NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आज़मगढ़ : रिहाई मंच का रासुका के खिलाफ दौरा
रासुका, भारत बंद और फर्जी मुठभेड़ के नाम पर निर्दोष लोगों पर किए जा रहे अत्याचार दौरे का मुख्य कारण है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Jun 2018
Rihai manch

“रिहाई मंच’’ नामक सामाजिक संगठन ने, 28 जून से आज़मगढ़ का तीन दिवसीय दौरा कर शुरू कियाI वे बीते कुछ सालों से दलित उत्पीड़न का शिकार हो रहे लोगों से मुलाकात करेंगे। रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून), भारत बंद और फर्ज़ी मुठभेड़ के नाम पर निर्दोष लोगों पर किये जा रहे अत्याचार इस दौरे का मुख्य कारण है।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए रिहाई मंच प्रभारी मसीहुद्दीन संजरी ने बताया कि विगत 28 अप्रैल 2018 सरायमीर की घटना के बाद ज़िला प्रशासन ने कई आरोपियों के खिलाफ रासुका का नोटिस भेजा है और प्राप्त जानकारियों के मुताबिक कुछ अन्य के खिलाफ यह प्रक्रिया चल रही है। रिहाई मंच ने इससे पहले सरायमीर घटना पर अपनी रिपोर्ट भी जारी की थी जो पुलिस की कहानी को प्रमाणित नहीं करती। ऐसे में रासुका जैसे कठोर कानून आरोपियों पर लगाना कितना न्याय संगत है?। रिहाई मंच का प्रतिनिधि मंडल रासुका पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात कर ताज़ा स्थिति की जानकारी हासिल करेगा। 

यह भी पढ़ें  2अप्रैल के भारत बंद के बाद विभिन्न राज्यों में दलितों पर फर्जी मुकदमे और दमन

गौरतलब है कि मौजूदा भाजपा शासित सरकार समय-समय पर नागरिकों की आवाज़ को कुचलने के लिए रसुका का नाजायज़ इस्तेमाल करती रही है। मई 2017 में उत्तर प्रदेश के मेरठ और सहारनपुर कि जातिय हिंसा के बाद भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ सहित 3 दलित कार्यकर्ताओं पर रासुका लगा कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था,हाल ही में चंद्रशेखरकी न्यायिक हिरासत की अवधि को 3 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है।

वहीं 2 अप्रैल को हुए भारत बंद के दौरान देश भर में पुलिस ने हज़ारो दलित कार्यकर्ताओं को बगैर किसी ठोस सबूत के जेल में डाल दिया गया था, जिसका भारी पैमाने पर विरोध हुआ।

रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव ने बताया कि वे इस दौरे के दौरान के उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा मुठभेड़ में मारे गए लोगों के परिवार वालों से भी मिलेंगे। याद रहे  कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेत्तृत्व में भाजपा की सरकार आने के बाद से शुरू हुआ पुलिस मुठभेड़ों का सिलसिला सवालों के घेरे में है। रिहाई मंच ने रिपोर्ट जारी कर दावा किया है कि बीते दिनों उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ में हुई हत्याएँ गैर-कानूनी हैं, साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मुठभेड़ों का शिकार ज़्यादातर दलित और मुसलमान हुए हैं। योगी सरकार को राज्य की कमान संभाले एक साल से ज़्यादा समय हो चुका है। इस बीचगत 12 महीनों के दौरान राज्य में 1,200 से अधिक पुलिस एनकाउंटर हुए हैं, जिनमें 50 से ज़्यादा अपराधियों को मार गिराने का दावा किया गया है।

यह भी देखें एक लोकतांत्रिक देश में कितने प्रासंगिक हैं UAPA जैसे कानून ?

मानवाधिकार समूह ‘सिटीजन अगेंस्ट हेट’ ने 8 मई को दिल्ली में 2017-2018 के दौरान उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ की 16 और मेवात क्षेत्र की 12 घटनाओं पर अपनी जांच रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट पेश करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने उत्तर प्रदेश में हुई पुलिस मुठभेड़ों को हत्या करार देते हुए कहा कि ’’राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को अपनी स्वतंत्र टीम भेजकर इस मामले की जाँच करानी चाहिए’’। इसके लिए ‘सिटीजन अगेंस्ट हेट’ के सदस्यों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एच.एल. दत्तू से भी मुलाकात की थी।

मानवाधिकार कार्यकर्त्ता गौतम नवलखा के अनुसार ’’सरकार शोषित वर्गों की आवाज़ दबाने के लिए  रासुका को एक हथियार के तौर पर इस्तमाल कर रही है। रासुका के तहत बगैर सबूत के किसी व्यक्ति को पुलिस 1 साल तक  के लिए गिरफ्तार कर सकती है। रासुका को अंग्रेज़ों ने राष्ट्रीय आंदोलन को दबाने के लिए बनाया था मगर आज़ाद भारत में इसका इस्तमाल शोषितों की आवाज़ दबाने के लिए करना दुखद है। हाल में जितने  लोगों पर भी रासुका लगाया गया, ज़्यादातर मामलों में अदालत ने आरोपियों को रिहा ही कर दिया  यह दर्शाता है कि ये सारी गिरफ्तारियाँ राजनीति से प्रेरित थीं’’।

 

रिहाई मंच
दलित उत्पीड़न
रासुका
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून
यूपी सरकार
यूपी पुलिस
योगी सरकार

Related Stories

बदहाली: रेशमी साड़ियां बुनने वाले हाथ कर रहे हैं ईंट-पत्थरों की ढुलाई, तल रहे हैं पकौड़े, बेच रहे हैं सब्ज़ी

लखनऊ : मो. शोएब व रॉबिन वर्मा कब रिहा होंगे?

नागरिकता कानून: यूपी के मऊ अब तक 19 लोग गिरफ्तार, आरएएफ और पीएसी तैनात

यूपी: योगी सरकार में कई बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप

बिहार: सामूहिक बलत्कार के मामले में पुलिस के रैवये पर गंभीर सवाल उठे!

राजकोट का क़त्ल भारत में दलितों की दुर्दशा पर रोशनी डालता है

2अप्रैल के भारत बंद के बाद विभिन्न राज्यों में दलितों पर फर्जी मुकदमे और दमन

नाम में क्या रखा है? बहुत कुछ

अधूरी लड़ाई को समेटने आज होते सैक्रामेंटो में अम्बेडकर और चम्बल में मार्टिन लूथर किंग

भारत बंद के बाद राजस्थान में दलितों पर हुए हमले


बाकी खबरें

  • SFI PROTEST
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई
    09 Feb 2022
    दिल्ली विश्वविद्यालय को फिर से खोलने के लिए SFI ने प्रदर्शन किया, इस दौरान छात्रों ने ऑनलाइन कक्षाओं का विरोध किया। साथ ही सड़क पर कक्षा लगाकर प्रशासन को चुनौत दी।
  • PTI
    समीना खान
    चुनावी घोषणापत्र: न जनता गंभीरता से लेती है, न राजनीतिक पार्टियां
    09 Feb 2022
    घोषणापत्र सत्ताधारी पार्टी का प्रश्नपत्र होता है और सत्ताकाल उसका परीक्षाकाल। इस दस्तावेज़ के ज़रिए पार्टी अपनी ओर से जनता को दी जाने वाली सुविधाओं का जिक्र करती है और जनता उनके आधार पर चुनाव करती है।…
  • हर्षवर्धन
    जन्मदिन विशेष : क्रांतिकारी शिव वर्मा की कहानी
    09 Feb 2022
    शिव वर्मा के माध्यम से ही आज हम भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुखदेव, राजगुरु, भगवती चरण वोहरा, जतिन दास और महाबीर सिंह आदि की कमानियों से परिचित हुए हैं। यह लेख उस लेखक की एक छोटी सी कहानी है जिसके बारे…
  • budget
    संतोष वर्मा, अनिशा अनुस्तूपा
    ग्रामीण विकास का बजट क्या उम्मीदों पर खरा उतरेगा?
    09 Feb 2022
    कोविड-19 महामारी से पैदा हुए ग्रामीण संकट को कम करने के लिए ख़र्च में वृद्धि होनी चाहिए थी, लेकिन महामारी के बाद के बजट में प्रचलित प्रवृत्ति इस अपेक्षा के मामले में खरा नहीं उतरती है
  • Election
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः प्रचार और भाषणों में स्थानीय मुद्दों को नहीं मिल रही जगह, भाजपा वोटर भी नाराज़
    09 Feb 2022
    ऐसे बहुत से स्थानीय मुद्दे हैं जिनको लेकर लोग नाराज हैं इनमें चाहे रोजगार की कमी का मामला हो, उद्योग की अनदेखी करने का या सड़क, बिजली, पानी, महिला सुरक्षा, शिक्षा का मामला हो। इन मुद्दों पर चर्चा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License