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अमेरिका में डीएसीए धारकों पर विनाशकारी फ़ैसले से अनिश्चिता बढ़ी
"ड्रीमर्स” यानी अप्रवासियों पर जीओपी के नेतृत्व में एक नए हमले ने युवा अप्रवासियों के बीच अनिश्चितता बढ़ा दी है और उन्हें बर्बादी की ओर धकेल दिया है, ऐसे में डेमोक्रेट्स को उम्मीद है कि सीनेट बजट सुलह प्रक्रिया का इस्तेमाल कर वह अप्रवासी सुधार लागू कर लेगी। 
सोनाली कोल्हटकर
27 Jul 2021
Translated by महेश कुमार
अमेरिका में डीएसीए धारकों पर विनाशकारी फ़ैसले से अनिश्चिता बढ़ी

टेक्सास में बैठे रिपब्लिकन अफसर उस बड़ी राजनीतिक जीत का जश्न मना रहे हैं क्योंकि उन्होंने डिफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल्स (डीएसीए) कार्यक्रम पर फेडरल सरकार पर सफलतापूर्वक मुकदमा चलाया है। डिफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल्स (डीएसीए) 2012 से जीओपी का लक्ष्य रहा है, जब तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसे पहली बार पेश किया था और फिर 2014 में कार्यकारी आदेश के माध्यम से इसे बढ़ा दिया था। इस कार्यक्रम ने रिपब्लिकन नेतृत्व वाली कानूनी चुनौतियों और बाद में अदालती फैसलों के साथ-साथ डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन के दौरान कार्यक्रम को एकतरफ़ा बंद करने का सामना भी किया है। 2020 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद, जिसने इसे बरकरार रखने का आदेश दिया था, टेक्सास की एक संघीय अदालत में जज एंड्रयू हैन ने जोकि एक घनघोर अप्रवासी विरोधी न्यायाधीश हैं ने अपने फैसले में इस कार्यक्रम को "अवैध" ठहरा दिया, जिससे सैकड़ों हजारों युवा आप्रवासियों का जीवन एक बार फिर अधर में लटक गया।

ऐसी ही एक अप्रवासी फातिमा फ्लोर्स हैं, जो कोइलिशन फॉर ह्यूमेन इमिग्रेंट राइट्स लॉस एंजिल्स की राजनीतिक निदेशक हैं, जिन्होंने इस निर्णय से सिर्फ डेढ़ हफ्ते पहले अपना डीएसीए कार्ड का नवीनीकरण किया था। अगर हेनन का फैसला उसके नवीनीकरण से पहले आया होता, तो फ्लोर्स उन अप्रवासियों में से एक होती, जिन्हें अपना मौजूदा स्टेटस खोने का खतरा पैदा हो गया है, यह जानते हुए कि अभी कोई नया आवेदन संसाधित नहीं किया जा रहा है।

फ्लोर्स ने साक्षात्कार में बताया कि वे इस विनाशकारी निर्णय को "अप्रवासी समुदायों पर हमले" के रूप में देखती है और कहती है कि "हजारों डीएसीए आवेदनकर्ताओं का पहले से ही बैकलॉग है [जो] जिससे अब उनके मामलों में कोई निर्णय नहीं होंगे।" इसका मतलब है कि वे रोजगार और अन्य लाभ खोने के साए में हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनकी अमरीका से बेदखली हो सकती है। इस निर्णय का यह भी अर्थ है कि वे अप्रवासी जो डीएसीए के तहत अपनी स्टेटस को समायोजित करने में सक्षम हो सकते हैं, अब वे भी संभावित निर्वासन के दायरे में आ जाएंगे। फ्लोर्स ने समझाया कि, "मैं इस देश में तब आई थी जब मैं छह साल की थी, और अब मैं 30 साल की हूं। और मैं उन लाखों लोगों में से एक हूं जो इस स्टेटस के कानूनी/लीगल होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।"

डीएसीए धारकों ने महामारी के दौरान जरूरी कर्मियों और स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के रूप में बेहतरीन भूमिका निभाई है, और इस तरह उन्होने अमरीका के निवासियों के जीवन की रक्षा की है, उनकी इस भूमिका को सब देखते हुए कोर्ट का निर्णय काफी निराशाजनक है। पिछले साल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प द्वारा कार्यक्रम को बंद करने के निर्णय के खिलाफ फैसला सुनाया था – और कहा था कि ट्रम्प प्रशासन के पास कार्यक्रम को बंद करने का कोई पर्याप्त औचित्य नहीं है – उस वक़्त डीएसीए स्टेटस वाले करीब 30,000 स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों को निर्वासन से बचा लिया गया था और उन्हे उनके महत्वपूर्ण काम को जारी रखने की अनुमति दे दी गई थी। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के वकील ने कोर्ट से कहा कि स्वास्थ्य देखभाल का केंद्रीय सिद्धांत "किसी को कोई नुकसान न हो" है, और "अगर हम स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों की इस आबादी को सिस्टम से बाहर कर देते हैं, तो यह वाकई में बड़ा नुकसान होगा।" हेनन का फैसला इस तरह के नुकसान की धमकी है जब संयुक्त राज्य अमेरिका कोविड-19 संक्रमणों के एक अन्य उछाल के कगार पर है।

हालांकि राष्ट्रपति जोए बाइडेन ने पहले ही घोषणा कर दी है कि उनका न्याय विभाग हैन के फैसले के खिलाफ अपील करेगा, लेकिन फ्लोर्स को चिंता इस बात की है कि इस तरह की कानूनी चुनौती में बहुत लंबा समय लगेगा, जिस के चलते अनगिनत संभावित डीएसीए आवेदक फंसे हुए हैं, और रोजगार हासिल करने में असमर्थ हैं और कभी भी उनका निर्वासन हो सकता हैं जबकि उनमें से बहुमत लोग एकमात्र संयुक्त राज्य अमेरिका को ही जानते हैं। इससे भी बदतर बात तो ये है कि अगर अपील यू.एस. सुप्रीम कोर्ट तक जाती है, तो इस बार अदालत में रूढ़िवादी जजों का बहुमत है जो कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त कर सकता है।

इसलिए फ़्लोर्स का सुझाव है कि डीएसीए को मजबूत करने का एकमात्र और सीधा रास्ता संसदीय प्रक्रिया है ताकि रिपब्लिकन अटॉर्नी जनरल, राज्य के राज्यपाल या राष्ट्रपति की सनक के आगे कार्यक्रम न झुके। हालांकि इमिग्रेशन पर विधायी रास्ते हाल के वर्षों में निराशाजनक रहे हैं, और जबकि डेमोक्रेट्स ने 2021 में सत्ता में रहते हुए बहुत कम बिल पारित किए हैं, लेकिन इस बार इस मुद्दे पर उन्हे सफलता मिल सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सीमित इमिग्रेशन रिफ़ोर्म्स को सीनेट बजट रिकंसिलिएशन प्रोसेस के माध्यम से पारित किया जा सकता है, जिसके लिए केवल साधारण बहुमत की जरूरत होती है, न कि महा-बहुमत की।

इसके लिए सीनेट बजट समिति के अध्यक्ष बर्नी सैंडर्स (आई-वीटी) ने अभी 6 ट्रिलियन डॉलर बजट का ब्लूप्रिंट जारी किया है जिसमें डीएसीए धारकों सहित आप्रवासियों को लीगल स्टेटस के लिए 150 बिलियन डॉलर का वित्त पोषण भी शामिल है। फ्लोर्स ने कैलिफोर्निया के नए सीनेटर एलेक्स पैडिला के होनहार नेतृत्व का हवाला दिया, जो सीनेट न्यायपालिका समिति के इमिग्रेशन  पैनल की अध्यक्षता करते हैं और जो चिरला के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

पाडिला एक बुनियादी ढांचे के पैकेज के साथ इसके कानूनी/वैध रास्ते पर जोर दे रहे है और आश्वस्त भी है कि बाइडेन उनका समर्थन करेंगे, "मेरा मानना ​​है कि व्हाइट हाउस एक महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा पैकेज, और वास्तविक इमिग्रेशन रिफ़ोर्म्स दोनों का समर्थन करता है जिसे हासिल करना संभव है।” शायद सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात, वेस्ट वर्जीनिया के सीनेटर जोए मैनचिन हैं, जो प्रगतिशील कानून पर सबसे अड़ियल रुख रखते हैं वे भी इशारा कर रहे हैं कि वे इमिग्रेशन रिफ़ोर्म्स का समर्थन करते हैं।

चिंताजनक रूप से, यह सीनेट सांसद एलिजाबेथ मैकडोनो है जो यह तय करती है कि सीनेट बजट रिकंसिलिएशन प्रोसेस के माध्यम से डीएसीए को वैध बनाना स्वीकार्य है या नहीं, और अप्रवासी अधिवक्ताओं ने बाइडेन की घोषणा को खारिज कर दिया कि वह इस मामले पर अनिर्वाचित अधिकारी जो भी फैसला करेगा, उसे टाल देगा। कोई भी इसकी उम्मीद कर सकता है कि आव्रजन मामलों से निपटने वाले न्याय विभाग के वकील के रूप में मैकडोनो का अतीत डीएसीए धारकों की दुर्दशा के प्रति सहानुभूति रखता है। इस साल की शुरुआत में सीनेट बजट रिकंसिलिएशन प्रोसेस के हिस्से के रूप में फेडरल न्यूनतम वेतन वृद्धि को शामिल करने से इनकार करने के उनके निर्णय के खिलाफ राष्ट्रीय आक्रोश पैदा हो गया था। उन्होने कहा, कि उन वित्तीय प्राथमिकताओं को जिन्हें सुलह में शामिल किया जा सकता है, वास्तव में काफी सीमित हैं।

फेडरल बजट पर आधारित तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से इमिग्रेशन रिफ़ोर्म्स की खोज करना शायद एक ऐसे राष्ट्र के लिए उपयुक्त है, जिसकी प्रमुख संस्कृति अभिजात वर्ग द्वारा तय की जाती है, और मनुष्य को संसाधन और पूंजी के रूप में मानती है, न कि उन्हें करुणा और सहानुभूति के नजरिए से देखती है। लेकिन फ्लोर्स और उसके समुदाय के अन्य लोगों ने राजनीतिक समाधान की प्रतीक्षा में दशकों से अपने जीवन को उल्टा-पूल्टा किया हुआ है। यदि डेमोक्रेट अप्रवासियों को वित्तीय संपत्ति के रूप में देखते हैं, तो रिपब्लिकन उन्हें भविष्य के डेमोक्रेटिक मतदाताओं के रूप में देखते हैं जो राजनीतिक सत्ता के मामले में उनकी पकड़ को खतरे में डाल सकते हैं। फ्लोरेस ने कहा, "हम यहां अपने समुदायों के साथ एकजुटता से खड़े होने के लिए हैं [और इसलिए उनके वैध/कानूनी स्टेटस के लिए लड़ रहे हैं] और मजबूती से लड़ना है क्योंकि रिपब्लिकन और जीओपी हमारे खिलाफ मजबूती से लड़ रहे हैं।"

बिना दस्तावेज वाले अप्रवासियों को कृषि और परिधान उद्योग के लिए सस्ते श्रम के स्रोत के रूप में देखने की पारंपरिक सीमा के बाहर भी, इसे एक स्पष्ट आर्थिक मामला बनाया जाना चाहिए। सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस द्वारा जून के मध्य में अपने एक अध्ययन में अप्रवासी वैधीकरण के कई परिदृश्यों की जांच की थी। यदि सभी गैर-दस्तावेज वाले आप्रवासियों को नागरिकता की पेशकश की गई, तो अध्यन का निष्कर्ष है कि यह "अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को 10 वर्षों में कुल 1.7 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ा देगा और 4,38,800 नई नौकरियां पैदा करेगा।" यदि केवल डीएसीए धारकों को वैध किया गया, तो यह "अमेरिकी सकल घरेलू उत्पाद में 10 वर्षों में कुल 799 बिलियन डॉलर की वृद्धि करेगा और 2,85,400 नई नौकरियां पैदा करेगा।" दिलचस्प बात यह है कि स्टडी के लेखक इस बात का अनुमान लगा रहे हैं कि पहले जाँचे गए परिदृश्य में, "अन्य सभी अमेरिकी श्रमिकों के वार्षिक वेतन में 700 डॉलर की वृद्धि हो जाएगी," और बाद में, "उनकी वार्षिक मजदूरी 400 डॉलर तक बढ़ जाएगी"।

दूसरे शब्दों में, अप्रवासियों को लीगल स्टेटस देने के साथ सभी अमेरिकी कामगारों को लाभ होगा। यह निष्कर्ष एक जटिल आर्थिक विश्लेषण पर आधारित नहीं है। गैर-दस्तावेज वाले कर्मचारियों का कानूनी स्टेटस न होने के कारण नियोक्ता भी उनका अधिक शोषण करते हैं। उनका स्टेटस उन्हे सबसे कम मजदूरी लेने पर मजबूर कर देता है। इसका उलटा भी एक सच है।

फ्लोर्स ने बताया कि हाथों से वक़्त निकल रहा है। "हम वैधीकरण/कानूनी स्टेटस के प्रयासों के मसले एमिन 2021 को खाली नहीं छोड़ सकते हैं," क्योंकि 2022 में मध्यावधि चुनाव हैं जो काफी करीब हैं और सीनेटर चुनाव की तैयारी में हैं, और इसलिए अगले साल उनके अभियानों में व्यस्त होने की संभावना है। इसके अलावा, डीएसीए धारक और उनके जैसे संभावित आवेदक काफी थक चुके हैं। "लंबे समय से हमें कहा जा रहा है कि 'अपनी लेन में रहो। वे कहती हैं अब काफी इंतज़ार कर लिया"। "हम अब पिछली सीट पर नहीं बैठेंगे। अच्छे बनकर बहुत देख लिया।"

सोनाली कोल्हाटकर फ़्री स्पीच टीवी और पैसिफ़िक स्टेशनों पर प्रसारित होने वाले टेलीविज़न और रेडियो शो “राइज़िंग अप विद सोनाली" की संस्थापक, होस्ट और कार्यकारी निर्माता हैं। वह इंडिपेंडेंट मीडिया इंस्टीट्यूट में इकोनॉमी फ़ॉर ऑल प्रोजेक्ट की लेखक फ़ेलो हैं।

इस लेख को इकॉनोमी फ़ॉर ऑल ने प्रकाशित किया था, जो इंडिपेंडेंट मीडिया इंस्टीट्यूट का एक प्रोजेक्ट है।

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