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‘चलो कृष्णपट्टनम पोर्ट’ : नौकरी में सुरक्षा और श्रम अधिकारों की बहाली को लेकर प्रदर्शन
अडानी द्वारा कृष्णापटनम पोर्ट कंपनी लिमिटेड (केपीसीएल) में 75% हिस्सेदारी हथियाये जाने की प्रक्रिया शुरू किये जाने के बाद से अभी तक कुल मिलाकर 187 श्रमिकों को निकाल बाहर किया जा चुका है।
पृध्वीराज रूपावत
30 Jun 2020
Andhra: Workers

नौकरी में सुरक्षा की गारंटी और श्रम कानूनों के उचित कार्यान्वयन की मांग को लेकर आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में स्थित कृष्णापट्टनम बंदरगाह के हजारों श्रमिकों ने सोमवार 29 जून को ‘चलो कृष्णपट्टनम पोर्ट’ के नारे के साथ विरोध प्रदर्शन किया। श्रमिक संघों का तर्क है कि आज के दिन विरोध प्रदर्शन की आवश्यकता इसलिए पड़ रही है क्योंकि प्रबंधन कथित तौर पर श्रमिकों को नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है। श्रमिकों को इस बात तक के लिए धमकाया जा रहा है कि वे खुद को संगठित करने के प्रयासों से बाज आयें।

जहाँ इस विरोध प्रदर्शन में एक हजार से अधिक श्रमिकों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई थी, वहीं जिला पुलिस ने कई नेताओं और श्रमिकों पर कथित तौर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के नाम पर आपराधिक मामले दर्ज कर दिए हैं।

अडानी समूह की कम्पनी अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड (एपीएसईजेड) ने नवयुग ग्रुप की कंपनी, कृष्णापटनम पोर्ट कंपनी लिमिटेड (केपीसीएल) में लगभग 13,500 करोड़ रुपये के भुगतान के साथ इसके 75% हिस्सेदारी को अधिग्रहित करने की प्रक्रिया को आरंभ कर दिया है।इस बंदरगाह में मौजूद लगभग 10,000 कर्मचारियों के बीच आज के दिन सबसे बड़ी चिंता अपनी नौकरी की सुरक्षा को लेकर बनी हुई है। क्योंकि जबसे अडानी द्वारा इस पोर्ट के अधिग्रहण को लेकर सौदा किया गया है, उसके बाद से ही नए ठेकेदारों ने बंदरगाह पर अपने साम्राज्य को स्थापित करना शुरू कर दिया था, ये कहना है सेंटर ऑफ़ ट्रेड यूनियन (सीटू) के राज्य उपाध्यक्ष और नेल्लोर के जिला महासचिव के. अजय कुमार का।

अजय कुमार आरोप लगाते हुए कहते हैं कि “पिछले साल दिसंबर में नवयुग और अडानी प्रबंधन, इन दोनों की ही ओर से यूनियन को आश्वस्त किया गया था कि वे सभी मौजूदा कर्मचारियों और श्रमिकों की बहाली को बरकरार रखेंगे। लेकिन पिछले दो महीनों के दौरान सैकड़ों मजदूरों को इस बात के लिए विवश किया जा रहा है कि वे अपने पदों से इस्तीफ़ा दें, जबकि इस बीच पहले से ही 187 श्रमिकों को नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है। नए ठेकेदारों ने अब इस बात की धमकी देनी शुरू कर दी है कि श्रमिकों को निकाल बाहर किया जायेगा, यदि उन्होंने खुद को संगठित करने की कोशिशें की।"

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श्रमिकों द्वारा अपनी जिन माँगों को उठाया जा रहा है, उसमें न्यूनतम मजदूरी के भुगतान को सुनिश्चित करने, बकाया वेतन और बोनस के मुद्दे से लेकर बंदरगाह में श्रम कानूनों के उचित कार्यान्वयन जैसे अन्य मुद्दों को शामिल किया गया था।मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी को लिखे अपने माँगपत्र में सीटू सचिव एम. ए. गफूर ने उनसे निवेदन किया है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार को इस विषय में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है ताकि बंदरगाह में कार्यरत परिवहन श्रमिकों, हमालियों, कंटेनर टर्मिनल ऑपरेटरों, सुरक्षा कर्मियों और अन्य असंगठित श्रमिकों के लंबित वेतन के भुगतान को सुनिश्चित किया जा सके। गफूर ने माँग की है कि "बंदरगाह में जो श्रमिक पिछले 13 वर्षों से कार्यरत हैं, उन्हें तत्काल नियमित किया जाए और उन्हें अडानी के कर्मचारियों के तौर पर मान्यता दी जाये।"

अजय कुमार ने सूचित किया कि  “जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले में न्यूनतम मजदूरी के भुगतान की दर 327 रुपये प्रतिदिन की है। लेकिन इसके बावजूद सफाई कर्मियों को, जिनमें से अधिकांश महिलाएं हैं, उन्हें प्रति दिन के हिसाब से 200 रुपये तक का ही भुगतान किया जा रहा है। और उस पर हद तो यह है कि मजदूरों से 8 घंटे काम लेने के नियम के सरासर खिलाफ उनसे 12 घंटे से अधिक समय तक काम लिया जा रहा है।”

वे आगे कहते हैं कि अडानी समूह द्वारा जिस नए प्रबंधन को काम का जिम्मा सौंपा गया है वे तो श्रमिकों के साथ उनकी शिकायतों के सम्बंध में बात तक करने को राजी नहीं है।प्रदर्शनकारी श्रमिकों ने बंदरगाह के भीतर श्रमिकों को कोरोनावायरस से सुरक्षा हेतु अपनाए जाने वाले आवश्यक सुरक्षा उपायों की कमी को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की।

अजय कुमार आरोप लगाते हुए बताते हैं कि इस बीच प्रबंधन की ओर से बिहार, ओडिशा और झारखंड के प्रवासी श्रमिकों की वापसी के लिए पांच बसों का इंतजाम कर उन्हें वापस काम पर लाया गया है, जो लॉकडाउन के दौरान अपने घरों को लौट चुके थे। लेकिन न तो उन्हें नियमानुसार क्वारंटाइन ही किया गया है और न ही उनकी कोई जाँच ही कराई गई है। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया है कि "बंदरगाह में मौजूद छह प्रवासी कामगारों में पहले से ही कोविड-19 की जांच के दौरान पॉजिटिव पाए जाने की सूचना है।“

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Andhra: Workers Hold Chalo Krishnapatnam Port Protest Demanding Job Security, Labour Rights

Krishnapatnam Port
Adani Ports
APSEZ
CITU
Nellore
KPCL
workers protest
Illegal Layoffs
COVID 19
Chalo Krishnapatnam
Labour Laws
Port Acquisition
Adani Port Acquisition
Andhra pradesh

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