NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अयोध्या विवाद : अब सुप्रीम कोर्ट को बाइपास करना चाहती है बीजेपी
अयोध्या ज़मीन विवाद में सुप्रीम कोर्ट अब जनवरी में सुनवाई करेगा। लेकिन बीजेपी ने इसके खिलाफ माहौल बनाना शुरू कर दिया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Oct 2018
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy: MyNation

सर्वोच्च न्यायालय में सोमवार को अयोध्या जमीन विवाद मामले में सुनवाई टल गई। अब मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2019 में एक उचित पीठ के समक्ष होगी।

हालांकि, अदालत ने सुनवाई के लिए कोई विशेष तारीख निर्धारित करने से इनकार किया।

आज की सुनवाई को लेकर मीडिया खासकर न्यूज़ चैनलों ने काफी उत्सुकता जगाई थी। सभी चैनल सुबह से ही “अयोध्या पर सबसे बड़ा फैसला” जैसे शीर्षक लेकर जनता के सामने प्रकट हो गए थे। अयोध्या में कई जगह कैमरे लगा दिए गए थे और लाइव टेलीकास्ट किया जा रहा था। कई चैनलों ने तो लोगों को इकट्ठा कर बाकायदा बहस भी शुरू कर दी थी कि अयोध्या में मंदिर बनना चाहिए या नहीं। ऐसा लगने लगा था कि जैसे आज अयोध्या मामले में अंतिम फैसला आ रहा हो। जबकि आज सिर्फ ये तय होना था कि इस केस को कौन सी बेंच सुनेगी और नियमित सुनवाई कबसे होगी।

पहले इस मामले को पूर्व मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ जिसमें जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर शामिल थे, सुन रही थी। शीर्ष अदालत ने 27 सितम्बर को 2 : 1 के बहुमत से 1994 में दिए गए उच्च न्यायालय के एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था और मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर से तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ द्वारा सुने जाने का निर्देश दिया था। नवगठित पीठ द्वारा सोमवार को दोनों पक्षों, हिंदू व मुस्लिम हितधारकों द्वारा दाखिल याचिकाओं के समूह पर सुनवाई किए जाने की उम्मीद थी। इन याचिकाओं में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय बेंच ने आज इस मामले को जनवरी, 2019 तक टाल दिया। इस बेंच में मुख्य न्यायाधीश गोगोई के अलावा जस्टिस केएम जोसेफ़ और जस्टिस संजय किशन कौल शामिल थे।  

कोर्ट ने मामला तो जनवरी तक टाल दिया है लेकिन इस बीच केंद्र और यूपी की सरकार के अलावा पार्टी के स्तर पर बीजेपी ने इस मुद्दे को काफी हवा दे दी है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आस्था के सवाल को बहुत बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे हैं। सबरीमाला पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुखालफत करते हुए अब राममंदिर पर भी लगातार बोला जा रहा है।

आपको बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में पौने तीन एकड़ विवादित ज़मीन को तीनों पक्षकारों रामलला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बराबर-बराबर बांटने का फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट भी अयोध्या मामले को आस्था की बजाय पूरी तरह ज़मीन के मालिकाना हक के मामले की तरह देख रहा है। इसलिए मंदिर के पक्षकारों की तरफ से अब सुप्रीम कोर्ट को बाइपास कर कानून बनाने की मांग की जाने लगी है। जबकि बाबरी मस्जिद के पक्षकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ही इंतज़ार कर रहे हैं और उसके ही सम्मान की बात कह रहे हैं।

आरएसएस और बीजेपी के तमाम नेताओं ने राम मंदिर के लिए संसद में कानून बनाने की मांग तेज़ कर दी है। अपने बयानों को लेकर हमेशा विवादों में रहने वाले बीजेपी के केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा भी कि “अब हिन्दुओं का सब्र टूट रहा है।”

जानकारों का कहना है कि कुल मिलाकर बीजेपी और आरएसएस का मकसद 2019 के आम चुनाव तक इस मुद्दे को पूरी तरह गर्माने का है। ताकि वोटों का आसानी से ध्रुवीकरण किया जा सके।

(इनपुट आईएएनएस)

Ayodhya Case
Supreme Court
BJP-RSS
Ram Janamabhoomi – Babri Masjid
Babri Masjid issue

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • यूपी चुनाव: नतीजे जो भी आयें, चुनाव के दौरान उभरे मुद्दे अपने समाधान के लिए दस्तक देते रहेंगे
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव: नतीजे जो भी आयें, चुनाव के दौरान उभरे मुद्दे अपने समाधान के लिए दस्तक देते रहेंगे
    09 Mar 2022
    जो चैनल भाजपा गठबंधन को बहुमत से 20-25 सीट अधिक दे रहे हैं, उनके निष्कर्ष को भी स्वयं उनके द्वारा दिये गए 3 से 5 % error margin के साथ एडजस्ट करके देखा जाए तो मामला बेहद नज़दीकी हो सकता है।
  • crude
    अजय कुमार
    कच्चे तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी से कहां तक गिरेगा रुपया ?
    09 Mar 2022
    जब डॉलर रुपए से अधिक मज़बूत होता है तब 1 डॉलर के लिए पहले से ज़्यादा रुपये देना पड़ता है तो इसका असर उन पर भी पड़ता है जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में कभी डॉलर में लेन-देन नहीं किया होता है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 4,575 नए मामले, 145 मरीज़ों की मौत
    09 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.11 फ़ीसदी यानी 46 हज़ार 962 हो गयी है।
  • ukraine
    एपी/भाषा
    यूक्रेन-रूस अपडेट: कीव में हवाई अलर्ट घोषित; यूक्रेन और रूस बृहस्पतिवार को वार्ता करेंगे
    09 Mar 2022
    युद्धग्रस्त यूक्रेन की राजधानी कीव और उसके आसपास बुधवार की सुबह एक हवाई अलर्ट घोषित किया गया और निवासियों से जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों में जाने का अनुरोध किया गया।
  • ship
    एम के भद्रकुमार
    यूक्रेन के ख़िलाफ़ चल रहे रूसी सैन्य अभियान नये चरण में दाखिल
    09 Mar 2022
    बेलारूस में रूसी-यूक्रेन के बीच की वार्ता में जो कुछ भी होगा, वह निर्णायक होगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License