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अनिल अंबानी को 4 हफ्ते में 453 करोड़ चुकाने के आदेश, वरना होगी जेल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंबानी, रिलायंस टेलिकॉम के अध्यक्ष सतीश सेठ और रिलायंस इंफ्राटेल की अध्यक्ष छाया विरानी ने कोर्ट में दिए गए आश्वासनों और इससे जुड़े आदेशों का उल्लंघन किया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Feb 2019
ANIL AMBANI
Image Courtesy: NDTV

सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस कम्‍युनिकेशंस के चेयरमैन अनिल अंबानी को जानबूझ कर उसके आदेश का उल्लंघन करने और कंपनी एरिक्सन इंडिया को 453 करोड़ रुपये बकाया भुगतान नहीं करने पर बुधवार को अदालत की अवमानना का दोषी करार दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस कम्‍युनिकेशंस के अलावा रिलायंस टेलिकॉम और रिलायंस इंफ्राटेल को भी अवमानना का दोषी माना। कोर्ट ने कहा कि अंबानी के अलावा रिलायंस टेलिकॉम के अध्यक्ष सतीश सेठ और रिलायंस इंफ्राटेल की अध्यक्ष छाया विरानी ने कोर्ट में दिए गए आश्वासनों और इससे जुड़े आदेशों का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने कहा कि एरिक्सन को 4 हफ्ते में 453 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। तय समय में भुगतान नहीं करने पर उन्हें तीन महीने जेल की सजा भुगतनी होगी।

मामला स्वीडन की टेलिकॉम उपकरण बनाने वाली कंपनी एरिक्सन इंडिया को 550 करोड़ रुपये की बकाया राशि दिए जाने का है। 2014 में एरिक्सन ने आरकॉम के नेटवर्क के प्रबंधन और संचालन को लेकर समझौता किया था। अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (एडीएजी) के अध्यक्ष अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ बकाया भुगतान नहीं करने पर टेलिकॉम उपकरण निर्माता एरिक्सन ने सुप्रीम कोर्ट में तीन अवमानना याचिकाएं दायर की थीं।

जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस विनीत शरण की बेंच ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि अंबानी और अन्य को अवमानना से बचने के लिए एरिक्सन को चार हफ्ते में 453 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। ऐसा न करने पर तीन महीने जेल की सजा होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही रिलायंस टेलिकॉम और रिलायंस इंफ्राटेल, दोनों को चार हफ्ते में सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में एक-एक करोड़ रुपये जमा करने को भी कहा। ऐसा न करने पर एक महीने की अतिरिक्त जेल की सजा होगी।

आपको बता दें कि एरिक्सन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने पिछले सप्ताह कोर्ट से कहा था कि रिलायंस के पास रफ़ाल सौदे में निवेश करने के लिए पैसे हैं, लेकिन एरिक्सन के बकाया को चुकाने के लिए नहीं। अनिल अंबानी की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने बचाव किया। बचाव में कहा गया कि मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस जियो के साथ संपत्तियों की बिक्री का सौदा विफल होने के बाद उनकी कंपनी दिवालियेपन के लिए कार्यवाही कर रही है, ऐसे में रकम पर उसका नियंत्रण नहीं है। याचिका पर सुनवाई करने के बाद जस्टिस आरएफ नरीमन और विनीत शरण की बेंच ने 13 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने जब यह फ़ैसला सुनाया तो अनिल अंबानी भी कोर्ट में ही मौजूद थे। फैसला आने के तुरंत बाद आर कॉम समेत अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों के शेयर में तेज़ी से गिरावट आई।

अनिल अंबानी दूसरे उद्योगपति हैं जिन्हें अदालत की अवमानना में दोषी ठहराया गया है। इससे पहले सहारा ग्रुप के चेयरमैन सुब्रत रॉय को इस मामले में दोषी ठहराया गया था।

(Live Law के इनपुट के साथ)

संबंधित ख़बरें :  अदालत की अवमानना के बाद आरकॉम की दिवालिया प्रक्रिया अपनाने की घोषणा

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