NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संस्कृति
भारत
राजनीति
अलविदा, चिरयुवा साथी दूधनाथ सिंह
सामाजिक-राजनीतिक मसलों पर सजग और पैनी निगाह रखनेवाले दूधनाथ जी का लेखन अपने समय को इतने कोणों से पकड़ता है कि उन्हें पढ़ना एक युग के आरपार गुज़रने की तरह है I
जनवादी लेखक संघ
12 Jan 2018
doodhnath singh

‘आख़िरी क़लाम’ जैसे अविस्मरणीय महाकाव्यात्मक उपन्यास और ‘रक्तपात’, ‘रीछ’, ‘धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे’, ‘माई का शोकगीत’ जैसी लम्बे समय तक चर्चा में बनी रहने वाली कहानियों के लेखक, जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय दूधनाथ सिंह नहीं रहे I उनका न रहना हिन्दी की दुनिया के लिए और विशेष रूप से जनवादी लेखक संघ के लिए एक अपूरणीय क्षति है I वे एक साल से प्रोस्ट्रेट कैंसर से पीड़ित थे Iलगभग एक हफ़्ते पहले हालत बहुत बिगड़ने पर इलाहाबाद के फिनिक्स अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में उन्हें भर्ती कराया गया था. वहीं 11 जनवरी की रात 12 बजे उनका इंतकाल हुआ I

17 अक्टूबर 1936 को उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले के एक गाँव में जन्मे दूधनाथ जी अपनी शुरुआती कहानियों के साथ ही हिन्दी में साठोत्तरी पीढ़ी के प्रमुख हस्ताक्षर के रूप में उभरे थे I सत्तर के दशक की शुरुआत में आलोचना-पुस्तक ‘निराला: आत्महंता आस्था’ के साथ वे आलोचना के क्षेत्र में भी प्रतिष्ठित हुए I सन साठ के आसपास शुरू हुए, तकरीबन साठ वर्षों के अपने रचनात्मक जीवन में उन्होंने कहानी, उपन्यास, कविता, नाटक, संस्मरण और आलोचना—इन सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान किया I पूर्वोल्लिखित रचनाओं के अलावा ‘यमगाथा’ नाटक, महादेवी पर लिखी आलोचना-पुस्तक, और संस्मरणों की पुस्तक ‘लौट आ ओ धार’ उनकी यादगार कृतियाँ हैं I

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1957 में हिन्दी में एम.ए. करने के बाद दूधनाथ जी ने 1959 में कलकत्ता के रुंगटा कॉलेज से अध्यापन की शुरुआत की I कलकत्ता रहते हुए ही उन्होंने ‘चौंतीसवां नरक’ शीर्षक से एक उपन्यास-अंश और ‘बिस्तर’ कहानी लिखी जिसे कमलेश्वर के सम्पादन में निकलनेवाली ‘सारिका’ पत्रिका ने छापा और पुरस्कृत किया I दो साल बाद वे नौकरी छोड़कर इलाहाबाद लौट आये जहां कुछ समय बेरोज़गारी में गुज़ारने के बाद उन्हें इलाहाबाद विश्वविद्यालय में तदर्थ प्राध्यापक के रूप में नौकरी मिली I रचनात्मक कार्य इस बीच लगातार जारी रहा I 1963 में प्रकाशित ‘रक्तपात’ कहानी के साथ कहानीकारों की उस समय उभर रही पीढ़ी के प्रमुख हस्ताक्षर के रूप में उनकी पहचान बनी I

दूधनाथ जी की महत्वपूर्ण पुस्तकों की संख्या बीस से ऊपर है: उपन्यास—‘आख़िरी क़लाम’, ‘निष्कासन’, ‘नमो अन्धकारम’; कहानी-संग्रह—‘सपाट चेहरे वाला आदमी’, ‘सुखान्त’, ‘प्रेमकथा का अंत न कोई’, ‘माई का शोकगीत’, ‘धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे’, ‘तू फू’; कविता-पुस्तकें—‘अगली शताब्दी के नाम’, ‘एक और भी आदमी है’, ‘युवा खुशबू’, ‘सुरंग से लौटते हुए’; नाटक—‘यमगाथा’; संस्मरण—‘लौट आ ओ धार’; आलोचना—‘निराला: आत्महंता आस्था’, ‘महादेवी’, ‘मुक्तिबोध: साहित्य में नई प्रवृत्तियां’; साक्षात्कार—‘कहा-सुनी’. इनके अलावा उन्होंने ‘भुवनेश्वर समग्र’ और शमशेर पर केन्द्रित पुस्तक ‘एक शमशेर भी है’ का सम्पादन किया I उन्हें मिलने वाले पुरस्कारों और सम्मानों में भारत भारती सम्मान, भारतेंदु हरिश्चंद्र सम्मान, शरद जोशी स्मृति सम्मान और कथाक्रम सम्मान प्रमुख हैं I

सामाजिक-राजनीतिक मसलों पर सजग और पैनी निगाह रखनेवाले दूधनाथ जी का लेखन अपने समय को इतने कोणों से पकड़ता है कि उन्हें पढ़ना एक युग के आरपार गुज़रने की तरह है I आज हमारा मुल्क जिस दौर में है, वहाँ 2003 में प्रकाशित, बाबरी मस्जिद ध्वंस पर केन्द्रित ‘आख़िरी क़लाम’ को बार-बार पढ़े जाने की ज़रूरत है, जिसकी भूमिका के रूप में लिखे शुरुआती हिस्से में आया यह वाक्य जैसे हमारे समय पर एक इल्हामी टिप्पणी है: ‘हमें इस बात का डर नहीं कि लोग कितने बिखर जायेंगे, डर यह है कि लोग नितांत ग़लत कामों के लिए कितने बर्बर ढंग से संगठित हो जायेंगे I ''

ऐसे दूधनाथ जी अब हमारे बीच नहीं हैं Iआज, 12/01/2018 को, इलाहाबाद के रसूलाबाद घाट पर उन्हें अंतिम विदाई दी जायेगी Iराष्ट्रीय सम्मलेन की तैयारियों में जुटे जनवादी लेखक संघ के लिए यह अपार शोक की घड़ी है I वे हमारी स्मृतियों में सदा बसे रहेंगे और अपनी रचनाओं से हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे I हम अपने दिवंगत अध्यक्ष और हिन्दी के अप्रतिम रचनाकार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके दोनों बेटों, एक बेटी, पुत्रवधुओं, प्रपौत्र एवं अन्य परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रेषित करते हैं I

 

दूधनाथ सिंह पर ये लेख जनवादी लेखक संघ के फेसबुक पेज से लिया गया है I

 

Doodhnath singh
जनवादी लेखर संघ
हिंदी लेखक

Related Stories


बाकी खबरें

  • कोल इंडिया के चेयरमैन ने यूनियन से कहा, कर्मचारियों को 50 प्रतिशत वेतनवृद्धि देना मुश्किल
    भाषा
    कोल इंडिया के चेयरमैन ने यूनियन से कहा, कर्मचारियों को 50 प्रतिशत वेतनवृद्धि देना मुश्किल
    19 Aug 2021
    कर्मचारी यूनियनों ने कोल इंडिया प्रबंधन को अपना मांग पत्र दिया है जिसमें पांच साल के अवधि के दौरान वेतन में कम से कम 50 प्रतिशत वृद्धि की मांग शामिल है।
  •  सिद्दीकी कप्पन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    अदालत ने केरल के पत्रकार कप्पन से दोबारा पूछताछ के अनुरोध वाली याचिका खारिज की
    19 Aug 2021
    मथुरा की एक अदालत ने आतंकवाद के आरोपों का सामना कर रहे  केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन से पूछताछ के अनुरोध वाली उप्र एसटीएफ की याचिका खारिज कर दी।
  • भीमा कोरेगांव मामलें में आरोपी रोना विल्सन के पिता की मौत
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    भीमा कोरेगांव मामलें में आरोपी रोना विल्सन के पिता की मौत
    19 Aug 2021
    भीमा कोरेगांव हिंसा मामलें में आरोपी मानवाधिकार कार्यकर्त्ता रोना विल्सन के पिता की मृत्यु हो गयी है। वो अंतिम समय में  पिता के साथ नहीं रह सके, उन्होंने अपनी जमानत के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख…
  • मीडिया रिपोर्ट और BJP नेताओं के दावे ग़लत, रोहिंग्या शरणार्थियों की भ्रामक तस्वीर पेश की गयी
    अर्चित मेहता
    मीडिया रिपोर्ट और BJP नेताओं के दावे ग़लत, रोहिंग्या शरणार्थियों की भ्रामक तस्वीर पेश की गयी
    19 Aug 2021
    रोहिंग्या एक उत्पीड़ित अल्पसंख्यक समुदाय है जो 2010 की शुरुआत से म्यांमार में हुई हिंसा के बाद से भाग रहा है. 2018 में UNHCR ने द प्रिंट को बताया कि 40 हज़ार रोहिंग्या शरणार्थी दिल्ली, जम्मू, हरियाणा…
  • अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान के कब्ज़े ने महिलाओं को 20 साल पहले के डरावने अतीत में धकेल दिया है!
    सोनिया यादव
    अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान के कब्ज़े ने महिलाओं को 20 साल पहले के डरावने अतीत में धकेल दिया है!
    19 Aug 2021
    भले ही तालिबान इस बार अपने पिछले क्रूर शासन के उलट खुद को अधिक उदार दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसकी वापसी से अफ़गान महिलाएं अब भी आशंकित हैं, सबसे ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License