NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
असमां जहांगीर, एक असली जांबाज़ महिला
पाकिस्तान में सेना की मुखालफ़त करने के लिए उन्हें काफी कुछ भुगतना पड़ा
सीमा मुस्तफा
12 Feb 2018
asma jahangir
image courtesy: Hindustan times

असमां जहांगीर नहीं रहीं. अचानक, लगभग हतप्रभ कर देने वाली, मौत (दिल का दौरा) ने उन्हें हमसे ऐसे समय छीन लिया जब इस क्षेत्र को उनकी सबसे ज्यादा जरुरत थी. जब युद्ध का उन्माद चरम पर हो और भारत और पाकिस्तान के बीच नफ़रत की भाषा हावी हो, दर्जनों की संख्या में आम नागरिक और सैनिक मारे जा रहे हों, असमां की आवाज़ शांति के प्रति दृढ़ और अटल थी. उन्हें न तो कोई खरीद सकता था, न ही कोई सरकार लुभा सकती थी. शांति के अपने मिशन में वो सबके लिए उदहारण और प्रेरणास्रोत थीं.

असमां पाकिस्तान की सैन्य सरकारों की एक मजबूत आलोचक के रूप में उभरी थीं. उन्होंने मेरी इस समझ के लिए अक्सर मुझे झिड़का था कि गैर – असैनिक सरकारें बेहतर काम कर सकती हैं. उनका कहना था, “हमें लोकतंत्र चाहिए. हमें मालूम है कि वो कमजोर है. हमारी चाहत है कि वो मजबूत हो और यह सेना की वर्दी तले मुमकिन नहीं.” लाहौर स्थित उनके घर पर उनसे हमारी रात – रात भर लंबी बहसें चली हैं. हमने भारत और पाकिस्तान के बीच के मतभेदों के बारे में आपस में तकरीरें की और दोनों देशों के बीच की समानताओं को एक जैसी राहत महसूस की.

वो नई दिल्ली के हुक्मरानों पर हंसती थी, जो बाहें फैलाकर उनका स्वागत करते थे. यह आलिंगन इस्लामाबाद की सरकार की उनकी आलोचना के सीधे अनुपात में था. एक समय था जब वो भारतीय विदेश मंत्रालय की चहेती हुआ करती थीं, जो उनकी आगवानी में लाल कालीन बिछाये रहता था ताकि वो भारत में घूम – घूमकर पाकिस्तान में सैन्य शासन, जिसकी उन्होंने लगातार मुखालफ़त की, की आलोचना कर सकें. इस बारे में इशारा किये जाने पर वो कहतीं, “ मैं जानती हूं कि तुम्हें लगता है कि मुझे इसका इल्हाम नहीं. वैसे यह सही भी है. हमें इस्लामाबाद में एक असैनिक सरकार चाहिए.”

कई लोगों की तरह असमां को भी अपने देश में सैन्य सरकार की मुखालफ़त करने के लिए काफी कुछ भुगतना पड़ा. अपने परिवार को लेकर वो चिंतित रहती थी और इस बात के लिए प्रतिबद्ध थी कि उनके करीबी लोग पाकिस्तान से बाहर अपनी ज़िन्दगी बसर करें. उन्हें अपने वतन से बेहद मुहब्बत थी और इस बारे में बिल्कुल साफ़ थीं कि वो वतन छोड़कर नहीं जायेंगी. लेकिन अपने साथ जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर डरी रहती थी. उनका कहना था कि वो गोली खाने को तैयार हैं, लेकिन अपने चहेतों के साथ किसी अनहोनी को बर्दाश्त करना उनके लिए मुश्किल होगा. वो गर्व और भय के जद्दोजहद से गुजरीं जब उनकी बच्ची ने पत्रकारिता के पेशे में कदम रखा. उन्हें मालूम था कि पाकिस्तान में राज्य के कहर ने कईयों की ज़िंदगी उलट – पुलट कर दी. यक़ीनन भारत में भी ऐसा हुआ है.

यह सही है कि असमां ने कई अवार्ड हासिल किये. दुनिया भर के अमनपसंद लोगों ने उनकी वाहवाही की. वो एक नामचीन हस्ती थी. लेकिन उनके दोनों पांव जमीन पर मजबूती से जमे थे. दुश्वारियों और शोहरत, दोनों स्थितियों में उनकी मुस्कराहट एक जैसी रहती थी. उनके जेहन में यह बात साफ़ थी कि उनका जीवन ड्राइंगरूम तक सिमट जाने भर के लिए नहीं, बल्कि बाहर जाकर मैदान में अनुभव हासिल करने के लिए है. अपने ऊपर हुए हमलों के बावजूद मैदान में वो अपनी आवाज़ बुलंद करने से नहीं हिचकिचाती थीं. धमकियों से बेपरवाह वो सेना और कट्टरपंथियों, दोनों, से एक साथ भिड़ी रहीं. उनके लिए दोनों दुश्मन थे और एक मजबूत और लोकतांत्रिक पाकिस्तान के लिए इन दोनों से जूझना जरुरी था.

मेरी उनसे बात हुई थी, लेकिन भारत में बदलती परिस्थितियों और लोकतंत्र पर छाए खतरों के मद्देनज़र मुलाकात न हो सकी. मुझे मालूम नहीं कि उनकी क्या प्रतिक्रिया होती. क्योंकि सेना और कट्टरपंथ से दूर एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक व्यवस्था के साये में भारत द्वारा हासिल की गयी प्रगति की वो प्रशंसक थीं. यक़ीनन उन्हें निराशा होती, लेकिन फिर भी वो हमें हालात से जूझने को कहतीं. वो इस बात को रेखांकित करतीं कि पाकिस्तान में उनके जैसे चुनिंदा लोग हैं, जबकि भारत में ऐसे कई लोग हैं जो इन स्थितियों से टकराने का माद्दा रखते हैं.

मैं यह कहने की इजाज़त चाहती हूं कि शांति के लिए असमां का मिशन भले ही जंग से खुराक पाने वालों को राजी नहीं कर सका हो, लेकिन उसने इस पूरे क्षेत्र में शांति को एक संस्थागत रूप दे दिया है. एक ऐसी जमात है जो उनकी ही भांति शांति के लिए प्रतिबद्ध और समर्पित है. यह जमात गैर – समझौतापरस्त, कभी हार न मानने वाली है. उसे उम्मीद है कि जल्द ही जंग के इरादों से पार पाते हुए और तमाम अराजकताओं को धता बताते हुए शांति स्थापित होगी.

अपनी छोटी कद-काठी, सतर्क आंखों और होठों पर मुस्कराहट के साथ पूरी तन्मयता से शांति की वकालत करते हुए असमां को आज भी महसूस किया जा सकता है. निश्चित रूप से वो एक असली जांबाज़ महिला थीं, जिन्हें हमलोगों ने उनके जिंदा रहते बहुत ही हलके में लिया. और अब एक भारी क्षति महसूस कर रहे हैं.

Courtesy: द सिटिज़न
ashma jahangir
lahore
Pakistan
human rights activists

Related Stories

जम्मू-कश्मीर के भीतर आरक्षित सीटों का एक संक्षिप्त इतिहास

रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं

कार्टून क्लिक: इमरान को हिन्दुस्तान पसंद है...

कश्मीरी माहौल की वे प्रवृत्तियां जिनकी वजह से साल 1990 में कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ

फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये

सीमांत गांधी की पुण्यतिथि पर विशेष: सभी रूढ़िवादिता को तोड़ती उनकी दिलेरी की याद में 

भारत को अफ़ग़ानिस्तान पर प्रभाव डालने के लिए स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने की ज़रूरत है

कैसे कश्मीर, पाकिस्तान और धर्मनिर्पेक्षता आपस में जुड़े हुए हैं

भारत और अफ़ग़ानिस्तान:  सामान्य ज्ञान के रूप में अंतरराष्ट्रीय राजनीति

विशेष: दोनों तरफ़ के पंजाबियों को जोड़ती पंजाबी फिल्में और संगीत


बाकी खबरें

  • election
    लाल बहादुर सिंह
    पक्ष-प्रतिपक्ष: चुनाव नतीजे निराशाजनक ज़रूर हैं, पर निराशावाद का कोई कारण नहीं है
    16 Mar 2022
    UP के चुनाव का ज़ोरदार झटका शायद उन सभी विपक्षी राजनीतिक ताकतों को जो अपना अस्तित्व बचाना और भाजपा को हराना चाहती हैं, उन्हें 24 की लड़ाई को अधिक गम्भीरता से जीवन-मरण का संग्राम बनाकर लड़ने के लिए…
  • bhagwant mann
    भाषा
    भगवंत मान ने पंजाब के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की
    16 Mar 2022
    पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने राज्य के शहीद भगत सिंह (एसबीएस) नगर जिले में महान स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह के पैतृक गांव खटकड़ कलां में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में मान को पद एवं गोपनीयता की…
  • रौनक छाबड़ा
    दिल्ली: संसद सत्र के बीच स्कीम वर्कर्स का प्रदर्शन, नियमितीकरण और बजट आवंटन में वृद्धि की मांग
    16 Mar 2022
    इस प्रदर्शन में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका, मध्याह्न भोजन (मिड डे मिल) कार्यकर्ता और आशाकर्मी  शामिल थीं। इन सभी ने कहा कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट में इन सभी योजनाओ के लिए "बजट आवंटन में…
  • protest
    मंजीत सिंह पटेल
    क्या हैं पुरानी पेंशन बहाली के रास्ते में अड़चनें?
    16 Mar 2022
    समस्या यह है कि नई पेंशन योजना सेवा के वर्षों से कोई इत्तेफाक नहीं रखती है बल्कि यह कार्पस बेस्ड है यानी जितना फंड NPS अकाउंट में होगा उसी हिसाब से पेंशन।
  • ज़ोमैटो डिलीवरी एजेंटों ने तिरुवनंतपुरम में शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल
    अभिवाद
    ज़ोमैटो डिलीवरी एजेंटों ने तिरुवनंतपुरम में शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल
    16 Mar 2022
    डिलीवरी एजेंटों ने ज़ोमैटो फ़ूड एग्रीगेटर के प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि बिना किसी अतिरिक्त लाभ के उन्हें फ़ुल टाइम काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License