NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता प्रक्रिया पर एक हफ्ते के भीतर मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर यह विवादित मामला मैत्रीपूर्ण तरीके से हल नहीं हुआ तो वह 25 जुलाई से दिन-प्रतिदिन आधार पर इसकी सुनवाई करेगा।
भाषा
11 Jul 2019
फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद अयोध्या भूमि विवाद मामले में जारी मध्यस्थता प्रक्रिया के संबंध में गुरुवार को एक सप्ताह के अंदर नवीनतम स्थिति रिपोर्ट मांगी और स्पष्ट किया कि अगर यह विवादित मामला मैत्रीपूर्ण तरीके से हल नहीं हुआ तो वह 25 जुलाई से दिन-प्रतिदिन आधार पर इसकी सुनवाई करेगा।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) एफ एम आई कलीफुल्ला से 18 जुलाई तक स्थिति रिपोर्ट सौंप देने का अनुरोध किया।

साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि वह अगला आदेश भी 18 जुलाई को ही देगी। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) एफ एम आई कलीफुल्ला तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल के अध्यक्ष हैं।

संविधान पीठ ने कहा कि नवीनतम स्थिति रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अगर उसे लगेगा कि मध्यस्थता प्रक्रिया विफल रही तब मुख्य अयोध्या विवाद मामले की सुनवाई न्यायालय 25 जुलाई से दिन प्रतिदिन के आधार पर करेगा।

पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबड़े, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर भी शामिल हैं। 

पीठ ने कहा, ‘हम समझते हैं कि न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) एफ एम आई कलीफुल्ला से यह अनुरोध करना उचित है कि वह अभी तक की मध्यस्थता प्रक्रिया के बारे में हमें सूचित करें और साथ ही यह भी बताएं कि प्रकिया अभी किस स्तर पर है।’

पीठ ने कहा, ‘न्यायाधीश कलीफुल्ला अगले बृहस्पतिवार तक यह रिपोर्ट सौंपेंगे। इसी दिन अगला आदेश पारित किया जाएगा।’

सुप्रीम कोर्ट ने एक मूल वादी के कानूनी उत्तराधिकारी गोपाल सिंह विशारद की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में विवाद पर न्यायिक फैसला देने और मौजूदा मध्यस्थता प्रक्रिया को बंद करने का अनुरोध किया गया। इसमें आरोप लगाया गया है कि मध्यस्थता प्रक्रिया में ज्यादा कुछ नहीं हो रहा है। 

सुनवाई के दौरान राम लला विराजमान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने याचिका का समर्थन किया और कहा कि उन्होंने पहले भी मध्यस्थता समिति में मामला भेजे जाने का विरोध किया था। याचिका का विरोध कर रहे मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा कि यह नयी याचिका उन्हें डराने-धमकाने की चाल है इसलिए मध्यस्थता प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए।

हालांकि, पीठ ने धवन को बताया कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता समिति का गठन किया था तो उसे समिति से ताजा स्थिति रिपोर्ट प्राप्त करने का अधिकार है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के एस परासरण ने कहा कि शुरुआत से ही इस तरह के विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाना काफी मुश्किल रहा है।

मध्यस्थता समिति की बैठकों का ब्यौरा देते हुए उन्होंने कहा कि यह बेहतर होगा कि सुप्रीम कोर्ट विवाद पर न्यायिक रूप से फैसला करें। उनकी दलीलों का विरोध करते हुए धवन ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इस समय समिति की कार्य प्रणाली की आलोचना करना उचित है।’

इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘हम मध्यस्थता समिति से रिपोर्ट मांगेंगे।’ इस पर धवन ने कहा कि मध्यस्थता को बीच में छोड़ना 10 मई के आदेश को पलटने जैसा होगा जब सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 15 अगस्त तक का समय बढ़ा दिया था।

उन्होंने कहा, ‘यह ठीक नहीं है। वे (वादी) 10 मई के आदेश को पलटने के लिए नहीं कर रहे। वे कह रहे हैं कि मध्यस्थता समिति रद्द की जाए। गंभीर मध्यस्थता चल रही है।’

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि उसने विवाद के पक्षकारों से पहले कहा था कि वह मौखिक सबूत के अनुवाद की सटीकता और शुद्धता के संबंध में लिखित में अदालत को सूचित करे। पीठ ने कहा कि पक्षकारों ने अभी तक उसे सूचित नहीं किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय 15 अगस्त तक बढ़ा दिया था और कहा था कि मध्यस्थता समिति सर्वमान्य समाधान को लेकर ‘आशावादी’ है।

न्यायालय ने आठ मार्च को सर्वमान्य समाधान की संभावना की तलाशने के लिए मध्यस्थता समिति के पास मामला भेज दिया था और न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) कलीफुल्ला को उसका अध्यक्ष नियुक्त किया था। आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता तथा प्रख्यात मध्यस्थ श्रीराम पंचू को समिति का सदस्य बनाया गया। 

उसने समिति से बंद कमरे में सुनवाई करने और प्रक्रिया को आठ सप्ताह के भीतर पूरी करने के लिए कहा था। निर्मोही अखाड़ा और उत्तर प्रदेश सरकार को छोड़कर हिंदू संस्थाओं ने पीठ को बताया था कि वे मध्यस्थता के लिए अदालत के सुझाव के पक्ष में नहीं हैं। मुस्लिम संस्थाओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में 14 अपील दायर की गई। उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया था कि अयोध्या में 2.77 एकड़ भूमि को तीन पक्षकारों सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लल्ला के बीच बराबर बांटा जाए।

गौरतलब है कि 16वीं सदी में शिया मुस्लिम मीर बाकी द्वारा विवादित स्थल पर बनायी गयी बाबरी मस्जिद का ढांचा छह दिसंबर 1992 को ढहा दिया गया था।
    

Supreme Court
Ayodhya Case
mediation panel
mediation committee
Justice Ranjan Gogoi
FM Kalifulla

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • farmers’ movement
    रौनक छाबड़ा
    दिल्ली के बॉर्डर पर जश्न के बीच किसानों के होंठों पर एक ही सवाल: 'सरकार ने क्यों की इतनी देर'
    20 Nov 2021
    किसान आंदोलन के केंद्र सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे तब तक घर नहीं लौटेंगे, जब तक कि संसद में विवादास्पद कृषि क़ानूनों को वापस लेने के लिए एक विधेयक पारित नहीं हो…
  • Stubble-burning
    अजय कुमार
    वोट बैंक की पॉलिटिक्स से हल नहीं होगी पराली की समस्या
    20 Nov 2021
    अगर सरकार वोट बैंक की बजाए जनकल्याण से संचालित होती तो पराली की समस्या से निजात मिल जाता
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 10,302 नए मामले, 267 मरीज़ों की मौत
    20 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.36 फ़ीसदी यानी 1 लाख 24 हज़ार 868 हो गयी है।
  • climate change
    रेनार्ड लोकी
    COP26: नीतियों या उपभोक्ता व्यवहारों से मेल नहीं खाता जलवायु संकल्प 
    20 Nov 2021
    ग्लासगो जलवायु समझौते ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई को पटरी से उतार दिया है।
  • Farmers Protest
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बरः किसानों ने तोड़ा मोदी का अहंकार, लड़ाई है अभी बाक़ी
    19 Nov 2021
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने तीन कृषि कानूनों को रद्द करते समय भी बोले गये PM के झूठ को किया बेनकाब, बात की बॉर्डर पर बैठे किसानों-नेताओं से और जानने की कोशिश की आगे की रणनीति
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License