NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
"और मुज़फ़्फ़रनगर नहीं सहेंगे" कुपोषण मुक्त भारत के लिए आइफ़ा का देशव्यापी विरोध प्रदर्शन
कुपोषण मुक्त भारत के लिए आईसीडीएस को मज़बूत करने की मांग को लेकर देश भर की लाखों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने ज़िला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Jul 2019
और मुज़फ़्फ़रनगर नहीं सहेंगे

देश के कई हिस्सों में भारी बारिश के बावजूद, लाखों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने ऑल इंडिया फ़ेडरेशन ऑफ़ आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स (आइफ़ा) ने कल 10 जुलाई 2019 को अखिल भारतीय मांग दिवस मनाया। आइफ़ा ने कहा कि इस वर्ष मुजफ्फरपुर में 150 से अधिक बच्चों की मृत्यु की पृष्ठभूमि में आज देशभर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने मांग दिवस “और मुजफ्फरपुर नहीं सहेंगे, कुपोषण मुक्त भारत के लिए, आईसीडीएस को मज़बूत बनाने, स्वतंत्रता का वादा पूरा करने” के नारे के साथ मनाया। इसमें आइफ़ा के देशभर के आंगनवाड़ी कर्मचारियों ने भाग लिया। 

66344968_2151565044911757_2065609884732227584_n.jpg

आइफ़ा ने कहा कि 22 राज्यों - आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, पॉण्डिचेरी, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा, तमिलनाडु, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के लाखों आंगनवाड़ी कर्मचारियों ने आइफ़ा के आह्वान पर आज अखिल भारतीय मांग दिवस मनाया।

नई सरकार के सत्ता में आने के बाद, यह राष्ट्रीय स्तर का पहला विरोध प्रदर्शन है। आइफ़ा ने अपने प्रेस रिलीज़ में कहा है कि बिहार की त्रासदी और स्थिति ऐसी है कि बिहार सहित कई राज्यों में महीनों तक पूरक पोषाहार और वर्कर्स व हेल्पर्स के वेतन का भुगतान नहीं किया गया है- ऐसी पृष्ठभूमि में आज देशभर के आंगनवाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स ने प्रदर्शन किया।
 
देश के कई हिस्सों में भारी बारिश के बावजूद, बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका एकत्रित हुईं आइफ़ा के नेताओं ने कहा कि वे इसलिए भी आंदोलित हैं क्योंकि भाजपा और आरएसएस चुनाव के दौरान और सरकार बनने के बाद लगातार यह अभियान चलाती रही कि मोदी सरकार द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का वेतन प्रतिमाह 18000 रुपये तक बढ़ाया जाएगा।

66438088_2151565614911700_5278972895110889472_n.jpg

आंगनवाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स को इस तरह के संदेश बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया का उपयोग करके भेजे गए। लेकिन मुजफ्फरपुर की दुखद घटना के बाद भी मोदी सरकार मंत्रालय की महिला वित्त मंत्री द्वारा बहुत धूमधाम के साथ रखे गए बजट में, आईसीडीएस के आवंटन के लिए एक रुपया भी नहीं बढ़ाया गया; और तो और कई राज्यों में अभी तक आंगनवाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स को सितंबर 2018 में घोषित वेतन वृद्धि का भुगतान नहीं किया गया है। कई राज्य सरकारें स्कूलों में प्री-स्कूल खोल रही हैं, ताकि बच्चों को आंगनवाड़ियों से दूर ले जाया जा सके। कुछ राज्यों में पोषाहार के बदले पैसा देने और केंद्रीकृत रसोई का भी प्रयास किया जा रहा है।

मुजफ्फरपुर में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सैकड़ों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने भाग लिया। पूरे देश में कार्यकर्ताओं ने जनसभा से पहले मुजफ्फरपुर में जान गंवाने वाले बच्चों को श्रद्धांजलि दी। बिहार राज्य आंगनवाड़ी सेविका सहायिका संघ के द्वारा हाल ही में आयोजित सम्मेलन में निर्णय लिया गया है कि मुजफ्फरपुर में कुपोषण के ख़िलाफ़ और आईसीडीएस को मज़बूत करने के लिए 14 अगस्त 2019 से ‘बच्चों को कुपोषण और बीमारी मुक्ति, बच्चों की मृत्यु- अब और नहीं’ नामक शीर्षक से वार्षिक अभियान और गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

आशा कर्मियों की मुख्य मांगें

आईसीडीएस को स्थायी बनाया जाए; आईसीडीएस के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाया जाए
45वें भारतीय श्रम सम्मेलन द्वारा की गई सिफ़ारिशों के अनुसार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभ तथा पेंशन दी जाए।
आईसीडीएस का किसी भी प्रकार से निजीकरण नहीं किया जाए; आईसीडीएस में कॉर्पोरेट कंपनियों या ग़ैर-सरकारी संगठनों को शामिल न किया जाए।
आईसीडीएस को मज़बूत बनाया जाए; आंगनवाड़ी को आंगनवाड़ी-सह-क्रेच में परिवर्तित किया जाए; पोषण के लिए आवंटन में वृद्धि की जाए; आईसीडीएस में पूर्वस्कूली शिक्षा को मज़बूत करके उसे बनाए रखा जाए।

आइफ़ा ने अंत में कहा कि आईसीडीएस को मज़बूत करने की मांग के साथ-साथ नियमितीकरण, न्यूनतम वेतन व पेंशन जैसी मांगों को अगर सरकार नहीं मानती तो आने वाले दिनों में और भी बड़े आंदोलन होंगे।

AIFAWH
aanganwadi workers
workers protests
Modi Govt
modi sarkar
women employment
healthcare
Workers rights

Related Stories

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

लंबे संघर्ष के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायक को मिला ग्रेच्युटी का हक़, यूनियन ने बताया ऐतिहासिक निर्णय

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ भारत बंद का दिखा दम !

हरियाणा: आंगनबाड़ी कर्मियों का विधानसभा मार्च, पुलिस ने किया बलप्रयोग, कई जगह पुलिस और कार्यकर्ता हुए आमने-सामने

उत्तर प्रदेश में स्कीम वर्कर्स की बिगड़ती स्थिति और बेपरवाह सरकार

2021 : जन प्रतिरोध और जीत का साल

जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?

किसानों की ऐतिहासिक जीत के मायने

'अच्छे दिन’ नहीं चाहिए, बस ये बता दो कब होगी रेलवे ग्रुप डी की भर्ती परीक्षा?


बाकी खबरें

  • veto
    एपी/भाषा
    रूस ने हमले रोकने की मांग करने वाले संरा के प्रस्ताव पर वीटो किया
    26 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 और विपक्ष में एक मत पड़ा। चीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात मतदान से दूर रहे।
  • Gujarat
    राजेंद्र शर्मा
    बैठे-ठाले: गोबर-धन को आने दो!
    26 Feb 2022
    छुट्टा जानवरों की आपदा का शोर मचाने वाले यह नहीं भूलें कि इसी आपदा में से गोबर-धन का अवसर निकला है।
  • Leander Paes and Rhea Pillai
    सोनिया यादव
    लिएंडर पेस और रिया पिल्लई मामले में अदालत का फ़ैसला ज़रूरी क्यों है?
    26 Feb 2022
    लिव-इन रिलेशनशिप में घरेलू हिंसा को मान्यता देने वाला ये फ़ैसला अपने आप में उन तमाम पीड़ित महिलाओं के लिए एक उम्मीद है, जो समाज में अपने रिश्ते के अस्तित्व तो लेकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करती…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022: किस तरफ होगा पूर्वांचल में जनादेश ?
    26 Feb 2022
    इस ख़ास बातचीत में परंजॉय गुहा ठाकुरता और शिव कुमार बात कर रहे हैं यूपी चुनाव में पूर्वांचाल की. आखिर किस तरफ है जनता का रुख? किसको मिलेगी बहुमत? क्या भाजपा अपना गढ़ बचा पायेगी? जवाब ढूंढ रहे हैं…
  • manipur
    शशि शेखर
    मणिपुर चुनाव: भाजपा के 5 साल और पानी को तरसती जनता
    26 Feb 2022
    ड्रग्स, अफस्पा, पहचान और पानी का संकट। नतीजतन, 5 साल की डबल इंजन सरकार को अब फिर से ‘फ्री स्कूटी’ का ही भरोसा रह गया है। अब जनता को तय करना है कि उसे ‘फ्री स्कूटी’ चाहिए या पीने का पानी?    
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License