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भारत
राजनीति
आज़ादी के 71 साल बाद भी 'ऑनर किलिंग' जारी
जातिय भावनाओं और जातिय संगठनों की ताकत के सामने बड़ी-बड़ी प्रशासन, न्यायलय, सरकार, राजनैतिक दल सब झुक ही नहीं जाते, उनके साथ खड़े हो जाते हैंI
सुभाषिनी सहगल अली
17 Aug 2018
honour killings in india

15 अगस्त को आज़ादी के 71 साल पूरे हुए और उस दिन, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के साथियों के साथ, हम हरियाणा के रोहतक शहर से 15 किलोमीटर दूर सिंहपूरा गाँव में बाल्मीकि जाति के दिनेश और उसकी माँ से मिलने गएI इससे पहले कि इस बात पर आपत्ति हो कि उनकी जाति का ज़िक्र क्यों किया जा रहा है, यह बता दिया जाए कि उस दिन मिली आज़ादी से प्राप्त समान नागिरकता पर आज भी जातिय असमानता भारी पड़ती हैI

दिनेश और उसकी माँ खौफ के साए से घिरे दिखाई दिएI 14 अगस्त की  सुबह ही उनके गाँव में दो किराये पर हत्या करने वाले अपराधी पकड़े गए थेI वह मेरठ से 4-5 दिन पहले रोहतक आये थे और 8 अगस्त को उन्होंने न्यायालय परिसर के अन्दर, ममता की हत्या कर डाली थीI  ममता की सुरक्षा में लगे, ASI, नरेंद्र को भी मार डालाI ममता की मौत का कारण उसकी जाति थीI वह जाट परिवार की थी और एक साल पहले, उसने दिनेश के भाई, सोमी, से शादी की थीI

ममता के पिता, रमेश, ने सोमी और उसके पूर्व-सैनिक पिता से ढाई लाख रूपये का क़र्ज़ लिया थाI उसको रहने और अपना व्यवसाय चलाने के लिए अपने मकान का ऊपर का हिस्सा किराये पर दिया थाI उसके साथ खाना भी खाता थाI

ममता ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की थीI वह आगे भी पढ़ना चाहती थी, लेकिन रमेश को शराब की लत थीI उसने उसकी पढ़ाई रोक दी और उसे सिलाई-कढ़ाई के काम में लगा दियाI पैसों की ज़रूरत हमेशा उसे रहती थी तो उसने एक अन्य व्यक्ति से 5 लाख का क़र्ज़ लियाI लौटाने की स्थिति नहीं रही तो उसने उस व्यक्ति के साथ ममता की शादी तय कर ली जबकि वह उम्र में उससे बहुत बड़ा थाI ममता ने विरोध किया और घर में कलह बढती गयीI सोमी को ममता से पूरी हमदर्दी थी और दोनों की दोस्ती ने प्यार का रूप ले लियाI दोनों ने नायडा जाकर शादी कर लीI  शादी कराने वालों ने उनकी तमाम जमा पूंजी हथिया लीI बड़ी मुश्किल से दोनों दिल्ली में रहने लगेI

रमेश ने ममता के नाबालिग होने के दावे के आधार पर मुकद्दमा दायर कर दियाI ममता ने अपने हलफनामे में अपने आधार कार्ड (जिसमें जन्म का वर्ष 1999 था) का हवाला दिया लेकिन यह माना नहीं गयाI जातिगत भेदभाव के सामने आधार कार्ड भी कमज़ोर पड़ जाता हैI ममता पर जालसाज़ी और सोमी और उसके पिता पर इस जुर्म में मददगार होने के  मुकद्दमें दायर हो गये और सोमी के पिता को जेल भेज दिया गयाI  मजबूर होकर, ममता और सोमी को रोहतक की अदालत के सामने पेश होना पड़ाI अदालत ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को भी नहीं माना जिसने उनके विवाह को वैध घोषित किया थाI सोमी भी जेल भेज दिया गया और ममता ने अपने घर वालों के साथ जाने से इंकार कर दिया तो नारी निकेतन भेज दी गयीI

तारीखो पर ममता के साथ दिनेश और उनकी माँ आते थेI ज़रूरत का सामान भी उसे पहुँचाते थेI उनके आपस के पारिवारिक सम्बन्ध मज़बूत हो गएI

8 अगस्त को तारीख के बाद, ममता ASI, दिनेश, दिनेश की माँ और एक महिला पुलिसकर्मी न्यायालय परिसर के बाहर निकल रहे थे कि  ममता की पीठ में गोली लगीI ASI अपनी पिस्तौल निकाल रहा था कि उसको भी गोली लग गयीI दोनों की मौत थोड़ी देर बाद हो गयीI

दोनों घायलों को अस्पताल पहुँचाने के लिए भी कोई आगे नहीं आयाI  ममता ने जाति की लक्ष्मण रेखा लांघी थी तो वह तो हमदर्दी की पात्र ही नहीं रहीI लेकिन ASI नरेन्द्र? वह तो वर्दीधारी पुलिस वाला थाI लेकिन, वह भी जाति का बाल्मीकी ही थाI वर्दी से ज़्यादा उसकी जाति की पहचान थीI दिनेश को ही दोनों घायलों को ऑटो में लादकर अस्पताल ले जाना पड़ाI वहाँ दोनों ही मृतक घोषित कर दिए गयाI

इसके बाद भी दिनेश और उसकी माँ की यात्नाएँ समाप्त नहीं हुईI उन्हें एक थाने से दूसरे तक घुमाया गया, लेकिन बयान उनका न लेकर महिला पुलिसकर्मी का ही लिया गया, जो उनके साथ न्यायालय में थीI उसके बयान पर दिनेश से हस्ताक्षर करवाए गएI उसको और उसकी माँ को देर रात ही अपने घर पहुँचाया गयाI दिन भर उन्हें किसी ने पानी तक को नहीं पूछा, चाय और खाने की बात तो बहुत ही दूर की थीI

अपनी पत्नी की सूरत आखिरी बार देखने के लिए सोमी ने तीन दरख्वास्त लगाईं लेकिन सब ख़ारिज कर दी गयींI उसके गाँव समेत तीन गाँवों की पंचायतों ने ममता की लाश को गाँव में लाने से मना करने का प्रस्ताव पारित कर दियाI उसके अंतिम संस्कार में जनवादी महिला समिति के सदस्य पहुँचे और आग देने का काम उसके चचेरे भाई ने कियाI इसके पहले ही, रमेश और उसके बेटा को किराये के हत्यारों के साथ ममता की हत्या का सौदा करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया थाI लेकिन प्रशासन की सोच यही थी कि ममता को मारने के बाद, उसके अंतिम संस्कार का अधिकार उसके परिवार को ही हैI

ममता की हत्या को ‘इज्ज़त के नाम पर हत्या’ की श्रेणी में आता हैI जातिय विभाजन को लाँघकर उसने अपने परिवार और बिरादरी की इज्ज़त को खतरे में डाल दी थीI ममता का एक चचेरा भाई जेल में सज़ा काट रहा हैI उसने अपने साथियों के साथ एक मानसिक तौर पर विक्षिप्त नेपाली मूल की लड़की के साथ बहुत ही क्रूर तरीके से बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी थीI यह कर उसने बुरा तो किया लेकिन अपने परिवार और बिरादरी की इज्ज़त पर कोई धब्बा नहीं लगायाI

‘इज्ज़त’ के नाम पर की जाने वाली हत्याओं के खिलाफ़ AIDWA सालों से एक कानून की माँग कर रही हैI मसविदे पर महिला कल्याण मंत्रालय ने मोहर भी लगा दी हैI लेकिन केंद्र की सरकार, मौजूदा और इससे पहले वाली, दोनों ही इस कानून को पारित करने के लिए तैयार नहीं हैंI मज़बूत जातिय संगठनों से लड़ने की उनमें हिम्मत नहीं हैI

आज रमेश और उसके परिवार की मदद में बहुत-सी आवाज़ें उठ रही हैंI उनके लिए उनकी बिरादरी के लोग चंदा इकठ्ठा कर रहे हैंI अपनी बेटी की हत्या कर, उन्होंने अपनी पूरी बिरादरी की इज्ज़त को बचाने का काम किया है! दिनेश और उसकी माँ के साथ AIDWA को छोड़ कोई खड़ा होने के लिए तैयार नहींI अम्बेडकरवादी संगठनों ने भी उनका हाल-चाल लेना ज़रूरी नहीं समझा हैI

जातिय भावनाओं और जातिय संगठनों की ताकत के सामने बड़ी-बड़ी प्रशासन, न्यायलय, सरकार, राजनैतिक दल सब झुक ही नहीं जाते, उनके साथ खड़े हो जाते हैंI संविधान, नागरिकों के सामान अधिकार का उन्हें ध्यान ही नहीं रहता हैI

फिर 15 अगस्त के दिन, थोड़ी देर के लिए वह भारत भर के नागरिकों को मिली आज़ादी के दिन को धूम-धाम से मनाते हैंI आज़ादी हासिल करने वाले और आज़ादी हासिल करने की उम्मीद रखने वाले, दोनों अपने-अपने तरीके से 15 अगस्त मनाते हैंI

सबको स्वतंत्रता दिवस की बधाई!

ऑनर किलिंग
इज़्ज़त के नाम पर हत्या
प्रेम विवाह
patriarchal society

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