NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
आंदोलन
समाज
भारत
राजनीति
अब लिंचिंग के लिए गाय के बहाने की भी ज़रूरत नहीं रही
अब किसी को आपका झोला तलाशने की ज़रूरत नहीं है, न आपकी फ्रिज में झांकने की ज़रूरत है। बस ‘जय श्रीराम’ कहकर किसी की भी टोपी उछाली जा सकती है, किसी की भी दाढ़ी खींची जा सकती है, किसी को भी पीटा जा सकता है, किसी को भी मारा जा सकता है।
मुकुल सरल
04 Jul 2019
सांकेतिक तस्वीर

बधाई हो! बहुत ही कम समय में हम उस मकाम पर पहुंच गए हैं जहां मॉब लिंचिंग के लिए अब गाय के बहाने की भी ज़रूरत नहीं रही है। जी हां! अब एक नारा ही काफ़ी है किसी की जान लेने के लिए।

पार्ट-1 से पार्ट-2 तक आते-आते 5 सालों में हमने काफ़ी तरक्की कर ली है। आप कहेंगे ये व्यंग्य है। मैं कहूंगा नहीं, ये विद्रूप है, हमारे समय की भयानक हक़ीक़त जिसे व्यंग्य की शैली में कहा जा रहा है। 

अब किसी को आपका झोला तलाशने की ज़रूरत नहीं है, न आपकी फ्रिज में झांकने की ज़रूरत है। बस ‘जय श्रीराम’ कहकर किसी की भी टोपी उछाली जा सकती है, किसी की भी दाढ़ी खींची जा सकती है, किसी को भी पीटा जा सकता है, किसी को भी मारा जा सकता है।

अच्छा हुआ। वरना कितना झंझट था। सुबूत दिखाओ, सुबूत बनाओ, कि फलां ने गौ-कशी की है। या फलां बीफ खा रहा था, ले जा रहा था। इसके लिए कितने जतन करने पड़ते थे, कहां-कहां से लाकर गाय के शव मौके पर डालने पड़ते थे। भैंस को, बकरे को गाय का मांस साबित करने के लिए भी कितनी मशक्कत करनी पड़ती थी। और तब भी बड़े दंगे न हो पाए। बेकार गई इतनी कवायद। अब ये सब चोंचले, ये सब बहाने बंद।

हां, अगर अपनी सरकार में भी ये सब ‘दिखावे’ करने पड़ें तो बेकार है। ये पहले ही बंद हो जाने चाहिए थे। अगर कोई भक्त कह रहा है कि फलां ने गौमांस खाया तो मान लेना चाहिए कि खाया है। फलां ने गौ-कशी की, तो मान लेना चाहिए कि गौ-कशी की है। एक भक्त के कहे की कोई कीमत है भी या नहीं! उसे भी सुबूत दिखाना पड़े तो बेकार है।

और इसकी भी ज़रूरत क्या है। भक्त को बिना कहे, बिना बताए भी किसी भी पीटने, मारने का अधिकार होना चाहिए।

अगर भक्तों को भी कानून मानना पड़े, पुलिस से डरना पड़े तो क्या फायदा अपनी सरकार का। अब हम इसी तरफ़ बढ़े हैं तो ये बधाई की बात है। जहां भक्त को कुछ कहने की भी ज़रूरत नहीं, आपका सिर्फ़ मुसलमान होना ही काफी है। आपको पीटने के लिए, आपकी हत्या के लिए। क्या अब भी हमें इसके लिए कोई कारण बताना पड़ेगा। फिर तो धिक्कार है हमारे हिन्दू होने पर। फिर किस काम का बहुमत और बहुसंख्यकवाद।

jharkhand lynching.jpg

तबरेज़ के साथ क्या हुआ?

बीती 17 जून को, 24 वर्षीय तबरेज़ अंसारी को झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में अपने घर लौटते समय कुछ लोगों ने घेर लिया और मोटरसाइकिल चोरी करने का आरोप लगाते हुए खंभे से बांधकर पिटाई की। भीड़ ने उनसे जबरन 'जय श्री राम' और 'जय हनुमान' के नारे भी लगवाए। भीड़ ने उन्हें इतना मारा और बाद में पुलिस ने इतनी लापरवाही की कि उनकी मौत हो गई।

इसे पढ़ें : झारखंड : लिंचिंग को ललकार

इंडिया स्पेंड की एक रिपोर्ट के मुताबिक  2014 के बाद से झारखंड में नफ़रत से भरे अपराध का यह 14वां मामला था। कुछ रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में मॉब लिंचिंग का 18वां मामला था। यही नहीं तबरेज़ अंसारी की मौत के साथ, इस साल इस तरह के 11 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा के 2014 में पहली बार सत्ता में आने के बाद से ऐसी घटनाओं की कुल संख्या बढ़कर 266 हो गई है। यह आंकडे  Factchecker.in की मीडिया रिपोर्टों के आधार पर जारी किए गए हैं जो एक ऐसी वेबसाइट है जो भारत में धार्मिक घृणा पर आधारित अपराधों के भयावह रूप पर नज़र रख रही है।

इसे पढ़ें : झारखंड में चार साल में भीड़ ने की 14 हत्याएं, देशभर में 266

अब केवल 2.O की बात करें तो अब तेज़ी से ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं। कुछ दिन पहले असम के बरपेटा में एक दक्षिणपंथी संस्थान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई कि वहां कथित तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के एक समूह की पिटाई कर दी गई और उनसे जबरन ‘जय श्रीराम’ और ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लगवाए। 

इसी तरह अभी हाल में दिल्ली के अमन विहार इलाके में एक मदरसे के मौलवी ने आरोप लगाया कि तीन लोगों की ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने की मांग मानने से इनकार करने पर उन्हें कार से टक्कर मारी गई।

हरियाणा के गुड़गांव में 25 मई की शाम नमाज़ पढ़कर लौटते 25 साल के बरकत से मारपीट की गई थी। बरकत का दावा था कि जब वह नमाज़ पढ़कर घर लौट रहे थे तो कुछ युवकों ने उनके साथ मारपीट की और जय श्री राम का नारा लगाने के लिए कहा।

मई के आखिरी हफ्ते में ही पुणे के एक डॉक्टर को नई दिल्ली में भीड़ का सामना करना पड़ गया था। अरुण गद्रे नाम के इस डॉक्टर के मुताबिक युवाओं के एक समूह ने उनसे ‘जय श्री राम' बोलने को कहा। यह घटना कनॉट प्लेस के पास उस समय हुई जब वह सुबह की सैर पर थे।

इसे पढ़ें : क्या इस देश में भाजपा नहीं भीड़तंत्र का राज लौट आया है?

stop lynching_0.jpg

(फोटो साभार)

आपको मालूम हो कि राज्य सरकारों और केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर सुप्रीम कोर्ट के 2018 निर्देशों की अनदेखी की है जिसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करना शामिल है। सोशल मीडिया पर नफरत भरे संदेशों को रोकना शामिल है, पीड़ितों को मुआवजा देना और भीड़ द्वारा हिंसा को रोकने के लिए एक कानून बनाना शामिल है। लेकिन इस सिलसिले में कोई ठोस काम नहीं हुआ है।

हां, एक काम हुआ है कि अब मॉब लिंचिंग का विरोध भी रोकने की कोशिश की जा रही है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में यही हुआ। यहां तबरेज़ की हत्या के विरोध में जुलूस निकालने की कोशिश पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। पुलिस का कहना है कि शहर में धारा 144 लागू है। रविवार को फैज-ए-आम कॉलेज में बिना अनुमति सभा की गई और उसके बाद बिना अनुमति के जुलूस निकालने की कोशिश की गई। इसलिए उसे रोका गया लेकिन पुलिस के रोकने पर कुछ लोगों ने पथराव किया। इस मामले में 70 नामज़द सहित एक हजार लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। 10 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में भी लिया गया।

इसे पढ़ें : मेरठ में तबरेज़ हत्याकांड के विरोध जुलूस पर लाठीचार्ज, 1000 लोगों पर मुकदमा

इसी तरह पिछले शनिवार की शाम लखनऊ में तबरेज़ की हत्या के विरोध में निकाले जा रहे शांति मार्च को पुलिस ने रोक लिया था। वहां भी पुलिस का कहना था क पूर्व अनुमति नहीं ली गई। जबकि प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पुलिस-प्रशासन को इसके लिए पहले ही सूचित कर दिया गया था।

ख़ैर, मुस्कुराइए क्योंकि आप...

(यह लेखक के निजी विचार हैं।)

इसे भी पढ़ें : घृणा और हिंसा को हराना है...

 

mob lynching
stop mob lynching
mob lynching in india
Hate Crime
Hindutva
Hindutva Agenda
Hindu Right Wing
hindu rashtra
Anti Muslim
Anti minority
Narendra modi
Narendra Modi Government
modi 2.0
Jharkhand
TABREZ ANSARI
Justice For Tabrez
Uttar pradesh
Yogi Adityanath
Yogi Adityanath govt

Related Stories

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!

अब भी संभलिए!, नफ़रत के सौदागर आपसे आपके राम को छीनना चाहते हैं


बाकी खबरें

  • modi
    अनिल जैन
    खरी-खरी: मोदी बोलते वक्त भूल जाते हैं कि वे प्रधानमंत्री भी हैं!
    22 Feb 2022
    दरअसल प्रधानमंत्री के ये निम्न स्तरीय बयान एक तरह से उनकी बौखलाहट की झलक दिखा रहे हैं। उन्हें एहसास हो गया है कि पांचों राज्यों में जनता उनकी पार्टी को बुरी तरह नकार रही है।
  • Rajasthan
    सोनिया यादव
    राजस्थान: अलग कृषि बजट किसानों के संघर्ष की जीत है या फिर चुनावी हथियार?
    22 Feb 2022
    किसानों पर कर्ज़ का बढ़ता बोझ और उसकी वसूली के लिए बैंकों का नोटिस, जमीनों की नीलामी इस वक्त राज्य में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में गहलोत सरकार 2023 केे विधानसभा चुनावों को देखते हुए कोई जोखिम…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, चौथा चरण: केंद्रीय मंत्री समेत दांव पर कई नेताओं की प्रतिष्ठा
    22 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश चुनाव के चौथे चरण में 624 प्रत्याशियों का भाग्य तय होगा, साथ ही भारतीय जनता पार्टी समेत समाजवादी पार्टी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। एक ओर जहां भाजपा अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना चाहेगी,…
  • uttar pradesh
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव : योगी काल में नहीं थमा 'इलाज के अभाव में मौत' का सिलसिला
    22 Feb 2022
    पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि "वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सा सुविधा बेहद नाज़ुक और कमज़ोर है। यह आम दिनों में भी जनता की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त…
  • covid
    टी ललिता
    महामारी के मद्देनजर कामगार वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप शहरों की योजना में बदलाव की आवश्यकता  
    22 Feb 2022
    दूसरे कोविड-19 लहर के दौरान सरकार के कुप्रबंधन ने शहरी नियोजन की खामियों को उजागर करके रख दिया है, जिसने हमेशा ही श्रमिकों की जरूरतों की अनदेखी की है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License