्षा का निजीकरण होगा और ग़रीब किसान और मज़दूर आदि के बच्चे अशिक्षित रह जायेंगे। इस अभियान में नई शिक्षा नीति वापिस लेने के लिए भी दबाव बनाया जायेगा।

लाखों रिक्त पद पर नौकरी नहीं

युवा शक्ति संगठन के संयोजक गौरव सिंह ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि आज की तारीख़ में नौजवानों के लिये रोज़गार से बड़ा कोई प्रश्न कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि नेताओं से पूछना चाहिए कि जिस उत्तर प्रदेश ने देश को सबसे ज़्यादा प्रधानमंत्री दिये, वहाँ रोज़गार के अवसर इतने कम क्यों हैं?

सिंह ने आगे कहा कि सरकारी आँकड़ों के अनुसार केंद्र और राज्य सरकारों के मिलाकर 28 लाख सरकारी पद ख़ाली पड़े हैं। लेकिन इनपर नियुक्तियाँ नहीं हो रही हैं।वह दावा करते हैं कि 2017 के क़रीब उत्तर प्रदेश जो 5 हज़ार पद ख़ाली पड़े थे, जब योगी की सरकार बनी थी, उन पर अभी नियुक्तियाँ नहीं हुईं हैं। उन्होंने कहा कि 65 प्रतिशत युवाओं को नज़रंदाज़ कर के देश को आगे नहीं ले जाया जा सकता।

ज्योति राय ने कहा कि मोदी सरकार की ग़लत आर्थिक नीतियों के कारण क़रीब 5 लाख लागू और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम ख़त्म हो गये। यह उद्यम बड़ी संख्या में रोज़गार देते थे। छात्र-नौजवान अधिकार अभियान का कहना है प्रधानमंत्री मोदी की सरकार का
उद्देश्य केवल अडानी-अंबानी को लाभ पहुँचाना होता है।

बेरोज़गारी के कारण बढ़ा अपराध

राय के अनुसार कोविड-19 महामारी के बाद देश 10 करोड़ से अधिक लोग बेरोज़गार हुए हैं। वह कहते हैं कि बेरोज़गारी के कारण समाज में अपराध भी बढ़ रहा है। रोज़गार की माँग करते हुए राय कहते हैं- “काम के अधिकार” पर क़ानून बनना चाहिए ताकि सभी को रोज़गार का अवसर मिले।

राय ने कहा कि नौजवानों को चुनावों के दौरान बुनियादी मुद्दों से भटकाने के लिए  कर्नाटक से “हिजाब” का मुद्दा उठाया गया है। जबकि कौन क्या पहनता है यह उसका निजी मसला है। आज हिजाब पर सवाल उठाने वाले असल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए कल “सिख समुदाय” की पगड़ी को भी मुद्दा बना सकते हैं।

सुभाष चंद्र बोस रोज़गार गारंटी क़ानून

सोशलिस्ट युवाजन सभा के मोहम्मद अहमद ख़ान ने न्यूज़क्लिक को बताया कि नौजवानों द्वारा “सुभाष चंद्र बोस रोज़गार गैरंटी क़ानून” का एक मसौदा बनाया गया है। जिसपर “प्राइवट मेंबर बिल” की तरह संसद में बहस होना चाहिए, ताकि देश के करोड़ों बेरोज़गारों के लिए रोज़गार सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि नौजवान अब केवल रोज़गार की बात करने वाले को सत्ता में लाना चाहता है।

अटका दी जाती हैं नौकरियां

अधिवक्ता वीरेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि इस सरकार में नौजवान हताश और निराश हैं। क्योंकि जो संस्थान नौकरियाँ देते थे सरकार उनका निजीकरण कर रही है। जो संस्थान बचे हैं वहाँ ठेका और संविदा प्रणाली लागू है। हाईकोर्ट के वकील त्रिपाठी कहते हैं नौकरियों के विज्ञापन निकाल कर, सरकार धन कमाती है।लेकिन नियुक्तियाँ पर्चा लीक होने आदि के नाम पर अटका दी जाती हैं।

संविदा कर्मियों का आंदोलन

उत्तर प्रदेश रोडवेज संविदा कर्मचारी संघ  के होमेन्द्र मिश्रा के अनुसार 35 हज़ार संविदा कर्मचारी परिवहन विभाग में संविदा पर काम करता है, जिसको वक़्त पर वेतन भी नहीं मिल रहा है। कर्मचारी संघ 2012 से आंदोलन कर रहा है लेकिन किसी सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी है।

मिश्रा ने कहा कि इस बार संविदा कर्मचारी जो उनके संपर्क में हैं, वह मतदान नहीं करेंगे। मिश्रा ने बताया कि हाल के वर्षों में परिवहन विभाग में एक भी कर्मचारी नियमित नहीं हुआ है। एक हज़ार कर्मचारियों की सूची सरकार के पास गई है लेकिन वह भी शासन में लंबित है।

प्रदेश में हो रहे विधानसभा चुनावों में ऐसा लग रहा है कि कहीं न कहीं सत्ता पक्ष का  ध्रुवीकरण का मुद्दा विफ़ल हो रहा है। जबकि कृषि, रोज़गार और शिक्षा जैसे बुनयादी मुद्दे राजनीति के केंद्र में आ रहे हैं। यह मुद्दे चुनाव में निर्णायक भूमिका भी निभाते नज़र आ रहे हैं। क्योंकि यह मुद्दे सांप्रदायिकता पर भारी पड़ते दिख रहे हैं।

ये भी पढ़ें: यूपी चुनाव: योगी राज में पेपर लीक और परीक्षा-संबंधित घोटालों की कोई कमी नहीं

Uttar pradesh
UP Assembly Elections 2022
youth
Student and Youth
unemployment
BJP
Youth organizations
Subhash Chandra Bose Employment Guarantee Act

Related Stories

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

राष्ट्रीय युवा नीति या युवाओं से धोखा: मसौदे में एक भी जगह बेरोज़गारी का ज़िक्र नहीं

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

बढ़ती बेरोजगारी पूछ रही है कि देश का बढ़ा हुआ कर्ज इस्तेमाल कहां हो रहा है?

झारखंड: राज्य के युवा मांग रहे स्थानीय नीति और रोज़गार, सियासी दलों को वोट बैंक की दरकार

उत्तराखंड चुनाव : क्या है युवाओं के मुद्दे

कौन हैं ओवैसी पर गोली चलाने वाले दोनों युवक?, भाजपा के कई नेताओं संग तस्वीर वायरल

क्या बजट में पूंजीगत खर्चा बढ़ने से बेरोज़गारी दूर हो जाएगी?

छात्रों-युवाओं का आक्रोश : पिछले तीन दशक के छलावे-भुलावे का उबाल


बाकी खबरें

  • CSTO
    एम. के. भद्रकुमार
    कज़ाख़िस्तान में पूरा हुआ CSTO का मिशन 
    18 Jan 2022
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बुधवार को क्रेमलिन में रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु के साथ कज़ाख़िस्तान मिशन के बारे में कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीट ऑर्गनाइजेशन की “वर्किंग मीटिंग” के बाद दी गई चेतावनी…
  • election rally
    रवि शंकर दुबे
    क्या सिर्फ़ विपक्षियों के लिए हैं कोरोना गाइडलाइन? बीजेपी के जुलूस चुनाव आयोग की नज़रो से दूर क्यों?
    18 Jan 2022
    कोरोना गाइडलाइंस के परवाह न करते हुए हर राजनीतिक दल अपनी-अपनी तरह से प्रचार में जुटे हैं, ऐसे में विपक्षी पार्टियों पर कई मामले दर्ज किए जा चुके हैं लेकिन बीजेपी के चुनावी जुलूसों पर अब भी कोई बड़ी…
  • Rohit vemula
    फ़र्रह शकेब
    स्मृति शेष: रोहित वेमूला की “संस्थागत हत्या” के 6 वर्ष बाद क्या कुछ बदला है
    18 Jan 2022
    दलित उत्पीड़न की घटनायें हमारे सामान्य जीवन में इतनी सामान्य हो गयी हैं कि हम और हमारी सामूहिक चेतना इसकी आदी हो चुकी है। लेकिन इन्हीं के दरमियान बीच-बीच में बज़ाहिर कुछ सामान्य सी घटनाओं के प्रतिरोध…
  • bank
    प्रभात पटनायक
    पूंजीवाद के अंतर्गत वित्तीय बाज़ारों के लिए बैंक का निजीकरण हितकर नहीं
    18 Jan 2022
    बैंकों का सरकारी स्वामित्व न केवल संस्थागत ऋण की व्यापक पहुंच प्रदान करता है बल्कि पूंजीवाद की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर विपक्ष का सवाल !
    17 Jan 2022
    न्यूज़चक्र में अभिसार बात कर रहे हैं समाजवादी पार्टी के चुनाव आयोग पर किए गए सवालों और धर्म संसद के मामले में हुई गिरफ़्तारी की
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License