NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
असम: एनआरसी का अंतिम ड्राफ्ट प्रकाशित होते ही तनाव की स्थिति
सरकार ने दावे और आपत्तियाँ जमा करने के लिए 52 दिन का समय दिया है; दिसंबर 2018 तक एनआरसी की अंतिम सूचि आने की उम्मीद है।
विवान एबन
31 Jul 2018
National Register of Citizens

कल नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) प्रकाशित होने से पहले असम के तेंतीस में से दस जिलों में धारा 144  लागू कर दी गयी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी को प्रकाशित करने की तारीख 30 जून निर्धारित की थी लेकिन असम में वार्षिक बाढ़ से पैदा होने वाली परेशानियों की वजह से तारीख़ 30 जुलाई तक बढ़ा दी। सरकार को शायद इस प्रक्रिया की गंभीरता का एहसास है इसलिए अगर मौजूदा एनआरसी में किसी का नाम नहीं है तो उन्हें दावे और आपत्तियाँ दायर करने के लिए 52 दिन का समय दिया हैI अंतिम एनआरसी इस साल दिसंबर में प्रकाशित होने वाला है।

इसे भी पढ़े : असम: एनआरसी अद्यतन से बढ़ी असुरक्षा की भावना

स्थानीय असमिया समाचार चैनल, डीवाई 365 के मुताबिक, राज्य एनआरसी समन्वयक ने कहा कि "3,29,91,385 कुल आवेदकों में से 2,89,83,668 लोग नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर में शामिल होने के योग्य पाए गए हैं"। इसका मतलब यह होगा कि एनआरसी के मौजूदा मसौदे में 40 लाख से ज़्यादा नाम शामिल नहीं हैं। भले ही 40 लाख का आँकड़ा पहले अनुमान लगाए गए लोगों की तुलना में काफी कम संख्या है, फिर भी यह त्रिपुरा के अलावा किसी भी उत्तर-पूर्वी राज्य की आबादी से ज़्यादा है। हालांकि सरकार ने सुधार के लिए 52 दिनों के समय  की घोषणा की है, विपक्षी दलों ने माँग की है कि समय 90 दिनों तक बढ़ाया जाए। भले ही यह समयावधि बढ़े या नहीं लेकिन एक बात तय है कि किसी को भी इस बिनाह पर विदेशी नहीं घोषित किया जा सकता क्योंकि उसका नाम एनआरसी में नहीं हैI

इस कदम का स्वागत करते हुए, ऑल असम  स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) ने कहा है कि बांग्लादेशियों से मुक्त एनआरसी असम आंदोलन में शहीदों के बलिदान  के साथ न्याय होगा। अंग्रेजी भाषा दैनिक, द सेंटिनल ने इस कदम के लिए समर्थन व्यक्त करने वाले संपादकीयों को प्रकाशित किया । शनिवार को, एक संपादकीय ने लोगों की नागरिकता निर्धारित करने में  होने वाली कठिनाइयों को उजागर किया कि असम और बांग्लादेश के लोग बहुत समान हैं। कल के संपादकीय ने एनआरसी के कदम की सराहना करते हुए कहा, "जैसा कि एनआरसी का ये कार्य सत्यापन चरण से आगे बढ़ गया है, समर्थक विदेशी लॉबी की हताशा इस जानकारी से बढ़ गयी है कि जांच के दौरान इस तरह के फर्ज़ी कागजात का पता लगाया जा सकता है। कोई आश्चर्य नहीं कि 'असली भारतीयों' के पीड़ित होने की बात फीकी हो गई है!इस्लामवादियों, हिन्दुत्त्व ब्रिगेड और अन्य असामाजिक तत्त्वों को उकसा कर स्थिति खराब करने की कोशिश की जा रही हैI विदेशी ज़मीन से एक खुराफ़ाती ऑनलाइन अभियान के बाद, राष्ट्रीय मीडिया के एक वर्ग ने एनआरसी प्रकाशन के मसौदे आने के बाद 'रोहिंग्या जैसी स्थिति'की तरह पेश कर रहा है।"

                                    

असम ट्रिब्यून ने आज एक संपादकीय दिया, जिससे लोगों ने एनआरसी प्रकाशन के बाद शांत रहने का आग्रह किया। संपादकीय ने उल्लेख किया कि स्थिति इतनी तनाव पूर्ण  है कि एक छोटी सी चिंगारी ही जो पूरे राज्य को जलाने के लिए पर्याप्त होगा। उन्होंने कहा कि "एनआरसी अद्यतन वैध नागरिकता दस्तावेज़ों की सहायता से भारतीय नागरिकों की पहचान करने और पूर्वजों के साथ अपने परिवार के संबंध स्थापित करने का प्रयास है। यह देश के सुप्रीम कोर्ट की सख्त निगरानी के तहत किया जा रहा है, न कि एक सांप्रदायिक कार्य है, जैसा कि कथित रूप से या निहित स्वार्थ के  कुछ लोगों द्वारा आरोप लगाया जा रहा है।"

असम में एनआरसी पर सभी रिपोर्टों में दिखायी गयी एक आम बात यह है कि माहौल में तनाव हैI यद्यपि कहीं भी हिंसा हुई नहीं है यह ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई है लेकिन स्थानीय प्रेस और मुख्यधारा के दैनिक समाचार पत्रों ने उल्लेख किया है कि माहौल शंकाभरा और अजीब-सा है। इसका कारण चाहे भारी सैनिक तैनाती हो, धारा 144 हो, या इन दोनों से पहले ही मौजूद थीI यहाँ स्थिति एक मुर्गी पहले आई या अंडा वाली समस्या हो गयी है।  हालांकि, यह स्पष्ट है कि स्थानीय प्रेस द्वारा इस प्रक्रिया पर उठे किसी भी सवाल को  को बाहरी ताकतों (हिंदुत्त्वादी या अन्य) के हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा हैI

NRC
National Register of Citizens
Citizenship
Assam
Assam Agitation
Assam Accord
Bangladesh

Related Stories

असम में बाढ़ का कहर जारी, नियति बनती आपदा की क्या है वजह?

असम : विरोध के बीच हवाई अड्डे के निर्माण के लिए 3 मिलियन चाय के पौधे उखाड़ने का काम शुरू

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

ज़मानत मिलने के बाद विधायक जिग्नेश मेवानी एक अन्य मामले में फिर गिरफ़्तार

शाहीन बाग़ की पुकार : तेरी नफ़रत, मेरा प्यार

असम की अदालत ने जिग्नेश मेवाणी को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

सद्भाव बनाए रखना मुसलमानों की जिम्मेदारी: असम CM

देश बड़े छात्र-युवा उभार और राष्ट्रीय आंदोलन की ओर बढ़ रहा है

सामाजिक कार्यकर्ताओं की देशभक्ति को लगातार दंडित किया जा रहा है: सुधा भारद्वाज

असम: बलात्कार आरोपी पद्म पुरस्कार विजेता की प्रतिष्ठा किसी के सम्मान से ऊपर नहीं


बाकी खबरें

  • श्रुति एमडी
    ‘तमिलनाडु सरकार मंदिर की ज़मीन पर रहने वाले लोगों पर हमले बंद करे’
    05 Apr 2022
    द्रमुक के दक्षिणपंथी हमले का प्रतिरोध करने और स्वयं को हिंदू की दोस्त पार्टी साबित करने की कोशिशों के बीच, मंदिरों की भूमि पर रहने वाले लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। 
  • भाषा
    श्रीलंका में सत्ता पर राजपक्षे की पकड़ कमज़ोर हुई
    05 Apr 2022
    "सरकारी बजट पर मतदान के दौरान गठबंधन के पास 225 सांसदों में से 157 का समर्थन था, लेकिन अब 50 से 60 सदस्य इससे अलग होने वाले हैं। इसके परिणामस्वरूप सरकार न सिर्फ दो-तिहाई बहुमत खो देगी, बल्कि सामान्य…
  • विजय विनीत
    एमएलसी चुनाव: बनारस में बाहुबली बृजेश सिंह की पत्नी के आगे दीन-हीन क्यों बन गई है भाजपा?
    05 Apr 2022
    पीएम नरेंद्र मोदी का दुर्ग समझे जाने वाले बनारस में भाजपा के एमएलसी प्रत्याशी डॉ. सुदामा पटेल ऐलानिया तौर पर अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर आरोप जड़ रहे हैं कि वो…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: आज दूसरे दिन भी एक हज़ार से कम नए मामले 
    05 Apr 2022
    देश में कोरोना से पीड़ित 98.76 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 24 लाख 96 हज़ार 369 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है। और एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 12 हज़ार 54 रह गयी है।
  • मुकुल सरल
    नफ़रत की क्रोनोलॉजी: वो धीरे-धीरे हमारी सांसों को बैन कर देंगे
    05 Apr 2022
    नज़रिया: अगर किसी को लगता है कि ये (अ)धर्म संसद, ये अज़ान विवाद, ये हिजाब का मुद्दा ये सब यूं ही आक्समिक हैं, आने-जाने वाले मुद्दे हैं तो वह बहुत बड़ा नादान है। या फिर मूर्ख या फिर धूर्त। यह सब यूं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License