NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
उत्पीड़न
कानून
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
योगी सरकार द्वारा ‘अपात्र लोगों’ को राशन कार्ड वापस करने के आदेश के बाद यूपी के ग्रामीण हिस्से में बढ़ी नाराज़गी
सरकार ने अपात्र व्यक्तियों को 20 मई तक अपने-अपने राशन कार्डों को वापस करने का फरमान सुनाया है अन्यथा उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना होगा।
अब्दुल अलीम जाफ़री
18 May 2022
RATION CARD
प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ: ऐसा माना जाता है कि हाल ही में संपन्न हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के पीछे मुफ्त राशन वितरण का का जबर्दस्त प्रभाव रहा है। अपनी इस जीत से उत्साहित होकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने लगातार दूसरे कार्यकाल के दूसरे दिन अपने पहले फैसले में घोषणा की कि उनकी सरकार राज्य भर में अगले तीन महीने अर्थात 30 जून तक 1.5 करोड़ पात्र गरीब लोगों को मुफ्त राशन मुहैया कराना जारी रखेगी।

हालाँकि, सरकार ने अप्रैल में एक आदेश जारी कर अपात्र व्यक्तियों को 20 मई तक अपने-अपने राशनकार्ड वापस करने के लिए कहा है अन्यथा उन्हें अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज किये जाने जैसी अनुशासनात्मक कार्यवाही का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।

सरकारी आदेश में निर्दिष्ट किया गया है कि इसमें से वे निवासी राशनकार्ड रखने के लिए अपात्र हैं यदि उनके परिवार में से किसी एक सदस्य के द्वारा आयकर चुकाया जा रहा है, या एक से अधिक सदस्य के पास हथियारों का लाइसेंस है, या यदि किसी सदस्य की शहरी क्षेत्र में 3 लाख रूपये से अधिक की सालाना आय है और ग्रामीण क्षेत्रों में 2 लाख से अधिक है, या उनके पास एक घर, फ्लैट या व्यावसायिक स्थान का मालिकाना है। जिन परिवारों के घर में चौपाया वाहन/ट्रेक्टर/एयर-कंडीशनर या जनरेटर सेट में से कोई भी एक चीज मौजूद है, तो उन्हें राशनकार्ड रखने के लिए अयोग्य माना जायेगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन ऐसे अपात्र लोगों को वसूली के नोटिस भेजेगा जो 20 मई तक अपने राशन कार्डों को जमा नहीं कराते हैं, और उनके खिलाफ आपराधिक प्रकिया संहिता के तहत प्रथिमिकी तक दर्ज कराई जा सकती है। उन्होंने बताया कि वसूली की प्रकिया दिशानिर्देशों के मुताबिक की जायेगी। 

अधिकारी का कहना था कि लोग चाहें तो अपने राशन कार्डों को अपने-अपने प्रखंड कार्यालयों अथवा जिला आपूर्ति अधिकारी के दफ्तर में जमा करा सकते हैं।

सभी जिलाधिकारियों ने इसके अनुरूप आदेश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, “वसूली प्रकिया” में अपात्र परिवारों ने जब से राशन लेना आरंभ किया था, तब से लेकर आज तक एक किलोग्राम गेंहूँ के लिए 24 रूपये और एक किलोग्राम चावल के लिये 32 रूपये के हिसाब से जुर्माना लगाया जायेगा। 

अधिकारियों के मुताबिक, राशन कार्ड दो प्रकार के होते हैं – एक है अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) कार्ड और दूसरा प्राथमिक घरेलू कार्ड। शहरी क्षेत्रों में 3 लाख रूपये/प्रति वर्ष से कम वार्षिक आय वाले परिवार और ग्रामीण क्षेत्रों में 2 लाख रूपये से कम वार्षिक आय वाले परिवार ही प्राथमिक घरेलू कार्ड के लिए पात्रता रखते हैं। जिन लोगों के पास अपना घर नहीं है, या कोई निश्चित आय या काम करने का हुनर नहीं है – जो अनिवार्य रूप से, समाज के सबसे गरीब तबके से आते हैं – ऐसे लोग ही एएवाई कार्ड के लिए पात्र हैं।

सरकार के इस आदेश पर टिप्पणी करते हुए मजदूर किसान मंच, उत्तरप्रदेश के महासचिव बृज बिहारी, जो भोजन के अधिकार अभियान के साथ सक्रिय तौर पर जुड़े हुए हैं, कहते हैं, “ये आदेश एक ऐसे समय पर आये हैं जब महंगाई अपने चरम पर है, और गरीब लोग एक दिन में दो जून का भोजन तक का प्रबंध कर पाने के लिए जूझ रहे हैं। कोविड-19 के चलते कई लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है। जब तक उनके आर्थिक हालात वापस पटरी पर नहीं आ जाते तब तक उन्हें मुफ्त राशन देने और कुछ आर्थिक मदद करने के बजाय, सरकार उन्हें इस प्रकार से धमका रही है, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

आदेश में खामियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने आगे कहा, “सरकार के द्वारा अपनाई गई प्रकिया की मूल्यांकन पद्धति अपने-आप में सही नहीं है क्योंकि इन लाभों से गरीब और निम्न-मध्यम-वर्ग के लोगों को भी बाहर कर दिया जा रहा है। यहाँ तक कि मनरेगा में काम करने वाले मजदूर तक इसकी चपेट में आ रहे हैं। हमने अवध क्षेत्र के विभिन्न गाँवों में एक सर्वेक्षण किया था। इससे पहले के आदेश के मुताबिक, कुल आबादी के 89% हिस्से के पास राशन कार्ड हुआ करता था। इस हालिया आदेश के बाद, किसी भी गाँव में सिर्फ 30-35% लोग ही राशन कार्ड के पात्र रह जायेंगे।

सोनभद्र क्षेत्र में स्थित एक अन्य कार्यकर्ता अजय राय ने इस आदेश को “अमानवीय” और “हड़बड़ी में लिया गया फैसला” बताया है। उन्होंने सरकार को निम्न मध्यम वर्ग को ध्यान में रखते हुए इस आदेश को पुनर्निर्धारित करने के लिए कहा है।

राय ने न्यूज़क्लिक के साथ हुई अपनी बातचीत में कहा, “आदेश के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति के पास 1000 वर्ग फीट में पक्का घर है तो उसे प्रशासन को राशनकार्ड वापस करना होगा और उसे मुफ्त राशन नहीं मिलेगा। सरकार को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि दलित समुदाय या किसी भी अन्य पिछड़ा समुदाय के अधिकाँश लोगों को दहेज में बाइक मिलती है, और पीएम आवास योजना या उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें पक्का घर मिला हुआ है। इसके बावजूद, नौकरी छूट जाने के कारण उनके पास भोजन का स्रोत नहीं बचा है। यह पूरी तरह से अनुचित है, जिस पर सरकार को पुनर्विचार करने की जरूरत है। इसके साथ ही उनका कहना था कि इस फैसले के खिलाफ ग्रामीण इलाकों में खासी नाराजगी बनी हुई है।

कार्यकर्ता का कहना था कि यदि कोई व्यक्ति मुफ्त राशन पाने के लिए अपात्र पाया जाता है तो जिला आपूर्ति विभाग ऐसे व्यक्ति के खिलाफ वसूली की कार्यवाही करेगा।

वो आगे कहते हैं, “ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस बात से आशंकित हैं कि प्रशासन उन्हें अपात्र राशन कार्ड धारक और कुछ समय के लिए ही मुफ्त राशन पाने के नाम पर भी प्रताड़ित कर सकता है।”

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/anger-grows-rural-UP-yogi-govt-ineligible-people-return-ration-card

Uttar pradesh
yogi government
Public Distribution System
ration card

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

यूपी से लेकर बिहार तक महिलाओं के शोषण-उत्पीड़न की एक सी कहानी

यूपी: अयोध्या में चरमराई क़ानून व्यवस्था, कहीं मासूम से बलात्कार तो कहीं युवक की पीट-पीट कर हत्या

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!

मीरगंज रेडलाइट एरियाः देह व्यापार में धकेली गईं 200 से ज़्यादा महिलाओं को आख़िर कैसे मिला इंसाफ़?

पड़ताल: जौनपुर में 3 दलित लड़कियों की मौत बनी मिस्ट्री, पुलिस, प्रशासन और सरकार सभी कठघरे में

यूपी: 8 महीने से तकरीबन 3.5 लाख मिड-डे मील रसोइयों को नहीं मिला मानदेय, कई भुखमरी के कगार पर

यूपी: ललितपुर बलात्कार मामले में कई गिरफ्तार, लेकिन कानून व्यवस्था पर सवाल अब भी बरकरार!


बाकी खबरें

  • George Orwell
    समीना खान
    “1984” 2022 में भी प्रासंगिक
    06 Mar 2022
    हाल ही में राजकमल प्रकाशन के लिए अभिषेक श्रीवास्तव ने बीसवीं सदी के सबसे प्रसिद्ध और प्रासंगिक उपन्यास ‘1984’ का अनुवाद किया, जो अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1949 में…
  • Jai Prakash Chouksey
    मृगेंद्र सिंह
    स्मृति शेष : चौकसे साहब के निधन से एक धारदार और आकर्षक लेखनी पर पर्दा गिर गया
    06 Mar 2022
    जय प्रकाश चौकसे की याद में एक प्रशंसक पाठक का संस्मरण।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    पूर्वांचल: मुकाबला किसानों-युवाओं की नाराज़गी और सत्ताधारियों के चुनावी प्रबंधन में
    05 Mar 2022
    सात चरणों में विभाजित यूपी के विधानसभाई चुनाव के आखिरी चरण में 7 मार्च को 54 सीटों पर मतदान होगा. किसान और नौजवान सत्ताधारियो से बेहद नाराज़ है. इसके जवाब में सत्ताधारियो का चुनाव प्रबंधन भी बेजोड़…
  • Padtal Duniya Bhar Ki
    न्यूज़क्लिक टीम
    पड़ताल दुनिया भर कीः यूक्रेन के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र जापोरिजया पर रूसी, आख़िर इरादा क्या है
    05 Mar 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने रूस के यूक्रेन पर हमले के 10वें दिन, यूक्रेन के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र पर कब्जे किये जाने के पीछे, रूसी इरादों के बारे में न्यूज़क्लिक के…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    आज़मगढ़: फ़र्ज़ी एनकाउंटर, फ़र्ज़ी आतंकी मामलों को चुनावी मुद्दा बनाया राजीव यादव ने
    05 Mar 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने आज़मगढ़ की निजामाबाद विधानसभा का हाल लिया। बात की निर्दलीय उम्मीदवार, रिहाई मंच के एक्टिविस्ट राजीव यादव से, जिन्होंने आज़मगढ़ में फ़र्ज़ी एनकाउंटर और…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License