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भारत
राजनीति
अनिश्चितकालीन ‘सत्याग्रह’ पर बैठी मेधा की तबीयत बिगड़ी, मोदी और कमलनाथ से दख़ल की मांग
मेधा पाटकर ने बीती 25 अगस्त से बड़वानी से लगभग 25 किलोमीटर दूर छोटा बड़दा गांव में पांच महिलाओं के साथ ‘सत्याग्रह’ के नाम से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है। यह गांव सरदार सरोवर बांध के बैकवाटर के जलमग्न क्षेत्र में पड़ता है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Sep 2019
medha

बड़वानी (मध्यप्रदेश): गुजरात में निर्मित सरदार सरोवर बांध के विस्थापितों के उचित पुनर्वास और बांध के गेट खोलने की मांग को लेकर मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के छोटा बड़दा गांव में पिछले नौ दिनों से ‘सत्याग्रह’ आंदोलन (अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल) कर रहीं नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर की तबीयत बिगड़ रही है।

आपको बता दें कि पाटकर बड़वानी में जिस स्थान पर सत्याग्रह कर रहीं हैं, वह इलाका भी जलमग्न हो रहा है, जिसके चलते जिला प्रशासन उनसे आंदोलन खत्म करने के लिए कह रहा है।

मेधा ने गत 25 अगस्त को बड़वानी से लगभग 25 किलोमीटर दूर छोटा बड़दा गांव में पांच महिलाओं के साथ अनिश्चितकालीन ‘सत्याग्रह’ आंदोलन शुरू किया है। यह गांव सरदार सरोवर बांध के बैकवाटर के जलमग्न क्षेत्र में पड़ता है।

मालूम हो कि सरदार सरोवर बांध में लगभग 134 मीटर ऊंचाई तक पानी भरने से इसके बैक वाटर से मध्यप्रदेश के बडवानी, झाबुआ, धार, अलीराजपुर और खरगोन जिलों तक के गांवों में दिक्कत पैदा हो रही है। इस बांध में पानी भरने का अधिकतम स्तर 138 मीटर तय किया गया है।

छोटा बड़दा गांव के प्रदर्शनकारियों रोहित एवं हर्षित ने बताया कि मेधा की तबीयत बिगड़ गई है।

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हालांकि, बड़वानी जिले के कलेक्टर अमित तोमर ने बताया, ‘मैं उनकी तबीयत के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बता सकता, क्योंकि वह प्रशासन के लगातार प्रयास के बाद भी डॉक्टरों एवं मेडिकल दल को अपने मेडिकल जांच कराने की अनुमति नहीं दे रहीं हैं।’

उन्होंने कहा, ‘मैं रोज उनकी मेडिकल जांच के लिए अधिकारियों को भेज रहा हूं, लेकिन वह अपनी मेडिकल जांच करवाने से बार-बार इनकार कर रहीं हैं।’

जब उनसे पूछा गया कि क्या जहां पर मेधा ‘सत्याग्रह’ आंदोलन पर बैठीं हैं, वहां पर जलभराव हो गया है, तो इस पर तोमर ने बताया कि सरदार सरोवर बांध में नर्मदा नदी का पानी आने से पूरे इलाके में ही जलभराव है।

प्रधानमंत्री मामले में दखल दें: भाकपा सांसद

‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की नेता मेधा पाटकर की तबीयत बिगड़ने का हवाला देते हुये भाकपा के राज्यसभा सदस्य बिनय विस्वम ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

विस्वम ने पत्र में कहा है कि पाटकर के साथ आंदोलनरत हजारों ग्रामीणों की सेहत में लगातार गिरावट के कारण उपजे हालात की गंभीरता को देखते हुये प्रधानमंत्री को इस मामले में तत्काल दखल देना चाहिये।

उन्होंने कहा कि सरदार सरोवर बांध से जल निकासी बंद करने के गुजरात सरकार के फैसले के कारण मध्य प्रदेश के बड़वानी सहित आसपास के 192 गांवों में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।

विस्वम ने कहा कि नर्मदा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण प्रभावित इलाकों के लगभग 32 हजार परिवारों पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘विकास लोगों की भलाई के लिये होना चाहिये, न कि उनका जीवन अस्थिर करने के लिये। इसके मद्देनजर ही पाटकर पिछले आठ दिन से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी सेहत दिन प्रतिदिन बिगड़ रही है। पाटकर का जीवन उन सभी भारतीयों के लिये मूल्यवान है जो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के वास्तविक पैरोकार हैं।’

विस्वम ने मामले की गंभीरता का हवाला देते हुये प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने का अनुरोध करते हुये कहा कि गुजरात सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिये।

देश भर से भेजे जा रहे कमलनाथ को पत्र

मेधा पाटकर की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी देश भर के समाज सेवियों और छात्रों द्वारा पत्र भेजे जा रहे हैं।

जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्यव (एनएपीएम) द्वारा कमलनाथ को भेजे गए एक पत्र में इस पूरे मामले को कुछ यूं समझाया गया है।

'नर्मदा घाटी के सरदार सरोवर के हजारों विस्थापित परिवार गांव-गांव में अमानवीय डूब का सामना कर रहे है। इस डूब का सामना करने के दौरान अब तक निमाड़ और आदिवासी क्षेत्र के 3 गरीब किसानों की मृत्यु हो चुकी है। जलाशय में 139 मी0 तक पानी भरने का विरोध आपकी सरकार द्वारा भी किया गया है फिर भी गुजरात और केंद्र शासन से ही जुड़े नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने कभी न विस्थापितों के पुनर्वास की, न ही पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की परवाह की है न ही सत्य रिपोर्ट या शपथ पत्र पेश किये है।

हजारों परिवारों का सम्पूर्ण पुनर्वास भी मध्य प्रदेश में अधूरा है, पुनर्वास स्थलों पर कानूनन सुविधाएं नहीं है। ऐसे में विस्थापित अपने मूल गांव में खेती, आजीविका डूबते देख संघर्ष कर रहे है। ऐसे में आज की मध्य प्रदेश सरकार लोगो का साथ नही छोड़ सकती। ऐसा हमारा विश्वास है।

मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण को 27 मई 2019 के पत्र के अनुसार 76 गांवों में 6000 परिवार डूब क्षेत्र में निवासरत है। 8500 अर्जियां तथा 2952 खेती या 60 लाख की पात्रता के लिए अर्जियाँ लंबित हैं। नर्मदा बचाओ आंदोलन के अनुसार 6000 परिवार और 76 गाँव ही नहीं, काफी अधिक संख्या में (तकरीबन 32000 परिवार) निवासरत है। गांवों में विकल्प में अधिकार न पाये दुकान, छोटे उद्योग, कारीगरी, केवट,कुम्हार तो डूब लाकर क्या इन गांवों की हत्या करने दे सकते हैं?

इन मुद्दों पर कार्य बहुत धीमी गति से आगे बढ़ा है। आज तुरंत सही प्रक्रिया अपनाना जरूरी है क्योंकि पिछले 15 सालों में काफी गड़बड़ी, धांधली, झूठी रिपोर्ट और भ्रष्टाचार चला है। आज भी दुर्देव से भ्रष्टाचारियों को रोका नहीं गया है। पूर्व शासन से सर्वाेच्च या उच्च अदालत में प्रस्तुत याचिकाएँ वापस करने के आश्वासनों की पूर्ति आज तक नहीं हुई है।

इसीलिए किसी भी हालत में सरदार सरोवर में 122 मीटर के ऊपर पानी नहीं रहे, यह मध्य प्रदेश को देखना होगा। जिसके लिये आपके साथ नर्मदा बचाओ आंदोलन का तथा हमारा भी सहयोग रहेगा। आपने तथा आपके दल ने न केवल अपने चुनाव घोषणा पत्र द्वारा किन्तु प्रत्यक्ष विस्थापितों के साथ खड़े होकर भी समर्थन दिया है। मध्य प्रदेश में 1996 में व 1978 के निमाड़ बचाओ आंदोलन में, सर्वदलीय सहमति भी इस मुद्दे पर हो चुकी है।

34 साल के अहिंसक संघर्ष की सीमा पर जाकर नर्मदा घाटी में मेधा पाटकर जी व प्रभावित गांव की 24 महिलाओं का अनिश्चितकालीन उपवास चालू किया है। नर्मदा ट्रिब्यूनल और सर्वोच्च अदालत के फैसलों के तहत डूब के पहले सम्पूर्ण पुनर्वास हो, यह सुनिश्चित करना, आपका हक़ भी है और कानूनी ज़िम्मेदारी भी। अतः आपकी सरकार से हमारी अपेक्षा है कि तुरंत संवेदनशील युध्द स्तरीय, न्यायपूर्ण निर्णय और कार्यवाही करें।'

गौरतलब है कि इस सत्याग्रह को देश भर से समर्थन मिल रहा है। मध्यप्रदेश सोशलिस्ट पार्टी ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर बिना पुनर्वास डूब की निंदा की तथा बांध के गेट खोलने की मांग की। वहीं, राजस्थान के शुक्लावास में अनशन के समर्थन में धरना किया गया। तमिलनाडु के चेन्नई में जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय, तथा पर्यावरणवादी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया है।

मेधा का अनशन खत्म करने से इनकार

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मेधा पाटकर को मनाने का दौर जारी है। गृहमंत्री बाला बच्चन के बाद मेधा पाटकर को मनाने के लिए सोमवार को प्रभारी मंत्री डाॅ. विजयलक्ष्मी साधौ सत्याग्रह स्थल पहुंचीं। साधौ ने मोबाइल पर मुख्यमंत्री कमलनाथ से मेधा की 7 मिनट बात करवाई, लेकिन दूसरी बार भी सीएम से चर्चा बेनतीजा रही।

अनशन खत्म करने का निवेदन मेधा ने एक बार फिर नकार दिया है। सत्याग्रह स्थल से विजयालक्ष्मी साधौ को बैरंग लौटना पड़ा। इस दौरान मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ को मेधा पाटकर ने दो टूक जवाब में कहा कि पूर्व सरकार ने तो हमारी हत्या कर दी अब ये सरकार अंतिम संस्कार कर रही है।

इस दौरान मेधा ने यह भी कहा कि समझ में यह नहीं आ रहा है कि कमलनाथ मैसेज कन्वे क्यों नहीं करना चाह रहे हैं। मैं समझ रही हूं कमलनाथ किसी न किसी कारण तो दबाव में हैं।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ) 

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