NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अदानी ग्रुप के अस्पताल में 111 नवजात शिशुओं की मौत, सरकार ने दिए जाँच के आदेश
अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट जीएस राव ने जो आँकड़े मुहैया करवाए हैं उनके मुताबिक अस्पताल में पाँच महीने के भीतर 777 नवजात शिशु भर्ती हुए जिनमें से 111 की मौत हो गयीI
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
31 May 2018
G K Hospital

साल 2018 के पाँच महीनों में भुज के जीके अस्पताल में 111 नवजात शिशुओं की मौत मामलों में गुजरात सरकार ने जाँच के आदेश दिए हैंI यह अस्पताल अदानी ग्रुप चलाता हैI अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट जीएस राव ने जो आँकड़े मुहैया करवाए हैं उनके मुताबिक अस्पताल में पाँच महीने के भीतर 777 नवजात शिशु भर्ती हुए जिनमें से 111 की मौत हो गयीI इसके मायने क्या हैं: सिर्फ पाँच महीने के आँकड़ों के आधार पर, अस्पताल की नवजात शिशु मृत्यु दर 14% पहुँच चुकी हैI 2015 में यह दर 19% थी, 2016 में 18% और 2017 में 21% Iअधिकारियों का कहना है कि साल के अंत तक यह दर इतनी ही कम बनी रहेगीI    

अधिकारियों का कहना है कि कई मरीज़ इस अस्पताल में दूसरी जगहों से भेजे जाते हैं और अस्पताल आते-आते उनकी हालत और गंभीर हो जाती हैI यही कारण है कि अस्पताल की मृत्यु दर काफी ज़्यादा हैI अस्पताल प्रशासन ने बताया कि गर्भावस्था के समय माँओं में कुपोषण और इसके साथ समय से पहले डिलीवरी इन मौतों के मुख्य कारण हैं I

दिलचस्प बात है कि जीके अस्पताल तभी से विवादों में हैं जब से इसे कॉर्पोरेट घराने को दे दिया गया है I ये अस्पताल भुज के भूकंप के बाद बना था और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी ने चाहा था कि ये सरकारी अस्पताल बने I यहाँ तक कि सरकार ने इस अस्पताल को बनाने के लिए प्रधानमंत्री सहायक कोष से इस अस्पताल में 100 करोड़ की पूँजी लगायी थी I शुरुआत में राज्य सरकार ने पीमओ जो कि इस अस्पताल के निर्माण की देख रेख कर रहे थे और उस समय की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज को लिखा था कि स्वस्थ्य मंत्रालय को इसकी देख रेख करनी चाहिए I उनका तर्क था कि इस 300 बेड वाले नए सूपर स्पेशलिटी अस्पताल की देख-रेख के लिए 15 करोड़ रुपये चाहिए जो कि उनके बजट के बाहर है I लेकिन इसके कुछ समय बाद नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार ने इस अस्पताल को अदानी समूह को दे दिया I 2009 में इस कॉर्पोरेट घराने को ये अस्पताल 99 वर्षों के लिए लीस पर दे दिया गया I अस्पताल के साथ एक चिकित्सा संस्थान भी बनाया गया I ये साफ़ तौर पर नरेद्र मोदी द्वारा अदानी को किया गया एक एहसान था, ये जग ज़ाहिर है कि नरेन्द्र मोदी की अदानी से नज़दीकियाँ हैं I

एडम चाकी ने एक PIL दायर की जिसमें ये दावा किया गया कि ये अस्पताल इलाके के गरीबों के हितों के खिलाफ काम कर रहा है और राज्य सरकार ने अस्पताल को लीस पर देने के लिए कुछ ज़रूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया और उनसे बचकर निकला गया है I 2012 में गुजरात हाई कोर्ट ने इस PIL को ख़ारिज करते हुए, अस्पताल के काम करने के ढंग पर कड़ी शर्ते रखने का आदेश दिया I अस्पताल को 450 बेड और लगाने, 10% कॉलेज सीटों में आरक्षण देने, गरीबों  और सरकारी कर्मचारियों के मुफ्त इलाज करने को कहा गया I चाकी ने फिर से PIL दायर करी ये कहते हुए कि अस्पताल अच्छी मेडिकल सुविधायें नहीं दे रहा है और ये कि ऐसा करना 2012 के कोर्ट के आदेश की अवहेलना है I लेकिन अब तक ये मामला अब तक कोर्ट में अटका हुआ है I

अब जब मोदी सरकार अपने 4 साल पूरे करने जा रही है , स्वस्थ्य के क्षेत्र में लगातार निजीकरण को लाया जा रहा है I ये सरकार न सिर्फ स्वस्थ्य सेवाओं को बल्कि सभी संस्थाओं जो कि पहले सरकारी थीं, को लगातार निजी हाथों में दे रही है, जिससे निजी मुनाफों में लगातार बढ़ौतरी हो रही है I इसका नतीजा साफ़ है जी के अस्पताल की तरह ही इससे आम लोगों की दिक्कतें बढेंगी I

अदानी ग्रुप
GK Hospital
गुजरात
गुजरात सरकार
नवजात शिशु मृत्यु दर
नवजात शिशु

Related Stories

कोयला आयात घोटाला : अदानी समूह ने राहत पाने के लिए बॉम्बे हाइ कोर्ट का रुख किया

''सिलिकोसिस बीमारी की वजह से हज़ारो भारतीय मजदूर हो रहे मौत के शिकार''

बुलेट ट्रेन परियोजना के खिलाफ गोदरेज ने की हाई कोर्ट में अपील

न्याय से बेजार गुजरात के बच्चे !

अदानी ग्रुप के अस्पताल में 111 नवजात शिशुओं की मौत

राजकोट का क़त्ल भारत में दलितों की दुर्दशा पर रोशनी डालता है

गुजरात में मछुआरों की आजीविका बर्बाद करने को लेकर विश्व बैंक क़ानूनी कार्रवाई का कर रहा सामना

गुजरात किसानों ने किया बुलेट ट्रेन परियोजना का विरोध,कहा किसानों के साथ मीटिंग एक धोखा थी

गुजरात सरकार ने कहा कि ऊना के दलित पीड़ितों को नौकरी और ज़मीन नहीं दी जाएगी

जन्म लेते ही दम तोड़ रहें हैं नवजात शिशु


बाकी खबरें

  • Budget 2022
    भरत डोगरा
    जलवायु बजट में उतार-चढ़ाव बना रहता है, फिर भी हमेशा कम पड़ता है 
    18 Feb 2022
    2022-23 के केंद्रीय बजट में जलवायु परिवर्तन, उर्जा नवीनीकरण एवं पर्यावरणीय संरक्षण के लिए जिस मात्रा में समर्थन किये जाने की आवश्यकता है, वैसा कर पाने में यह विफल है।
  • vyapam
    भाषा
    व्यापमं घोटाला : सीबीआई ने 160 और आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया
    18 Feb 2022
    केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने वर्ष 2013 के प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) में धांधली करने के आरोप में 160 और आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया है। आरोपियों में प्रदेश के तीन निजी मेडिकल…
  • Modi
    बी सिवरमन
    मोदी के नेतृत्व में संघीय अधिकारों पर बढ़ते हमले
    18 Feb 2022
    मोदी सरकार द्वारा महामारी प्रबंधन के दौरान अनुच्छेद 370 का निर्मम हनन हो, चाहे राज्यों के अधिकारों का घोर उल्लंघन हो या एकतरफा पूर्ण तालाबंदी की घोषणा हो या फिर महामारी के शुरुआती चरणों में अत्यधिक…
  • kannauj
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: कन्नौज के पारंपरिक 'इत्र' निर्माता जीवनयापन के लिए कर रहे हैं संघर्ष
    18 Feb 2022
    कच्चे माल की ऊंची क़ीमतें और सस्ते, सिंथेटिक परफ्यूम के साथ प्रतिस्पर्धा पारंपरिक 'इत्र' निर्माताओं को पहले से कहीं अधिक प्रभावित कर रही है।
  • conteniment water
    सौरभ शर्मा
    यूपी चुनाव: कथित तौर पर चीनी मिल के दूषित पानी की वजह से लखीमपुर खीरी के एक गांव में पैदा हो रही स्वास्थ्य से जुड़ी समस्यायें
    18 Feb 2022
    लखीमपुर खीरी ज़िले के धरोरा गांव में कथित तौर पर एक चीनी मिल के कारण दूषित होते पानी के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गांव के लोग न सिर्फ़ स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं, बल्कि…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License