NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संस्कृति
भारत
राजनीति
अयोध्या विवाद के शांतिपूर्ण हल के लिए CJP ने SC में दाखिल की याचिका, आप भी करें समर्थन
शांति के इस अभियान में शामिल होने के लिए CJP ने 10 लाख हस्ताक्षर वाला अभियान चलाया है।
सबरंग इंडिया
04 Dec 2017
babri masjid
sabrang india

नई दिल्ली। अयोध्या का शाब्दिक अर्थ समझा जाए तो यह (अ-युद्धा) होता है, जिसका मतलब है कि वह स्थान जिसे युद्ध से नहीं जीता जा सकता। लेकिन बड़ी विडम्बना है कि अयोध्या विवाद का नाम लेते ही 'अलगाव' की राजनीति और खून खराबे का मंजर आंखों के सामने कौंधने लगता है। 25 साल से अयोध्या को लेकर बांटने वाली राजनीति होती आ रही है। 

सियासी फायदे के लिए की जा रही इस राजनीति से इतर देखा जाए तो लगभग सभी भारतीय यह चाहते हैं कि नफरत या टकराव के बजाय यह अनमोल सांस्कृतिक शहर समझदारी, संवाद और आपसी सहयोग का प्रतीक बने। शांति से संवाद और निपटारे की पहल के तहत् सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) को करीब तीन दर्जन जानी मानी हस्तियों ने समर्थन दिया है। 

CJP ने इस मुद्दे को लेकर अपनी दलीलों के साथ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। CJP द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय भारत और अयोध्या में उन अनमोल संवैधानिक सिद्धांतों को पुनर्स्थापित करे जिसकी बुनियाद पर स्वाधीन भारत का अस्तित्व साकार हुआ था।

CJP की पहल को श्याम बेनेगल, अपर्णा सेन, ओम थानवी, आरबी श्रीकुमार, आनंद पटवर्धन, गणेश देवी, मेधा पाटकर, अरुणा रॉय, अनिल धरकर, तीस्ता सीतलवाड़, जॉय सेनगुप्ता, साइरस गजर, राम रहमान, सोहेल हाशमी, एम के रैना, डॉ. बीटी ललिता नाईक, जॉन दयाल, सुमन मुखोपाध्याय, किरण नागरकर, कुमार केतकर, कल्पना कन्नामिरन, के.एल. अशोक, केपी श्रीपला, ए.के. सुब्बिया, सुरेश भट्ट बकाबेल, प्रोफेसर जी हरगोपाल, एन बाबायाह, तानाज दारा मोदी, मुनीज़ा खान, तनवीर जाफरी और डॉल्फी डिसूजा जैसी दिग्गज हस्तियों ने समर्थन दिया है।

CJP द्वारा दर्ज मज़बूत दलीलों के अनुसार, न्यायालय इसे केवल संपत्ति-विवाद का मामला नहीं मान सकता। यह गैरबराबर वालों के बीच की लड़ाई है, साथ ही यह भी संज्ञान में लेना आवश्यक है कि जिन्होंने अतीत में अपराध किये हैं, वे अब सत्ता में हैं। न्यायालय इस मामले को संवैधानिक बेंच के समक्ष रखते हुए महज जमीन का टुकड़ा समझने के बजाय वो मामला समझे जिसने धर्मनिरपेक्ष लोकतान्त्रिक गणतंत्र की नींव को झकझोर दिया है।

अनुच्छेद 142  के तहत सर्वोच्च न्यायालय के पास यह ताक़त होती है, कि वह किसी भी स्थिति में “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करे।  यहां CJP का कहना है, कि सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत मामले का हल ढूँढने के लिए न्यायलय के भीतर या बाहर कोई भी रास्ता अपनाये। इस अनुच्छेद में दोनों पक्षों की मांग के दायरे के बाहर से भी हल ढूँढने का प्रावधान है। हम आग्रह करते हैं कि जहां बाबरी मस्जिद कभी हुआ करती थी उस जगह को एक तटस्थ संवैधानिक जगह में बदला जाए जो भारत में नई शांतिपूर्ण शुरुआत का संकेत दे। और जो हिंसा की राजनीति को स्पष्ट रूप से नकारा जाए।

शांति के इस अभियान में शामिल होने के लिए CJP ने 10 लाख हस्ताक्षर वाला अभियान चलाया है। आप भी इसमें हिस्सेदार बनने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर इस पहल को अपना समर्थन दे सकते हैं। 

Courtesy: सबरंग इंडिया
babri masjid
BJP
Supreme Court

Related Stories

उर्दू पत्रकारिता : 200 सालों का सफ़र और चुनौतियां

मैंने क्यों साबरमती आश्रम को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की है?

नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

सांप्रदायिक घटनाओं में हालिया उछाल के पीछे कौन?

ज्ञानवापी मस्जिद : अनजाने इतिहास में छलांग लगा कर तक़रार पैदा करने की एक और कोशिश

अयोध्या विवाद के 'हल' होने के बाद, संघ परिवार का रुख़ काशी और मथुरा की तरफ़

बनारस: ‘अच्छे दिन’ के इंतज़ार में बंद हुए पावरलूम, बुनकरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

अयोध्या का भूमिपूजन भारत के लोकतंत्र का बहुसंख्यकवाद में बदल जाने का सबसे बड़ा गवाह है

हल्ला बोल! सफ़दर ज़िन्दा है।

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में आदिवासियों पर सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताएं थोपी जा रही हैं


बाकी खबरें

  • पीपल्स डिस्पैच
    नेपाल ने अमेरिका के MCC अनुदान समझौते को विरोध प्रदर्शनों के बीच दी मान्यता, अब आगे क्या?
    04 Mar 2022
    नेपाली संसद में कई हफ़्तों तक चली उठापटक नतीजा आख़िरकार अमेरिका की एमसीसी के साथ 500 मिलियन डॉलर का समझौता रहा। इस समझौते के पहले सरकार के समझौते का विरोध कर रही राजनीतिक पार्टियों ने बड़े विरोध…
  • mamta banerjee
    विजय विनीत
    यूपी चुनावः बनारस के सियासी अखाड़े में दिग्गजों पर भारी पड़ीं ममता, भाजपा को दे गईं गहरी चोट
    04 Mar 2022
    बंगाली समाज के लोग बनारस में पीढ़ियों से बंग संस्कृति को जीवंत बनाए हुए हैं। पिछले कई चुनावों से वह बीजेपी को वोट देते आए हैं। इस बार ममता बनर्जी का अपमान और उनको यह कहना कि वो हिन्दू नहीं हैं, अंदर…
  • पीपल्स डिस्पैच
    यूक्रेन में चल रहे संघर्ष और युद्ध-विरोधी आंदोलन के परिपेक्ष्य
    04 Mar 2022
    शांति के लिए काम करने वाले एबी मार्टिन और ब्रायन बेकर रूस-यूक्रेन संघर्ष के सिलसिले में युद्ध विरोधी आंदोलन की दिशा में चर्चा करने के लिए आपस में मिले
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 6,396 नए मामले, 201 मरीज़ों की मौत
    04 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.16 फ़ीसदी यानी 69 हज़ार 897 हो गयी है।
  • mbbs
    रवि कौशल
    सरकार ने मेडिकल कॉलेजों की बजाय मंदिरों को प्राथमिकता दी,  इसी का ख़ामियाज़ा यूक्रेन में भुगत रहे हैं छात्र : मेडिकल विशेषज्ञ
    04 Mar 2022
    विशेषज्ञों का कहना है कि रूस, चीन और पूर्वी यूरोपीय देशों में मेडिकल की डिग्री हासिल करने के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की बड़ी तादाद की मुख्य वजह देश के निजी चिकित्सा संस्थानों की मोटी फीस है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License